हाल में बिहार और महाराष्ट्र में चुनावी सफलता के बाद ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने यूपी में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी और उनके भाई अकबरुद्दीन ओवैसी समेत स्थानीय नेता खुलकर सपा को चुनौती दे रहे हैं। ओवैसी ने तो यहां तक कह दिया है कि वे अखिलेश यादव की दुकान बंद कर देंगे। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यूपी में भी बिहार-महाराष्ट्र जैसी स्थिति बन रही? 2022 के विधानसभा चुनाव में एमआईएम ने कितनी सीटों पर लड़ाई लड़ी? सपा को कितना नुकसान पहुंचाया? सपा आरजेडी से ज्यादा सतर्क क्यों है? महाराष्ट्र की सफलता के पीछे सपा की अंदरूनी लड़ाई का क्या रोल था? यूपी में AIMIM का चेहरा कौन है? पार्टी यहां नाकाम क्यों रह सकती है और कामयाबी के क्या रास्ते हैं? इन सवालों का जवाब इस खबर में तलाशेंगे… AIMIM के लिए यूपी में बिहार और महाराष्ट्र जैसी जमीन नहीं
वरिष्ठ पत्रकार हसन एजाज कहते हैं- AIMIM के लिए यूपी में बिहार और महाराष्ट्र जैसी जमीन नहीं है। इन दोनों जगहों पर परिस्थितियां अलग थीं। AIMIM को कामयाबी बिहार के मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र सीमांचल में मिली। यहां राष्ट्रीय जनता दल के पास मुस्लिम चेहरों की कमी थी। साथ ही ओवैसी को लेकर तेजस्वी यादव का तल्ख लहजा भी सीमांचल के लोगों को नागवार गुजरा था। यही वजह रही कि बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग ओवैसी के साथ गए। इसी तरह महाराष्ट्र में समाजवादी पार्टी पर लंबे समय से अबू आसिम आजमी का एकाधिकार चला आ रहा है। ओवैसी को लोकसभा चुनाव में कोई खास कामयाबी नहीं मिली थी। कामयाबी नगर निकाय चुनावों में मिली थी। इसकी मुख्य वजह सपा की अंदरूनी लड़ाई थी। सपा के पास हर क्षेत्र में मुस्लिम चेहरा जहां तक बात यूपी की है, तो यहां समाजवादी पार्टी के पास लगभग हर जिले में मुस्लिम चेहरा है। AIMIM की निगाह भी इन्हीं इलाकों पर है। खासकर उन जिलों में, जहां मुस्लिमों की अच्छी आबादी है। हर जिले में सपा के पास कोई न कोई बड़ा नेता है। जैसे पश्चिमी यूपी में इकरा हसन, शाहिद मंजूर, कादिर राणा, एसटी हसन, आजम खान, मोहिबुल्ला नदवी, रफीक अंसारी, आदिल चौधरी, असलम चौधरी, आशु मलिक, इकबाल महमूद, महबूब अली, जियाउर्रहमान बर्क जैसे नेता हैं। इसी प्रदेश के बाकी हिस्सों में भी मुस्लिम नेताओं की कमी नहीं। कानपुर में सोलंकी परिवार, हरदोई में आसिफ खान उर्फ बब्बू, सुल्तानपुर में शकील अहमद, ताहिर अली, लखनऊ में इंसराम अली, रेहान, रफीक, गाजीपुर में अफजाल अंसारी, बलिया में जियाउद्दीन रिजवी, भदोही में जाहिद बेग जैसे नेता समाजवादी पार्टी के प्रमुख चेहरा हैं। 2022 में कैसी थी AIMIM की परफार्मेंस सपा के लिए AIMIM को पूरी तरह इग्नोर करना भी आत्मघाती होगा। 2022 के चुनाव में 95 सीटों पर AIMIM ने चुनाव लड़ा था। कई सीटों पर सपा के प्रत्याशियों के हार के अंतर से ज्यादा वोट हासिल किया था। जिन 95 सीटों पर AIMIM लड़ी, वहां भाजपा और उसके सहयोगियों ने 51 सीटें हासिल कीं। जबकि, सपा और उसके सहयोगियों को 44 सीटें मिलीं। 7 सीटें ऐसी रहीं, जहां सपा की हार का अंतर AIMIM के प्रत्याशी को मिले वोटों से कम था। AIMIM ने 2 सीटों पर हासिल किए थे 20 हजार से अधिक वोट
