लखनऊ के एस्ट्रोनॉट ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) से लौटते ही अपनी पत्नी और बेटे को गले लगाकर भावुक स्वागत किया। ह्यूस्टन स्थित मेडिकल रिकवरी और क्वारैंटाइन सुविधा केंद्र में उनकी पत्नी कामना ने बांह फैलाकर उनका वेलकम किया। चार साल का बेटा गले से लिपट गया। महीनों की तैयारी, अंतरिक्ष की यात्रा और फिर पृथ्वी पर सुरक्षित लौटने के बाद अपनों की बाहों में आना उनके लिए सबसे कीमती अनुभव रहा। शुभांशु ने इस मुलाकात की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कीं, जिनमें वह पत्नी और बेटे को गले लगाते नजर आ रहे हैं। तस्वीरों के साथ उन्होंने लिखा कि वह अब भी घर में एक हफ्ते के क्वारैंटाइन में हैं। इस दौरान परिजनों से मिलने के लिए आठ मीटर की दूरी बनाए रखनी होती है। छोटे बेटे को समझाया जा रहा है कि वह अभी पापा को छू नहीं सकता है, लेकिन वह हर बार मासूमियत से पूछता है, “क्या मैं हाथ धोकर पापा को छू सकता हूं?” आइए पहले शुभांशु से मुलाकात की 3 तस्वीरें देखते हैं.. “अंतरिक्ष अद्भुत है, लेकिन अपनों की बाहों में लौटना उससे भी ज़्यादा” अपनी पत्नी कामना और चार साल के बेटे को गले लगाते हुए शुभांशु की जो तस्वीरें सामने आई हैं, उन्होंने सोशल मीडिया पर लाखों दिलों को छू लिया है। ये सिर्फ एक अंतरिक्ष यात्री की पोस्ट नहीं थी, बल्कि वो मानवीय दस्तावेज था जो बताता है कि विज्ञान के सबसे ऊंचे शिखर पर पहुंचने के बाद भी इंसान की सबसे बड़ी जरूरत ‘अपनापन’ ही होता है। इंस्टाग्राम पर साझा की गईं तस्वीरों के साथ उन्होंने लिखा, “मुझे क्वारंटीन में दो महीने हो गए। इस दौरान हमें अपने परिवार से 8 मीटर की दूरी बनाकर रखनी होती थी। मेरे छोटे बेटे को बताया गया कि उसके हाथों में कीटाणु हो सकते हैं, इसलिए वह पापा को नहीं छू सकता। हर बार वह अपनी मां से मासूमियत से पूछता, ‘क्या मैं अब हाथ धोकर पापा को छू सकता हूं?” आंसू छलक पड़े पत्नी की आंखों से.. जब शुभांशु ने पहली बार अपनी पत्नी और बेटे को गले लगाया, तब उनकी पत्नी की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। उन्होंने वर्षों तक उनके इस मिशन की तैयारी देखी थी, लेकिन 18 दिन की वह अंतरिक्ष यात्रा, और उसके बाद के क्वारंटीन, इंतजार को असहनीय बना चुके थे। कामना, जिनकी दिनचर्या पिछले दो महीनों से सुबह की पूजा में मंगलकामना और हर शाम बेटे के सवालों के जवाब देने में बीत रही थी, अब अंततः सुकून के आंसुओं में बह गईं। इंसान ही अंतरिक्ष को जादुई बनाते हैं शुभांशु ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में एक अहम बात लिखी जो विज्ञान और मानवीयता के रिश्ते को नए तरीके से बखान करती है। उन्होंने कहा कि, “धरती पर लौटकर अपने परिवार को गले लगाना वही पल था जब मुझे फिर से घर जैसा महसूस हुआ। आज ही किसी अपने को फोन करें, गले लगाएं, उन्हें बताएं कि आप उनसे प्यार करते हैं। हम जीवन में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि भूल जाते हैं कि हमारे जीवन में लोग ही असली जादू हैं। अंतरिक्ष मिशन जादुई होते हैं, लेकिन उन्हें इंसान ही जादुई बनाते हैं।” राकेश शर्मा के बाद भारत के दूसरे अंतरिक्ष योद्धा ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला राकेश शर्मा के बाद अंतरिक्ष की यात्रा करने वाले दूसरे भारतीय बन गए हैं। जहां राकेश शर्मा ने 1984 में सोवियत मिशन के तहत उड़ान भरी थी, वहीं शुभांशु ने 25 जून, 2025 को अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित कैनेडी स्पेस सेंटर से स्पेसएक्स के फाल्कन-9 रॉकेट में सवार होकर अपनी यात्रा शुरू की। 26 जून को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से जुड़ने के बाद उन्होंने 18 दिन तक वहां रहकर 60 से अधिक वैज्ञानिक प्रयोग किए। ‘स्प्राउट्स प्रोजेक्ट’ – भविष्य की खेती की नई दिशा शुभांशु का सबसे चर्चित प्रयोग ‘स्प्राउट्स प्रोजेक्ट’ था, जिसमें माइक्रोग्रैविटी (अंतरिक्ष की भारहीन स्थिति) में पौधों की वृद्धि का अध्ययन किया गया। यह प्रयोग भविष्य में अंतरिक्ष में सस्टेनेबल फार्मिंग के लिए क्रांतिकारी साबित हो सकता है। साथ ही, उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जीव विज्ञान और मटीरियल साइंस से जुड़े कई प्रयोग किए जो आने वाले दशकों में धरती और अंतरिक्ष दोनों पर विज्ञान की दिशा तय कर सकते हैं। ————– संबंधित खबर भी पढ़िए… ‘इतना प्राउड फील कराया कि सपने कम पड़ गए’:लखनऊ में शुभांशु शुक्ला की मां रो दीं, पिता बोले- बेटा 144 करोड़ में अकेला मेरे जीवन का सबसे बड़ा दिन है। मेरी लाइफ का सबसे बड़ा अचीवमेंट है। सब पूछते हैं आपने कौन सा पदक जीत लिया? मैं ये कहना चाहूंगा कि मैंने सबसे बड़ा पदक जीत लिया। मेरे बेटे ने वो कर दिखाया, जो 144 करोड़ की आबादी में कोई न कर सका। वो देश की आबादी में अकेला एक है। यही मेरे जीवन का सबसे बड़ा …पूरी खबर पढ़ें