ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामनेई की अमेरिका और इजराइल के हमलों में हुई मौत के चार दिन बाद अखिलेश यादव ने निंदा की है। बुधवार को सोशल मीडिया साइट एक्स पर अखिलेश यादव ने लिखा कि “समाजवादी पार्टी अयातुल्ला खामेनेई पर हुए हमले और मीनाब के एक स्कूल पर हुए सबसे घातक इज़रायली-अमेरिकी हमलों में से एक, जिसमें 165 छात्राएं मारी गईं, दोनों की कड़ी निंदा करती है। जिनेवा कन्वेंशन और अंतरराष्ट्रीय कानून, जो संघर्ष के समय में भी मानव जीवन की रक्षा के लिए बनाए गए हैं, ऐसे कृत्यों से गंभीर रूप से खतरे में हैं। हम उनकी शहादत को नमन करते हैं और इस क्षति से दुखी, शोक संतप्त सभी लोगों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं।” बता दें कि बीते शनिवार को अमेरिका और इजराइल ने आयतुल्ला खामनेई के घर पर हमला कर दिया था, जिसमें खामनेई, उनकी बेटी, दामाद, नवासी की मौत हो गई थी। इस हमले में उनकी पत्नी घायल हो गई थीं, जिनका तीसरे दिन इंतकाल हो गया था। 28 फरवरी को ही अमेरिका इजराइल ने लड़कियों के एक स्कूल पर भी हमला कर 165 बच्चियों को मार डाला था। इस हमले के बाद लखनऊ समेत देश के कई हिस्सों में अमेरिका और इजराइल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुआ। पहले सिर्फ केंद्र सरकार को घेरा था अखिलेश यादव ने आयतुल्लाह खामनेई की मौत को ईरान की ओर से कंफर्म किए जाने के बाद 1 मार्च को पोस्ट कर केंद्र सरकार पर हमला बोला था। अखिलेश यादव ने लिखा था कि…“किसी देश के सबसे ख़ास से लेकर आम नागरिकों तक पर हो रहे जानलेवा हमलों व जंग के इन हालातों में हमारे देश की सरकार, इस अंतरराष्ट्रीय विषय पर अपना रुख़ साफ़ करे और बताए कि वो जंग के साथ है या अमन के और युद्ध को रोकने व शांति की बहाली के लिए एक तटस्थ देश होने के नाते क्या कूटनीतिक प्रयास कर रही है। हमारे देश की सरकार, हर संभव स्तर पर, युद्ध में मारे जानेवालों से जुड़ी ख़बरों की पुष्टि करे और सच क्या है ये जनता के सामने रखे। युद्धकालीन समाचार अक्सर रणनीति का हिस्सा होते हैं, इसीलिए उनकी पुष्टि की ज़रूरत होती है। इंसान के साथ इंसानियत का मारा जाना बेहद अफ़सोसजनक है। हर देश को ज़िम्मेदाराना व्यवहार करना चाहिए।”