प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज वाराणसी में दालमंडी प्रोजेक्ट की आधारशिला रखेंगे। यह उन 52 प्रोजेक्ट में से एक है, जिनका पीएम लोकार्पण-शिलान्यास कर रहे हैं। दालमंडी प्रोजेक्ट में काशी विश्वनाथ के गेट नंबर 4 तक पहुंचने वाली एक सड़क को चौड़ा किया जाएगा। वाराणसी की मॉडल रोड की तरह विकसित करने का प्लान है। इस प्रोजेक्ट में लकड़ी के खिलौने बनाने वाले कारीगर, बुनकर, परंपरागत बनारसी साड़ी तैयार करने वाले कारीगरों को फायदा होगा। क्योंकि उन्हीं का मार्केट डेवलप किया जाएगा। साथ ही, इस रूट पर होम स्टे और छोटे रेस्टोरेंट भी खोले जाने का प्लान है। दालमंडी के पूरे प्रोजेक्ट को 4 स्लाइड में समझिए… जिनकी दुकानें टूट रहीं, उनमें आक्रोश दालमंडी के चौड़ीकरण को लेकर यहां काम करने वाले लोगों में गुस्सा भी है। मुस्लिम बहुल इस इलाके की सड़क के चौड़ीकरण को रोकने के लिए शहर मुफ्ती अब्दुल बातिन नोमानी ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को लेटर भी लिखा। जो दुकानें चिह्नित की गई हैं, उनके दुकानदार इस चौड़ीकरण के प्रोजेक्ट को गलत ठहरा रहे हैं। अब प्रोजेक्ट पर एक्सपर्ट व्यू इस प्रोजेक्ट को और करीब से समझने के लिए दैनिक भास्कर ने वाराणसी को समझने वाले दो एक्सपर्ट से बात की। वाराणसी के वरिष्ठ पत्रकार राजेश गुप्ता और काशी पर रिसर्च करने वाले BHU के रिटायर्ड प्रोफेसर डॉ. राम प्रसाद से टीम ने 2 सवाल किए। पहला- दालमंडी मार्केट टूटने से क्या फायदा होगा? दूसरा- इस प्रोजेक्ट की वाराणसी को कितनी जरूरत है? एक्सपर्ट के जवाब पढ़िए… कब्जे होते गए, 30 फीट की सड़क, संकरी गली रह गई वरिष्ठ पत्रकार राजेश गुप्ता कहते हैं – दालमंडी को कई नजरिये से देखने की जरूरत है। एक खास समुदाय के लोगों के तुष्टिकरण का ये परिणाम है। हमें याद है, एक जमाने में बिजली चोरी की सघन चेकिंग चल रही थी, लेकिन किसी अधिकारी की हिम्मत दालमंडी में घुसने की नहीं होती थी। चाहे वो कांग्रेस, सपा या बसपा की सरकार रही हो। इसका फायदा दालमंडी के लोगों ने उठाया। अवैध तरीके से गली को कब्जा करना शुरू किया। वह बताते हैं- दालमंडी गली की चौड़ाई पहले 30 से 35 फीट थी, वो धीरे-धीरे संकरी गली बन गई। हम लोगों को अपने बचपन की बातें याद हैं, दालमंडी से हम लोग रिक्शे से इस पार से उस पार निकल जाते थे और पूरा ट्रैफिक जाता था। आज दालमंडी में पैदल चलना दूभर है। इसलिए यह प्रोजेक्ट वाराणसी के लिए बहुत जरूरी है। विश्वनाथ कॉरिडोर की तरह किराएदार 100 साल से काबिज
उन्होंने आगे कहा – दालमंडी में अब जो प्रॉपर्टी हैं, उनपर 100-100 साल से शिकमी किरायेदार हैं और मकान मालिक बेचारा कोई और है। किरायेदार न खाली करेंगे और मकान मालिक न खाली करा पाएंगे। ठीक इसी तरह विश्वनाथ कॉरिडोर में हुआ था कि 100 साल, 200 साल पुराने मकानों में किरायेदार रह रहे थे। उनके मकान मालिक बंगाल, मुंबई और गुजरात में थे। उन्हें फायदा प्रत्यक्ष रूप से मिला। ऐसा ही दालमंडी में भी होगा। मकान मालिकों को फायदा होगा। अब रिटायर्ड प्रोफेसर डॉ. राम प्रसाद की बात इस प्रोजेक्ट से लोगों को फायदा भी होगा
