‘मुझे क्लास में प्यास लगी। बोतल उठाकर सिपर से पानी पीने लगी। अचानक मेरे होंठ उसमें फंस गए। उसे निकालने के लिए जीभ से जोर लगाया। होंठ तो निकल गए, लेकिन जीभ बुरी तरह से फंस गई। मुंह से लगी बोतल हाथ में पकड़े क्लास टीचर के पास गई। उन्होंने भी निकालने की कोशिश की, लेकिन निकाल नहीं पाईं। उसके बाद मैम कार में बैठाकर अस्पताल ले गईं।’ यह कहना है क्लास-3 की छात्रा अदित्री का, जिसकी जीभ में बोतल का ढक्कन फंस गया। वो 3 घंटे तक संघर्ष करती रहीं। अदित्री सेंट जोसेफ स्कूल गोरखनाथ में पढ़ती हैं। उनकी मां प्रियंका सिंह ने कहा- बच्ची के बारे में सुनकर मन घबरा रहा था। कुछ समझ नहीं आया। तो मैं नहाकर सासू मां के साथ पूजा करने बैठ गई। दैनिक भास्कर टीम अदित्री के घर पहुंची। उनसे बातचीत कर हाला जाना। परिवारवालों से बात की। इस दौरान उनके मन में क्या चल रहा था? वो क्या सोच रहीं थीं? खुद को कैसे संभाला? पढ़िए पूरी रिपोर्ट… रोई नहीं, खुद टीचर को जाकर बताया
8 साल की अदित्री ने बताया- इस बोतल का इस्तेमाल मैं क्लास-2 से कर रही हूं। मेरे और मेरी छोटी बहन के लिए पापा एक ही जैसी बोतल लेकर आए थे। पहले भी जब मैं इसका इस्तेमाल करती थी, तो जैसे लगता था कि होंठ अंदर की ओर खिंचकर फंस गए हैं। हालांकि हर बार मैं उसे निकाल लेती थी। 12 जुलाई की सुबह क्लास में आने के बाद मैंने सिपर से पानी पीना शुरू किया, तो मेरे होंठ उसमें फंस गए। मैंने जीभ से थोड़ा धक्का लगाकर होंठ निकालने की कोशिश की। लेकिन, अचानक जीभ अंदर की ओर खिच गई। मुझे पता ही नहीं चला कि कब आधी जीभ बोतल के ढक्कन में फंस गई? मेरे हाथ में बोतल थी और उसका ढक्कन मेरी जीभ में फंसा था। काफी कोशिश के बाद भी जीभ नहीं निकली, तो मैं मैम के पास गई। दो अस्पतालों ने लौटाया, तो थोड़ा डर लगा
अदित्री ने बताया- मैम मुझे कार में बैठाकर एक हॉस्पिटल ले गईं, लेकिन वहां कुछ नहीं किया गया। उसके बाद वह दूसरे हास्पिटल गईं, वहां भी तत्काल कुछ नहीं किया गया। दो जगहों पर जब कुछ नहीं हुआ, तो मुझे थोड़ा डर लगा था। उसके बाद पापा भी पहुंच गए थे। इससे मुझमें हिम्मत आ गई। वह मुझे लेकर तीसरे हॉस्पिटल पहुंचे। वहां डॉक्टर अंकल ने काफी देर कोशिश करके ढक्कन निकाल दिया। उस दौरान दर्द हुआ। शाम तक मैं बोलने लगी थी। अब इस तरह के बोतल का यूज नहीं करूंगी। रोने लगी थीं दादी, मां को कुछ समझ नहीं आया
रामजानकी नगर स्थित आवास में अदित्री अपने दादा शिवपूजन सिंह, दादी चंद्रमती सिंह, पिता विनीत सिंह, मां प्रियंका सिंह के साथ रहती हैं। पिता इंश्योरेंस कंपनी में काम करते हैं। रोज की तरह अदित्री और उसकी छोटी बहन आंशी को स्कूल भेजा गया था। छुट्टी होने की वजह से विनीत भी घर पर थे। सुबह करीब 8.15 बजे उनके मोबाइल पर स्कूल से फोन आया। बताया गया कि अदित्री की जीभ बोतल के ढक्कन में फंस गई है। उसे लेकर अस्पताल जा रहे हैं। वह आनन-फानन में अपने पिता शिवपूजन के साथ अस्पताल के लिए निकले। घर में अदित्री की दादी और मम्मी ही थीं। वास्तविक स्थिति किसी को पता नहीं थी। दादी रोने लगीं, मां को भी कुछ समझ नहीं आया। मां बोलीं- भगवान के पास बैठी रही
