अखिलेश के हलफनामों की तीन साल बाद शुरू हुई जांच:18 हजार हलफनामों में से पंद्रह हलफनामों के दावों को गलत ठहराया

चुनाव आयोग पर वोट चोरी के लग रहे आरोप को लेकर समाजवादी पार्टी ने जो 18 हजार हलफनामे दिए थे उसमें से 15 हलफनामों की जांच तीन साल बाद पूरी हो गई है। जौनपुर, कासगंज और बाराबंकी के जिलाधिकारी ने मंगलवार देर रात सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर पोस्ट कर बताया कि उनके पास जो शिकायतें आई थीं, उनकी जांच पूरी कर ली गई है। इसमें कुछ नाम मतदाता सूची में मौजूद हैं, जो विलोपित किए गए थे वह दूसरे स्थान पर भी नाम दर्ज होने के कारण किए गए थे और कुछ पहले ही मर चुके थे, जिसके कारण नाम डिलीट किए गए थे। दर असल 17 अगस्त को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने दिल्ली में प्रेस कांफ्रेंस की थी। प्रेस कांफ्रेंस में जब सवाल किया गया कि अखिलेश यादव ने 18 हजार नामों का हलफनामा दिया हुआ है, राजनीति में बार–बार सवाल उठा रहा है कि आपने उसका जवाब नहीं दिया। इस सवाल के जवाब में ज्ञानेश कुमार ने कहा था कि चुनाव जीतने या हारने के बाद जिस मतदाता सूची पर चुनाव हुआ उसके ऊपर बिना हलफनामा दिए (हलफनामा दिया गया ये बात ठीक नहीं है) बिना ओथ दिए सिर्फ एक पत्र लिखकर अगर हमारे बूथ लेवल आफिसर, एसडीएम और डीएम की कार्यशैली पर कोई प्रश्न चिन्ह लगाता है तो ये गलत है। यानी आयोग का साफ कहना था कि आयोग को हलफानामे के साथ शिकायत नहीं मिली। इसके जवाब में अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा था कि जो चुनाव आयोग ये कह रहा है कि हमें यूपी में समाजवादी पार्टी द्वारा दिये गये ऐफ़िडेविट नहीं मिले हैं, वो हमारे शपथपत्रों की प्राप्ति के प्रमाण स्वरूप दी गयी अपने कार्यालय की पावती को देख ले। इस बार हम मांग करते हैं कि चुनाव आयोग शपथपत्र दे कि ये जो डिजिटल रसीद हमको भेजी गयी है वो सही है, नहीं तो ‘चुनाव आयोग’ के साथ-साथ ‘डिजिटल इंडिया’ भी शक के घेरे में आ जाएगा। इसके साथ अखिलेश यादव ने चार ईमेल रिसीविंग भी अटैच की थी। इसके बाद सोमवार को दिल्ली में संसद सत्र के दौरान भी अखिलेश यादव ने हलफनामों की कॉपी बांटी थी और निर्वाचन आयोग का जवाब दिया था। अब तीन जिला निर्वाचन अधिकारी जौनपुर, बाराबंकी और कासगंज ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर अखिलेश यादव को जवाब दिया है। जौनपुर के डीएम ने लिखा कि.. ईमेल के माध्यम से जनपद जौनपुर की विधान सभा 366 जौनपुर के अंतर्गत पांच मतदाताओं के नाम गलत ढंग से काटने की शिकायत प्राप्त हुयी थी। वर्णित सभी पांचों मतदाता वर्ष 2022 के पूर्व ही मृतक हो चुके थे। इसकी पुष्टि सम्बंधित मृतक मतदाता के परिवार के सदस्यों, स्थानीय लोगों सहित स्थानीय सभासद के द्वारा की गयी थी। मृतकों के नाम नियमानुसार विलोपित किये गए हैं। अतः उपर्युक्त वर्णित शिकायत पूर्णतया निराधार व भ्रामक है। कासगंज के जिलाधिकारी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर एक्स पर पोस्ट किया कि ईमेल के माध्यम से जनपद कासगंज की विधान सभा 101 अमांपुर के अंतर्गत 8 मतदाताओं के नाम गलत ढंग से काटने की शिकायत प्राप्त हुयी थी।जांच में पाया गया कि 7 मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में दो बार होने के कारण नियमानुसार एक नाम को विलोपित किया गया था। इन 7 मतदाताओं का नाम आज भी मतदाता सूची में विद्यमान है। एक मतदाता की मृत्यु होने के कारण उनकी पत्नी के द्वारा फार्म 7 भरा गया था, जिसके आधार पर मृतक का नाम विलोपित किया गया था। बाराबंकी के जिलाधिकारी ने एक्स पोस्ट पर लिखा …बाराबंकी जिले के विधान सभा क्षेत्र 266-कुर्सी के 2 मतदाताओं के शपथ पत्र उनके नाम मतदाता सूची से गलत ढंग से काट दिये जाने के संबंध में प्राप्त हुए। जांच में पाया गया कि उपर्युक्त दोनों मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में दर्ज हैं। बाराबंकी डीएम ने कहा कि समाजवादी पार्टी की ओर से प्राप्त हुए हलफनामे बाराबंकी के जिलाधिकारी ने अपनी पोस्ट में ही मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस दावे गलत साबित कर दिया कि कोई हलफनामा नहीं मिला है। उन्होंने लिखा कि समाजवादी पार्टी की ओर से जो हलफनामे मिले थे उनकी जांच की गई। तीन साल के बाद आनन फानन में हुई जांच समाजवादी पार्टी ने हलफनामे 4 नवंबर 2022 को दिए थे। लेकिन आयोग ने जवाब 19 अगस्त 2025 को देर शाम सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से दिया है।