बलरामपुर का उतरौला इलाका। यहां 3 बीघे में एक आलीशान घर है। गेट तो ऐसा, जैसे शहर के 5 स्टार होटलों में होते हैं। चारों तरफ सीसीटीवी लगे हैं। बाउंड्री के ऊपर कुछ इस तरह कटीले तार लगे हैं, जिन्हें पार करना किसी शातिर चोर के लिए भी संभव नहीं। कहा तो यह भी जाता है कि रात में उन तारों में करंट दौड़ा दिया जाता है। ये आलीशान घर जलालुद्दीन शाह उर्फ छांगुर बाबा का है। उसी छांगुर बाबा का, जिसे धर्मांतरण के आरोप में यूपी एसटीएफ ने गिरफ्तार किया है। छांगुर 2011 तक गांव-गांव घूमकर अंगूठी और नग बेचा करता था। फिर अचानक किस्मत ऐसी पलटी कि करोड़ों का आदमी बन गया। हालांकि, मंगलवार को 40 कमरों वाली आलीशान कोठी पर 9 बुलडोजर चलाए गए। शाम 5 बजे तक कोठी के 20 कमरे और 40 फीट लंबे और इतने ही चौड़े हॉल को ढहा दिया गया। आखिर यह कैसे हुआ? कैसे सब कुछ बदल गया? करोड़ों रुपए कहां से आए? इन सारे सवालों को जानने के लिए दैनिक भास्कर की टीम बलरामपुर में छांगुर बाबा के गांव पहुंची। जो कुछ निकलकर सामने आया, वह हैरान करने वाला है। आइए सब कुछ एक तरफ से जानते हैं… बचपन में पिता की मौत, ननिहाल में जीवन बीता
बलरामपुर जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर रेहरामाफी गांव है। यहां की आबादी करीब 3000 है, जिसमें 50% मुस्लिम हैं। इसी गांव में जलालुद्दीन शाह उर्फ छांगुर बाबा का जीवन बीता। हम उसके पुराने घर पहुंचे, तो वहां भीड़ लगी थी। गांव के तमाम लोग इकट्ठा थे। स्थानीय लेखपाल और अधिकारी छांगुर की जमीनों की जांच कर रहे थे। हमने यहां के लोगों से बातचीत शुरू की। छांगुर बाबा के ममेरे भाई फारुख कहते हैं- छांगुर बाबा का घर गरीबपुर में था। उनके पिता करीमुल्ला गांव में जाकर फेरी करते थे। छांगुर जब छोटे थे, तभी उनके पिता की मौत हो गई। इसके बाद वो लोग गरीबपुर छोड़कर रेहरामाफी में आकर रहने लगे। वो 4 भाई हैं, सभी मेहनत-मजदूरी करने लगे। छांगुर बाबा थोड़े बड़े हुए तो गांव-गांव कपड़ा बेचने का काम करने लगे। इसके बाद वह अंगूठी और नग बेचने लगे। छांगुर ने कुतबुनिशा से शादी की। जिससे उसे 4 बेटियां शबनम, साहिबा, सुमौना और छोटकाना हुईं। एक बेटा महबूब हुआ। छांगुर ने इन सबकी पढ़ाई-लिखाई पर बहुत ध्यान नहीं दिया। सभी की शादी कर दी। 1995 में छांगुर की मामी गांव की प्रधान बनीं, तो इंट्रेस्ट राजनीति की तरफ हो गया। 2011 में छांगुर ने कह दिया कि अब चुनाव लड़ेंगे। पत्नी कुतबुनिशा को चुनाव में उतारा और जीत हासिल की। फाइलों में प्रधान पत्नी थी, लेकिन सारा काम छांगुर ही करता था। पत्नी प्रधान बनी, तो लोगों की मदद की
छांगुर बाबा की पत्नी प्रधान बनी, तो उसने फेरी वाला काम बंद कर दिया। उसके पड़ोसी नियाज कहते हैं- बाकी भाई लोग कबाड़ या फिर कुछ और काम-धंधे में लगे रहे। प्रधान बने तो वह पूरे गांव के लोगों की मदद करते थे। गरीब व्यक्ति का बहुत ख्याल रखते थे। किसी के पास पैसा नहीं होता, तो उसे पैसा दे देते थे। एक बार मेरा भाई भी बीमार हुआ। मेरे पास पैसा नहीं था, तो छांगुर ने ही पैसा दिया था। नतीजा, 2016 में फिर से प्रधानी का चुनाव हुआ। छांगुर की पत्नी दोबारा चुनाव जीत गई। छांगुर ने इस दौरान मुंबई में कपड़े की एक दुकान भी खोल दी। इसके लिए वह अक्सर वहां जाता रहता था। 2021 में ग्राम पंचायत के चुनाव में उसने अपने बेटे महबूब को मैदान में उतारा। उसके ममेरे भाई फारुख को यह पसंद नहीं आया। वह भी चुनाव में उतर गया। नतीजा यह हुआ कि दोनों चुनाव हार गए और करताराम यादव पहली बार प्रधान बन गए। इसके बाद छांगुर ने साल 2022 में गांव छोड़ दिया। कोरोना के बीच मुंबई गया, वहां से नीतू-नवीन को लाया
