‘मेरे पास अननोन नंबर से कॉल आई। उन्होंने कहा कि आपके आधार से कई सिम इशू हुए हैं। उन सिम से सेक्सुअल हैरेसमेंट हुआ है। दो महिलाओं ने आपके खिलाफ मुंबई के कोलाबा थाने में एफआईआर दर्ज करवाई है। इसके बाद वीडियो कॉल पर हमें डिजिटल अरेस्ट कर लिया गया।’ यह कॉल बरेली कॉलेज के कॉमर्स विभागाध्यक्ष रहे प्रो. राजीव मल्होत्रा के पास 13 जुलाई को आई। उन्हें बताया गया कि तुम्हारे खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस हैं। अरेस्ट हो चुके एक शख्स ने कबूल किया है कि तुम्हारे बैंक अकाउंट में कमीशन भेजा गया है। 45 मिनट के डिजिटल अरेस्ट में हम जल्दी ही समझ गए कि महाराष्ट्र पुलिस कहने वाले ये लोग जालसाज हैं। वीडियो काल पर हमने देखा कि पुलिस जैसे ऑफिस में सब हिंदी में लिखा है। हमने 2 सवाल पूछे। पहला- आपके ऑफिस में सब हिंदी में क्या लिखा है, महाराष्ट्र में मराठी में लिखा होना चाहिए था। दूसरा- कभी आप कहते हैं सेक्सुअल हैरेसमेंट में फंसा हूं, कभी बोलते हैं, मेरे खाते में कमीशन आया है। ये सुनकर जालसाज हमें हड़काने लगे कि 10 मिनट में पुलिस तुम्हें अरेस्ट करने आ रही है। प्रोफेसर कहते हैं- मैंने भी कह दिया कि भेजिए, मैं घर पर बैठा हूं। प्रोफेसर के साथ क्या हुआ? वो कैसे जालसाजी से बचे? ये समझने के लिए दैनिक भास्कर ऐप रिपोर्टर ने प्रो. मल्होत्रा से बात की। पढ़िए रिपोर्ट… 13 जुलाई को 10:30 बजे जालसाज की कॉल आई
राजीव मल्होत्रा कहते हैं- 13 जुलाई की सुबह 10:30 बजे मेरे पास एक कॉल आई, ट्रूकॉलर पर उस नंबर के साथ भारत सरकार का लोगो और ‘टेलीफोन अथॉरिटी ऑफ इंडिया’ लिखा था। राजीव बताते हैं- कॉल पर वो लगातार यह जताता रहा कि यह केस बहुत ही गंभीर है। वो लगातार मुझे डराने की कोशिश कर रहा था। ताकि मैं उनकी बातों फंस जाऊं। फिर कॉल पर उसने कहा- हमारी रिपोर्ट के आधार पर अब आपकी आईडी से जितने भी सिम इशू हुए हैं, हम उन्हें ब्लॉक कर रहे हैं। मैनेजर बोला- FIR मुंबई के कोलाबा थाने में है मैंने उससे पूछा- ऐसा आप कैसे कर सकते हैं? तो उसने जवाब दिया कि कोलाबा थाने में आपके खिलाफ केस दर्ज है। आप वहां थाने आ जाइए। मैंने कहा- मैं कैसे आ सकता हूं? मैं रिटायर्ड हूं। मेरी उम्र 65 साल है और पैरालाइज्ड हूं। जिस तारीख को आप सिम जारी होना बता रहे हैं, उस दिन मैं कनाडा में अपने बेटे के पास था। उसने पूछा- फिर सिम कैसे जारी हो गया? मैंने कहा- ये आप ही बताइए। अब तो बायोमेट्रिक से सिम जारी होता है। फिर उसने कहा कि आप ऑनलाइन कंप्लेंट कर सकते हैं। मैंने पूछा- कैसे? तो बोला, लिंक भेज देते हैं। आप उसे फॉलो कीजेगा। ‘पुलिस अधीक्षक क्राइम’ से जोड़ा, माहौल बनाया