सर नमस्ते। नमस्ते, तुम्हारी आज की डेट है?, टोकन हो गया इसका? नहीं सर, टोकन अभी नहीं मिला है। जाओ…टोकन कराओ, फोटो-फिंगर कराओ। सर, ये भैया बोले हैं पैसा देने को। (हाथ में पैसे की पुड़िया लेते हुए) ठीक है जाओ…टोकन तो कराओ नीचे जाकर। सर, आज देख लीजिए, आज मेरा हो जाए। जाओ… पहले टोकन तो कराओ… नीचे जाकर। टोकन कराकर सीधा मेरे पास आओ। सर, भैया डांट रहे थे…साहब को कम पैसा दिए हो, इसलिए काम तुम्हारा नहीं हुआ। जाओ… टोकन कराकर सीधा मेरे पास आना… हो जाएगा। यह बातचीत है गोरखपुर पासपोर्ट ऑफिस पर इन दिनों APO (असिस्टेंट पासपोर्ट ऑफिसर) का चार्ज देख रहे ग्रांट अफसर विनय मिश्रा और यहां पासपोर्ट बनवाने आने वाले की। ये अफसर रुपए लेकर दलालों के इशारे पर काम कर रहे हैं। यहां तैनात APO लंबी छुट्टी पर हैं। इसका फायदा उठाकर इन्होंने दलालों से सेटिंग कर ली है। ऑफिस के भीतर रिस्ट्रिक्टेड एरिया होने की वजह से यहां पुलिस तक की एंट्री नहीं हो सकती। इसलिए कभी यहां के अधिकारी न पकड़े जाते और न ही रिश्वत लेते सामने आते हैं। यही वजह है, रिश्वतखोरी से लेकर फर्जी ढंग से डबल पासपोर्ट तक बनवाने का काम दलालों के इशारों पर किया जा रहा। पासपोर्ट दफ्तरों पर चलने वाली दलाली और यहां तैनात विदेश मंत्रालय के अफसरों के रुपए लेने के मामले को एक्सपोज करने के लिए दैनिक भास्कर टीम ने गोरखपुर पासपोर्ट ऑफिस में एक महीने तक इन्वेस्टिगेशन किया। जिस फाइल में कमी बताकर यहां के अफसर ने रिजेक्ट किया, उसी फाइल को APO ने अगले दिन 2 हजार रुपए लेकर अप्रूव कर दिया। पढ़िए, सिलसिलेवार पूरा खुलासा… दलालों के बीच रहकर पहले उनके काम करने का तरीका समझा हमारी टीम एक महीने तक रोजाना सुबह 6 से शाम के 6 बजे तक पासपोर्ट ऑफिस पर घूमती रही। कुछ दिन में ही हमें यह समझ में आ गया कि यहां बाहर लगने वाली भीड़ में एप्लिकेंट कम और दलाल ज्यादा हैं। अगर कोई एप्लिकेंट अपना पासपोर्ट बनवाने आता है, तो उसे पहले बाहर दलाल ही पकड़ लेते हैं। उसे समझाते हैं कि वे उसका पासपोर्ट अप्लाई करने से लेकर बनवाने तक का ठेका लेंगे और गारंटी के साथ काम कराएंगे। भास्कर टीम में शामिल हुए एप्लिकेंट, तो एक्सपोज हुए APO इंचार्ज
पहले हमें लगा कि दलाल एप्लिकेंट को बेवकूफ बनाते हैं। शायद अंदर ऐसा नहीं होगा। ऐसे में हमने पासपोर्ट दफ्तर के अंदर चल रहे सिस्टम को समझने की कोशिश की। हमने यहां आने वाले कुछ पीड़ित एप्लिकेंट्स को अपनी टीम में शामिल किया। जो दलालों की मुंह मांगी कीमत देने में सक्षम नहीं थे और उन्हें पासपोर्ट बनवाना भी जरूरी था। हमने उन्हें यह भरोसा दिलाया कि उनके पासपोर्ट की सरकारी फीस से लेकर दलाली तक की रकम हम खुद पेमेंट करेंगे। इसके बाद कुछ एप्लिकेंट्स को लगा कि देशहित में यह बेहद जरूरी है। वे हिम्मत दिखाते हुए हमारी टीम में शामिल हुए। हमने अपनी टीम में 3 पीड़ित एप्लिकेंट्स को शामिल किया, जो पासपोर्ट दफ्तर के अधिकारियों और यहां की दलाली से त्रस्त थे। इनमें 2 एप्लिकेंट्स के डॉक्यूमेंट पूरी तरह सही थे। किसी तरह की कोई कमी नहीं थी। जबकि, एक एप्लिकेंट के डॉक्यूमेंट में पिता का सरनेम गलत था। हम इस रिपोर्ट में एप्लिकेंट्स की पहचान नहीं बता रहे हैं। जिससे उन्हें बाद में किसी तरह की दिक्कत न हो। खुफिया कैमरा लेकर APO तक पहुंचा एप्लिकेंट
हमने सबसे पहले देवी लाल (बदला हुआ नाम) का पासपोर्ट तत्काल में एक दलाल के जरिए अप्लाई कराया। इसकी सरकारी फीस 3500 रुपए हमने खुद ही ऑनलाइन पेमेंट किया। जबकि, फॉर्म भरने से लेकर डिजी-लॉकर बनाने, उसे पासपोर्ट की वेबसाइट से मर्ज करने और पूरी फाइल बनाकर देने के दलाल ने 500 रुपए एक्स्ट्रा चार्ज लिया। हालांकि, दलाल पासपोर्ट अप्लाई करने को तैयार नहीं था। उसका कहना था कि आप अप्लाई करा भी लो तो आपका बनेगा नहीं। क्योंकि, बिना सेटिंग अंदर काम नहीं होगा। इसके बावजूद चूंकि हमें अफसरों को एक्सपोज करना था, इसलिए हमारी टीम ने पासपोर्ट बनवाने के लिए दलालों का सहारा नहीं लिया। जिस दिन हमने पासपोर्ट अप्लाई कराया, उसके एक दिन बाद का ही अप्वाइंटमेंट मिल गया। पहले दिन हमने बिना पैसा दिए अपने एप्लिकेंट को खुफिया कैमरा देकर अंदर भेजा। एप्लिकेंट अपने अप्वाइंटमेंट के दिन फाइल लेकर सबसे पहले पासपोर्ट दफ्तर के इन्क्वायरी पर पहुंचा। यहां बैठे TCS (टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज) के अफसर प्रतीक मिश्रा मिले। उनसे एप्लिकेंट ने बताया कि हमें बाहर से एजेंट शानू ने भेजा है। इस पर प्रतीक मिश्रा ने कहा कि उसने किससे मिलने को कहा है? जिस काउंटर का नाम बताया है, वहां जाकर अधिकारी से मिलो। इसके बाद हम काउंटर नंबर- B3 पर गए। यहां बैठे अफसर अश्वनी को हमने बताया कि हमें कसया के शमशाद भाई ने भेजा है। उन्हें अपनी फाइल दी। पहले तो अधिकारी ने किसी और काउंटर पर जाने को कहा। लेकिन, फिर कहा कि सोमवार की डेट ले लो। सोमवार को आना, तुम्हारा काम करा दूंगा। APO इंचार्ज ने कर दिया रिजेक्ट
