आटे में खड़िया पाउडर मिलाया जा रहा है। लाल मिर्च और हल्दी में सिंथेटिक डाई मिलाकर बाजार में खुलेआम बेचते हैं। यूरिया, पाम ऑयल और डिटर्जेंट से बना पनीर खाने के लिए दिया जा रहा। यह हाल किसी एक जिले का नहीं, पूरे यूपी का है। फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FSDA) के 11 महीने में हुए 1.76 लाख से ज्यादा सर्वे/छापे में यह सच्चाई सामने आई है। स्वाद और सेहत देने वाला भोजन अब बीमारियां दे रहा है। डॉक्टर कहते हैं- लंबे समय तक मिलावटी फूड खाने से किडनी और लिवर पर बुरा असर होता है। कैंसर तक हो सकता है। फूड आइटम में मिलाए जाने वाले केमिकल और उसके नुकसान पर हमने बीएचयू में केमेस्ट्री के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. कृपा राम से बात की। पढ़िए ये रिपोर्ट… खड़िया से बढ़ा रहे वजन, टूटे चावल से सफेदी बीते दिनों FSDA ने बुलंदशहर और फिरोजाबाद समेत कई जिलों में फ्लोर मिलों पर छापेमारी की। इससे पता चला कि कई जगहों पर गेहूं के आटे में खड़िया पाउडर और टूटा हुआ चावल मिलाया जा रहा था। खड़िया का इस्तेमाल वजन बढ़ाने और आटे को सफेद-चमकदार बनाने के लिए किया जा रहा था। इसी तरह टूटे चावल की मिलावट से न सिर्फ रोटी में सफेदी आती है, बल्कि आटे की लागत कम हो जाती है। बाजार में टूटे चावल का रेट 12 से 15 रुपए किलो है, जबकि गेहूं की कीमत 20 रुपए से ज्यादा है। नुकसान- मिलावटी आटे से बनी रोटी खाने से डाइजेशन की दिक्कतें होती हैं। लंबे समय तक इसके सेवन से पथरी जैसी बीमारियां हो सकती हैं। मिलावट पहचाने- खड़िया (कैल्शियम कार्बोनेट) की मिलावट पहचानने के लिए एक गिलास पानी में एक चम्मच आटा मिलाएं। ऊपर से नींबू का रस या सिरके की कुछ बूंदें मिलाएं। अगर पानी में गैस के बुलबुले उठें, तो खड़िया या चूना मिलाया गया है। शुद्ध आटा पानी में बैठने लगेगा और कोई रिएक्शन नहीं देगा। सूडान डाई की मिलावट से कैंसर का खतरा लाल मिर्च पाउडर में सूडान फर्स्ट, सेकेंड और थर्ड जैसी सिंथेटिक डाई मिलाई जाती है। आमतौर पर इनका इस्तेमाल प्लास्टिक, मोमबत्ती, जूते और फर्श की पॉलिश बनाने में होता है। चूंकि ये रंग सस्ते होते हैं और मिर्च को चमकदार लाल रंग देते हैं, इसलिए मिलावटखोर धड़ल्ले से इनका इस्तेमाल करते हैं। नुकसान- ये रंग ‘कार्सिनोजेनिक’ होते हैं, यानी इसके सेवन से कैंसर हो सकता है। साथ ही लिवर और किडनी पर भी बुरा असर डालते हैं। यूपी में मिर्च पाउडर की मिलावट के सबसे ज्यादा मामले पश्चिमी यूपी और कानपुर-आगरा रीजन में सामने आए हैं। मिलावट पहचाने- बीएचयू में केमेस्ट्री के एसोसिएट प्रोफसर डॉ कृपा राम बताते हैं कि सूडान डाई, ऑयल बेस्ड कलर होते हैं। ये पानी में तुरंत नहीं घुलते, जबकि एसीटोन में बहुत जल्दी घुल जाते हैं। मिलावट पहचानने के लिए कांच की कटोरी में थोड़ा लाल मिर्च पाउडर लें। उसमें नेल पॉलिश रिमूवर (जिसमें एसीटोन हो) मिलाएं। अगर घोल तुरंत गहरा लाल हो जाए, तो सूडान डाई मिली है। चटख रंग के लिए मिला रहे सीसायुक्त केमिकल हल्दी पाउडर में ‘मेटानिल यलो’ की मिलावट होती है। ये एक तरह की डाई होती है। कपड़ा, कागज, लेदर वगैरह रंगने के लिए इस्तेमाल होती है। इसके अलावा लेड क्रोमेट (सीसा युक्त पीला रंग) की भी मिलावट होती है। ये हल्दी पाउडर का रंग चटख पीला कर देता है। लेड क्रोमेट काफी सस्ता होता है। इसका रंग भी प्राकृतिक हल्दी से मेल खाता है। इस वजह से मिलावटखोर इसका इस्तेमाल करते