बीएचयू से रिटायर्ड डॉ. राम प्रसाद सिंह ने बताया- बनारस की गलियों की वजह से सड़कें अब भीड़ का दबाव नहीं झेल पा रही हैं। दालमंडी यदि इतनी चौड़ी हो जाती है, वास्तव में जितना प्रोजेक्ट में बताया जा रहा है तो मुझे लगता है कि यहां के लोगों को काफी फायदा होगा। उन्होंने आगे कहा- अभी सिर्फ यहां पैदल चला जा सकता है। आने वाले समय में जब यह सड़क चौड़ी हो जाएगी, तब हर मकान में नीचे दुकानें और ऊपर होटल और गेस्ट हाउस नजर आएंगे। क्योंकि तब होटल-रेस्टोरेंट बनाना आसान होगा। जिस तरह से काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन को देश के कोने-कोने से भीड़ आ रही है। विदेशों से लोग आ रहे हैं। उससे यह जरूरी हो गया है कि सरकार इस तरह से सड़कों का चौड़ीकरण करके विकास करे। वो कहते हैं- जो मकान आगे है, वो टूटेंगे। उनके टूटने से नुकसान होगा। यदि कोई मकान 20 फीट टूटे और बाकी बचे मकान में डेवलपमेंट भी होगा। जो भी लोग विश्वनाथ मंदिर जा रहे हैं, वो इसी मार्ग से जाना शुरू कर देंगे। ऐसे में यहां दुकानें बर्बाद नहीं होगी बल्कि दालमंडी की मार्केट और डेवलप हो जाएगी। ……………… ये भी पढ़ें :
काशी में क्यों टूटेंगी 6 मस्जिदें: दालमंडी के 10 हजार दुकानदारों में गुस्सा, बोले- मुस्लिमों को टारगेट कर रहे; हिंदू भी बर्बाद होंगे हम उस दिन का इंतजार कर रहे हैं, जब बुलडोजर आएगा। हम जैसे लोग उसके नीचे लेट जाएंगे और खुद को खत्म कर लेंगे। हमारे घर वालों को अल्लाह ही संभालेगा। हमारे जैसे यहां 10 हजार लोग हैं, जिन्हें टारगेट किया जा रहा है। इसमें मुस्लिम और हिंदू दोनों हैं। ये कहते हुए वाराणसी के दुकानदार अजीजुर्रहमान भावुक हो गए। ऐसा सोचने वाले वो अकेले नहीं हैं। करीब 10 हजार दुकानदार पूर्वांचल के सबसे बड़े मार्केट दालमंडी की सड़क के चौड़ीकरण का विरोध कर रहे हैं। लोग गुस्सा इसलिए भी हैं, क्योंकि यहां की 6 मस्जिदें भी टूटने वाली हैं। पढ़िए पूरी खबर…
उन्होंने आगे कहा – दालमंडी में अब जो प्रॉपर्टी हैं, उनपर 100-100 साल से शिकमी किरायेदार हैं और मकान मालिक बेचारा कोई और है। किरायेदार न खाली करेंगे और मकान मालिक न खाली करा पाएंगे। ठीक इसी तरह विश्वनाथ कॉरिडोर में हुआ था कि 100 साल, 200 साल पुराने मकानों में किरायेदार रह रहे थे। उनके मकान मालिक बंगाल, मुंबई और गुजरात में थे। उन्हें फायदा प्रत्यक्ष रूप से मिला। ऐसा ही दालमंडी में भी होगा। मकान मालिकों को फायदा होगा। अब रिटायर्ड प्रोफेसर डॉ. राम प्रसाद की बात इस प्रोजेक्ट से लोगों को फायदा भी होगा
बीएचयू से रिटायर्ड डॉ. राम प्रसाद सिंह ने बताया- बनारस की गलियों की वजह से सड़कें अब भीड़ का दबाव नहीं झेल पा रही हैं। दालमंडी यदि इतनी चौड़ी हो जाती है, वास्तव में जितना प्रोजेक्ट में बताया जा रहा है तो मुझे लगता है कि यहां के लोगों को काफी फायदा होगा। उन्होंने आगे कहा- अभी सिर्फ यहां पैदल चला जा सकता है। आने वाले समय में जब यह सड़क चौड़ी हो जाएगी, तब हर मकान में नीचे दुकानें और ऊपर होटल और गेस्ट हाउस नजर आएंगे। क्योंकि तब होटल-रेस्टोरेंट बनाना आसान होगा। जिस तरह से काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन को देश के कोने-कोने से भीड़ आ रही है। विदेशों से लोग आ रहे हैं। उससे यह जरूरी हो गया है कि सरकार इस तरह से सड़कों का चौड़ीकरण करके विकास करे। वो कहते हैं- जो मकान आगे है, वो टूटेंगे। उनके टूटने से नुकसान होगा। यदि कोई मकान 20 फीट टूटे और बाकी बचे मकान में डेवलपमेंट भी होगा। जो भी लोग विश्वनाथ मंदिर जा रहे हैं, वो इसी मार्ग से जाना शुरू कर देंगे। ऐसे में यहां दुकानें बर्बाद नहीं होगी बल्कि दालमंडी की मार्केट और डेवलप हो जाएगी। ……………… ये भी पढ़ें :
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