मार्च, 2020 में कोरोना महामारी फैली, तब छांगुर बाबा मुंबई में था। वहां वह अक्सर वरली स्थित सैयद पीर हाजी अली शाह बुखारी की दरगाह पर जाता था। वहीं पर उसकी मुलाकात नवीन रोहरा और उसकी पत्नी नीतू से हुई। नवीन उस वक्त एक बड़ी कंपनी में बड़े पद पर था। नीतू भी एक विदेशी कंपनी में बतौर चार्टर्ड अकाउंटेंट काम कर रही थी। एक बेटी थी। मुंबई में अरबों की संपत्ति थी। इतना सब कुछ होने के बावजूद यह सिंधी परिवार उलझन में रहता था। छांगुर से मुलाकात हुई, तो नवीन ने अपने बारे में सब कुछ बताया। गांव के ही एक व्यक्ति ने बताया कि नवीन रोहरा के पास करीब 158 करोड़ की संपत्ति थी। उसने वह सब बेच दी और फिर छांगुर बाबा के साथ मधपुर गांव चला आया। छांगुर ने जहां-जहां कहा, नवीन और उसकी पत्नी नीतू ने वहां-वहां निवेश किया। सबसे बड़ा निवेश मधपुर गांव में किया गया। इसके अलावा गांव के घर को बुलडोजर से गिरवा कर नया और बड़ा बनाने की तैयारी थी। हम गांव के मौजूदा प्रधान करताराम यादव के पास पहुंचे। उनसे छांगुर बाबा को लेकर बात की। वह कहते हैं- जब से नीतू और नवीन यहां आए, तब से छांगुर बाबा लगातार अमीर होते चले गए। एक बार वह हमारे यहां भी नीतू के निवास प्रमाण पत्र के लिए आए थे। हमने मना कर दिया, क्योंकि वह हमारे गांव की नहीं है। आलीशान कोठी में सब कुछ हाईटेक
हम रेहरामाफी गांव से निकलकर मधपुर गांव पहुंचे। रेहरामाफी गांव से इसकी दूरी करीब 1 किलोमीटर ही होगी। आलीशान घर बना था। वहां तक पहुंचने के लिए 500 मीटर तक सीमेंटेड रोड बनाया गया है। ये रोड भी सरकारी नहीं, बल्कि छांगुर बाबा की तरफ से ही बनवाई गई है। हालांकि, इस आलीशान कोठी पर 9 बुलडोजर चलाकर मंगलवार को कोठी के 20 कमरे और 40 फीट लंबे और इतने ही चौड़े हॉल को ढहा दिया गया। आलीशान घर के बाहर जो बाउंड्री बनाई गई थी, उसके ऊपर कटीले तार लगाए गए थे। उनके बीच से बिजली के तार दौड़ाए गए थे। ऐसा कहा जाता है कि रात में तारों में बिजली का करंट आता था। इस घर में छांगुर बाबा का परिवार और नीतू और नवीन का परिवार रहता था। छांगुर के संपर्क में आने के बाद नवीन और नीतू ने धर्म बदल लिया था। नवीन जमालुद्दीन बना और नीतू नसरीन बन गई थी। दोनों की एक 8 साल की बेटी भी है। उसका भी नाम बदल दिया गया। नीतू इस्लाम धर्म का पालन करने लगी। बुर्का पहनने लगी, लेकिन उसके आधार कार्ड में कोई बदलाव नहीं हुआ। उसमें उसका नाम अभी भी नीतू ही है। दरगाह पर कब्जे की भी मंशा
