प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच विवाद बढ़ गया है। मेला प्रशासन ने शंकराचार्य को दूसरी नोटिस भेजी है। पूछा है कि माघ मेले से आपको प्रतिबंधित क्यों न किया जाए। नोटिस में यह भी कहा गया है कि मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य ने इमरजेंसी के लिए रिजर्व पांटून पुल पर लगा बैरियर तोड़ दिया। बिना अनुमति के बग्घी के साथ संगम की ओर जाने की कोशिश की थी। उस समय संगम क्षेत्र में बहुत ज्यादा भीड़ थी और सिर्फ पैदल जाने की अनुमति थी। शंकराचार्य की हरकत से दिक्कत हुई और भगदड़ का खतरा पैदा हो गया। इससे मेला व्यवस्था और स्नानार्थियों की सुरक्षा प्रभावित हुई। प्रशासन ने कहा है कि अगर 24 घंटे के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो शंकराचार्य की संस्था को दी गई जमीन और सुविधाएं रद्द की जा सकती हैं और भविष्य में उन्हें मेला क्षेत्र में प्रवेश से रोका जा सकता है। इसके अलावा, प्रशासन ने मेले में खुद को शंकराचार्य बताकर बोर्ड लगाने पर भी आपत्ति जताई है। कहा है कि यह कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन हो सकता है। दरअसल, मंगलवार को मेला प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के 14 अक्टूबर 2022 के एक आदेश का हवाला देते हुए नोटिस जारी कर पूछा था कि उन्होंने खुद को शंकराचार्य कैसे घोषित कर लिया। प्रशासन के नोटिस के जवाब में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मंगलवार रात करीब 10 बजे अपने प्रतिनिधि के हाथों 8 पन्नों का जवाब मेला प्रशासन के कार्यालय भिजवाया। कोई नहीं मिला तो प्रशासन स्टाइल में नोटिस का जवाब चस्पा कर दिया। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने प्रयागराज प्रशासन को चेतावनी दी है कि अगर उनको दिया गया नोटिस वापस नहीं लिया तो वह मानहानि का केस करेंगे। इसमें नोटिस को मनमाना, दुर्भावनापूर्ण और असंवैधानिक बताया। अविमुक्तेश्वरानंद ने लिखा– सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा कोई आदेश नहीं दिया है, जिससे मुझे शंकराचार्य पद पर बने रहने से रोका गया हो। मामला कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए किसी भी तीसरे पक्ष को टिप्पणी करने या रोक लगाने का अधिकार नहीं है। 5 पॉइंट में समझिए विवाद शंकराचार्य विवाद और माघ मेले से जुड़े अपडेट्स के लिए लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…