लखनऊ में देश की पहली नाइट सफारी बनाई जानी है। यह सफारी कुकरैल के जंगलों में होगी। योगी सरकार ने 2022 में इसकी घोषणा की थी। इस प्रोजेक्ट का नाम- ‘कुकरैल नाइट सफारी और एडवेंचर पार्क’ है। इसका डेवलपमेंट दो चरणों में किया जाना है। इसके लिए 1,510 करोड़ रुपए का बजट लगेगा। सरकार का कहना था कि इस सफारी को सिंगापुर की तर्ज पर बनाया जाएगा। इन बातों को अब तीन साल बीत चुके हैं और जमीनी हकीकत यह है कि ग्राउंड पर तीन फीसदी भी काम नहीं हुआ है। हां, जंगल से गुजरने वाली कुकरैल नदी के जीर्णोद्धार का काम जरूर शुरू हो गया है। ये गोमती में मिलती है, फिलहाल इसके दोनों किनारों पर मिट्टी की पटान का काम किया गया। यहीं पर रिवर फ्रंट भी बनाया जाना है। इस वक्त बारिश का पानी आने से नदी खूबसूरत भी दिखाई दे रही है। वहीं, जंगल भी विहंगम दिखाई दे रहा है। ‘दैनिक भास्कर’ की टीम ने नाइट सफारी बनने से पहले इस जंगल और नदी का ड्रोन वीडियो शूट किया, जो मानसून के मौसम में बहुत खूबसूरत नजर आ रहा है। टूरिज्म एक्सपर्ट्स का कहना है कि नाइट सफारी बनने के बाद ये स्पॉट लखनऊ का ही नहीं, बल्कि प्रदेश का सबसे बड़ा हॉटस्पॉट होगा। इसलिए सरकार को इस प्रोजेक्ट को तेजी से पूरा करना चाहिए। पहले ड्रोन व्यू वाली 3 तस्वीरें देखिए अब नाइट सफारी प्रोजेक्ट और कुकरैल जंगल के बारे में जानिए- नाइट सफारी का प्रस्ताव कब और कैसे शुरू हुआ? 3 साल, 3 बैठकें, नतीजा महज कागजों तक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस प्रोजेक्ट को लेकर अब तक तीन बार उच्च स्तरीय बैठकें कर चुके हैं। पहली बैठक- अगस्त 2022 में हुई, ‘कुकरैल नाइट सफारी और एडवेंचर पार्क’ प्रोजेक्ट को हरी झंडी दी। दूसरी बैठक- 15 मई 2023 को हुई, जब प्रोजेक्ट को केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA) की अनुमति मिली। तीसरी बैठक- 3 फरवरी 2025 को हुई, जब व्यय वित्त समिति ने परियोजना के बजट को अंतिम मंजूरी दी। हर बैठक में यह कहा गया कि अब काम शुरू होने जा रहा है, लेकिन इन तीन बैठकों के परिणाम आज भी फाइलों तक सीमित हैं। अभी तक टेंडर प्रक्रिया भी नहीं हो सकी। बजट में से भी 4 करोड़ रुपए जारी हुए हैं। ग्राउंड पर जीरो काम, सिर्फ DPR तैयार हो रही तीन सालों में नाइट सफारी प्रोजेक्ट का ग्राउंड पर कोई काम शुरू हो सका है, न ही कोई स्पष्ट कार्ययोजना सार्वजनिक की गई है। अभी तक केवल डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार करने और सलाहकार एजेंसी नियुक्त करने की प्रक्रिया चल रही है। ग्राउंड पर ना कोई सड़क बनी है, ना बाउंड्रीवॉल खड़ी हुई और ना ही सफारी के किसी हिस्से की नींव रखी गई है। वन विभाग के एक बड़े अधिकारी ने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अब तक जो भी काम हुआ है, वह सिर्फ कागजी प्रक्रियाओं, सर्वे और अनुमतियों तक ही सीमित रहा है। व्यय वित्त समिति ने फरवरी 2025 में इस प्रोजेक्ट के लिए कुल 1510 करोड़ रुपए की मंजूरी दी है। पहले चरण में नाइट सफारी और उससे जुड़ा आधारभूत ढांचा बनाने के लिए 631 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। कुकरैल नाइट सफारी और एडवेंचर पार्क’ प्रोजेक्ट का ब्लू प्रिंट पहला चरण- नाइट सफारी, एडवेंचर पार्क, बाड़े, गाइडेड टूर व्यवस्था, इको टूरिज्म जोन दूसरा चरण- चिड़ियाघर का निर्माण और इको टूरिज्म सुविधाओं का विकास कुल लागत- 1510 करोड़ रुपए प्रोजेक्ट