आजम खान 23 महीने बाद आज जेल से रिहा होंगे:बेल ऑर्डर देरी से पहुंचा; 9 अक्टूबर को बसपा में शामिल हो सकते हैं

आजम खान से जुड़ी बड़ी खबर है। वे आज यानी मंगलवार को सीतापुर जेल से रिहा होंगे। आजम 1 साल 11 महीने और 4 दिन से जेल में बंद हैं। जानकारी के मुताबिक, मंगलवार की सुबह करीब सात बजे आजम खान की जेल से रिहाई होगी। वैसे तो आजम खान को आज ही रिहा होना था, लेकिन 5 बेल ऑर्डर देरी से पहुंचे। जेल प्रशासन ने केस नंबर, धाराएं, नाम, पता और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी को क्रॉस चेक किया। बेल ऑर्डर का जेल के रिकॉर्ड से मिलान कराया गया। इसलिए आज आजम की रिहाई नहीं हो सकी। जेल प्रशासन ने आजम की रिहाई के कुल 58 ऑर्डर जांच लिए हैं। रिहाई को लेकर जेल प्रशासन ने अपनी तैयारी पूरी कर ली है। उधर, बसपा के कई पदाधिकारी सीतापुर जेल पहुंचे हैं। इससे आजम खान के बसपा में जाने की अटकलें तेज हो गई हैं। सूत्रों का कहना है कि 9 अक्टूबर को लखनऊ में बसपा प्रमुख मायावती बड़ा सम्मेलन करने वाली हैं। उसी दिन आजम बसपा में शामिल हो सकते हैं। आजम के वकील बोले- बढ़ाई गई धाराओं में कस्टडी नहीं तो रिहाई मुमकिन
सूत्रों के मुताबिक, जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े शत्रु संपत्ति केस में पुलिस ने तीन धाराएं बढ़ाई हैं। हालांकि पुलिस ने इस मामले में आजम खान की कस्टडी नहीं ली है। आज़म ख़ान के वकील इमरानुल्लाह ने बताया, जिन-जिन मामलों में जमानत होती है, उसमें रिहाई का परवाना जेल भेजा जाता है। इसके अतिरिक्त किसी मामले में गिरफ्तारी रहती है, और उसमें ज़मानत नहीं हुई होती है तो रिहाई नहीं होती है। जहां तक उन धाराओं की बात है, जिसे हाल ही में बढ़ाया गया है, उसमें अब तक कस्टडी नहीं ली गई है। ऐसे में रिहाई मुमकिन है। साल 2020 में पहली बार जेल गए थे आजम
आजम खान फरवरी, 2020 में गिरफ्तारी के बाद सबसे पहले रामपुर जेल भेजे गए थे। वहां से उन्हें सुरक्षा कारणों से सीतापुर जेल में शिफ्ट कर दिया गया था। मई, 2022 में आजम खान जेल से जमानत पर बाहर आ गए। इसके बाद एक मामले में सजा होने के बाद 18 अक्तूबर, 2023 को आजम खान ने सरेंडर कर दिया था, जिसके बाद उन्हें पहले रामपुर जेल भेजा गया, फिर सीतापुर जेल शिफ्ट कर दिया गया। आजम खान पर कितने मुकदमे?
आजम के खिलाफ कुल 104 मुकदमे दर्ज हैं। इसमें अकेले रामपुर में 93 मामले दर्ज हैं, बाकी दूसरे जिलों में दर्ज हैं। 12 मुकदमों में फैसला आ चुका है। कुछ में सजा हुई है और कुछ में वे बरी हो गए हैं। लगभग सभी मामलों में उन्हें जमानत मिल चुकी है। वरिष्ठ वकील इमरान उल्लाह कहते हैं, ये सभी मामले राजनीतिक साजिश हैं। आजम खान ने कभी अपनी ताकत का दुरुपयोग नहीं किया। सबूतों की कमी से जमानत मिली है। लेकिन रामपुर पुलिस ने शत्रु संपत्ति मामले में नई धाराएं (IPC 467, 471, 201) जोडी जिसमें उम्रकैद तक की सजा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ये धाराएं कोर्ट में टिक नहीं पाएंगी, क्योंकि ये पुराने केस को नया रूप देने की कोशिश लगती हैं। भड़काऊ भाषण के मामले में सजा होने से चली गई थी विधायकी
आजम खान को सबसे बड़ा झटका उस समय लगा था, जब 2022 में भड़काऊ भाषण देने के एक मामले में अदालत ने दो साल की सजा सुनाई थी। जिसके बाद आजम की विधायकी चली गई थी। हालांकि आजम खान की मुश्किलें 2019 से बढ़नी शुरू हो गईं थी। उन्होंने लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान तत्कालीन जिलाधिकारी और वर्तमान में मुरादाबाद मंडल के मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह समेत तमाम अधिकारियों के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया था। जिसके बाद उनके खिलाफ भडकाऊ भाषण देने के आरोप में मुकदमा भी दर्ज हुआ था। इसी मामले में कोर्ट ने उन्हें तीन साल की कैद और छह हजार रुपए जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई है। उनके खिलाफ विभिन्न धाराओं और थानों में सौ से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। पूरे परिवार पर दर्ज हुए 165 मामले
