आजम खान RSS के खिलाफ साजिश केस में बरी:लखनऊ कोर्ट से मुस्कुराते बाहर आए, बोले- आज मैं अटैची लेकर आया था

सपा के सीनियर लीडर आजम खान को बड़ी राहत मिली है। 6 साल पुराने केस में आजम को लखनऊ की एमपी-एमएलए कोर्ट ने बरी कर दिया। उन पर RSS को बदनाम करने की साजिश रचने के आरोप लगे थे। आजम कोर्ट में करीब एक घंटे बैठे रहे। फैसला आने पर बेटे अब्दुल्ला, वकीलों और समर्थकों के साथ कोर्ट से बाहर आए। उनके चेहरे पर मुस्कान थी। मीडिया से आजम ने कहा- बहुत ही ईमान वाला फैसला है। जज साहब का शुक्रिया है। न्यायालय से ही आस बची है। उन्होंने अपने अंदाज में कहा, आज मैं अटैची लेकर आया था, क्योंकि इससे पहले एक ऐसे ही मुकदमे में 7 साल की सजा हुई थी। तब मैं अटैची लेकर नहीं आया था। 2 तस्वीरें… ठोस सबूत नहीं मिलने पर आजम बरी
लखनऊ के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय (एमपी-एमएलए कोर्ट) आलोक वर्मा ने ठोस सबूत नहीं होने पर आजम खान को बरी किया। पेशी को देखते हुए न्यायालय परिसर और उसके आस-पास सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। कोर्ट में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात थे। मेरी मरी हुई मां पर भी मुकदमे हैं
मुकदमों की संख्या के सवाल पर आजम खान ने कहा- ‘मुझ पर सैकड़ों में मुकदमे हैं। वकील से पूछ कर बता पाऊंगा। मेरी बीवी, बड़े बेटे, भाई, बहनों और दोस्तों पर मुकदमे हैं। मेरी मरी हुई मां पर भी मुकदमे हैं। अभी भी जेलों में मेरे लोग हैं। मेरे साथी और रामपुर नगर पालिका के दो बार चेयरमैन रहे अजहर अली खान अभी भी बिजनौर जेल में बंद हैं।’ अखिलेश से गहरी मुलाकात हुई
आजम खान ने कहा- अखिलेश यादव से गहरी मुलाकात हुई। अखिलेश मेरी औलाद जैसे हैं। उस परिवार से आधी सदी का रिश्ता है। मेरी तकलीफें उस रिश्ते को तोड़ नहीं सकती हैं। इस संबंध की कीमत अदा कर रहा हूं, जो बची है। RSS को बदनाम करने का आरोप
पूर्व मंत्री आजम खान के खिलाफ लखनऊ की हजरतगंज कोतवाली में फरवरी 2019 में मुकदमा दर्ज कराया गया था। आरोप है कि मंत्री पद पर रहते हुए उन्होंने अपने सरकारी लेटरपैड और सरकारी मुहर का दुरुपयोग किया था। उन्हीं लेटरपैड के माध्यम से RSS (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदनाम करने का प्रयास किया गया था। मामला 2014 का था, उस समय प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी। इसको लेकर सामाजिक कार्यकर्ता अल्लामा जमीर नकवी की ओर से 2019 में हजरतगंज थाने में FIR दर्ज कराई गई थी। इसमें बताया गया कि वर्ष 2014 में आजम खान के लेटरपैड पर जारी छह पत्रों में आरएसएस के साथ ही शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद और उनके निजी सचिव इमरान नकवी के खिलाफ अपमानजनक बातें लिखी गई थीं। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया था कि आरएसएस को बदनाम करने की इस साजिश में शिया वक्फ बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष वसीम रिजवी भी शामिल थे। सुबह अखिलेश से की थी मुलाकात
