5 हजार करोड़ के बकाए और सड़क पर रैश ड्राइविंग करने वालों के खिलाफ ट्रैफिक महकमा हरकत में आ गया है। ऐसी गाड़ियों की पहचान की जा रही है, जिनके पांच या उससे ज्यादा चालान कट चुके है। साथ ही जुर्माना भी अदा नहीं किया है। ऐसे लोगों के लाइसेंस निरस्त किए जाएंगे और आरसी को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा, ताकि ऐसे वाहन सड़क पर न चल सकें। यह प्रक्रिया शुरू भी हो चुकी है। अब तक 3 लाख गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन और 58 हजार 893 वाहन चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस निरस्त करने के लिए पहचान की गई है। यातायात निदेशालय ने परिवहन विभाग को इसी महीने इसकी सूची भेजी है। इस सूची में उन लोगों के वाहन शामिल हैं, जिनके 5 या 5 से ज्यादा चालान होने के बाद भी चालान की राशि जमा नहीं की गई। यातायात निदेशालय के अनुरोध पर परिवहन विभाग ने आरसी और डीएल सस्पेंड करने की प्रक्रिया शुरू भी कर दी है। अब तक 1 हजार डीएल और 4 हजार आरसी निरस्त
एडीजी यातायात के. सत्यनारायण के अनुसार, प्रदेश में चालान की बकाया राशि हजारों करोड़ में है। यह राशि उन वाहन चालकों और मालिकों से संबंधित है, जिन्होंने बार-बार नियम तोड़े और चालान की राशि जमा नहीं की। यातायात पुलिस ने इस स्थिति को गंभीरता से लिया है। अब सख्त कार्रवाई की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। इस कार्रवाई के तहत, जिन वाहनों के 5 या उससे अधिक चालान बकाया हैं, उनकी पहचान की जा रही है। इन वाहनों की आरसी को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा, जिससे वे सड़क पर कानूनी रूप से नहीं चल सकेंगे। साथ ही, ऐसे चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस को भी निरस्त किया जाएगा, जो बार-बार नियम तोड़ते पाए गए हैं। यातायात निदेशालय ने परिवहन विभाग को इस महीने एक विस्तृत सूची सौंपी है, जिसमें 3 लाख 1 हजार 410 गाड़ियों और 58 हजार 893 ड्राइविंग लाइसेंस धारकों के नाम शामिल हैं। इनमें से अब तक 1 हजार 6 ड्राइविंग लाइसेंस और 3 हजार 964 आरसी को सस्पेंड या निरस्त किया जा चुका है। के. सत्यनारायण का कहना है कि ज्यादातर लोग चालान इसलिए नहीं जमा करते, क्योंकि कोर्ट में पहुंच कर यह राशि आमतौर पर कम हो जाती है। इन जिलों में सबसे ज्यादा सड़क हादसे
यातायात निदेशालय ने ऐसे बीस जिलों की पहचान की है, जहां नियमों को सबसे ज्यादा तोड़ा जाता है। इसमें पहले नंबर पर लखनऊ है, जहां साल- 2024 में सबसे ज्यादा सड़क हादसे हुए। यहां 1630 सड़क हादसों में 576 लोगों की जान गई और 1165 लोग घायल हुए। लखनऊ के बाद कानपुर, गोरखपुर, प्रयागराज, आगरा, बरेली, नोएडा, हरदोई, बुलंदशहर, मथुरा, गाजियाबाद, अलीगढ़, बाराबंकी, सीतापुर, उन्नाव, मेरठ, शाहजहांपुर, आजमगढ़, लखीमपुर खीरी और कुशीनगर का नाम शामिल है। यहां विशेष अभियान चलाया जा रहा है। नियम तोड़ने में सरकारी गाड़ियां आगे
यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाने में सरकारी महकमे सबसे आगे रहते हैं, क्योंकि सरकारी गाड़ियों का ई-चालान नहीं होता। ई-चालान की प्रक्रिया में ऐसी प्रोग्रामिंग की गई है कि सरकारी नंबर वाली गाड़ियों का चालान नहीं कटता। उदाहरण के तौर पर अधिकतर सरकारी गाड़ियों के नंबर बीजी या ईजी सीरीज के होते हैं। इस सीरीज के नंबरों की गाड़ियों का चालान नहीं कटता। ये चौराहों पर ट्रैफिक नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए निकल जाती हैं। परिवहन विभाग भी काटता है चालान, करता है वसूली
ऐसा नहीं है कि सिर्फ यातायात पुलिस ही चालान काटती है और वसूली करती है। परिवहन विभाग भी गाड़ियों का चालान काटता है और उसकी वसूली करता है। हालांकि ज्यादातर कामर्शियल गाड़ियों का चालान और वसूली परिवहन विभाग करता है। यहां चालान की रकम भी पांच हजार रुपए से शुरू होकर 25 हजार रुपए तक होती है। कहां जाती है चालान से होने वाली इनकम
चालान से होने वाली इनकम सीधे राजकोष (ट्रेजरी) में जमा होती है। पूरे साल में जमा होने वाली रकम का कुछ हिस्सा संबंधित विभाग को भी मिलता है, जो बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के लिए दिया जाता है। बाकी रकम सरकार दूसरी मदों में खर्च करती है। —————————– ये खबर भी पढ़ें… यूपी में चालान क्यों नहीं भर रहे लोग?, ढाई साल में 5 हजार करोड़ का चालान काटा; एक्सपर्ट ने बताई वजह यूपी में हर साल सवा करोड़ से ज्यादा गाड़ियों के चालान होते हैं। चालान की ये रकम करीब एक हजार करोड़ रुपए से ज्यादा है। लेकिन वसूली नाम मात्र ही हो पाती है। बीते ढाई साल में यूपी में 5,239 करोड़ रुपए का चालान हुआ है। इसके मुकाबले यातायात विभाग सिर्फ 333 करोड़ रुपए ही वसूल सका है। यानी लगभग 5 हजार करोड़ रुपए बकाया है। ‘दैनिक भास्कर’ की इस खास रिपोर्ट में जानिए आखिर क्यों लोग चालान जमा नहीं कर रहे? ऑनलाइन चालान करने के बाद क्या खुद की जिम्मेदारी से बरी हो जा रहे यातायात पुलिस कर्मी? साल-दर-साल चालान की संख्या कितनी बढ़ी और वसूली में गिरावट कितनी आ रही? पढ़िए पूरी खबर
एडीजी यातायात के. सत्यनारायण के अनुसार, प्रदेश में चालान की बकाया राशि हजारों करोड़ में है। यह राशि उन वाहन चालकों और मालिकों से संबंधित है, जिन्होंने बार-बार नियम तोड़े और चालान की राशि जमा नहीं की। यातायात पुलिस ने इस स्थिति को गंभीरता से लिया है। अब सख्त कार्रवाई की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। इस कार्रवाई के तहत, जिन वाहनों के 5 या उससे अधिक चालान बकाया हैं, उनकी पहचान की जा रही है। इन वाहनों की आरसी को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा, जिससे वे सड़क पर कानूनी रूप से नहीं चल सकेंगे। साथ ही, ऐसे चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस को भी निरस्त किया जाएगा, जो बार-बार नियम तोड़ते पाए गए हैं। यातायात निदेशालय ने परिवहन विभाग को इस महीने एक विस्तृत सूची सौंपी है, जिसमें 3 लाख 1 हजार 410 गाड़ियों और 58 हजार 893 ड्राइविंग लाइसेंस धारकों के नाम शामिल हैं। इनमें से अब तक 1 हजार 6 ड्राइविंग लाइसेंस और 3 हजार 964 आरसी को सस्पेंड या निरस्त किया जा चुका है। के. सत्यनारायण का कहना है कि ज्यादातर लोग चालान इसलिए नहीं जमा करते, क्योंकि कोर्ट में पहुंच कर यह राशि आमतौर पर कम हो जाती है। इन जिलों में सबसे ज्यादा सड़क हादसे