जिस जगह पर छांगुर का यह आलीशान मकान बना है, इसी के ठीक पीछे एक मशहूर मजार भी है। इस मजार का पूरा एरिया 5 बीघे से ज्यादा का है। इसका कोई सीधा मालिक नहीं है। छांगुर ने इसके लिए मुस्लिम धर्मगुरुओं से मुलाकात शुरू कर दी थी। खुद को वह पीर बाबा भी घोषित कर चुका था। इस जमीन को कब्जाने पर उसका पूरा फोकस था। इसी के बगल में छांगुर एक डिग्री कॉलेज भी बनवा रहा था। बिल्डिंग लगभग तैयार हो गई थी। लेकिन, उसके पहले ही छांगुर के धर्मांतरण से जुड़े मामले सामने आ गए और यूपी एसटीएफ ने उसे गिरफ्तार कर लिया। यूपी एसटीएफ ने छांगुर बाबा के बेटे महबूब और नवीन रोहरा को 10 अप्रैल को गिरफ्तार कर लिया। इनकी गिरफ्तारी के बाद छांगुर बाबा और नीतू फरार हो गए। दोनों 16 अप्रैल को लखनऊ पहुंचे। यहां विकास नगर के स्टार रूम्स होटल पहुंचे। 4 दिन के लिए कमरा बुक किया और साथ रहने लगे। शुरुआत के 4 दिन कमरा नंबर- 102 में रुके और फिर इसके बाद 104 नंबर कमरा लेकर अगले 70 दिन तक रहे। नीतू अक्सर कमरे से बाहर निकलकर आती-जाती रहती थी, लेकिन छांगुर बाबा बहुत कम ही बाहर निकलता था। इस दौरान पुलिस ने छांगुर बाबा पर 50 हजार रुपए का इनाम घोषित कर दिया। खोजने के लिए छापेमारी शुरू हुई। 5 जुलाई को यूपी एसटीएफ ने लखनऊ से ही छांगुर बाबा और नीतू को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद दोनों से पूछताछ हुई। इसमें पता चला कि छांगुर बाबा और नीतू के अकाउंट्स से 100 करोड़ रुपए से ज्यादा के लेन-देन हुए हैं। सहयोगियों के पास 40 से ज्यादा अकाउंट हैं। इनमें कई दूसरे देशों से पैसे आए हैं। दूसरी तरफ, 8 जुलाई को डीएम पवन अग्रवाल और एसपी विकास कुमार मौके मधपुर गांव पहुंचे। साथ में 9 बुलडोजर भी गए। छांगुर की बिल्डिंग के अवैध हिस्से को गिरा दिया गया। एसपी ने कहा- यह सरकारी जमीन पर बनाई गई थी। इसलिए पूरी प्रक्रिया का पालन करते हुए गिराया गया है। ——————— ये खबर भी पढ़ें… मनोज सिंह की जगह यूपी का अगला बॉस कौन, रेस में 3 नाम; पंचायत चुनाव के चलते जाति पर भी फोकस यूपी के मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह 31 जुलाई को रिटायर हो रहे हैं। शासन और सत्ता के गलियारों में लखनऊ से दिल्ली तक यही सवाल है कि प्रदेश का अगला बॉस यानी मुख्य सचिव (CS) कौन होगा? बीते साढ़े 8 साल से बतौर प्रमुख सचिव और अपर मुख्य सचिव सीएम योगी के भरोसमंद आईएएस शशि प्रकाश गोयल, केंद्र में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव देवेश चतुर्वेदी और कृषि उत्पादन आयुक्त, वित्त, बेसिक, माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार मुख्य सचिव की दौड़ में शामिल हैं। पढ़ें पूरी खबर
बलरामपुर जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर रेहरामाफी गांव है। यहां की आबादी करीब 3000 है, जिसमें 50% मुस्लिम हैं। इसी गांव में जलालुद्दीन शाह उर्फ छांगुर बाबा का जीवन बीता। हम उसके पुराने घर पहुंचे, तो वहां भीड़ लगी थी। गांव के तमाम लोग इकट्ठा थे। स्थानीय लेखपाल और अधिकारी छांगुर की जमीनों की जांच कर रहे थे। हमने यहां के लोगों से बातचीत शुरू की। छांगुर बाबा के ममेरे भाई फारुख कहते हैं- छांगुर बाबा का घर गरीबपुर में था। उनके पिता करीमुल्ला गांव में जाकर फेरी करते थे। छांगुर जब छोटे थे, तभी उनके पिता की मौत हो गई। इसके बाद वो लोग गरीबपुर छोड़कर रेहरामाफी में आकर रहने लगे। वो 4 भाई हैं, सभी मेहनत-मजदूरी करने लगे। छांगुर बाबा थोड़े बड़े हुए तो गांव-गांव कपड़ा बेचने का काम करने लगे। इसके बाद वह अंगूठी और नग बेचने लगे। छांगुर ने कुतबुनिशा से शादी की। जिससे उसे 4 बेटियां शबनम, साहिबा, सुमौना और छोटकाना हुईं। एक बेटा महबूब हुआ। छांगुर ने इन सबकी पढ़ाई-लिखाई पर बहुत ध्यान नहीं दिया। सभी की शादी कर दी। 1995 में छांगुर की मामी गांव की प्रधान बनीं, तो इंट्रेस्ट राजनीति की तरफ हो गया। 2011 में छांगुर ने कह दिया कि अब चुनाव लड़ेंगे। पत्नी कुतबुनिशा को चुनाव में उतारा और जीत हासिल की। फाइलों में प्रधान पत्नी थी, लेकिन सारा काम छांगुर ही करता था। पत्नी प्रधान बनी, तो लोगों की मदद की