इसके बाद हम अपनी फाइल लेकर APO का चार्ज देख रहे ग्रांट अफसर विनय मिश्रा के पास पहुंचे। उन्होंने फाइल के कुछ डॉक्यूमेंट्स पर पिता का सरनेम अलग-अलग देख फाइल पर एक हरे रंग का टिक कर उसे रिजेक्ट कर दिया। कहा कि इस पर नहीं बनेगा। जाओ, पहले पेपर सही कराकर आओ। हालांकि, इस दौरान हमने यह देखा कि दलालों के जरिए सेटिंग से आने वाले एप्लिकेंट यहां अफसरों को अपनी फाइल के साथ एक पैकेट दे रहे हैं, जिसमें पैसा है। ये एप्लिकेंट, अफसरों को अलग-अलग दलालों का नाम बता रहे हैं। किसी दलाल से अफसर एप्लिकेंट से बात कराने को भी कह रहे हैं तो किसी एप्लिकेंट का नाम और काम की डिटेल पहले ही उन्हें दलाल मैसेज कर भेज चुके हैं। इससे हमें यह समझ आ गया कि किन-किन दलालों की अंदर अधिकारियों तक सेटिंग है? किनके-किनके नाम पर वे पैसे ले रहे हैं? नोट:- (हमें किसी भी तरह के डॉक्यूमेंट में कमी होने पर पासपोर्ट बनवाना नहीं था। इसलिए पहले दिन न ही हमने किसी अफसर को पैसों से भरा लिफाफा दिया और न ही इसके लिए कोई एक्स्ट्रा कोशिश की। हालांकि, काउंटर नंबर- B3 पर बैठे अफसर ने एप्लिकेंट से सोमवार की डेट लेकर आने को कहा था और आश्वासन भी दिया था कि वो उसका काम करा देंगे।) अब पहले दलाली का पूरा सिस्टम समझिए… गार्ड और कर्मचारी भी दलाली में शामिल
पहली फाइल रिजेक्ट होने के बाद हमने एक-एक कर यहां के दलालों से बातचीत करनी शुरू की। सभी से पासपोर्ट बनवाने के अलग-अलग रेट जाने। अंदर काम कराने के लिए अधिकारियों को किस काम के कितने रुपए भेजे जाते, अफसरों को रुपए देने का पूरा सिस्टम समझा। पासपोर्ट ऑफिस के सिक्योरिटी गार्ड से लेकर यहां इन्क्वायरी पर बैठे अफसर से भी बात की तो समझ आया कि यहां के गार्ड और अफसर भी दलाली के इस खेल में शामिल हैं। रिपोर्टर: पासपोर्ट बनवाना है, कैसे बनेगा? यादव गार्ड: ऑनलाइन अभी हुआ है या नहीं? रिपोर्टर: अभी नहीं हुआ है। कराना है। कहां होगा? यादव गार्ड: यहीं हो जाएगा। बैठिए अभी करा देते हैं। रिपोर्टर: क्या-क्या लगेगा? कैसे भरा जाएगा? यादव गार्ड: पहली बार बनवा रहे हैं या रिन्युअल है? रिपोर्टर: पहली बार। यादव गार्ड: आइए, इन्क्वायरी पर। खुद साथ ले गया। अब इनसे पूछ लीजिए। इन्क्वायरी पर बैठे टाटा कंसल्टेंसी कर्मचारी प्रतीक मिश्रा और रिपोर्टर की बातचीत… रिपोर्टर: सर, नया पासपोर्ट बनवाने के लिए क्या-क्या जरूरत पड़ेगी? TCS कर्मचारी: आपका ऑनलाइन हो चुका है। आज का डेट है आपका? रिपोर्टर: नहीं अभी मैं पहली बार आया हूं। TCS कर्मचारी: ऑनलाइन फॉर्म भरिए। जो डेट मिलेगी, उस डेट पर पैनकार्ड, आधार कार्ड, हाईस्कूल का सर्टिफिकेट और बैंक पासबुक लेकर आइएगा। रिपोर्टर: सर, कैसे फॉर्म भरा जाएगा? TCS कर्मचारी: बिना कुछ बोले हुए सिक्योरिटी गार्ड की तरफ इशारा कर दिया। बाहर आने पर यादव गार्ड ने रिपोर्टर को रोका, पूछा क्या हुआ? रिपोर्टर: बोल रहे पहले ऑनलाइन कराना होगा। यादव गार्ड: कराएंगे या फिर…? रिपोर्टर: कराना तो है ही। यादव गार्ड: रुकिए, अभी यहीं करा देते हैं। यादव गार्ड ने पासपोर्ट ऑफिस के दलाल बृजमोहन तिवारी को फोन कर बुलाया और कहा कि अभी यही आपका ऑनलाइन करेंगे। दलाल बृजमोहन तिवारी और रिपोर्टर की बातचीत… दलाल बृजमोहन तिवारी: क्या है आपका, नया पासपोर्ट बनवाना है? रिपोर्टर: हां। दलाल बृजमोहन तिवारी: ऑनलाइन नहीं हुआ है अभी? रिपोर्टर: अभी नहीं। दलाल बृजमोहन तिवारी: इससे पहले कभी पासपोर्ट के लिए आवेदन तो नहीं किए हैं? रिपोर्टर: नहीं। दलाल बृजमोहन फिर रिपोर्टर को अपनी दुकान में ले गया। यहां हमें दुकान पर बैठा एक और दलाल प्रशांत शर्मा मिला। दलाल प्रशांत शर्मा: आपका नया है या रिन्युअल? रिपोर्टर: नया है। दलाल प्रशांत शर्मा: हाईस्कूल सर्टिफिकेट, पैन कार्ड, आधार कार्ड और बैंक पासबुक लगेगा। रिपोर्टर: कितना लगेगा और क्या करना होगा? दलाल प्रशांत शर्मा: हो जाएगा। 2500 रुपया लगेगा, सेटिंग के साथ। रिपोर्टर: क्या करना होगा? दलाल प्रशांत शर्मा: आज ऑनलाइन करेंगे। अक्टूबर का डेट मिलेगी। रिपोर्टर: बहुत लेट हो जाएगा। दलाल प्रशांत शर्मा: जल्दी है क्या आपको? रिपोर्टर: हां। दलाल प्रशांत शर्मा: तत्काल में तो कल ही करा देंगे। 5 दिन में आपको पासपोर्ट मिल जाएगा। लेकिन, तत्काल में पैसा अधिक लगता है। रिपोर्टर: कितना लगेगा? दलाल प्रशांत शर्मा: अगर तत्काल में कराएंगे तो 8 हजार रुपए खर्च लगेगा। अगर बहुत जल्दी नहीं है, तो नॉर्मल करा लीजिए 2500 रुपए में हो जाएगा। रिपोर्टर: पूरा पैसा आज ही देना होगा? दलाल प्रशांत शर्मा: नहीं, आज 3500 रुपए सिर्फ फीस देनी होगी। बाकी जब कल आइएगा डेट पर, तब दीजिएगा। अंदर जाएंगे और अधिकारी को मेरा नाम बताएंगे तो आपका काम हो जाएगा, सेटिंग से। 