अदित्री की मां प्रियंका सिंह ने कहा- 12 जुलाई की सुबह का समय काफी भयावह था। बच्ची के बारे में सुनकर मन घबरा रहा था। कुछ समझ नहीं आया, तो मैं नहाकर सासू मां के साथ पूजा करने बैठ गई। हम तब तक भगवान के पास बैठे रहे, जब तक अदित्री के पिता ने फोन कर यह नहीं बताया कि ढक्कन निकल गया है और वह ठीक है। दादी ने बताया- जो फोटो आयी थी, उसे देखकर मैं और मेरे रिश्तेदार डर गए थे। छोटा बेटा सत्यम सिंह महराजगंज से भागकर आया। उसकी पत्नी अंशिका सिंह कप्तानगंज से अस्पताल पहुंच गईं। पिता बोले- स्थिति गंभीर थी
पिता विनीत सिंह ने बताया- अदित्री के जीभ में बोतल का ढक्कन फंसा था। वह दर्द से परेशान थी। उसकी जीभ आगे से काली होने लगी थी। डॉक्टर के पास लेकर गए तो उन्होंने भी कहा कि लेट हो गया है। लेकिन, कोशिश करते हैं। डॉक्टर ने काफी कोशिश की। करीब 1 घंटे बाद ढक्कन को निकालने में कामयाबी पाई। उन्होंने कहा कि मैं अपनी दोनों बेटियों के लिए यह बोतल लेकर आया था। लेकिन, अब इसका प्रयोग नहीं करने दूंगा और दूसरों को भी जागरूक करूंगा। अब जानिए डॉक्टर ने क्या कहा
अदित्री का इलाज करने वाले ईएनटी स्पेशलिस्ट डॉ. पीएन जायसवाल ने कहा- अदित्री जब अस्पताल लाई गई, तो मुझे भी कुछ समझ नहीं आया। उसके अभिभावक को बता दिया था कि कोशिश करूंगा। करीब 1 घंटे के बाद जीभ को बाहर निकाला गया। जीभ कुछ समय और ढक्कन नहीं निकाली जाती, तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी। अब वह ठीक है। उन्होंने कहा कि इस तरह की बोतल का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। उस बोतल का इस्तेमाल करें, जिसके सिपर में सिलिकॉन की पाइप लगी होती है। उसमें होंठ और जीभ फंसने की आशंका नहीं होती। अब पढ़िए एक्सपर्ट की बात
इंटर कॉलेज में फिजिक्स के प्रवक्ता सुनील राव कहते हैं- जब बच्ची ने पानी पीया होगा, तो अंदर जगह बनी होगी। लगातार पानी पीने से बाहर से हवा अंदर नहीं जा पाई होगी। इससे वहां वैक्यूम क्रिएट हो गया होगा। इस स्थिति में अंदर का दबाव काफी घट जाता है और बाहर का बढ़ा रहता है। ऐसी स्थिति में बाहर से कोई चीज जाएगी, तो अंदर खिंचेगी। इस मामले में ऐसा ही होने की संभावना है। अगर बच्ची रुक-रुक कर पानी पीती, तो यह स्थिति नहीं आती। अभिभावकों को चाहिए कि ऐसी पानी का बोतल दें, जिसमें उड़ेलकर पानी पीने की सुविधा हो। ————————- ये खबर भी पढ़ें:- वाटर बॉटल के ढक्कन में फंसी बच्ची की जीभ, स्कूल में पानी पी रही थी, ढाई घंटे छटपटाई; गोरखपुर में ऑपरेशन करके निकाला गोरखपुर में पानी की बोतल के ढक्कन में 8 साल की बच्ची की जीभ फंस गई। शनिवार को बच्ची