छांगुर बाबा की पत्नी प्रधान बनी, तो उसने फेरी वाला काम बंद कर दिया। उसके पड़ोसी नियाज कहते हैं- बाकी भाई लोग कबाड़ या फिर कुछ और काम-धंधे में लगे रहे। प्रधान बने तो वह पूरे गांव के लोगों की मदद करते थे। गरीब व्यक्ति का बहुत ख्याल रखते थे। किसी के पास पैसा नहीं होता, तो उसे पैसा दे देते थे। एक बार मेरा भाई भी बीमार हुआ। मेरे पास पैसा नहीं था, तो छांगुर ने ही पैसा दिया था। नतीजा, 2016 में फिर से प्रधानी का चुनाव हुआ। छांगुर की पत्नी दोबारा चुनाव जीत गई। छांगुर ने इस दौरान मुंबई में कपड़े की एक दुकान भी खोल दी। इसके लिए वह अक्सर वहां जाता रहता था। 2021 में ग्राम पंचायत के चुनाव में उसने अपने बेटे महबूब को मैदान में उतारा। उसके ममेरे भाई फारुख को यह पसंद नहीं आया। वह भी चुनाव में उतर गया। नतीजा यह हुआ कि दोनों चुनाव हार गए और करताराम यादव पहली बार प्रधान बन गए। इसके बाद छांगुर ने साल 2022 में गांव छोड़ दिया। कोरोना के बीच मुंबई गया, वहां से नीतू-नवीन को लाया
मार्च, 2020 में कोरोना महामारी फैली, तब छांगुर बाबा मुंबई में था। वहां वह अक्सर वरली स्थित सैयद पीर हाजी अली शाह बुखारी की दरगाह पर जाता था। वहीं पर उसकी मुलाकात नवीन रोहरा और उसकी पत्नी नीतू से हुई। नवीन उस वक्त एक बड़ी कंपनी में बड़े पद पर था। नीतू भी एक विदेशी कंपनी में बतौर चार्टर्ड अकाउंटेंट काम कर रही थी। एक बेटी थी। मुंबई में अरबों की संपत्ति थी। इतना सब कुछ होने के बावजूद यह सिंधी परिवार उलझन में रहता था। छांगुर से मुलाकात हुई, तो नवीन ने अपने बारे में सब कुछ बताया। गांव के ही एक व्यक्ति ने बताया कि नवीन रोहरा के पास करीब 158 करोड़ की संपत्ति थी। उसने वह सब बेच दी और फिर छांगुर बाबा के साथ मधपुर गांव चला आया। छांगुर ने जहां-जहां कहा, नवीन और उसकी पत्नी नीतू ने वहां-वहां निवेश किया। सबसे बड़ा निवेश मधपुर गांव में किया गया। इसके अलावा गांव के घर को बुलडोजर से गिरवा कर नया और बड़ा बनाने की तैयारी थी। हम गांव के मौजूदा प्रधान करताराम यादव के पास पहुंचे। उनसे छांगुर बाबा को लेकर बात की। वह कहते हैं- जब से नीतू और नवीन यहां आए, तब से छांगुर बाबा लगातार अमीर होते चले गए। एक बार वह हमारे यहां भी नीतू के निवास प्रमाण पत्र के लिए आए थे। हमने मना कर दिया, क्योंकि वह हमारे गांव की नहीं है। आलीशान कोठी में सब कुछ हाईटेक
हम रेहरामाफी गांव से निकलकर मधपुर गांव पहुंचे। रेहरामाफी गांव से इसकी दूरी करीब 1 किलोमीटर ही होगी। आलीशान घर बना था। वहां तक पहुंचने के लिए 500 मीटर तक सीमेंटेड रोड बनाया गया है। ये रोड भी सरकारी नहीं, बल्कि छांगुर बाबा की तरफ से ही बनवाई गई है। हालांकि, इस आलीशान कोठी पर 9 बुलडोजर चलाकर मंगलवार को कोठी के 20 कमरे और 40 फीट लंबे और इतने ही चौड़े हॉल को ढहा दिया गया। आलीशान घर के बाहर जो बाउंड्री बनाई गई थी, उसके ऊपर कटीले तार लगाए