2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में AIMIM का वोट शेयर 0.5 प्रतिशत था। उसे एक भी सीट पर जीत हासिल नहीं हुई थी। उसे कुल साढ़े चार लाख वोट मिले थे। सबसे अधिक मुबारकपुर सीट पर 36 हजार 460 वोट मिले थे। हालांकि, यहां पर समाजवादी पार्टी 29 हजार वोटों से जीती थी। संभल में भी AIMIM ने 20 हजार से अधिक वोट हासिल किए थे। यहां भी समाजवादी पार्टी 41 हजार से अधिक वोटों से जीती थी। AIMIM की सबसे खराब परफार्मेंस शामली के थानाभवन सीट पर थी, जहां उसे केवल 325 वोट मिले थे। आरजेडी के मुकाबले सपा ज्यादा सतर्क क्यों?
बिहार में आरजेडी ने AIMIM को लेकर काफी तल्ख टिप्पणियां की थीं। इसका सीधा नुकसान उसे मुस्लिम बाहुल्य सीटों पर हुआ। लेकिन, यूपी में सपा ज्यादा सतर्क है। अखिलेश यादव ने ओवैसी के मसले पर अपने प्रवक्ताओं को भी मुंह बंद रखने की सलाह दी है। यूपी में मुस्लिम-यादव समीकरण और पीडीए रणनीति सपा के पक्ष में ज्यादा मजबूत है। कौन है यूपी में AIMIM का चेहरा
यूपी में AIMIM का आधिकारिक चेहरा प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली हैं। शौकत अली अलग अलग जिलों में अभी से छोटी-छोटी सभाएं कर रहे हैं। वह अक्सर विवादों में भी रहते हैं। हाल ही में उन्होंने एक विवादास्पद नारा दिया था- हम दो, हमारे दो दर्जन। वे सपा पर सीधा हमला बोलने से भी नहीं चूकते। उनका कहना है कि सपा ने मुसलमानों को डिस्पोजेबल ग्लास की तरह इस्तेमाल किया। शौकत अली ऐलान कर चुके हैं कि 2026 का जिला पंचायत चुनाव और 2027 का विधानसभा चुनाव सभी 75 जिलों में लड़ेंगे। असदुद्दीन ओवैसी के भाई अकबरुद्दीन ओवैसी भी यूपी विस्तार की बात कर रहे हैं। यूपी में AIMIM अपने नेता असदुद्दीन ओवैसी और अकबरुद्दीन ओवैसी के चेहरे पर ही वोट मांगेगी। बसपा के साथ आने पर सपा को होगा ज्यादा नुकसान वरिष्ठ पत्रकार सैयद कासिम कहते हैं- अगर AIMIM और बसपा का गठबंधन होता है, तो सपा को सीधा नुकसान होगा। अगर दोनों दल मिलकर लड़ते हैं, तो बड़ी संख्या में मुस्लिम वोट सपा से छिटक सकते हैं। AIMIM की तरफ से शौकत अली इसका इशारा भी कर चुके हैं। हालांकि, मायावती कहती रही हैं कि 2027 के चुनाव में वे किसी के साथ समझौता नहीं करेंगी। कुल मिलाकर अगर AIMIM और बसपा साथ आते हैं, तो यूपी में मुस्लिम-दलित गठजोड़ से इसका फायदा दोनों ही दलों को हो सकता है। ————————- ये खबर भी पढ़ें… पिता की हत्या करके बहन के साथ चिकन खाया, लखनऊ में नीले ड्रम में बेटा लाश जलाने वाला था, दूसरी शादी की चर्चा से खफा था लखनऊ की जानी-मानी पैथोलॉजी के मालिक की हत्या के मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। बताया जा रहा कि वर्धमान पैथोलॉजी के ओनर मानवेंद्र सिंह की दूसरी शादी की बात चल रही थी। इससे उनके बच्चे खासे नाराज थे। इसके चलते पिता की हत्या कर लाश नीले ड्रम में भर दी। पढ़िए पूरी खबर…
