आगरा में 2 सगी बहनों के धर्मांतरण मामले में पुलिस ने गैंग के मास्टरमाइंड अब्दुल रहमान समेत 11 लोगों को अरेस्ट किया। आगरा पुलिस और ATS ने इनसे बंद कमरे में अलग-अलग पूछताछ की। जो कुछ सामने आया, वो बेहद चौंकाने वाला था। उन्होंने बताया कि आगरा से कोलकाता लाई गई दोनों बहनों में से एक ने सिर्फ इस्लाम ही नहीं कबूला था। उसका इस तरह से ब्रेनवॉश किया गया था कि वो मुजाहिदा (कुर्बान होने को तैयार) बन गई थी। पुलिस को इस फैक्ट से जुड़े कुछ चैट भी मिले हैं। आयशा ने पुलिस कस्टडी में बताया कि इन बहनों को धर्मांतरण सलाफी मुस्लिम की तरह किया गया, जोकि बहुत कट्टर होते हैं। वहीं, मोहम्मद इब्राहिम ने पुलिस को बताया कि पहले लड़कियां सिर्फ इस्लाम में आने को तैयार हुईं थीं, मगर फिर जैसे-जैसे हम उन्हें मुगल काल में कैसे मुस्लिम का भारत पर शासन था, उसकी कहानियां वीडियो में दिखाते गए, छोटी वाली बहन जोया तैयार हो गई कि वह इस्लाम के लिए कुर्बान हो जाएगी। पुलिस को दोनों सगी बहनों को धर्मांतरण के लिए ब्रेनवॉश करने वाली आयशा के मोबाइल से कुछ वीडियो भी मिले हैं, जिनमें राम मंदिर का उद्घाटन करते हुए पीएम मोदी दिख रहे हैं, बैक ग्राउंड साउंड में एक शख्स कह रहा है- बहुत बन गए सोमनाथ से मंदिर… अब टूटने चाहिए। इन इनपुट के सामने आने के बाद ATS, IB और सुरक्षा एजेंसी इन लड़कियों से फिर से पूछताछ की तैयारी कर रही हैं। बहनें पुलिस के साथ आने को तैयार नहीं
आगरा पुलिस कोलकाता में जब दोनों बहनों तक पहुंची, तो वह दोनों हिजाब में थीं। पहले दोनों वापस आने को ही तैयार नहीं थीं। कह रही थी कि हमारा मकसद मिल गया है। जब पुलिस के साथ मौजूद महिला दरोगा ने उनकी काउंसिल की, तब वह बस्ती छोड़कर पुलिस के साथ बाहर आने को तैयार हुईं। सेफ जगह पहुंचने के बाद पुलिस ने दोनों बहनों के मोबाइल चेक किए। अब्दुल रहमान कर रहा था मरने-मारने को तैयार
उसमें लंबी-लंबी चैट मिली। धर्मांतरण का सिंडिकेट चलाने वाले सरगना अब्दुल रहमान कुरैशी के साथ ये लड़कियां कनेक्टेड मिली। इस बातचीत में लड़कियों को इस्लाम के लिए मरने-मारने के लिए तैयार किया जा रहा था। लड़कियां भी अब्दुल को लिखकर भेज रही थी कि वह अल्लाह की राह पर कुर्बान होने को तैयार हैं। वह इस्लाम के लिए जान देंगी। तभी जन्नत नसीब होगी। पुलिस ने फिलहाल ये चैट सार्वजनिक नहीं की है। आरोपियों के खिलाफ तैयार हो रही केस डायरी में शामिल की गई हैं। इन चैट से पुलिस को पता चला है कि किस तरह से दोनों का ब्रेन वॉश किया गया। पुलिस को लड़कियों की सोशल ID पर प्रोफाइल फोटो लगी मिली, जिसमें वो एके-47 के साथ थीं। सुरक्षा एजेंसी मान रही हैं कि बहनों को ISIS माड्यूल के लिए इस्तेमाल किया जाना था, मगर इससे पहले उन्हें रिकवर कर लिया गया। लश्कर ए तैयबा से कनेक्शन मिला
आगरा पुलिस को पूछताछ में पता चला है कि धर्मांतरण के खेल में जुड़े एक आरोपी का पाकिस्तान के आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा से कनेक्शन मिला है। पुलिस को उसके पास से कुछ मोबाइल नंबर मिले हैं। इनकी मदद से पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा के लोगों से बात की गई है। अब आईबी और एटीएस उससे पूछताछ कर रही है। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि मुस्कान और खुशबू (बदले हुए नाम) दोनों के परिवार को उनकी दोस्त साइमा पर पहले ही शक था। उन्होंने 24 मार्च 2025 को जब दोनों बहनें घर छोड़कर चली गई थी। तब पुलिस के सामने अंदेशा जताया था कि हमारी बेटियों का धर्मांतरण कराया जा सकता है। मगर ये धर्मांतरण कहां हो रहा है? ये पुलिस को क्लियर नहीं कर सके। इसलिए पहले अपहरण का केस दर्ज किया गया। लड़कियों के रेस्क्यू के लिए पुलिस तहमद, कुर्ते-पजामा में पहुंची