की खूबियों और अब तक के काम को जानिए- 72% क्षेत्र हरियाली युक्त और सौर ऊर्जा का इस्तेमाल होगा इस नाइट सफारी प्रोजेक्ट में 72% क्षेत्र हरा-भरा रहेगा और सौर ऊर्जा का उपयोग किया जाएगा। जानवरों को खुले में (कैटल ग्रिड) रखा जाएगा, ताकि प्राकृतिक वातावरण बना रहे। रात के समय सफारी को विशेष रूप से डिजाइन की गई मंद लाइट व्यवस्था के जरिए प्राकृतिक रूप देने की योजना है। सरकारी अधिकारियों और पर्यावरणविदों का मानना है कि यदि यह प्रोजेक्ट समय से और उसी स्तर पर पूरी होती है, जैसी इसकी योजना बनाई गई है, तो यह लखनऊ को न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर भी स्थापित कर सकती है। पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह और परियोजना निदेशक दावा कर चुके हैं कि यह सफारी सिंगापुर की तुलना में ज्यादा शानदार होगी और यह एशिया की पांचवीं नाइट सफारी बनेगी। अब तक शुरुआती सर्वे और पर्यावरणीय रिपोर्टिंग का काम हुआ अब तक किसी अंतरराष्ट्रीय सलाहकार कंपनी को अंतिम रूप नहीं दिया गया है। हालांकि वन विभाग ने सलाहकार चयन प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन टेंडर अब तक अंतिम स्तर तक नहीं पहुंचा। यह भी प्रोजेक्ट की देरी की एक बड़ी वजह है। अभी तक प्रोजेक्ट में केवल शुरुआती सर्वे और पर्यावरणीय रिपोर्टिंग का काम हुआ है। जमीन की पहचान, संभावित वन्यजीवों की लिस्टिंग और पर्यावरण प्रभाव आकलन रिपोर्ट की प्रक्रिया चल रही है। लेकिन साइट पर कोई फिजिकल डेवलपमेंट नजर नहीं आता। सुप्रीम कोर्ट से अनुमति लेने को लेकर फंसा है पूरा प्रोजेक्ट लखनऊ के कुकरैल वन क्षेत्र में प्रस्तावित नाइट सफारी परियोजना का निर्माण कार्य सुप्रीम कोर्ट से अनुमति लेने के चलते रुका हुआ है। दरअसल, वन क्षेत्र में निर्माण से पहले सुप्रीम कोर्ट से अनुमति लेनी पड़ती है। वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि रिटायर्ड आईएफएस अफसर अशोक कुमार शर्मा ने 2023 में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की थी, जिसमें कहा गया था कि आरक्षित वन क्षेत्रों में गैर-वानिकी गतिविधियों की अनुमति देना पर्यावरण के लिए घातक हो सकता है। इस याचिका में वन संरक्षण अधिनियम-1980 का हवाला दिया गया। हालांकि, सरकार ने उसी साल कानून में संशोधन कर नियमों को शिथिल कर दिया, जिससे नाइट सफारी निर्माण का रास्ता साफ होता दिखा। सेंट्रल जू अथॉरिटी की परमिशन मिली और एजेंसी का चयन हुआ वन विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि परियोजना को लेकर कैबिनेट मंजूरी, सेंट्रल जू अथॉरिटी की स्वीकृति और निर्माण एजेंसी (नागार्जुन कंस्ट्रक्शन, हैदराबाद) का चयन पहले ही किया जा चुका है। जैसे ही सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी मिलेगी, काम शुरू कर दिया जाएगा। ————————- ये खबर भी पढ़िए… मंत्री एके शर्मा का अपनी ही सरकार पर निशाना:लिखा- बिजली का निजीकरण सरकार की मंजूरी से हो रहा, तो दोषी हम क्यों? एक तरफ यूपी के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा बिजली अफसरों को निशाने पर लिए हुए हैं। तो दूसरी तरफ बिजली कर्मचारी भी मंत्री के खिलाफ मोर्चा खोले हैं। बिजली कर्मचारी दक्षिणांचल और पूर्वांचल बिजली कंपनियों के निजीकरण और बेपटरी हुई बिजली व्यवस्था को लेकर खफा हैं। धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। (पूरी खबर पढ़िए)