5 दिन में पासपोर्ट आपको मिल जाएगा। रिपोर्टर: ठीक है, बताते हैं। फिर दलाल प्रशांत शर्मा किसी से फोन पर बात करते हुए कहता है कि कागज और पैकेट साहब को दे दिए हैं न। अब कोई भी कुछ कहे, तो बोलिएगा, B4 वाले साहब भेजे हैं। कोई दिक्कत होगी तो उन्हीं के पास अब जाइएगा। अब कहीं आपका नाम बोला जाए तो वहां मत जाइएगा, B4 वाले साहब के पास जाइएगा। प्रशांत शर्मा से मिलने के बाद हम फिर यादव गार्ड के पास आए। यादव गार्ड और रिपोर्टर के बीच बातचीत… रिपोर्टर: जिसके पास आपने भेजा था, वो तो बहुत अधिक पैसा मांग रहे। यादव गार्ड: कितना मांग रहे? रिपोर्टर: 8 हजार रुपए। यादव गार्ड: अरे, 8 हजार क्यों मांग रहे? रुकिए किसी और को बुलाते हैं। इसके बाद यादव गार्ड ने फोन कर यहां के एक दूसरे दलाल विक्की शाही को बुलाया और रिपोर्टर को उसके साथ भेज दिया। विक्की शाही हमें अपनी दुकान पर ले गया। वहां बैठे राज नाम के दलाल को कहा कि इनका फॉर्म भर दो, पासपोर्ट बनवाना है। रिपोर्टर और अन्य दलालों के बीच बातचीत दलाल राज: देखिए, नॉर्मल में 2500 रुपए लगेगा और 500 रुपया डेट का। टोटल 3000 रुपए लगेंगे। सेटिंग से काम हो जाएगा। तत्काल में कराएंगे तो 7 हजार रुपए लगेंगे। लेकिन, अभी आपको पहले अपना आधार सही कराना पड़ेगा। इसके बाद हमें पासपोर्ट ऑफिस के बाहर खड़ा एक और दलाल अंश मिला। पासपोर्ट ऑनलाइन कराने का पूछने पर दलाल अंश ने कहा, फॉर्म भरने का 1500 सरकारी फीस और 200 रुपए भरने का चार्ज होगा। लेकिन, जब दलाल अंश को बताया गया कि किसी डॉक्यूमेंट में मेरे पिता का नाम गलत है और किसी में सही, इस पर कोई दिक्कत तो नहीं आएगी? दलाल अंश ने कहा कि काम करा देंगे, लेकिन पैसा खर्च करना पड़ेगा। इतना ही नहीं, यहां हमें एक और दलाल ओमप्रकाश साहनी मिला। उसने भी दावा किया कि अगर आप पैसा खर्च करें तो हम डॉक्यूमेंट में पिता का नाम और सरनेम गलत होने के बाद भी आपका पासपोर्ट बनवा देंगे। इसके बाद ओमप्रकाश साहनी ने भी अपने किसी क्लाइंट से फोन पर बात करते हुए कहा कि आप अंदर काउंटर नंबर- C2 पर जाकर मिल लीजिए। हम साहब को फोन कर दे रहे हैं, आपका काम हो जाएगा। ओमप्रकाश साहनी ने कहा कि आईडी पर आपको नाम सही कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी। 5 से 6 हजार रुपए खर्च होंगे, लेकिन आपका काम करा देंगे। आपके पैनकार्ड और आधार पर नाम कुछ भी हो, हम आपका पासपोर्ट मार्कशीट के हिसाब से बनवा देंगे। हमारी पड़ताल यहीं नहीं रुकी। इसके बाद हम एक और दलाल रविकांत कुशवाहा के पास पहुंचे। उसने बताया कि देखिए, आपका काम हो जाएगा, लेकिन जुगाड़ से। पहला कि आप अपने पिताजी का पासपोर्ट बनवा लीजिए। जिस नाम से पिता का पासपोर्ट बनेगा, आपके पासपोर्ट पर भी उसी आधार पर पिता का वही नाम छपकर आएगा। दूसरा तरीका है, अपने सारे डॉक्यूमेंट सही करा लीजिए, फिर पासपोर्ट बनवाइए। तीसरा तरीका है, पैसा खर्च कीजिए। 3500 रुपए लगेंगे। इसी पर पासपोर्ट बन जाएगा। जिसमें 1500 रुपए सरकारी फीस होगी। आपको रसीद सिर्फ 1500 रुपए की मिलेगी। बाकी सेटिंग का पैसा लगेगा। आखिरी में हमें यहां का सबसे फेमस दलाल शानू मिला। उसने दावा किया कि आपका काम यहां सिवाय मेरे कोई नहीं करा पाएगा। क्योंकि, आपके डॉक्यूमेंट में कमी है। 7 हजार रुपए लगेंगे। आज पैसा दीजिए। C4 वाला अधिकारी जो ऑर्डर करता है, उसी के पास अभी यह पेपर जाएगा। वह ऑर्डर करके रखे रहेगा। सोमवार को आइएगा, तुरंत फोटो और बायोमेट्रिक कराकर फटाफट आपका काम करा देंगे। पहले आपका हाईस्कूल का मार्कशीट नहीं लगवाएंगे। जब ऑर्डर और बायोमेट्रिक हो जाएगा, इसके बाद मार्कशीट लगवा देंगे। क्योंकि, उस पर आपके पिता का नाम गलत है। C3 वाला सरदार नहीं कर पाएगा आपका काम
शानू ने बताया कि इसके लिए हम अधिकारी को मैनेज कर लेंगे। जहां आप पहले गए थे, वह आपको C3 काउंटर पर भेज रहा था न। सरदार के पास। वो C3 वाला ऑर्डर थोड़ी कर सकता है। ऑर्डर सिर्फ C4 वाला अधिकारी कर सकता है। जिसकी बपौती होगी, वही न करेगा। हम लोग C4 वाले अधिकारी से डायरेक्ट काम करते हैं। आपकी यह फाइल आज ही C4 वाले अधिकारी लेंगे। हम आज उनके रूम पर ले जाकर देंगे फाइल। तब जाकर वह व्यवस्था बनाएंगे। फिर जब आप सोमवार को जाएंगे, तो तुरंत ऑर्डर करके आपको फाइल मिल जाएगी। फोटो और बायोमेट्रिक होगा। आपका बाकी सारा काम होने के बाद पासपोर्ट मिल जाएगा। अब देखिए, आपके सामने C4 वाले अधिकारी से बात कर रहे हैं। जो ऑर्डर करता है अंदर C4 वाला। गोरे से होंगे, चश्मा लगाए होंगे। पतले से हैं। इस दौरान दलाल शानू से अपने मोबाइल फोन से किसी से हमारे पासपोर्ट के सिलसिले में बात भी की। उधर से जवाब आया कि सोमवार को उसको बुला लो। शानू ने दावा किया कि जिससे उसने बात की, वह C4 पर बैठने वाले अधिकारी हैं। दो दलालों में हो गया विवाद
इस दौरान दलाल विक्की शाही एक बार हमसे फिर मिला। इस बीच दलाल शानू भी वहां पहुंच गया। हमारे काम को लेकर दोनों में कहासुनी होने लगी। विक्की शाही ने दावा किया कि वह अंदर सेटिंग से 100 प्रतिशत काम करा देगा। उसका कहना था कि चूंकि पासपोर्ट शानू से अप्लाई किया है। ऐसे में अगर वह दूसरे दलाल का काम लेकर कराएगा, तो आपस में विवाद हो जाएगा। विक्की शाही का कहना था कि अगर शानू से आईडी-पासवर्ड लेकर हम सोमवार को आएं तो वह 2500 रुपए में लेगा और गारंटी के साथ पासपोर्ट बनवा देगा। लिफाफा देकर C7 पर क्लाइंट को दलाल ने भेजा
इस दौरान हमें पासपोर्ट ऑफिस के एग्जिट गेट पर एक शहजाद नाम का दलाल खड़ा दिखा। वह दरवाजे के शीशे से पासपोर्ट ऑफिस के अंदर झांककर अपने किसी क्लाइंट से फोन पर बात कर रहा था। कह रहा था कि कितना टाइम लग रहा है आने में? आओ…सीधा आओ, देखो गेट पर मैं खड़ा हूं। जो लिफाफा दिया है, वो हाथ में निकालो। शहजाद अपने क्लाइंट को एक और लिफाफा गेट पर देते हुए बोलता है कि इसे C7 पर दे देना। तुम्हारा काम हो जाएगा। अब फिर चलते हैं पासपोर्ट ऑफिस के अंदर…