वरिष्ठ पत्रकार हसन एजाज कहते हैं- AIMIM के लिए यूपी में बिहार और महाराष्ट्र जैसी जमीन नहीं है। इन दोनों जगहों पर परिस्थितियां अलग थीं। AIMIM को कामयाबी बिहार के मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र सीमांचल में मिली। यहां राष्ट्रीय जनता दल के पास मुस्लिम चेहरों की कमी थी। साथ ही ओवैसी को लेकर तेजस्वी यादव का तल्ख लहजा भी सीमांचल के लोगों को नागवार गुजरा था। यही वजह रही कि बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग ओवैसी के साथ गए। इसी तरह महाराष्ट्र में समाजवादी पार्टी पर लंबे समय से अबू आसिम आजमी का एकाधिकार चला आ रहा है। ओवैसी को लोकसभा चुनाव में कोई खास कामयाबी नहीं मिली थी। कामयाबी नगर निकाय चुनावों में मिली थी। इसकी मुख्य वजह सपा की अंदरूनी लड़ाई थी। सपा के पास हर क्षेत्र में मुस्लिम चेहरा जहां तक बात यूपी की है, तो यहां समाजवादी पार्टी के पास लगभग हर जिले में मुस्लिम चेहरा है। AIMIM की निगाह भी इन्हीं इलाकों पर है। खासकर उन जिलों में, जहां मुस्लिमों की अच्छी आबादी है। हर जिले में सपा के पास कोई न कोई बड़ा नेता है। जैसे पश्चिमी यूपी में इकरा हसन, शाहिद मंजूर, कादिर राणा, एसटी हसन, आजम खान, मोहिबुल्ला नदवी, रफीक अंसारी, आदिल चौधरी, असलम चौधरी, आशु मलिक, इकबाल महमूद, महबूब अली, जियाउर्रहमान बर्क जैसे नेता हैं। इसी प्रदेश के बाकी हिस्सों में भी मुस्लिम नेताओं की कमी नहीं। कानपुर में सोलंकी परिवार, हरदोई में आसिफ खान उर्फ बब्बू, सुल्तानपुर में शकील अहमद, ताहिर अली, लखनऊ में इंसराम अली, रेहान, रफीक, गाजीपुर में अफजाल अंसारी, बलिया में जियाउद्दीन रिजवी, भदोही में जाहिद बेग जैसे नेता समाजवादी पार्टी के प्रमुख चेहरा हैं। 2022 में कैसी थी AIMIM की परफार्मेंस सपा के लिए AIMIM को पूरी तरह इग्नोर करना भी आत्मघाती होगा। 2022 के चुनाव में 95 सीटों पर AIMIM ने चुनाव लड़ा था। कई सीटों पर सपा के प्रत्याशियों के हार के अंतर से ज्यादा वोट हासिल किया था। जिन 95 सीटों पर AIMIM लड़ी, वहां भाजपा और उसके सहयोगियों ने 51 सीटें हासिल कीं। जबकि, सपा और उसके सहयोगियों को 44 सीटें मिलीं। 7 सीटें ऐसी रहीं, जहां सपा की हार का अंतर AIMIM के प्रत्याशी को मिले वोटों से कम था। AIMIM ने 2 सीटों पर हासिल किए थे 20 हजार से अधिक वोट
2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में AIMIM का वोट शेयर 0.5 प्रतिशत था। उसे एक भी सीट पर जीत हासिल नहीं हुई थी। उसे कुल साढ़े चार लाख वोट मिले थे। सबसे अधिक मुबारकपुर सीट पर 36 हजार 460 वोट मिले थे। हालांकि, यहां पर समाजवादी पार्टी 29 हजार वोटों से जीती थी। संभल में भी AIMIM ने 20 हजार से अधिक वोट हासिल किए थे। यहां भी समाजवादी पार्टी 41 हजार से अधिक वोटों से जीती थी। AIMIM की सबसे खराब परफार्मेंस शामली के थानाभवन सीट पर थी, जहां उसे केवल 325 वोट मिले थे। आरजेडी के मुकाबले सपा ज्यादा सतर्क क्यों?