यातायात निदेशालय ने ऐसे बीस जिलों की पहचान की है, जहां नियमों को सबसे ज्यादा तोड़ा जाता है। इसमें पहले नंबर पर लखनऊ है, जहां साल- 2024 में सबसे ज्यादा सड़क हादसे हुए। यहां 1630 सड़क हादसों में 576 लोगों की जान गई और 1165 लोग घायल हुए। लखनऊ के बाद कानपुर, गोरखपुर, प्रयागराज, आगरा, बरेली, नोएडा, हरदोई, बुलंदशहर, मथुरा, गाजियाबाद, अलीगढ़, बाराबंकी, सीतापुर, उन्नाव, मेरठ, शाहजहांपुर, आजमगढ़, लखीमपुर खीरी और कुशीनगर का नाम शामिल है। यहां विशेष अभियान चलाया जा रहा है। नियम तोड़ने में सरकारी गाड़ियां आगे
यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाने में सरकारी महकमे सबसे आगे रहते हैं, क्योंकि सरकारी गाड़ियों का ई-चालान नहीं होता। ई-चालान की प्रक्रिया में ऐसी प्रोग्रामिंग की गई है कि सरकारी नंबर वाली गाड़ियों का चालान नहीं कटता। उदाहरण के तौर पर अधिकतर सरकारी गाड़ियों के नंबर बीजी या ईजी सीरीज के होते हैं। इस सीरीज के नंबरों की गाड़ियों का चालान नहीं कटता। ये चौराहों पर ट्रैफिक नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए निकल जाती हैं। परिवहन विभाग भी काटता है चालान, करता है वसूली
ऐसा नहीं है कि सिर्फ यातायात पुलिस ही चालान काटती है और वसूली करती है। परिवहन विभाग भी गाड़ियों का चालान काटता है और उसकी वसूली करता है। हालांकि ज्यादातर कामर्शियल गाड़ियों का चालान और वसूली परिवहन विभाग करता है। यहां चालान की रकम भी पांच हजार रुपए से शुरू होकर 25 हजार रुपए तक होती है। कहां जाती है चालान से होने वाली इनकम
चालान से होने वाली इनकम सीधे राजकोष (ट्रेजरी) में जमा होती है। पूरे साल में जमा होने वाली रकम का कुछ हिस्सा संबंधित विभाग को भी मिलता है, जो बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के लिए दिया जाता है। बाकी रकम सरकार दूसरी मदों में खर्च करती है। —————————– ये खबर भी पढ़ें… यूपी में चालान क्यों नहीं भर रहे लोग?, ढाई साल में 5 हजार करोड़ का चालान काटा; एक्सपर्ट ने बताई वजह यूपी में हर साल सवा करोड़ से ज्यादा गाड़ियों के चालान होते हैं। चालान की ये रकम करीब एक हजार करोड़ रुपए से ज्यादा है। लेकिन वसूली नाम मात्र ही हो पाती है। बीते ढाई साल में यूपी में 5,239 करोड़ रुपए का चालान हुआ है। इसके मुकाबले यातायात विभाग सिर्फ 333 करोड़ रुपए ही वसूल सका है। यानी लगभग 5 हजार करोड़ रुपए बकाया है। ‘दैनिक भास्कर’ की इस खास रिपोर्ट में जानिए आखिर क्यों लोग चालान जमा नहीं कर रहे? ऑनलाइन चालान करने के बाद क्या खुद की जिम्मेदारी से बरी हो जा रहे यातायात पुलिस कर्मी? साल-दर-साल चालान की संख्या कितनी बढ़ी और वसूली में गिरावट कितनी आ रही? पढ़िए पूरी खबर