इतना कुछ जानने और समझने के बाद हमने एक दूसरे एप्लिकेंट सुभाष पांडेय (बदला हुआ नाम) का भी पासपोर्ट तत्काल में अप्लाई कराया। इसके लिए भी हमने 3500 रुपए सरकारी फीस और 500 रुपए एक्स्ट्रा एजेंट को दिए। एक दिन बाद की ही अप्वाइंटमेंट डेट भी मिल गई। अब हमें यहां बाहर से लेकर अंदर तक का पूरा खेल समझ आ चुका था। यह भी पता चल गया था कि बिना पैसे दिए कुछ न कुछ कमी बताकर फाइल होल्ड कर दी जाएगी। फाइल होल्ड करने का सबसे बड़ा आसान तरीका है PVC (पॉली विनाइल क्लोराइड) आधार कार्ड का न होना। जबकि, जब एप्लिकेंट के डिजी लॉकर पर आधार कार्ड सहित अन्य सभी डॉक्यूमेंट दिख रहे हैं। तो फिर ऐसे में PVC आधार की डिमांड कर फाइल होल्ड करना महज एक कमाई का बहाना है। इसके बाद अप्वाइंटमेंट के समय एप्लिकेंट खुफिया कैमरा लेकर पासपोर्ट ऑफिस के भीतर पहुंचा। दलालों के जरिए हमें पता चला कि तत्काल फाइल का रेट अंदर 2000 रुपए चल रहा है। ठीक वैसे ही एप्लिकेंट ने भी एक सादे कागज में 500-500 रुपए के 3 नोट, यानी 1500 रुपए का पैकेट बनाया। हमें दलालों के जरिए यह भी पता चल गया था कि किस-किस काउंटर पर किन-किन दलालों के नाम से पैकेट जा रहा। 500 रुपए कम देख लौटा दी फाइल
सबसे पहले एप्लिकेंट काउंटर नंबर C1 पर पहुंचा। पता चला, यहां संजय नाम के ग्रांट अफसर बैठते हैं। एप्लिकेंट ने अफसर को बताया, सर वेद भाई ने भेजा है। इतना कहते हुए एप्लिकेंट के हाथ से फाइल और 1500 हजार रुपए का लिफाफा अफसर ने ले लिया। फाइल टेबल पर रख दी और फिर हाथ काउंटर के नीचे करके लिफाफे को चेक किया। शायद लिफाफे में 500 रुपए की एक नोट कम थी। ऐसे में उन्होंने लिफाफा पैक कर दिया। इसके बाद उन्होंने फाइल चेक की और कहा कि इसमें मार्कशीट की कॉपी में डेट ऑफ बर्थ स्पष्ट नहीं है। इसकी कॉपी फिर से लगाकर आना। यह कहते हुए उन्होंने फाइल और लिफाफा दोनों वापस कर दिया। दलाल का नाम बता APO इंचार्ज को 2 हजार देते अप्रूव हो गई फाइल
इसके बाद एप्लिकेंट ने लिफाफे का वजन और बढ़ाया। उसमें 500 रुपए की नोट फिर डालकर अब सीधा काउंटर नंबर C4 पर तैनात APO का चार्ज देख रहे ग्रांट अफसर विनय मिश्रा के पास पहुंचा। लाइन में नंबर आते जैसे ही एप्लिकेंट कार्यवाहक APO के सामने पहुंचा, उनसे भी यही कहा- सर, मुझे वेद भाई ने भेजा है। मेरी फाइल है तत्काल की। अच्छा वेद भेजे हैं। अफसर ने कहा- अच्छा बात कराओ। जैसे ही रिपोर्टर ने फोन बाहर निकाला इतने में अफसर ने फिर कहा-सुनो…फोन न मिलाओ, पहले पेपर दिखाओ। यार साफ-सुथरा निकाल लो बड़ा प्रिंट। बड़ा नहीं निकाले हो? इसका डिजी-लॉकर कराया? दिखाओ। दिखाने पर- ठीक है। जाओ, B7 पर कराकर आओ। हालांकि, इस बीच वहां खड़े एक दूसरे एप्लिकेंट ने अपने दलाल को फोन लगाकर अफसर की बात भी कराई। दलाल से APO इंचार्ज ने फोन पर की बात
अफसर ने फोन पर कहा- हां, हेलो…हां, हां। अच्छा ठीक है। फिर कहा- फोन बंद करो यार। तुम्हें कौन भेजा है? संजय भैया देवरिया से। जाओ तुम भी जाओ, काउंटर नंबर B7 पर कराकर आओ। चले जाओ अब कर देंगे वो। इसके बाद पासपोर्ट दफ्तर में जहां सैकड़ों एप्लिकेंट लाइन लगाकर सुबह से खड़े थे। वहीं, लिफाफा देने वाले एप्लिकेंट का काम फटाफट बिना लाइन और नंबर के होने लगा। कुछ देर में बायोमेट्रिक और अन्य प्रक्रिया पूरी होने के बाद एप्लिकेंट के मोबाइल फोन पर पासपोर्ट ग्रांटेड का मैसेज भी आ गया। आगे बढ़ने से पहले पोल में हिस्सा लेकर राय दें- सीनियर एडवोकेट रवि शंकर पांडेय का कहना है कि अगर कोई भी सरकारी कर्मचारी रिश्वत लेकर काम करता है तो भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत उसके खिलाफ केस दर्ज कर कार्रवाई होती है। वहीं पासपोर्ट जैसे मामले में अगर भ्रष्टाचार की बात सामने आती है तो यह देश हित के खिलाफ माना जाएगा। ऐसे में भ्रष्टाचार अधिनियम के अलावा इन अफसरों के खिलाफ अन्य गंभीर धाराओं में भी केस दर्ज हो सकता है। रीजनल पासपोर्ट ऑफिसर (RPO) शुभम सिंह ने कहा कि इसके लिए मीडिया प्रभारी से बात कीजिए। जबकि, मीडिया प्रभारी संजय वर्मा ने कहा कि यह बेहद गंभीर विषय है। ROP से बात करके एक टीम गोरखपुर भेजी जाएगी और पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। दोषी अधिकारी-कर्मचारियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। ——————– भास्कर इन्वेस्टिगेशन की ये खबरें भी पढ़ें- यूपी से नेपाल पटाखा तस्करी करा रहे चौकी इंचार्ज:डायरी में हिसाब, कैमरे पर बोले- अलग से पैसा लगेगा पटाखों पर बहुत सख्ती है। नेपाल में भी DIG-SP चेंज हो गए हैं। पटाखे का लाइन (गाड़ी निकालने के बदले रुपया) अलग से लगेगा। दीपावली तक निकलवाएंगे। उतने में तो पूरा नेपाल पट जाएगा पटाखे से… लेकिन एक चीज ध्यान रखिए- हमारे क्षेत्र में कहीं पटाखा स्टोर मत करवाइएगा। ये कहना है खुनुवां-नेपाल बॉर्डर के चौकी इंचार्ज सुधीर त्रिपाठी का। पढ़ें पूरी खबर बड़े अस्पताल जाओ… यहां डॉक्टर नहीं:रात 12 