बिहार में आरजेडी ने AIMIM को लेकर काफी तल्ख टिप्पणियां की थीं। इसका सीधा नुकसान उसे मुस्लिम बाहुल्य सीटों पर हुआ। लेकिन, यूपी में सपा ज्यादा सतर्क है। अखिलेश यादव ने ओवैसी के मसले पर अपने प्रवक्ताओं को भी मुंह बंद रखने की सलाह दी है। यूपी में मुस्लिम-यादव समीकरण और पीडीए रणनीति सपा के पक्ष में ज्यादा मजबूत है। कौन है यूपी में AIMIM का चेहरा
यूपी में AIMIM का आधिकारिक चेहरा प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली हैं। शौकत अली अलग अलग जिलों में अभी से छोटी-छोटी सभाएं कर रहे हैं। वह अक्सर विवादों में भी रहते हैं। हाल ही में उन्होंने एक विवादास्पद नारा दिया था- हम दो, हमारे दो दर्जन। वे सपा पर सीधा हमला बोलने से भी नहीं चूकते। उनका कहना है कि सपा ने मुसलमानों को डिस्पोजेबल ग्लास की तरह इस्तेमाल किया। शौकत अली ऐलान कर चुके हैं कि 2026 का जिला पंचायत चुनाव और 2027 का विधानसभा चुनाव सभी 75 जिलों में लड़ेंगे। असदुद्दीन ओवैसी के भाई अकबरुद्दीन ओवैसी भी यूपी विस्तार की बात कर रहे हैं। यूपी में AIMIM अपने नेता असदुद्दीन ओवैसी और अकबरुद्दीन ओवैसी के चेहरे पर ही वोट मांगेगी। बसपा के साथ आने पर सपा को होगा ज्यादा नुकसान वरिष्ठ पत्रकार सैयद कासिम कहते हैं- अगर AIMIM और बसपा का गठबंधन होता है, तो सपा को सीधा नुकसान होगा। अगर दोनों दल मिलकर लड़ते हैं, तो बड़ी संख्या में मुस्लिम वोट सपा से छिटक सकते हैं। AIMIM की तरफ से शौकत अली इसका इशारा भी कर चुके हैं। हालांकि, मायावती कहती रही हैं कि 2027 के चुनाव में वे किसी के साथ समझौता नहीं करेंगी। कुल मिलाकर अगर AIMIM और बसपा साथ आते हैं, तो यूपी में मुस्लिम-दलित गठजोड़ से इसका फायदा दोनों ही दलों को हो सकता है। ————————- ये खबर भी पढ़ें… पिता की हत्या करके बहन के साथ चिकन खाया, लखनऊ में नीले ड्रम में बेटा लाश जलाने वाला था, दूसरी शादी की चर्चा से खफा था लखनऊ की जानी-मानी पैथोलॉजी के मालिक की हत्या के मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। बताया जा रहा कि वर्धमान पैथोलॉजी के ओनर मानवेंद्र सिंह की दूसरी शादी की बात चल रही थी। इससे उनके बच्चे खासे नाराज थे। इसके चलते पिता की हत्या कर लाश नीले ड्रम में भर दी। पढ़िए पूरी खबर…