मेरठ में पिंकी के छोले भटूरे…बिना लहसुन-प्याज भी लाजवाब:लौकी का अचार देता है बेस्ट टेस्ट, तीन पीढ़ियां 50 साल से परोस रहीं स्वाद

मेरठ की तंग गलियों में एक ऐसी दुकान है, जहां सुबह से शाम तक लोगों की भीड़ लगी रहती है। नाम है पिंकी छोले भंडार। यह सिर्फ एक दुकान नहीं, मेरठ की सांस्कृतिक धरोहर है। यहां 3 पीढ़ियों से छोले-भटूरे का स्वाद लोगों के दिलों को जीत रहा है। पिंकी भाई उर्फ विपिन छाबड़ा की मुस्कान और उनके हाथों का जादू ऐसा है कि जो एक बार यहां के छोले-भटूरे खा ले, बार-बार लौटकर आता है। 1976 में शुरू हुआ यह सफर अब 50 साल पूरे करने को है। हर थाली में स्वाद के साथ प्यार और परंपरा की खुशबू है। जानिए पिंकी छोले भंडार की कहानी
पिंकी छोले भंडार पिंकी भाई उर्फ विपिन छाबड़ा की बहन पिंकी के नाम पर है, जिन्होंने उन्हें खाना बनाने की कला सिखाई। विपिन छाबड़ा बताते हैं- मेरी बहन ने मुझे छोले-भटूरे का जायका सिखाया। उसी स्वाद ने आज इस दुकान को मेरठ का गौरव बनाया। मेरठ के लालकुर्ती में दो दुकानों और गंगानगर में एक आउटलेट के साथ पिंकी छोले-भटूरे का स्वाद पूरे शहर में मशहूर है। 1976 में जेएल छाबड़ा ने शुरू की थी दुकान
यह दुकान सिर्फ खाना नहीं परोसती, बल्कि एक परिवार की मेहनत और लगन की कहानी बयां करती है। पिंकी छोले भंडार की शुरुआत 1976 में जेएल छाबड़ा ने की थी। उसके बाद उनके बेटे विपिन छाबड़ा और अब तीसरी पीढ़ी में मोहित छाबड़ा इस स्वाद की विरासत को संभाल रहे हैं। मोहित बताते हैं कि हमारे दादाजी का सपना था कि हर थाली में घर जैसा स्वाद मिले। हम उसी सपने को जी रहे हैं। बिना लहसुन-प्याज बनते हैं लाजवाब छोले
यहां के छोले-भटूरे की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इन्हें बिना लहसुन-प्याज के बनाया जाता है। फिर भी स्वाद ऐसा कि लोग दूर-दूर से यहां पहुंचते हैं। दुकान मालिक विपिन छाबड़ा बताते हैं कि छोले में जो मसाला डाला जाता है, वो घर में तैयार किया जाता है। काली मिर्च, कसूरी मेथी, अनारदाना और अमचूर पाउडर छोले को खास स्वाद देते हैं। रोजाना करीब 50 किलो छोले भिगोए जाते हैं। टमाटर-तेल के तड़के के साथ पकाए जाते हैं। पिंकी छोले भंडार की खासियत
पिंकी छोले भंडार की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि रोजाना 600-700 लोग यहां खाने आते हैं। यहां छोले-भटूरे के अलावा राजमा चावल, कढ़ी चावल और गुलाब जामुन भी मिलता है। खास बात यह है कि यहां का रायता और लौकी का अचार हर थाली को और खास बनाता है। 60 रुपए में अनलिमिटेड स्वाद
मात्र 60 रुपए में पिंकी भाई की थाली में अनलिमिटेड छोले, दो भटूरे, सलाद, रायता और गाजर-मिर्च के साथ लौकी का खास अचार मिलता है। 1976 में यह थाली सिर्फ 1 रुपए में मिलती थी। विपिन छाबड़ा कहते हैं- हम चाहते हैं कि हर कोई हमारे स्वाद का आनंद ले सके। इसलिए कीमत को हमेशा हमने किफायती रखा। पढ़िए कस्टमर रिव्यू… ————————– ये खबर भी पढ़ें… गठबंधन की मजबूरी या संगठन की रणनीति, ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ कहने वाली प्रियंका की यूपी से दूरी के मायने 2017 से लेकर 2022 तक यूपी की हर सियासी हलचल में प्रियंका गांधी का चेहरा कांग्रेस की पहचान बन गया था। ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ के नारे से उन्होंने प्रदेश की महिलाओं को खास संदेश दिया। लेकिन आज वही प्रियंका यूपी की सियासत से लगभग गायब हैं। आखिरी बार 2024 लोकसभा चुनाव में अमेठी-रायबरेली में पार्टी की जीत के बाद धन्यवाद सभा में दिखी थीं। उसके बाद प्रयागराज महाकुंभ तक में नहीं आईं। कांग्रेस कार्यकर्ता और समर्थक हैरान हैं। आखिर प्रियंका ने यूपी से किनारा क्यों किया? प्रियंका के यूपी में आने से क्या सपा के साथ कांग्रेस के संभावित गठजोड़ पर कोई असर पड़ने का खतरा था? पढ़ें पूरी खबर…