से सुबह 5 बजे तक सरकारी अस्पतालों में इलाज ठप, नर्स करती है अबॉर्शन; देखें स्टिंग यूपी के कई सरकारी अस्पताल रात को भगवान भरोसे चलते हैं। यहां डॉक्टर नहीं मिलते। नर्स और बाकी स्टाफ चैन की नींद सोता है। डिलीवरी के लिए कोई गर्भवती पहुंचे, तो इलाज नहीं मिलता। दैनिक भास्कर की टीम ने रात 12 से सुबह 5 बजे तक 6 CHC (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र) का इन्वेस्टिगेशन किया। पढ़ें पूरी खबर यूपी में चल रहे अफ्रीकन-रशियन गर्ल्स के सेक्स रैकेट:स्पा सेंटर्स में एक्स्ट्रा सर्विस के नाम पर कस्टमर्स फंसा रहे; देखें स्टिंग अफ्रीकन… रशियन… थाई… ये लड़कियां जिस्मफरोशी के लिए खुद की नुमाइश कर रही हैं। यूपी में स्पा सेंटर की आड़ में इंडियन और थाई गर्ल्स से वैश्यावृत्ति कराना आम बात है। अब इन स्पा सेंटरों में काम्पिटिशन इतना बढ़ गया कि ये कस्टमर्स को फंसाने के लिए अफ्रीकन और रशियन गर्ल्स का सेक्स रैकेट चला रहे हैं। सोशल मीडिया से लेकर गली-चौराहे तक इनके एजेंट एक्टिव हैं, जो लड़कियां उपलब्ध करा रहे। पढ़ें पूरी खबर
पहले हमें लगा कि दलाल एप्लिकेंट को बेवकूफ बनाते हैं। शायद अंदर ऐसा नहीं होगा। ऐसे में हमने पासपोर्ट दफ्तर के अंदर चल रहे सिस्टम को समझने की कोशिश की। हमने यहां आने वाले कुछ पीड़ित एप्लिकेंट्स को अपनी टीम में शामिल किया। जो दलालों की मुंह मांगी कीमत देने में सक्षम नहीं थे और उन्हें पासपोर्ट बनवाना भी जरूरी था। हमने उन्हें यह भरोसा दिलाया कि उनके पासपोर्ट की सरकारी फीस से लेकर दलाली तक की रकम हम खुद पेमेंट करेंगे। इसके बाद कुछ एप्लिकेंट्स को लगा कि देशहित में यह बेहद जरूरी है। वे हिम्मत दिखाते हुए हमारी टीम में शामिल हुए। हमने अपनी टीम में 3 पीड़ित एप्लिकेंट्स को शामिल किया, जो पासपोर्ट दफ्तर के अधिकारियों और यहां की दलाली से त्रस्त थे। इनमें 2 एप्लिकेंट्स के डॉक्यूमेंट पूरी तरह सही थे। किसी तरह की कोई कमी नहीं थी। जबकि, एक एप्लिकेंट के डॉक्यूमेंट में पिता का सरनेम गलत था। हम इस रिपोर्ट में एप्लिकेंट्स की पहचान नहीं बता रहे हैं। जिससे उन्हें बाद में किसी तरह की दिक्कत न हो। खुफिया कैमरा लेकर APO तक पहुंचा एप्लिकेंट
हमने सबसे पहले देवी लाल (बदला हुआ नाम) का पासपोर्ट तत्काल में एक दलाल के जरिए अप्लाई कराया। इसकी सरकारी फीस 3500 रुपए हमने खुद ही ऑनलाइन पेमेंट किया। जबकि, फॉर्म भरने से लेकर डिजी-लॉकर बनाने, उसे पासपोर्ट की वेबसाइट से मर्ज करने और पूरी फाइल बनाकर देने के दलाल ने 500 रुपए एक्स्ट्रा चार्ज लिया। हालांकि, दलाल पासपोर्ट अप्लाई करने को तैयार नहीं था। उसका कहना था कि आप अप्लाई करा भी लो तो आपका बनेगा नहीं। क्योंकि, बिना सेटिंग अंदर काम नहीं होगा। इसके बावजूद चूंकि हमें अफसरों को एक्सपोज करना था, इसलिए हमारी टीम ने पासपोर्ट बनवाने के लिए दलालों का सहारा नहीं लिया। जिस दिन हमने पासपोर्ट अप्लाई कराया, उसके एक दिन बाद का ही अप्वाइंटमेंट मिल गया। पहले दिन हमने बिना पैसा दिए अपने एप्लिकेंट को खुफिया कैमरा देकर अंदर भेजा। एप्लिकेंट अपने अप्वाइंटमेंट के दिन फाइल लेकर सबसे पहले पासपोर्ट दफ्तर के इन्क्वायरी पर पहुंचा। यहां बैठे TCS (टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज) के अफसर प्रतीक मिश्रा मिले। उनसे एप्लिकेंट ने बताया कि हमें बाहर से एजेंट शानू ने भेजा है। इस पर प्रतीक मिश्रा ने कहा कि उसने किससे मिलने को कहा है? जिस काउंटर का नाम बताया है, वहां जाकर अधिकारी से मिलो। इसके बाद हम काउंटर नंबर- B3 पर गए। यहां बैठे अफसर अश्वनी को हमने बताया कि हमें कसया के शमशाद भाई ने भेजा है। उन्हें अपनी फाइल दी। पहले तो अधिकारी ने किसी और काउंटर पर जाने को कहा। लेकिन, फिर कहा कि सोमवार की डेट ले लो। सोमवार को आना, तुम्हारा काम करा दूंगा। APO इंचार्ज ने कर दिया रिजेक्ट
इसके बाद हम अपनी फाइल लेकर APO का चार्ज देख रहे ग्रांट अफसर विनय मिश्रा के पास पहुंचे। उन्होंने फाइल के कुछ डॉक्यूमेंट्स पर पिता का सरनेम अलग-अलग देख फाइल पर एक हरे रंग का टिक कर उसे रिजेक्ट कर दिया। कहा कि इस पर नहीं बनेगा। जाओ, पहले पेपर सही कराकर आओ। हालांकि, इस दौरान हमने यह देखा कि दलालों के जरिए सेटिंग से आने वाले एप्लिकेंट यहां अफसरों को अपनी फाइल के साथ एक पैकेट दे रहे हैं, जिसमें पैसा है। ये एप्लिकेंट, अफसरों को अलग-अलग दलालों का नाम बता रहे हैं। किसी दलाल से अफसर एप्लिकेंट से बात कराने को भी कह रहे हैं तो किसी एप्लिकेंट का नाम और काम की डिटेल पहले ही उन्हें दलाल मैसेज कर भेज चुके हैं। इससे हमें यह समझ आ गया कि किन-किन दलालों की अंदर अधिकारियों तक सेटिंग है? किनके-किनके नाम पर वे पैसे ले रहे हैं? नोट:- (हमें किसी भी तरह के डॉक्यूमेंट में कमी होने पर पासपोर्ट बनवाना नहीं था। इसलिए पहले दिन न ही हमने किसी अफसर को पैसों से भरा लिफाफा दिया और न ही इसके लिए कोई एक्स्ट्रा कोशिश की। हालांकि, काउंटर नंबर- B3 पर बैठे अफसर ने एप्लिकेंट से सोमवार की डेट लेकर आने को कहा था और आश्वासन भी दिया था कि वो उसका काम करा देंगे।) अब पहले दलाली का पूरा सिस्टम समझिए… गार्ड और कर्मचारी भी दलाली में शामिल