आजम खान इससे पहले अखिलेश यादव से मिलने उनके घर पहुंचे थे। आजम के जेल से बाहर आने के बाद दोनों नेताओं की यह दूसरी मुलाकात थी। दोनों नेताओं के बीच नाराजगी की अटकलों के बीच यह मुलाकात हुई। मीटिंग करीब 30 मिनट तक चली। इससे 30 दिन पहले ही अखिलेश रामपुर गए थे और आजम से बंद कमरे में मुलाकात की थी। लखनऊ में मुलाकात के बाद आजम मीडिया के सामने आए। काला चश्मा लगाए आजम अपने पुराने तेवर में दिखे। उन्होंने विरोधियों को सख्त संदेश दिया और मीडिया को भी आड़े हाथों लिया। खुलकर किसी भी निशाना नहीं साधा, लेकिन बातों ही बातों में सभी के लिए बहुत कुछ कहा। अपनी बात खत्म करने से पहले उन्होंने यह भी कहा कि मेरी बातें कोई फिल्मी डायलॉग नहीं हैं। उन्होंने कहा- अखिलेश बिहार चुनाव में मशरूफ हैं। मैं अपनी दास्तां लेकर उनके पास आया था। अपना दर्द बयां किया। मुझ पर जो गुजरी वह बताने आया था। हमारे बीच क्या-क्या बातें हुईं, यह नहीं बता पाऊंगा। इस बीच सपा मुखिया ने मुलाकात के बाद ‘X’ पर भावुक पोस्ट किया। उन्होंने लिखा- ‘न जाने कितनी यादें संग ले आए, जब वो आज हमारे घर पर आए! ये जो मेलमिलाप है, यही हमारी साझा विरासत है।’ कल माफिया मुख्तार अंसारी के बड़े भाई से मिले थे
इससे पहले आजम ने गुरुवार को माफिया मुख्तार अंसारी के बड़े भाई और पूर्व विधायक सिबगतुल्लाह अंसारी से मुलाकात की थी। पूर्व मंत्री अभिषेक मिश्रा भी उनके साथ थे। इस दौरान मीडिया से आजम ने कहा था- 50 साल की सियासत के बावजूद लखनऊ में मेरी कोई कोठी नहीं है। इसलिए होटल में रहना पड़ रहा है। उन्होंने कहा था- मुझे भू-माफिया घोषित किया जा रहा है। जबकि, मैं रामपुर में जिस मोहल्ले में रहता हूं, वहां बरसात में 2 फीट तक पानी भरा रहता है। यूपी की कानून व्यवस्था पर कहा था- बहुत अच्छी है। इस पर सवाल मत पूछिए। बिहार में पीएम के कट्टा वाले बयान कहा था- हमारे यहां तो कट्टा बेचने वाले का बेटा विधायक बन गया। उसे कमांडोज मिले हैं। 1 साल 11 महीने बाद हुई थी रिहाई
आजम खान एक साल 11 महीने बाद 23 सितंबर को सीतापुर जेल से रिहा हुए थे। दोनों बेटे अदीब और अब्दुल्ला उन्हें लेने पहुंचे। वे 100 गाड़ियों के काफिले के साथ यहां से रामपुर के लिए रवाना हुए थे। आजम खान को 18 सितंबर को हाईकोर्ट ने बीयर बार पर कब्जे से जुड़े केस में जमानत दी थी। यह आखिरी मामला था, जिसमें उन्हें जमानत मिली। हालांकि जमानत मिलते ही पुलिस ने शत्रु संपत्ति मामले में नई धाराएं जोड़ दीं। 20 सितंबर को रामपुर कोर्ट ने ये धाराएं खारिज कर दीं, जिससे रिहाई का रास्ता साफ हो गया। आजम पर 104 केस दर्ज हैं। ———————————– ये भी पढ़ें राहुल ने जिसे BJP समर्थित बताया, वो सरपंच नहीं:मथुरा से अपना नाम सुन चौंक गए; कांग्रेस नेता के दावों का सच कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने 5 अक्टूबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिस मथुरा के प्रह्लाद की तस्वीर दिखाई थी, उनसे दैनिक भास्कर ने हकीकत समझी। सामने आया कि प्रह्लाद मौजूदा सरपंच नहीं हैं। हां, 2015 से 2020 तक उनकी पत्नी चंदा देवी सरपंच रही थीं। राहुल गांधी ने प्रजेंटेशन के दौरान प्रह्लाद की BJP कैबिनेट मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी के भतीजे के साथ तस्वीरें भी शेयर की थी। बताया कि BJP समर्थित प्रह्लाद हरियाणा के होडल विधानसभा क्षेत्र की वोटर लिस्ट में भी शामिल हैं। साथ ही, उन्हीं डिटेल के साथ प्रह्लाद मथुरा विधानसभा की वोटर रिकॉर्ड में भी हैं। पूरी खबर पढ़िए