2022 में रामपुर विधानसभा चुनाव से लड़े आजम खान ने एफिडेविट में बताया है कि उनके ऊपर 87 मुकदमे दर्ज हैं। जबकि स्वार विधानसभा से चुनाव लड़े उनके बेटे अब्दुल्ला आजम ने अपने एफिडेविट में बताया है कि उनके ऊपर 43 मुकदमे दर्ज हैं। जबकि आजम खान की पत्नी तंजीन फातिमा के ऊपर 35 मामले दर्ज हैं। इस तरह पूरे परिवार पर 2022 तक 165 मामले दर्ज हुए हैं। चार बार प्रदेश सरकार में मंत्री रहे
आजम खान सपा सरकार में कई-कई महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री रहे। 1989 में उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री बने और श्रम, रोजगार, मुस्लिम वक्फ और हज जैसे विभागों में कामकाज किया। 1993 में वे एक बार फिर राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री बने। आजम खां उत्तर प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता भी रहे हैं। जबकि, 2003 से 2007 तक कैबिनेट मंत्री के रूप में संसदीय मामलों, शहरी विकास, जल आपूर्ति, शहरी रोजगार एवं गरीबी उन्मूलन विभागों का कामकाज देखा। 2012 में अखिलेश यादव की सरकार के दौरान आजम खान नगर विकास समेत कई महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री बने। सपा के संस्थापक सदस्यों में से थे एक
आजम खान को मुलायम सिंह यादव के सबसे करीबी नेताओं में से गिना जाता था। वे सपा के संस्थापक सदस्य भी हैं। उन्होंने कभी सपा का साथ नहीं छोड़ा। लिहाजा, मुलायम सिंह यादव ने भी आजम खान को आगे बढ़ाया। मुलायम सिंह यादव और आजम खान की दोस्ती के किस्से आज भी सियासी गलियारों में सुनाए जाते हैं। आजम, तंजीन और अब्दुल्लाह का चुनाव में हिस्सा लेना मुश्किल
वरिष्ठ वकील जुबैर खान कहते हैं- आजम खान जेल से बाहर आते हैं तो भी वे 2027 का चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। इसी तरह उनकी पत्नी तंजीन फातिमा और बेटे अब्दुल्ला आजम को भी सजा हो चुकी है, ऐसे में ये लोग भी अगला चुनाव नहीं लड़ सकते। बसपा के इकलौते विधायक बोले- आजम का बसपा में स्वागत है
बलिया के रसड़ा विधानसभा से बसपा के एकमात्र विधायक उमाशंकर सिंह ने रविवार को बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा, यदि आजम खान बसपा में शामिल होते हैं, तो उनका स्वागत है। इससे पार्टी को मजबूती मिलेगी। उमाशंकर सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि मुझे आजम खान की पत्नी तंजीन फातिमा और बसपा नेताओं के बीच किसी मुलाकात की जानकारी नहीं है। लेकिन अगर आजम खान बसपा में आते हैं, तो यह सियासी तौर पर पार्टी के लिए फायदेमंद होगा। उन्होंने कहा कि हर एक व्यक्ति का स्वागत है। —————- यह खबर भी पढ़ें- भास्कर इन्वेस्टिगेशन: यूपी में CMO ऑफिस में रिश्वत के रेट तय:बगैर दलाल के काम करने को तैयार नहीं स्टेनो, कैमरे पर मांगे 50 हजार ‘सीएमओ साहब के यहां 50 हजार रुपए स्टेनो मुकेश लेंगे, काम करवा देंगे।’ एटा में ये दावा दलाल कासिम कर रहा है। यूपी के CMO ऑफिस में हर काम के लिए रिश्वत के रेट तय हैं। नर्सिंग होम, डायग्नोस्टिक सेंटर, ब्लड बैंक या फिर पैथोलॉजी लैब खोलने के लिए यहां संपर्क करो तो कर्मचारी दलालों के पास भेज देते हैं। यहां पढ़ें पूरी खबर