पहली फाइल रिजेक्ट होने के बाद हमने एक-एक कर यहां के दलालों से बातचीत करनी शुरू की। सभी से पासपोर्ट बनवाने के अलग-अलग रेट जाने। अंदर काम कराने के लिए अधिकारियों को किस काम के कितने रुपए भेजे जाते, अफसरों को रुपए देने का पूरा सिस्टम समझा। पासपोर्ट ऑफिस के सिक्योरिटी गार्ड से लेकर यहां इन्क्वायरी पर बैठे अफसर से भी बात की तो समझ आया कि यहां के गार्ड और अफसर भी दलाली के इस खेल में शामिल हैं। रिपोर्टर: पासपोर्ट बनवाना है, कैसे बनेगा? यादव गार्ड: ऑनलाइन अभी हुआ है या नहीं? रिपोर्टर: अभी नहीं हुआ है। कराना है। कहां होगा? यादव गार्ड: यहीं हो जाएगा। बैठिए अभी करा देते हैं। रिपोर्टर: क्या-क्या लगेगा? कैसे भरा जाएगा? यादव गार्ड: पहली बार बनवा रहे हैं या रिन्युअल है? रिपोर्टर: पहली बार। यादव गार्ड: आइए, इन्क्वायरी पर। खुद साथ ले गया। अब इनसे पूछ लीजिए। इन्क्वायरी पर बैठे टाटा कंसल्टेंसी कर्मचारी प्रतीक मिश्रा और रिपोर्टर की बातचीत… रिपोर्टर: सर, नया पासपोर्ट बनवाने के लिए क्या-क्या जरूरत पड़ेगी? TCS कर्मचारी: आपका ऑनलाइन हो चुका है। आज का डेट है आपका? रिपोर्टर: नहीं अभी मैं पहली बार आया हूं। TCS कर्मचारी: ऑनलाइन फॉर्म भरिए। जो डेट मिलेगी, उस डेट पर पैनकार्ड, आधार कार्ड, हाईस्कूल का सर्टिफिकेट और बैंक पासबुक लेकर आइएगा। रिपोर्टर: सर, कैसे फॉर्म भरा जाएगा? TCS कर्मचारी: बिना कुछ बोले हुए सिक्योरिटी गार्ड की तरफ इशारा कर दिया। बाहर आने पर यादव गार्ड ने रिपोर्टर को रोका, पूछा क्या हुआ? रिपोर्टर: बोल रहे पहले ऑनलाइन कराना होगा। यादव गार्ड: कराएंगे या फिर…? रिपोर्टर: कराना तो है ही। यादव गार्ड: रुकिए, अभी यहीं करा देते हैं। यादव गार्ड ने पासपोर्ट ऑफिस के दलाल बृजमोहन तिवारी को फोन कर बुलाया और कहा कि अभी यही आपका ऑनलाइन करेंगे। दलाल बृजमोहन तिवारी और रिपोर्टर की बातचीत… दलाल बृजमोहन तिवारी: क्या है आपका, नया पासपोर्ट बनवाना है? रिपोर्टर: हां। दलाल बृजमोहन तिवारी: ऑनलाइन नहीं हुआ है अभी? रिपोर्टर: अभी नहीं। दलाल बृजमोहन तिवारी: इससे पहले कभी पासपोर्ट के लिए आवेदन तो नहीं किए हैं? रिपोर्टर: नहीं। दलाल बृजमोहन फिर रिपोर्टर को अपनी दुकान में ले गया। यहां हमें दुकान पर बैठा एक और दलाल प्रशांत शर्मा मिला। दलाल प्रशांत शर्मा: आपका नया है या रिन्युअल? रिपोर्टर: नया है। दलाल प्रशांत शर्मा: हाईस्कूल सर्टिफिकेट, पैन कार्ड, आधार कार्ड और बैंक पासबुक लगेगा। रिपोर्टर: कितना लगेगा और क्या करना होगा? दलाल प्रशांत शर्मा: हो जाएगा। 2500 रुपया लगेगा, सेटिंग के साथ। रिपोर्टर: क्या करना होगा? दलाल प्रशांत शर्मा: आज ऑनलाइन करेंगे। अक्टूबर का डेट मिलेगी। रिपोर्टर: बहुत लेट हो जाएगा। दलाल प्रशांत शर्मा: जल्दी है क्या आपको? रिपोर्टर: हां। दलाल प्रशांत शर्मा: तत्काल में तो कल ही करा देंगे। 5 दिन में आपको पासपोर्ट मिल जाएगा। लेकिन, तत्काल में पैसा अधिक लगता है। रिपोर्टर: कितना लगेगा? दलाल प्रशांत शर्मा: अगर तत्काल में कराएंगे तो 8 हजार रुपए खर्च लगेगा। अगर बहुत जल्दी नहीं है, तो नॉर्मल करा लीजिए 2500 रुपए में हो जाएगा। रिपोर्टर: पूरा पैसा आज ही देना होगा? दलाल प्रशांत शर्मा: नहीं, आज 3500 रुपए सिर्फ फीस देनी होगी। बाकी जब कल आइएगा डेट पर, तब दीजिएगा। अंदर जाएंगे और अधिकारी को मेरा नाम बताएंगे तो आपका काम हो जाएगा, सेटिंग से। 5 दिन में पासपोर्ट आपको मिल जाएगा। रिपोर्टर: ठीक है, बताते हैं। फिर दलाल प्रशांत शर्मा किसी से फोन पर बात करते हुए कहता है कि कागज और पैकेट साहब को दे दिए हैं न। अब कोई भी कुछ कहे, तो बोलिएगा, B4 वाले साहब भेजे हैं। कोई दिक्कत होगी तो उन्हीं के पास अब जाइएगा। अब कहीं आपका नाम बोला जाए तो वहां मत जाइएगा, B4 वाले साहब के पास जाइएगा। प्रशांत शर्मा से मिलने के बाद हम फिर यादव गार्ड के पास आए। यादव गार्ड और रिपोर्टर के बीच बातचीत… रिपोर्टर: जिसके पास आपने भेजा था, वो तो बहुत अधिक पैसा मांग रहे। यादव गार्ड: कितना मांग रहे? रिपोर्टर: 8 हजार रुपए। यादव गार्ड: अरे, 8 हजार क्यों मांग रहे? रुकिए किसी और को बुलाते हैं। इसके बाद यादव गार्ड ने फोन कर यहां के एक दूसरे दलाल विक्की शाही को बुलाया और रिपोर्टर को उसके साथ भेज दिया। विक्की शाही हमें अपनी दुकान पर ले गया। वहां बैठे राज नाम के दलाल को कहा कि इनका फॉर्म भर दो, पासपोर्ट बनवाना है। रिपोर्टर और अन्य दलालों के बीच बातचीत दलाल राज: देखिए, नॉर्मल में 2500 रुपए लगेगा और 500 रुपया डेट का। टोटल 3000 रुपए लगेंगे। सेटिंग से काम हो जाएगा। तत्काल में कराएंगे तो 7 हजार रुपए लगेंगे। लेकिन, अभी आपको पहले अपना आधार सही कराना पड़ेगा। इसके बाद हमें पासपोर्ट ऑफिस के बाहर खड़ा एक और दलाल अंश मिला। पासपोर्ट ऑनलाइन कराने का पूछने पर दलाल अंश ने कहा, फॉर्म भरने का 1500 सरकारी फीस और 200 रुपए भरने का चार्ज होगा। लेकिन, जब दलाल अंश को बताया गया कि किसी डॉक्यूमेंट में मेरे पिता का नाम गलत है और किसी में सही, इस पर कोई दिक्कत तो नहीं आएगी? दलाल अंश ने कहा कि काम करा देंगे, लेकिन पैसा खर्च करना पड़ेगा। इतना ही नहीं, यहां हमें एक और दलाल ओमप्रकाश साहनी मिला। उसने भी दावा किया कि अगर आप पैसा खर्च करें तो हम डॉक्यूमेंट में पिता का नाम और सरनेम गलत होने के बाद भी आपका पासपोर्ट बनवा देंगे। इसके बाद ओमप्रकाश साहनी ने भी अपने किसी क्लाइंट से फोन पर बात करते हुए कहा कि आप अंदर काउंटर नंबर- C2 पर जाकर मिल लीजिए। हम साहब को फोन कर दे रहे हैं, आपका काम हो जाएगा। ओमप्रकाश साहनी ने कहा कि आईडी पर आपको नाम सही कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी। 