गए थे। उनके बीच से बिजली के तार दौड़ाए गए थे। ऐसा कहा जाता है कि रात में तारों में बिजली का करंट आता था। इस घर में छांगुर बाबा का परिवार और नीतू और नवीन का परिवार रहता था। छांगुर के संपर्क में आने के बाद नवीन और नीतू ने धर्म बदल लिया था। नवीन जमालुद्दीन बना और नीतू नसरीन बन गई थी। दोनों की एक 8 साल की बेटी भी है। उसका भी नाम बदल दिया गया। नीतू इस्लाम धर्म का पालन करने लगी। बुर्का पहनने लगी, लेकिन उसके आधार कार्ड में कोई बदलाव नहीं हुआ। उसमें उसका नाम अभी भी नीतू ही है। दरगाह पर कब्जे की भी मंशा
जिस जगह पर छांगुर का यह आलीशान मकान बना है, इसी के ठीक पीछे एक मशहूर मजार भी है। इस मजार का पूरा एरिया 5 बीघे से ज्यादा का है। इसका कोई सीधा मालिक नहीं है। छांगुर ने इसके लिए मुस्लिम धर्मगुरुओं से मुलाकात शुरू कर दी थी। खुद को वह पीर बाबा भी घोषित कर चुका था। इस जमीन को कब्जाने पर उसका पूरा फोकस था। इसी के बगल में छांगुर एक डिग्री कॉलेज भी बनवा रहा था। बिल्डिंग लगभग तैयार हो गई थी। लेकिन, उसके पहले ही छांगुर के धर्मांतरण से जुड़े मामले सामने आ गए और यूपी एसटीएफ ने उसे गिरफ्तार कर लिया। यूपी एसटीएफ ने छांगुर बाबा के बेटे महबूब और नवीन रोहरा को 10 अप्रैल को गिरफ्तार कर लिया। इनकी गिरफ्तारी के बाद छांगुर बाबा और नीतू फरार हो गए। दोनों 16 अप्रैल को लखनऊ पहुंचे। यहां विकास नगर के स्टार रूम्स होटल पहुंचे। 4 दिन के लिए कमरा बुक किया और साथ रहने लगे। शुरुआत के 4 दिन कमरा नंबर- 102 में रुके और फिर इसके बाद 104 नंबर कमरा लेकर अगले 70 दिन तक रहे। नीतू अक्सर कमरे से बाहर निकलकर आती-जाती रहती थी, लेकिन छांगुर बाबा बहुत कम ही बाहर निकलता था। इस दौरान पुलिस ने छांगुर बाबा पर 50 हजार रुपए का इनाम घोषित कर दिया। खोजने के लिए छापेमारी शुरू हुई। 5 जुलाई को यूपी एसटीएफ ने लखनऊ से ही छांगुर बाबा और नीतू को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद दोनों से पूछताछ हुई। इसमें पता चला कि छांगुर बाबा और नीतू के अकाउंट्स से 100 करोड़ रुपए से ज्यादा के लेन-देन हुए हैं। सहयोगियों के पास 40 से ज्यादा अकाउंट हैं। इनमें कई दूसरे देशों से पैसे आए हैं। दूसरी तरफ, 8 जुलाई को डीएम पवन अग्रवाल और एसपी विकास कुमार मौके मधपुर गांव पहुंचे। साथ में 9 बुलडोजर भी गए। छांगुर की बिल्डिंग के अवैध हिस्से को गिरा दिया गया। एसपी ने कहा- यह सरकारी जमीन पर बनाई गई थी। इसलिए पूरी प्रक्रिया का पालन करते हुए गिराया गया है। ——————— ये खबर भी पढ़ें… मनोज सिंह की जगह यूपी का अगला बॉस कौन, रेस में 3 नाम; पंचायत चुनाव के चलते जाति पर भी फोकस यूपी के मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह 31 जुलाई को रिटायर हो रहे हैं। शासन और सत्ता के गलियारों में लखनऊ से दिल्ली तक यही सवाल है कि प्रदेश का अगला बॉस यानी मुख्य सचिव (CS) कौन होगा? बीते साढ़े 8 साल से बतौर प्रमुख सचिव और अपर मुख्य सचिव सीएम योगी के भरोसमंद आईएएस शशि प्रकाश गोयल, केंद्र में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव देवेश चतुर्वेदी और कृषि उत्पादन आयुक्त, वित्त, बेसिक, माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार मुख्य सचिव की दौड़ में शामिल हैं। पढ़ें पूरी खबर