‘अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर में बच्चों का शोषण होता है’:आशुतोष महाराज ने कोर्ट में वाद दाखिल किया, 2 पीड़ित को पेश किया

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर में नाबालिग बच्चों का यौन शोषण होता है। गुरुकुल की आड़ में बाल उत्पीड़न करते हैं। अवैध गतिविधियों में शामिल हैं। उनके पास आय से अधिक संपत्ति है। इसकी निष्पक्ष जांच कराई जाए। माघ मेले में विवाद के बाद चर्चा में आए अविमुक्तेश्वरानंद पर ये गंभीर आरोप आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने लगाए हैं। उन्होंने 8 फरवरी को प्रयागराज की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने शिकायत यानी वाद दायर किया। अपने आरोपों के पक्ष में उन्होंने 2 नाबालिग पीड़ित बच्चों की पेशी भी कराई। कोर्ट ने अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी करते हुए सवाल-जवाब किए। 2 दिन बाद यानी 10 फरवरी को अविमुक्तेश्वरानंद के वकील ने जवाब दाखिल कर दिया। इसमें आशुतोष महाराज पर आरोप लगाए हैं। अब 20 फरवरी को कोर्ट में दोनों पक्षों के वकील पेश होंगे। दोनों पक्षों को सुनने के बाद जज FIR के आदेश या फिर वाद को रद्द कर सकते हैं। आशुतोष ब्रह्मचारी चित्रकूट की श्री तुलसी पीठाधीश्वर जगतगुरु रामभद्राचार्य के शिष्य हैं। वह श्रीकृष्ण जन्मभूमि बनाम शाही मस्जिद ईदगाह के मुख्यवादी, पक्षकार भी हैं। माघ मेले में हुए विवाद के बाद रामभद्राचार्य और अविमुक्तेश्वरानंद आमने-सामने आ गए थे। पहले पुलिस कमिश्नर से शिकायत की, फिर कोर्ट गए
24 जनवरी यानी मौनी अमावस्या विवाद के 6 दिन बाद आशुतोष महराज ने प्रयागराज पुलिस कमिश्नर से अविमुक्तेश्वरानंद की 2 शिकायतें की थीं। पहली शिकायत में आरोप लगाया कि अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर और गुरुकुल में नाबालिग बच्चों को रखा जाता है। उनसे निजी सेवा, भीड़ जुटाने, कार्यक्रमों और पालकी जैसे काम कराए जाते हैं। इसमें बच्चों के यौन शोषण की आशंका भी है। माघ मेले जैसे बड़े आयोजनों में भी बच्चों से काम कराया गया, जो बाल अधिकार और श्रम कानूनों का उल्लंघन हो सकता है। शिविर में अवैध हथियार होने की आशंका, आय से अधिक संपत्ति और कई बैंक खातों की जांच की जानी चाहिए।शिकायत में मुकुंदानंद नाम के व्यक्ति की भूमिका की जांच कराने की भी मांग की गई है। दूसरी शिकायत में अविमुक्तेश्वरानंद पर फर्जी लेटरपैड और दस्तावेज बनाने का आरोप लगाया है। कहा कि माघ मेला क्षेत्र में अविमुक्तेश्वरानंद खुद को ज्योतिष पीठ का शंकराचार्य बताकर “ज्योतिष पीठ/श्री शंकराचार्य शिविर” के नाम से लेटरपैड और दस्तावेज बनवाकर प्रशासनिक अधिकारियों को पत्र भेज रहे हैं। ये लेटरपैड और पत्र फर्जी और भ्रामक हैं, जिससे प्रशासन और आम लोगों को गुमराह किया जा रहा है। इन लेटरपैड पर 24 जनवरी 2026 (माघ शुक्ल पंचमी) की तारीख दर्ज है। इसी तारीख का इस्तेमाल कर “श्री शंकराचार्य शिविर” के नाम से पत्र जारी किए गए हैं, जिनकी वैधता पर सवाल उठाए गए हैं। पढ़िए मौनी अमावस्या पर क्या हुआ था
18 जनवरी को माघ मेले में मौनी अमावस्या पर अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में स्नान करने जा रहे थे। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी पुलिस ने रोक दी। पुलिस ने उनसे पैदल संगम जाने को कहा। शंकराचार्य के शिष्य नहीं माने और पालकी लेकर आगे बढ़ने लगे। इस पर शिष्यों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। पुलिस ने कई शिष्यों को हिरासत में ले लिया था। पुलिस ने एक साधु को चौकी में भी पीटा था। इससे शंकराचार्य नाराज हो गए थे और शिष्यों को छुड़वाने पर अड़ गए। अफसरों ने उन्हें समझाने की कोशिश की, हाथ जोड़े, लेकिन वे नहीं माने। इसके बाद पुलिस ने शंकराचार्य के कई और समर्थकों को हिरासत में ले लिया था। शंकराचार्य की पालकी को खींचते हुए संगम से 1 किमी दूर ले जाया गया। इस दौरान पालकी का क्षत्रप भी टूट गया। शंकराचार्य स्नान भी नहीं कर पाए। माघ मेले में मौनी अमावस्या पर पुलिस ने शंकराचार्य की पालकी रोकी थी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का स्वामी रामभद्राचार्य ने किया था विरोध मौनी अमावस्या पर स्नान को लेकर तुलसी पीठ स्वामी रामभद्राचार्य ने कहा- अविमुक्तेश्वरानंद के साथ अन्याय नहीं हुआ। अन्याय तो उन्होंने किया है। संगम तक पालकी से जाने का नियम नहीं है। उनको बिल्कुल सही नोटिस दिया गया। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद बोले- स्वामी रामभद्राचार्य की बात मत करिए, वो दोस्ती निभा रहे हैं। उनको लोग गंभीरता से नहीं लेते हैं क्योंकि वो कुछ भी बोलते हैं। वो हमारे कुल का है ही नहीं। अगर हमारे कुल का होता तो उसको हमारा दर्द होता। जहां तक पालकी की बात है, पेशवा भी हमारी पालकी उठवाकर लाते थे। अब अविमुक्तेश्वरानंद के बारे में जानिए ज्योतिष्पीठ का पूरा विवाद जानिए ——————————
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अविमुक्तेश्वरानंद बोले-योगी मुख्यमंत्री या महंत में से एक पद छोड़ें:सीएम खलीफा जैसे, भगवा पहनने वाला मीट का व्यापार नहीं कर सकता प्रयागराज माघ मेला छोड़ने के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद इन दिनों काशी में हैं। यहां शंकराचार्य एक बार फिर खुलकर बोले। उन्होंने कहा- योगी खलीफा जैसे हैं। वह सीएम की कुर्सी छोड़ दें या फिर महंत का पद। योगी को असली हिंदू साबित करने के लिए मैंने 40 दिन दिए थे। 10 दिन बीत गए, अब उनके पास 30 दिन बचे हैं। पढ़िए पूरी खबर