5 से 6 हजार रुपए खर्च होंगे, लेकिन आपका काम करा देंगे। आपके पैनकार्ड और आधार पर नाम कुछ भी हो, हम आपका पासपोर्ट मार्कशीट के हिसाब से बनवा देंगे। हमारी पड़ताल यहीं नहीं रुकी। इसके बाद हम एक और दलाल रविकांत कुशवाहा के पास पहुंचे। उसने बताया कि देखिए, आपका काम हो जाएगा, लेकिन जुगाड़ से। पहला कि आप अपने पिताजी का पासपोर्ट बनवा लीजिए। जिस नाम से पिता का पासपोर्ट बनेगा, आपके पासपोर्ट पर भी उसी आधार पर पिता का वही नाम छपकर आएगा। दूसरा तरीका है, अपने सारे डॉक्यूमेंट सही करा लीजिए, फिर पासपोर्ट बनवाइए। तीसरा तरीका है, पैसा खर्च कीजिए। 3500 रुपए लगेंगे। इसी पर पासपोर्ट बन जाएगा। जिसमें 1500 रुपए सरकारी फीस होगी। आपको रसीद सिर्फ 1500 रुपए की मिलेगी। बाकी सेटिंग का पैसा लगेगा। आखिरी में हमें यहां का सबसे फेमस दलाल शानू मिला। उसने दावा किया कि आपका काम यहां सिवाय मेरे कोई नहीं करा पाएगा। क्योंकि, आपके डॉक्यूमेंट में कमी है। 7 हजार रुपए लगेंगे। आज पैसा दीजिए। C4 वाला अधिकारी जो ऑर्डर करता है, उसी के पास अभी यह पेपर जाएगा। वह ऑर्डर करके रखे रहेगा। सोमवार को आइएगा, तुरंत फोटो और बायोमेट्रिक कराकर फटाफट आपका काम करा देंगे। पहले आपका हाईस्कूल का मार्कशीट नहीं लगवाएंगे। जब ऑर्डर और बायोमेट्रिक हो जाएगा, इसके बाद मार्कशीट लगवा देंगे। क्योंकि, उस पर आपके पिता का नाम गलत है। C3 वाला सरदार नहीं कर पाएगा आपका काम
शानू ने बताया कि इसके लिए हम अधिकारी को मैनेज कर लेंगे। जहां आप पहले गए थे, वह आपको C3 काउंटर पर भेज रहा था न। सरदार के पास। वो C3 वाला ऑर्डर थोड़ी कर सकता है। ऑर्डर सिर्फ C4 वाला अधिकारी कर सकता है। जिसकी बपौती होगी, वही न करेगा। हम लोग C4 वाले अधिकारी से डायरेक्ट काम करते हैं। आपकी यह फाइल आज ही C4 वाले अधिकारी लेंगे। हम आज उनके रूम पर ले जाकर देंगे फाइल। तब जाकर वह व्यवस्था बनाएंगे। फिर जब आप सोमवार को जाएंगे, तो तुरंत ऑर्डर करके आपको फाइल मिल जाएगी। फोटो और बायोमेट्रिक होगा। आपका बाकी सारा काम होने के बाद पासपोर्ट मिल जाएगा। अब देखिए, आपके सामने C4 वाले अधिकारी से बात कर रहे हैं। जो ऑर्डर करता है अंदर C4 वाला। गोरे से होंगे, चश्मा लगाए होंगे। पतले से हैं। इस दौरान दलाल शानू से अपने मोबाइल फोन से किसी से हमारे पासपोर्ट के सिलसिले में बात भी की। उधर से जवाब आया कि सोमवार को उसको बुला लो। शानू ने दावा किया कि जिससे उसने बात की, वह C4 पर बैठने वाले अधिकारी हैं। दो दलालों में हो गया विवाद
इस दौरान दलाल विक्की शाही एक बार हमसे फिर मिला। इस बीच दलाल शानू भी वहां पहुंच गया। हमारे काम को लेकर दोनों में कहासुनी होने लगी। विक्की शाही ने दावा किया कि वह अंदर सेटिंग से 100 प्रतिशत काम करा देगा। उसका कहना था कि चूंकि पासपोर्ट शानू से अप्लाई किया है। ऐसे में अगर वह दूसरे दलाल का काम लेकर कराएगा, तो आपस में विवाद हो जाएगा। विक्की शाही का कहना था कि अगर शानू से आईडी-पासवर्ड लेकर हम सोमवार को आएं तो वह 2500 रुपए में लेगा और गारंटी के साथ पासपोर्ट बनवा देगा। लिफाफा देकर C7 पर क्लाइंट को दलाल ने भेजा
इस दौरान हमें पासपोर्ट ऑफिस के एग्जिट गेट पर एक शहजाद नाम का दलाल खड़ा दिखा। वह दरवाजे के शीशे से पासपोर्ट ऑफिस के अंदर झांककर अपने किसी क्लाइंट से फोन पर बात कर रहा था। कह रहा था कि कितना टाइम लग रहा है आने में? आओ…सीधा आओ, देखो गेट पर मैं खड़ा हूं। जो लिफाफा दिया है, वो हाथ में निकालो। शहजाद अपने क्लाइंट को एक और लिफाफा गेट पर देते हुए बोलता है कि इसे C7 पर दे देना। तुम्हारा काम हो जाएगा। अब फिर चलते हैं पासपोर्ट ऑफिस के अंदर…
इतना कुछ जानने और समझने के बाद हमने एक दूसरे एप्लिकेंट सुभाष पांडेय (बदला हुआ नाम) का भी पासपोर्ट तत्काल में अप्लाई कराया। इसके लिए भी हमने 3500 रुपए सरकारी फीस और 500 रुपए एक्स्ट्रा एजेंट को दिए। एक दिन बाद की ही अप्वाइंटमेंट डेट भी मिल गई। अब हमें यहां बाहर से लेकर अंदर तक का पूरा खेल समझ आ चुका था। यह भी पता चल गया था कि बिना पैसे दिए कुछ न कुछ कमी बताकर फाइल होल्ड कर दी जाएगी। फाइल होल्ड करने का सबसे बड़ा आसान तरीका है PVC (पॉली विनाइल क्लोराइड) आधार कार्ड का न होना। जबकि, जब एप्लिकेंट के डिजी लॉकर पर आधार कार्ड सहित अन्य सभी डॉक्यूमेंट दिख रहे हैं। तो फिर ऐसे में PVC आधार की डिमांड कर फाइल होल्ड करना महज एक कमाई का बहाना है। इसके बाद अप्वाइंटमेंट के समय एप्लिकेंट खुफिया कैमरा लेकर पासपोर्ट ऑफिस के भीतर पहुंचा। दलालों के जरिए हमें पता चला कि तत्काल फाइल का रेट अंदर 2000 रुपए चल रहा है। ठीक वैसे ही एप्लिकेंट ने भी एक सादे कागज में 500-500 रुपए के 3 नोट, यानी 1500 रुपए का पैकेट बनाया। हमें दलालों के जरिए यह भी पता चल गया था कि किस-किस काउंटर पर किन-किन दलालों के नाम से पैकेट जा रहा। 500 रुपए कम देख लौटा दी फाइल