इस गैंग को पकड़ने और बहनों के रेस्क्यू के लिए पुलिस कमिश्नर ने 48 पुलिस कर्मियों की टीम बनाई। इस आपरेशन को ‘मिशन अस्मिता’ नाम दिया गया। जब पुलिस को पता चला कि दोनों बहनें पश्चिम बंगाल के कोलकाता में मुस्लिम बाहुल्य इलाके में हैं। लोकल पुलिस ने यूपी पुलिस को बताया कि ये इलाका बेहद खतरनाक है। यहां से दोनों युवतियों को रेस्क्यू करना और आरोपियों को पकड़ना बहुत मुश्किल होगा। ऐसे में आगरा पुलिस ने इस मिशन के पहले फेज के मुस्लिम पुलिस अधिकारी और पुलिसकर्मी चुने। जहां दोनों बहनों को धर्म परिवर्तन के बाद रखा गया था, वहां पर कट्टर मुस्लिम लोग रहते हैं। ऐसे में पुलिसकर्मी उनकी वेशभूषा में ही बस्ती में पहुंचे। कोई ऊंचा पजामा पहने था तो कोई तहमद। पुलिस कर्मियों को खुफिया कैमरे दिए गए थे। टीम के सदस्यों ने पांच दिन तक उस मुस्लिम बस्ती में किराए पर कमरा लेने के लिए रेकी की। मगर, बस्ती में उनका वो घर नहीं मिल रहा था, जहां पर दोनों बहनें को रखा गया था। ऐसे में पुलिस ने बस्ती के बाहर के लोगों पर नजर रखी, जो लगातार एक घर में जा रहे थे। यहीं से पुलिस को मकान का पता चला। इसके बाद एसीपी अरीब अहमद, इंस्पेक्टर राजीव त्यागी, इंस्पेक्टर भानु प्रताप सिंह, इंस्पेक्टर रीता यादव, एसआई योगेश नागर, एसआई अंकुर मलिक आदि को कोलकाता भेजा गया था। टीम में सर्विलांस के लोग थे। ओसामा और अली हसन को भी पुलिस पकड़ने में कामयाब हो गई। उनकी मदद से 7 और आरोपियों को दिल्ली, देहरादून, राजस्थान, जयपुर से पकड़ा गया। आयशा गोवा में मिली। पुलिस ने उसको वहां से अरेस्ट किया। ………………..
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आगरा की 2 बहनों को मुस्लिम बनाने वाला मास्टरमाइंड अरेस्ट:खुद हिंदू से ईसाई फिर मुस्लिम बना, बंधक बनाई लड़की भी छुड़ाई गई आगरा की 2 बहनों को मुस्लिम बनाने वाले धर्मांतरण गैंग के अब्दुल रहमान कुरैशी को पुलिस ने दिल्ली से अरेस्ट किया है। अब्दुल इससे पहले 6 राज्यों से गिरफ्तार 10 लोगों का सरगना है। साथ ही धर्मांतरण के पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड है। अब्दुल पहले हिंदू था और उसका नाम महेंद्र पाल था। 1990 में वह पहले ईसाई धर्म में कन्वर्ट हुआ, फिर इस्लाम धर्म अपनाया और अपना नाम अब्दुल रहमान रख लिया। पढ़िए पूरी खबर…
आगरा पुलिस कोलकाता में जब दोनों बहनों तक पहुंची, तो वह दोनों हिजाब में थीं। पहले दोनों वापस आने को ही तैयार नहीं थीं। कह रही थी कि हमारा मकसद मिल गया है। जब पुलिस के साथ मौजूद महिला दरोगा ने उनकी काउंसिल की, तब वह बस्ती छोड़कर पुलिस के साथ बाहर आने को तैयार हुईं। सेफ जगह पहुंचने के बाद पुलिस ने दोनों बहनों के मोबाइल चेक किए। अब्दुल रहमान कर रहा था मरने-मारने को तैयार