क्लास रूम में बॉटल के ढक्कन में बने सीपर से पानी पी रही थी। अचानक जीभ ढक्कन में फंस गई। बच्ची क्लास रूम में दर्द से छटपटाने लगी। ढक्कन फंसने की वजह से बच्ची बोल नहीं पा रही थी, तभी क्लास टीचर ने देखा और दौड़कर उसके पास पहुंचीं। उन्होंने ढक्कन निकालने की कोशिश की, लेकिन ढक्कन नहीं निकला। स्कूल का स्टाफ बच्ची को लेकर हॉस्पिटल पहुंचा। जहां जीभ में फंसे ढक्कन को काटकर निकाला। मामला सेंट जोसेफ स्कूल का है। पढ़ें पूरी खबर
8 साल की अदित्री ने बताया- इस बोतल का इस्तेमाल मैं क्लास-2 से कर रही हूं। मेरे और मेरी छोटी बहन के लिए पापा एक ही जैसी बोतल लेकर आए थे। पहले भी जब मैं इसका इस्तेमाल करती थी, तो जैसे लगता था कि होंठ अंदर की ओर खिंचकर फंस गए हैं। हालांकि हर बार मैं उसे निकाल लेती थी। 12 जुलाई की सुबह क्लास में आने के बाद मैंने सिपर से पानी पीना शुरू किया, तो मेरे होंठ उसमें फंस गए। मैंने जीभ से थोड़ा धक्का लगाकर होंठ निकालने की कोशिश की। लेकिन, अचानक जीभ अंदर की ओर खिच गई। मुझे पता ही नहीं चला कि कब आधी जीभ बोतल के ढक्कन में फंस गई? मेरे हाथ में बोतल थी और उसका ढक्कन मेरी जीभ में फंसा था। काफी कोशिश के बाद भी जीभ नहीं निकली, तो मैं मैम के पास गई। दो अस्पतालों ने लौटाया, तो थोड़ा डर लगा
अदित्री ने बताया- मैम मुझे कार में बैठाकर एक हॉस्पिटल ले गईं, लेकिन वहां कुछ नहीं किया गया। उसके बाद वह दूसरे हास्पिटल गईं, वहां भी तत्काल कुछ नहीं किया गया। दो जगहों पर जब कुछ नहीं हुआ, तो मुझे थोड़ा डर लगा था। उसके बाद पापा भी पहुंच गए थे। इससे मुझमें हिम्मत आ गई। वह मुझे लेकर तीसरे हॉस्पिटल पहुंचे। वहां डॉक्टर अंकल ने काफी देर कोशिश करके ढक्कन निकाल दिया। उस दौरान दर्द हुआ। शाम तक मैं बोलने लगी थी। अब इस तरह के बोतल का यूज नहीं करूंगी। रोने लगी थीं दादी, मां को कुछ समझ नहीं आया
रामजानकी नगर स्थित आवास में अदित्री अपने दादा शिवपूजन सिंह, दादी चंद्रमती सिंह, पिता विनीत सिंह, मां प्रियंका सिंह के साथ रहती हैं। पिता इंश्योरेंस कंपनी में काम करते हैं। रोज की तरह अदित्री और उसकी छोटी बहन आंशी को स्कूल भेजा गया था। छुट्टी होने की वजह से विनीत भी घर पर थे। सुबह करीब 8.15 बजे उनके मोबाइल पर स्कूल से फोन आया। बताया गया कि अदित्री की जीभ बोतल के ढक्कन में फंस गई है। उसे लेकर अस्पताल जा रहे हैं। वह आनन-फानन में अपने पिता शिवपूजन के साथ अस्पताल के लिए निकले। घर में अदित्री की दादी और मम्मी ही थीं। वास्तविक स्थिति किसी को पता नहीं थी। दादी रोने लगीं, मां को भी कुछ समझ नहीं आया। मां बोलीं- भगवान के पास बैठी रही