सबसे पहले एप्लिकेंट काउंटर नंबर C1 पर पहुंचा। पता चला, यहां संजय नाम के ग्रांट अफसर बैठते हैं। एप्लिकेंट ने अफसर को बताया, सर वेद भाई ने भेजा है। इतना कहते हुए एप्लिकेंट के हाथ से फाइल और 1500 हजार रुपए का लिफाफा अफसर ने ले लिया। फाइल टेबल पर रख दी और फिर हाथ काउंटर के नीचे करके लिफाफे को चेक किया। शायद लिफाफे में 500 रुपए की एक नोट कम थी। ऐसे में उन्होंने लिफाफा पैक कर दिया। इसके बाद उन्होंने फाइल चेक की और कहा कि इसमें मार्कशीट की कॉपी में डेट ऑफ बर्थ स्पष्ट नहीं है। इसकी कॉपी फिर से लगाकर आना। यह कहते हुए उन्होंने फाइल और लिफाफा दोनों वापस कर दिया। दलाल का नाम बता APO इंचार्ज को 2 हजार देते अप्रूव हो गई फाइल
इसके बाद एप्लिकेंट ने लिफाफे का वजन और बढ़ाया। उसमें 500 रुपए की नोट फिर डालकर अब सीधा काउंटर नंबर C4 पर तैनात APO का चार्ज देख रहे ग्रांट अफसर विनय मिश्रा के पास पहुंचा। लाइन में नंबर आते जैसे ही एप्लिकेंट कार्यवाहक APO के सामने पहुंचा, उनसे भी यही कहा- सर, मुझे वेद भाई ने भेजा है। मेरी फाइल है तत्काल की। अच्छा वेद भेजे हैं। अफसर ने कहा- अच्छा बात कराओ। जैसे ही रिपोर्टर ने फोन बाहर निकाला इतने में अफसर ने फिर कहा-सुनो…फोन न मिलाओ, पहले पेपर दिखाओ। यार साफ-सुथरा निकाल लो बड़ा प्रिंट। बड़ा नहीं निकाले हो? इसका डिजी-लॉकर कराया? दिखाओ। दिखाने पर- ठीक है। जाओ, B7 पर कराकर आओ। हालांकि, इस बीच वहां खड़े एक दूसरे एप्लिकेंट ने अपने दलाल को फोन लगाकर अफसर की बात भी कराई। दलाल से APO इंचार्ज ने फोन पर की बात
अफसर ने फोन पर कहा- हां, हेलो…हां, हां। अच्छा ठीक है। फिर कहा- फोन बंद करो यार। तुम्हें कौन भेजा है? संजय भैया देवरिया से। जाओ तुम भी जाओ, काउंटर नंबर B7 पर कराकर आओ। चले जाओ अब कर देंगे वो। इसके बाद पासपोर्ट दफ्तर में जहां सैकड़ों एप्लिकेंट लाइन लगाकर सुबह से खड़े थे। वहीं, लिफाफा देने वाले एप्लिकेंट का काम फटाफट बिना लाइन और नंबर के होने लगा। कुछ देर में बायोमेट्रिक और अन्य प्रक्रिया पूरी होने के बाद एप्लिकेंट के मोबाइल फोन पर पासपोर्ट ग्रांटेड का मैसेज भी आ गया। आगे बढ़ने से पहले पोल में हिस्सा लेकर राय दें- सीनियर एडवोकेट रवि शंकर पांडेय का कहना है कि अगर कोई भी सरकारी कर्मचारी रिश्वत लेकर काम करता है तो भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत उसके खिलाफ केस दर्ज कर कार्रवाई होती है। वहीं पासपोर्ट जैसे मामले में अगर भ्रष्टाचार की बात सामने आती है तो यह देश हित के खिलाफ माना जाएगा। ऐसे में भ्रष्टाचार अधिनियम के अलावा इन अफसरों के खिलाफ अन्य गंभीर धाराओं में भी केस दर्ज हो सकता है। रीजनल पासपोर्ट ऑफिसर (RPO) शुभम सिंह ने कहा कि इसके लिए मीडिया प्रभारी से बात कीजिए। जबकि, मीडिया प्रभारी संजय वर्मा ने कहा कि यह बेहद गंभीर विषय है। ROP से बात करके एक टीम गोरखपुर भेजी जाएगी और पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। दोषी अधिकारी-कर्मचारियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। ——————– भास्कर इन्वेस्टिगेशन की ये खबरें भी पढ़ें- यूपी से नेपाल पटाखा तस्करी करा रहे चौकी इंचार्ज:डायरी में हिसाब, कैमरे पर बोले- अलग से पैसा लगेगा पटाखों पर बहुत सख्ती है। नेपाल में भी DIG-SP चेंज हो गए हैं। पटाखे का लाइन (गाड़ी निकालने के बदले रुपया) अलग से लगेगा। दीपावली तक निकलवाएंगे। उतने में तो पूरा नेपाल पट जाएगा पटाखे से… लेकिन एक चीज ध्यान रखिए- हमारे क्षेत्र में कहीं पटाखा स्टोर मत करवाइएगा। ये कहना है खुनुवां-नेपाल बॉर्डर के चौकी इंचार्ज सुधीर त्रिपाठी का। पढ़ें पूरी खबर बड़े अस्पताल जाओ… यहां डॉक्टर नहीं:रात 12 से सुबह 5 बजे तक सरकारी अस्पतालों में इलाज ठप, नर्स करती है अबॉर्शन; देखें स्टिंग यूपी के कई सरकारी अस्पताल रात को भगवान भरोसे चलते हैं। यहां डॉक्टर नहीं मिलते। नर्स और बाकी स्टाफ चैन की नींद सोता है। डिलीवरी के लिए कोई गर्भवती पहुंचे, तो इलाज नहीं मिलता। दैनिक भास्कर की टीम ने रात 12 से सुबह 5 बजे तक 6 CHC (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र) का इन्वेस्टिगेशन किया। पढ़ें पूरी खबर यूपी में चल रहे अफ्रीकन-रशियन गर्ल्स के सेक्स रैकेट:स्पा सेंटर्स में एक्स्ट्रा सर्विस के नाम पर कस्टमर्स फंसा रहे; देखें स्टिंग अफ्रीकन… रशियन… थाई… ये लड़कियां जिस्मफरोशी के लिए खुद की नुमाइश कर रही हैं। यूपी में स्पा सेंटर की आड़ में इंडियन और थाई गर्ल्स से वैश्यावृत्ति कराना आम बात है। अब इन स्पा सेंटरों में काम्पिटिशन इतना बढ़ गया कि ये कस्टमर्स को फंसाने के लिए अफ्रीकन और रशियन गर्ल्स का सेक्स रैकेट चला रहे हैं। सोशल मीडिया से लेकर गली-चौराहे तक इनके एजेंट एक्टिव हैं, जो लड़कियां उपलब्ध करा रहे। पढ़ें पूरी खबर