उसमें लंबी-लंबी चैट मिली। धर्मांतरण का सिंडिकेट चलाने वाले सरगना अब्दुल रहमान कुरैशी के साथ ये लड़कियां कनेक्टेड मिली। इस बातचीत में लड़कियों को इस्लाम के लिए मरने-मारने के लिए तैयार किया जा रहा था। लड़कियां भी अब्दुल को लिखकर भेज रही थी कि वह अल्लाह की राह पर कुर्बान होने को तैयार हैं। वह इस्लाम के लिए जान देंगी। तभी जन्नत नसीब होगी। पुलिस ने फिलहाल ये चैट सार्वजनिक नहीं की है। आरोपियों के खिलाफ तैयार हो रही केस डायरी में शामिल की गई हैं। इन चैट से पुलिस को पता चला है कि किस तरह से दोनों का ब्रेन वॉश किया गया। पुलिस को लड़कियों की सोशल ID पर प्रोफाइल फोटो लगी मिली, जिसमें वो एके-47 के साथ थीं। सुरक्षा एजेंसी मान रही हैं कि बहनों को ISIS माड्यूल के लिए इस्तेमाल किया जाना था, मगर इससे पहले उन्हें रिकवर कर लिया गया। लश्कर ए तैयबा से कनेक्शन मिला
आगरा पुलिस को पूछताछ में पता चला है कि धर्मांतरण के खेल में जुड़े एक आरोपी का पाकिस्तान के आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा से कनेक्शन मिला है। पुलिस को उसके पास से कुछ मोबाइल नंबर मिले हैं। इनकी मदद से पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा के लोगों से बात की गई है। अब आईबी और एटीएस उससे पूछताछ कर रही है। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि मुस्कान और खुशबू (बदले हुए नाम) दोनों के परिवार को उनकी दोस्त साइमा पर पहले ही शक था। उन्होंने 24 मार्च 2025 को जब दोनों बहनें घर छोड़कर चली गई थी। तब पुलिस के सामने अंदेशा जताया था कि हमारी बेटियों का धर्मांतरण कराया जा सकता है। मगर ये धर्मांतरण कहां हो रहा है? ये पुलिस को क्लियर नहीं कर सके। इसलिए पहले अपहरण का केस दर्ज किया गया। लड़कियों के रेस्क्यू के लिए पुलिस तहमद, कुर्ते-पजामा में पहुंची
इस गैंग को पकड़ने और बहनों के रेस्क्यू के लिए पुलिस कमिश्नर ने 48 पुलिस कर्मियों की टीम बनाई। इस आपरेशन को ‘मिशन अस्मिता’ नाम दिया गया। जब पुलिस को पता चला कि दोनों बहनें पश्चिम बंगाल के कोलकाता में मुस्लिम बाहुल्य इलाके में हैं। लोकल पुलिस ने यूपी पुलिस को बताया कि ये इलाका बेहद खतरनाक है। यहां से दोनों युवतियों को रेस्क्यू करना और आरोपियों को पकड़ना बहुत मुश्किल होगा। ऐसे में आगरा पुलिस ने इस मिशन के पहले फेज के मुस्लिम पुलिस अधिकारी और पुलिसकर्मी चुने। जहां दोनों बहनों को धर्म परिवर्तन के बाद रखा गया था, वहां पर कट्टर मुस्लिम लोग रहते हैं। ऐसे में पुलिसकर्मी उनकी वेशभूषा में ही बस्ती में पहुंचे। कोई ऊंचा पजामा पहने था तो कोई तहमद। पुलिस कर्मियों को खुफिया कैमरे दिए गए थे। टीम के सदस्यों ने पांच दिन तक उस मुस्लिम बस्ती में किराए पर कमरा लेने के लिए रेकी की। मगर, बस्ती में उनका वो घर नहीं मिल रहा था, जहां पर दोनों बहनें को रखा गया था। ऐसे में पुलिस ने बस्ती के बाहर के लोगों पर नजर रखी, जो लगातार एक घर में जा रहे थे। यहीं से पुलिस को मकान का पता चला। इसके बाद एसीपी अरीब अहमद, इंस्पेक्टर राजीव त्यागी, इंस्पेक्टर भानु प्रताप सिंह, इंस्पेक्टर रीता यादव, एसआई योगेश नागर, एसआई अंकुर मलिक आदि को कोलकाता भेजा गया था। टीम में सर्विलांस के लोग थे। ओसामा और अली हसन को भी पुलिस पकड़ने में कामयाब हो गई। उनकी मदद से 7 और आरोपियों को दिल्ली, देहरादून, राजस्थान, जयपुर से पकड़ा गया। आयशा गोवा में मिली। पुलिस ने उसको वहां से अरेस्ट किया। ………………..
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