हैं। नुकसान- दिमाग के ‘न्यूरोट्रांसमीटर’ पर असर करता है। इससे सीखने की क्षमता और याददाश्त कम हो सकती है। बच्चों के मानसिक विकास पर बुरा असर डाल सकता है, जबकि बड़ों में दिल की बीमारी का खतरा बढ़ाता है। प्रेग्नेंसी के दौरान गर्भस्थ शिशु के अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है। मिलावट पहचाने- हल्दी में थोड़ा पानी डालें और उसमें नींबू की कुछ बूंदें (एसिड) मिलाएं। पानी का रंग तुरंत गहरा गुलाबी या बैंगनी हो जाए, तो उसमें मेटानिल यलो मिला है। लेड क्रोमेट की पहचान के लिए हल्दी को पानी में डालें। अगर तुरंत गहरा पीला रंग छोड़ दे और नीचे चमकदार कण बैठ जाएं, तो उसमें लेड क्रोमेट की मिलावट है। मैदा और एसिड मिलाकर बनाते हैं नकली पनीर आजकल नकली पनीर धड़ल्ले से मार्केट में बिक रहा है। इसमें दूध का नाम-ओ-निशान तक नहीं होता। इसे वनस्पति तेल, मैदा, एसिटिक एसिड, केमिकल्स और यूरिया से बनाया जाता है। मेरठ के नगला कुंभा गांव में 16 अप्रैल को 28 क्विंटल मिलावटी पनीर, 5 हजार लीटर से ज्यादा नकली दूध, 1100 लीटर पाम ऑयल और केमिकल्स बरामद हुए। ये पनीर दिल्ली-NCR, उत्तराखंड तक सप्लाई किया जा रहा था। मामले में दो अलग-अलग FIR दर्ज की गई हैं। नुकसान- डिटर्जेंट और यूरिया की वजह से गंभीर संक्रमण, अल्सर और फूड पॉइजनिंग हो सकती है। उल्टी, दस्त और पेटदर्द जैसी समस्याएं तुरंत देखने को मिलती हैं। लंबे समय तक इस्तेमाल फिल्टरेशन सिस्टम (किडनी-लिवर) पर बुरा असर डालता है। इससे ‘लिवर सिरोसिस’ का खतरा बढ़ जाता है। मिलावट पहचाने- पनीर का टुकड़ा पानी में उबालें और ठंडा होने दें। फिर आयोडीन टिंचर की 2-3 बूंदें डालें। पनीर का रंग नीला या काला हो, तो यह मिलावटी है। इसके अलावा हाथ से मसलकर देखें। असली पनीर, खोया (मावा) की तरह टूटकर बिखर जाएगा। वहीं, डिटर्जेंट या यूरिया से बना पनीर रबर की तरह खिंचने लगेगा या ज्यादा सख्त महसूस होगा। 11 महीने में 55.34 करोड़ रुपए जुर्माना वसूला FSDA के मुताबिक यूपी के अलग-अलग इलाकों में अलग-अलग फूड आइटम में मिलावट होती है। पश्चिमी यूपी को मिलावटी धंधे का गढ़ कहा जा सकता है। मसालों में मिलावट के मामले में कानपुर और आगरा अव्वल हैं। वहीं, दूध और डेयरी प्रोडक्ट में मिलावट में बरेली, मुरादाबाद, मेरठ, आगरा, अलीगढ़ आगे हैं। मंत्री बोले- विभाग को फ्री-हैंड दिया पूरे मामले में दैनिक भास्कर ने यूपी के खाद्य सुरक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर मिश्र से बात की। वे कहते हैं- यूपी में पहले मिलावट को लेकर चलने वाले अभियान त्योहारों तक सिमट जाते थे। अब उन्हें सालभर चलाया जा रहा है। अप्रैल, 2025 से फरवरी, 2026 तक 11 महीने में करीब 55.34 करोड़ रुपए का जुर्माना वसूला गया है। विभाग को फ्री-हैंड दिया गया है कि गड़बड़ियां मिलने पर कार्रवाई करें। गाजियाबाद और मेरठ में डेयरी प्रोडक्ट की मिलावट पर बड़ी कार्रवाई हुई हैं। FIR भी की गई हैं। लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। ———————– ये खबर भी पढ़ें… एल्युमिनियम के बर्तन में खाना पकाना कितना खतरनाक?, एम्स के डॉक्टर बोले- किडनी, लिवर पर असर फतेहपुर जिले में चाय की एक दुकान पर 16 अप्रैल को फूड डिपार्टमेंट ने छापेमारी की। दुअधिकारियों ने एल्युमिनियम के बर्तन में चाय बनाने पर आपत्ति जताई। यहीं से सवाल उठे कि क्या वाकई एल्युमिनियम के बर्तन में खाना पकाने से सेहत को नुकसान होता है? पूरी खबर पढ़ें…