आगरा के दयालबाग का एक परिवार अफ्रीका में फंस गया है। जिस भारतीय कंपनी में युवक काम कर रहा था, उसकी कंपनी ने उस पर लूट का आरोप लगाते हुए पासपोर्ट छीन लिया है। नौकरी से निकाले जाने के बाद आर्थिक संकट से परिवार जूझ रहा है। परिवार ने सोशल मीडिया पर अपना एक वीडियो पोस्ट किया है। इसमें वो सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं। परिवार के पास खाने पीने तक पैसे नहीं है। वीडियो पीड़ित परिवार कहा रहा है कि हमारे पास बेटी के दूध के लिए पैसे नहीं है। अफ्रीका में 10 हजार फीफा के लिए किसी को कोई मार भी सकता है। हमारे घर पर रोज पुलिस आ रही है। हम लोग बहुत परेशान है। हमारी मदद करो। अब पढ़िए पूरा मामला पीड़ित धीरज जैन दयालबाग के बसेरा वसंत रेजीडेंसी खासपुर में रहने वाले है। धीरज जैन के पिता धनपाल जैन पेशे से ड्राइवर हैं। धीरज की शादी 2022 में फिरोजाबाद के आर्य नगर की रहने वाली सुप्रिया जैन से हुई थी। साल 2012 से पुणे की सदगुरु टूर एंड ट्रैवल्स सर्विसेज कंपनी में अकाउंट एंड फाइनेंस मैनेजर के पद पर तैनात थे। उनकी वेस्ट अफ्रीका के डुआला कैमरून में तैनाती थी। यहां वह पत्नी सुप्रिया जैन व डेढ़ वर्षीय बेटी राघवी के साथ रह रहे है। पिछले साल 2024 में वह छुट्टी लेकर भारत आए थे। धीरज जैन वीडियो में कह रहे हैं कि सात सितंबर 2024 को मैं कंपनी के 25 लाख रुपए लेकर कार से ड्राइवर के साथ ऑफिस जा रहा था। रास्ते में मेरा कैश लूट लिया गया। उस समय मैंने और ड्राइवर ने कैश लूट का बयान लोकल पुलिस के पास दर्ज कराया था। नवंबर 2024 में वह दो महीने के लिए छुट्टी पर आगरा आ गए थे। ड्राइवर ने बदल दिया अपना बयान
जनवरी 2025 में जब वापस वेस्ट अफ्रीका स्थित कंपनी के ऑफिस पहुंचे। तब तक ड्राइवर ने अपना बयान बदल दिया था। लूट का आरोप मेरे ऊपर लगाया गया है। कंपनी का जब क्लेम से रुपए नहीं मिले तो अब मुझ पर ही आरोप लगाना शुरू कर दिया है। हमारे पास बेटी के दूध के लिए पैसे नहीं
दो साल का कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने के बाद भी कंपनी मुझे वापस नहीं आने दे रही है। मेरे पासपोर्ट जब्त कर लिए गए हैं। अब कंपनी ने मेरा खर्चा उठाने से मना कर दिया है। हमारे पास बेटी के दूध के लिए पैसे नहीं है। किसी को भी मार सकते हैं
पीड़ित धीरज जैन ने कहा- अफ्रीका में 10 हजार फीफा के लिए किसी को कोई मार भी सकता है। हमारे घर पर रोज पुलिस आ रही है। हम पर दवाब बनाया जा रहा है। बहुत बड़ी कंपनी है, यहां पर हमारे साथ कुछ भी हो सकता है। अजमेर निवासी जिम्मी अलवानी और बिहार का मनीष ठाकुर ज्यादा परेशान कर रहे हैं। 2012 से कंपनी में काम कर रहा हूं। अब मुझे फंसाने की कोशिश की जा रही है। हम पति-पत्नी दोनों लोग हाथ जोड़कर भारत बुलाने की गुहार लगा रहे हैं। पत्नी भी तनाव में हैं और लगातार रो रही
धीरज जैन ने अपनी एक साल की बेटी की स्थिति पर विशेष चिंता जताई। उन्होंने बताया कि बच्ची का फॉर्मूला मिल्क खत्म हो चुका है। दवाइयाँ और आवश्यक सामान खरीदने के पैसे नहीं हैं। पत्नी भी तनाव में हैं और लगातार रो रही हैं।पासपोर्ट न होने की वजह से वे किसी भी एयरपोर्ट पर नहीं जा सकते। धीरज का कहना है कि अगर भारत सरकार तुरंत कदम नहीं उठाती तो उनकी बच्ची की जान को भी खतरा हो सकता है। भारतीय दूतावास से भी किया संपर्क, नहीं मिला सहायता
धीरज ने बताया- मैंने कैमरून में स्थित भारतीय दूतावास से भी संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन अभी तक कोई निश्चित सहायता नहीं मिली है। कंपनी द्वारा पासपोर्ट रखने से पूरा परिवार कानूनी रूप से भी बंधक जैसी स्थिति में आ गया है। विदेश मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अनुसार, कोई भी कंपनी बिना कानूनी आधार के कर्मचारी का पासपोर्ट जब्त नहीं कर सकती। लेकिन कई अफ्रीकी और मध्य-पूर्वी देशों में भारतीय कर्मचारियों को ऐसी समस्याओं का सामना अक्सर करना पड़ता है। धीरज ने विदेश मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय से किया निवेदन