अदित्री की मां प्रियंका सिंह ने कहा- 12 जुलाई की सुबह का समय काफी भयावह था। बच्ची के बारे में सुनकर मन घबरा रहा था। कुछ समझ नहीं आया, तो मैं नहाकर सासू मां के साथ पूजा करने बैठ गई। हम तब तक भगवान के पास बैठे रहे, जब तक अदित्री के पिता ने फोन कर यह नहीं बताया कि ढक्कन निकल गया है और वह ठीक है। दादी ने बताया- जो फोटो आयी थी, उसे देखकर मैं और मेरे रिश्तेदार डर गए थे। छोटा बेटा सत्यम सिंह महराजगंज से भागकर आया। उसकी पत्नी अंशिका सिंह कप्तानगंज से अस्पताल पहुंच गईं। पिता बोले- स्थिति गंभीर थी
पिता विनीत सिंह ने बताया- अदित्री के जीभ में बोतल का ढक्कन फंसा था। वह दर्द से परेशान थी। उसकी जीभ आगे से काली होने लगी थी। डॉक्टर के पास लेकर गए तो उन्होंने भी कहा कि लेट हो गया है। लेकिन, कोशिश करते हैं। डॉक्टर ने काफी कोशिश की। करीब 1 घंटे बाद ढक्कन को निकालने में कामयाबी पाई। उन्होंने कहा कि मैं अपनी दोनों बेटियों के लिए यह बोतल लेकर आया था। लेकिन, अब इसका प्रयोग नहीं करने दूंगा और दूसरों को भी जागरूक करूंगा। अब जानिए डॉक्टर ने क्या कहा
अदित्री का इलाज करने वाले ईएनटी स्पेशलिस्ट डॉ. पीएन जायसवाल ने कहा- अदित्री जब अस्पताल लाई गई, तो मुझे भी कुछ समझ नहीं आया। उसके अभिभावक को बता दिया था कि कोशिश करूंगा। करीब 1 घंटे के बाद जीभ को बाहर निकाला गया। जीभ कुछ समय और ढक्कन नहीं निकाली जाती, तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी। अब वह ठीक है। उन्होंने कहा कि इस तरह की बोतल का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। उस बोतल का इस्तेमाल करें, जिसके सिपर में सिलिकॉन की पाइप लगी होती है। उसमें होंठ और जीभ फंसने की आशंका नहीं होती। अब पढ़िए एक्सपर्ट की बात
इंटर कॉलेज में फिजिक्स के प्रवक्ता सुनील राव कहते हैं- जब बच्ची ने पानी पीया होगा, तो अंदर जगह बनी होगी। लगातार पानी पीने से बाहर से हवा अंदर नहीं जा पाई होगी। इससे वहां वैक्यूम क्रिएट हो गया होगा। इस स्थिति में अंदर का दबाव काफी घट जाता है और बाहर का बढ़ा रहता है। ऐसी स्थिति में बाहर से कोई चीज जाएगी, तो अंदर खिंचेगी। इस मामले में ऐसा ही होने की संभावना है। अगर बच्ची रुक-रुक कर पानी पीती, तो यह स्थिति नहीं आती। अभिभावकों को चाहिए कि ऐसी पानी का बोतल दें, जिसमें उड़ेलकर पानी पीने की सुविधा हो। ————————- ये खबर भी पढ़ें:- वाटर बॉटल के ढक्कन में फंसी बच्ची की जीभ, स्कूल में पानी पी रही थी, ढाई घंटे छटपटाई; गोरखपुर में ऑपरेशन करके निकाला गोरखपुर में पानी की बोतल के ढक्कन में 8 साल की बच्ची की जीभ फंस गई। शनिवार को बच्ची क्लास रूम में बॉटल के ढक्कन में बने सीपर से पानी पी रही थी। अचानक जीभ ढक्कन में फंस गई। बच्ची क्लास रूम में दर्द से छटपटाने लगी। ढक्कन फंसने की वजह से बच्ची बोल नहीं पा रही थी, तभी क्लास टीचर ने देखा और दौड़कर उसके पास पहुंचीं। उन्होंने ढक्कन निकालने की कोशिश की, लेकिन ढक्कन नहीं निकला। स्कूल का स्टाफ बच्ची को लेकर हॉस्पिटल पहुंचा। जहां जीभ में फंसे ढक्कन को काटकर निकाला। मामला सेंट जोसेफ स्कूल का है। पढ़ें पूरी खबर