यूपी में शुक्रवार को जारी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की फाइनल लिस्ट में मुस्लिम बहुल विधानसभा सीटों पर वोटर्स की संख्या उतनी कम नहीं हुई है, जितना विपक्ष शोर मचा रहा था। इसमें कुछ ऐसी सीटें हैं, जहां 2022 के विधानसभा चुनाव में कांटे की टक्कर हुई थी। 2022 में 30% से ज्यादा मुस्लिम बहुल 46 सीटों पर आधी सपा गठबंधन और आधी भाजपा के खाते में गई थीं। इन सीटों पर 5 से 29% तक वोटर्स कम हुए हैं। इसमें आजम खान की रामपुर और भाजपा के रामवीर सिंह की कुंदरकी जैसी 60% मुस्लिम बहुल सीट भी शामिल हैं। पढ़िए ये खास रिपोर्ट… सबसे पहले जानिए 2022 में क्या समीकरण थे…
2022 के विधानसभा चुनाव में रामपुर से सपा के आजम खान विधायक चुने गए थे। तब वे 55 हजार से ज्यादा मार्जिन से जीते थे। हालांकि, आजम खान के जेल जाने से खाली हुई सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा आकाश सक्सेना 34 हजार वोट जीते थे। अब SIR के बाद यहां 72 हजार से ज्यादा वोट कम हुए हैं। कुछ ऐसा ही रामपुर जिले की स्वार सीट पर भी हुआ था। यहां से आजम खान के बेटे अब्दुला आजम 61 हजार से ज्यादा वोटों से जीते थे। बाद में सजा के चलते उनकी विधायकी चली गई और उपचुनाव में अपना दल के शफीक अहमद अंसारी 8,724 वोटों से जीते। अब इस सीट पर 29 हजार से ज्यादा वोट कम हुए हैं। मुरादाबाद की कुंदरकी सीट पर 60% से अधिक मुस्लिम वोटर्स हैं। SIR की फाइनल लिस्ट में यहां 19,146 मतदाता घट गए। 2022 में सपा जियाउर रहमान बर्क ने 43 हजार से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की थी। उनके संभल से सांसद चुने जाने के बाद सीट खाली हो गई। उपचुनाव हुए तो भाजपा के रामवीर सिंह ने ये सीट 1.44 लाख वोटों के अंतर से जीत ली। कांटे वाली सीटों पर बदल सकता है समीकरण
बिजनौर की धामपुर विधानसभा सीट पर 2022 में भाजपा विधायक अशोक राणा सिर्फ 203 वोटों से जीत पाए थे। अब उनकी सीट पर 29 हजार से ज्यादा वोट कम हो गए हैं। इसी तरह चांदपुर विधानसभा सीट से सपा के स्वामी ओमवेश भी सिर्फ 234 वोटों से जीते थे। वहां 28 हजार से ज्यादा वोट घटे हैं। बिजनौर की नहटौर विधानसभा से भाजपा के ओमकुमार ने RLD के मुंशीराम को 258 वोटों से हराया था। अब यहां 23 हजार से ज्यादा वोट घटे हैं। हालांकि, RLD इस समय भाजपा के साथ गठबंधन में है, जबकि 2022 चुनाव में सपा के साथ थी। मुरादाबाद नगर विधानसभा सीट पर 2022 में भाजपा के रितेश गुप्ता 782 वोटों से जीते थे। अब यहां 72 हजार से ज्यादा वोट कम हुए हैं। सपा के साथ हुई कांटे की टक्कर वाली इन सीटों पर 2027 में समीकरण बदल सकता है। 10 हजार से कम मार्जिन वाली सीटों का हाल ऐसी 4 सीटें, जहां जीत की मार्जिन से कम वोट कटे चार मुस्लिम बहुल सीटें ऐसी भी हैं, जहां SIR के बाद कम हुए वोटर्स की तुलना में ज्यादा मार्जिन से जीत दर्ज की गई थी। इसमें कुंदरकी सीट भी है। भाजपा के रामवीर सिंह उपचुनाव में 1.44 लाख वोटों के अंतर से जीते थे। जबकि यहां सिर्फ 19,146 वोटर्स ही कम हुए हैं। इसी तरह कैरान सीट पर सपा के नाहिद हसन ने भाजपा की मृगांका सिंह को 25 हजार के अंतर से हराया था। यहां SIR के बाद 24, 541 वोटर्स ही कम हुए हैं। इसी तरह अमरोहा विधानसभा से सपा के महबूब अली ने भाजपा के रामसिंह सैनी को 71 हजार से ज्यादा अंतर से हराया था। यहां भी सिर्फ 26 हजार के करीब वोटर्स कम हुए हैं। टांडा से सपा के राकेश वर्मा ने भाजपा के कपिलदेव वर्मा को 32 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था। अब यहां 30 हजार के करीब वोटर कम हुए हैं। 10 हजार से ज्यादा मार्जिन वाली सीटों का हाल ————————————————- ये खबर भी पढ़ें… यूपी में महापुरुषों की मूर्तियां लगाकर क्या जीत मिलेगी?:सरकार छत्र-लाइटिंग लगाएगी, अखिलेश ने 12वीं प्रतिमा की घोषणा की; जानिए मूर्तियों की सियासत भाजपा सरकार महापुरुषों की प्रतिमाओं पर छत्र, लाइट और बाउंड्रीवाल लगाने जा रही है। अखिलेश यादव एक के बाद 12 से ज्यादा महापुरुषों की मूर्तियां गोमती रिवर फ्रंट पर लगाने का वादा कर चुके हैं। सवाल उठना वाजिब है कि क्या महापुरुषों की मूर्तियां लगाने से पार्टियों को फायदा होता है? पढ़िए रिपोर्ट…