धीरज और उनके परिवार ने भारत सरकार, विदेश मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय से निवेदन किया है कि कंपनी से पासपोर्ट वापस दिलाया जाए। इमरजेंसी ट्रैवल डॉक्यूमेंट जारी किया जाए। उन्हें और परिवार को भारत वापस लाने के लिए त्वरित व सुरक्षित व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि विदेशों में फंसे भारतीयों के लिए सरकार हमेशा तत्पर रही है, और उन्हें भी ऐसे ही संरक्षण और मदद की उम्मीद है। ———————- ये खबर भी पढ़ें…. कानपुर में कोयला जलाकर सो रहे 4 दोस्तों की मौत:ठंड से बचने के लिए अंगीठी जलाई थी; कमरा छोटा था, दम घुट गया
जनवरी 2025 में जब वापस वेस्ट अफ्रीका स्थित कंपनी के ऑफिस पहुंचे। तब तक ड्राइवर ने अपना बयान बदल दिया था। लूट का आरोप मेरे ऊपर लगाया गया है। कंपनी का जब क्लेम से रुपए नहीं मिले तो अब मुझ पर ही आरोप लगाना शुरू कर दिया है। हमारे पास बेटी के दूध के लिए पैसे नहीं
दो साल का कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने के बाद भी कंपनी मुझे वापस नहीं आने दे रही है। मेरे पासपोर्ट जब्त कर लिए गए हैं। अब कंपनी ने मेरा खर्चा उठाने से मना कर दिया है। हमारे पास बेटी के दूध के लिए पैसे नहीं है। किसी को भी मार सकते हैं
पीड़ित धीरज जैन ने कहा- अफ्रीका में 10 हजार फीफा के लिए किसी को कोई मार भी सकता है। हमारे घर पर रोज पुलिस आ रही है। हम पर दवाब बनाया जा रहा है। बहुत बड़ी कंपनी है, यहां पर हमारे साथ कुछ भी हो सकता है। अजमेर निवासी जिम्मी अलवानी और बिहार का मनीष ठाकुर ज्यादा परेशान कर रहे हैं। 2012 से कंपनी में काम कर रहा हूं। अब मुझे फंसाने की कोशिश की जा रही है। हम पति-पत्नी दोनों लोग हाथ जोड़कर भारत बुलाने की गुहार लगा रहे हैं। पत्नी भी तनाव में हैं और लगातार रो रही
धीरज जैन ने अपनी एक साल की बेटी की स्थिति पर विशेष चिंता जताई। उन्होंने बताया कि बच्ची का फॉर्मूला मिल्क खत्म हो चुका है। दवाइयाँ और आवश्यक सामान खरीदने के पैसे नहीं हैं। पत्नी भी तनाव में हैं और लगातार रो रही हैं।पासपोर्ट न होने की वजह से वे किसी भी एयरपोर्ट पर नहीं जा सकते। धीरज का कहना है कि अगर भारत सरकार तुरंत कदम नहीं उठाती तो उनकी बच्ची की जान को भी खतरा हो सकता है। भारतीय दूतावास से भी किया संपर्क, नहीं मिला सहायता
धीरज ने बताया- मैंने कैमरून में स्थित भारतीय दूतावास से भी संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन अभी तक कोई निश्चित सहायता नहीं मिली है। कंपनी द्वारा पासपोर्ट रखने से पूरा परिवार कानूनी रूप से भी बंधक जैसी स्थिति में आ गया है। विदेश मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अनुसार, कोई भी कंपनी बिना कानूनी आधार के कर्मचारी का पासपोर्ट जब्त नहीं कर सकती। लेकिन कई अफ्रीकी और मध्य-पूर्वी देशों में भारतीय कर्मचारियों को ऐसी समस्याओं का सामना अक्सर करना पड़ता है। धीरज ने विदेश मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय से किया निवेदन
धीरज और उनके परिवार ने भारत सरकार, विदेश मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय से निवेदन किया है कि कंपनी से पासपोर्ट वापस दिलाया जाए। इमरजेंसी ट्रैवल डॉक्यूमेंट जारी किया जाए। उन्हें और परिवार को भारत वापस लाने के लिए त्वरित व सुरक्षित व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि विदेशों में फंसे भारतीयों के लिए सरकार हमेशा तत्पर रही है, और उन्हें भी ऐसे ही संरक्षण और मदद की उम्मीद है। ———————- ये खबर भी पढ़ें…. कानपुर में कोयला जलाकर सो रहे 4 दोस्तों की मौत:ठंड से बचने के लिए अंगीठी जलाई थी; कमरा छोटा था, दम घुट गया
कानपुर में एक कमरे में सो रहे चार दोस्तों के शव गुरुवार सुबह मिले। बताया जा रहा है कि ठंड के कारण उन्होंने तसले में कोयला जलाया था। कमरे को अंदर से बंद कर सो गए थे। शुरुआती जांच के मुताबिक, चारों की मौत दम घुटने से हुई है। पढे़ं पूरी खबर…