2022 के विधानसभा चुनाव में रामपुर से सपा के आजम खान विधायक चुने गए थे। तब वे 55 हजार से ज्यादा मार्जिन से जीते थे। हालांकि, आजम खान के जेल जाने से खाली हुई सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा आकाश सक्सेना 34 हजार वोट जीते थे। अब SIR के बाद यहां 72 हजार से ज्यादा वोट कम हुए हैं। कुछ ऐसा ही रामपुर जिले की स्वार सीट पर भी हुआ था। यहां से आजम खान के बेटे अब्दुला आजम 61 हजार से ज्यादा वोटों से जीते थे। बाद में सजा के चलते उनकी विधायकी चली गई और उपचुनाव में अपना दल के शफीक अहमद अंसारी 8,724 वोटों से जीते। अब इस सीट पर 29 हजार से ज्यादा वोट कम हुए हैं। मुरादाबाद की कुंदरकी सीट पर 60% से अधिक मुस्लिम वोटर्स हैं। SIR की फाइनल लिस्ट में यहां 19,146 मतदाता घट गए। 2022 में सपा जियाउर रहमान बर्क ने 43 हजार से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की थी। उनके संभल से सांसद चुने जाने के बाद सीट खाली हो गई। उपचुनाव हुए तो भाजपा के रामवीर सिंह ने ये सीट 1.44 लाख वोटों के अंतर से जीत ली। कांटे वाली सीटों पर बदल सकता है समीकरण
बिजनौर की धामपुर विधानसभा सीट पर 2022 में भाजपा विधायक अशोक राणा सिर्फ 203 वोटों से जीत पाए थे। अब उनकी सीट पर 29 हजार से ज्यादा वोट कम हो गए हैं। इसी तरह चांदपुर विधानसभा सीट से सपा के स्वामी ओमवेश भी सिर्फ 234 वोटों से जीते थे। वहां 28 हजार से ज्यादा वोट घटे हैं। बिजनौर की नहटौर विधानसभा से भाजपा के ओमकुमार ने RLD के मुंशीराम को 258 वोटों से हराया था। अब यहां 23 हजार से ज्यादा वोट घटे हैं। हालांकि, RLD इस समय भाजपा के साथ गठबंधन में है, जबकि 2022 चुनाव में सपा के साथ थी। मुरादाबाद नगर विधानसभा सीट पर 2022 में भाजपा के रितेश गुप्ता 782 वोटों से जीते थे। अब यहां 72 हजार से ज्यादा वोट कम हुए हैं। सपा के साथ हुई कांटे की टक्कर वाली इन सीटों पर 2027 में समीकरण बदल सकता है। 10 हजार से कम मार्जिन वाली सीटों का हाल ऐसी 4 सीटें, जहां जीत की मार्जिन से कम वोट कटे चार मुस्लिम बहुल सीटें ऐसी भी हैं, जहां SIR के बाद कम हुए वोटर्स की तुलना में ज्यादा मार्जिन से जीत दर्ज की गई थी। इसमें कुंदरकी सीट भी है। भाजपा के रामवीर सिंह उपचुनाव में 1.44 लाख वोटों के अंतर से जीते थे। जबकि यहां सिर्फ 19,146 वोटर्स ही कम हुए हैं। इसी तरह कैरान सीट पर सपा के नाहिद हसन ने भाजपा की मृगांका सिंह को 25 हजार के अंतर से हराया था। यहां SIR के बाद 24, 541 वोटर्स ही कम हुए हैं। इसी तरह अमरोहा विधानसभा से सपा के महबूब अली ने भाजपा के रामसिंह सैनी को 71 हजार से ज्यादा अंतर से हराया था। यहां भी सिर्फ 26 हजार के करीब वोटर्स कम हुए हैं। टांडा से सपा के राकेश वर्मा ने भाजपा के कपिलदेव वर्मा को 32 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था। अब यहां 30 हजार के करीब वोटर कम हुए हैं। 10 हजार से ज्यादा मार्जिन वाली सीटों का हाल ————————————————- ये खबर भी पढ़ें… यूपी में महापुरुषों की मूर्तियां लगाकर क्या जीत मिलेगी?:सरकार छत्र-लाइटिंग लगाएगी, अखिलेश ने 12वीं प्रतिमा की घोषणा की; जानिए मूर्तियों की सियासत भाजपा सरकार महापुरुषों की प्रतिमाओं पर छत्र, लाइट और बाउंड्रीवाल लगाने जा रही है। अखिलेश यादव एक के बाद 12 से ज्यादा महापुरुषों की मूर्तियां गोमती रिवर फ्रंट पर लगाने का वादा कर चुके हैं। सवाल उठना वाजिब है कि क्या महापुरुषों की मूर्तियां लगाने से पार्टियों को फायदा होता है? पढ़िए रिपोर्ट…