जैसे वो थाने से बात कर रहे फिर इन लोगों ने थाने जैसा माहौल बनाने के लिए मुझे वीडियो कॉल से जोड़ा। कॉल पर एक सब इंस्पेक्टर जैसा व्यक्ति था। जो बोल रहा था कि वायरलेस आ रही है, कॉलिंग हो रही है। इसके बाद उसने कहा- मैं आपको SP क्राइम से जोड़ रहा हूं। उधर से ‘SP क्राइम’ आया और उसने दरोगा को डांट लगाई। ताकि मुझ पर मानसिक दबाव पड़े और मैं डर सकूं।” कोलाबा थाना लिखा था… पर मराठी गायब थी
जब वीडियो कॉल पर जोड़ा गया तो पीछे कोलाबा थाना, मुंबई लिखा दिखाई दिया। हिंदी और अंग्रेज़ी में। लेकिन पीछे लगे बोर्ड पर कहीं भी मराठी नहीं लिखी थी। महाराष्ट्र में मराठी जरूरी होती है। यहीं से मुझे शक हुआ कि यह सेटअप फर्जी है।” पूछा गया- घर में कौन-कौन है? दिखाइए कैमरे से “SP क्राइम ने कहा- आपकी वीडियो रिकॉर्डिंग कोर्ट में जाएगी। जो पूछेंगे, सच-सच बताइएगा। कैमरे से घर का पूरा एरिया दिखाइए। मैंने कहा- मेरी वाइफ हैं। वीडियो कॉल पर उसने कहा- उन्हें भी बैठा दीजिए। अब जो भी पूछेंगे, सच बताइए। उसने हमारी मानसिक स्थिति को हिप्नोटाइज जैसा कर दिया।” ‘तुम्हारा अकाउंट केनरा बैंक में है’, मैंने कहा- है ही नहीं “वीडियो कॉल पर उसने कहा- तुमने हमारा आधार कार्ड देखा है। तुम्हारा केनरा बैंक में अकाउंट है। जिसमें नरेश गोयल पैसे भेजता है। इस पर मैंने कहा- मेरा तो केनरा बैंक में कोई अकाउंट है ही नहीं। इस पर उसने कहा- हमने नरेश गोयल को अरेस्ट किया है। वह कह रहा है कि वो आपके अकाउंट में 15% कमीशन देता है। मैंने कहा- आप मनी लॉन्ड्रिंग की बात कर रहे हैं और शुरुआत में सेक्सुअल हैरेसमेंट की कर रहे थे। दोनों में कंट्राडिक्शन कैसे है? इस पर वो बोला- जवाब दीजिए, कोर्ट में जो लगेगा, उसका स्टेटमेंट दीजिए। राजीव बोले- वीडियो कॉल पर मैं उससे जो सवाल पूछ रहा था, वो उनको इग्नोर कर रहा था। उसे लग रहा था कि मैं वीडियो पर हिप्नोटाइस हो जाऊंगा। डिजिटल अरेस्ट का एहसास यही से हो गया
राजीव ने बताया- “यहीं से हमें समझ आया कि यह एक प्लांड डिजिटल अरेस्ट है। हम रोज न्यूज में देखते हैं कि लोग ऐसे डिजिटल गिरफ्तारी के झांसे में आ जाते हैं। तभी मैंने पत्नी से कहा- सारे नंबर नोट करो। तभी उधर से आवाज आई- क्या कर रहे हो? स्क्रीनशॉट नहीं ले सकते। सब रिकॉर्ड कोर्ट में जाएगा। 45 मिनट तक रखा ‘डिजिटल अरेस्ट’ “करीब 45 मिनट तक मैं और मेरी पत्नी डिजिटल अरेस्ट में रहे। 15 मिनट कॉल पर और 30 मिनट वीडियो कॉल पर। मेरी वाइफ से कहा गया- अभी 10 मिनट में पुलिस आ रही है आपको अरेस्ट करने। मैंने कहा- भेजो, मैं यहीं बैठा हूं। इसके बाद कॉल काट दी गई। अननोन नंबर की कॉल और वीडियो कॉल से सतर्क रहें प्रो. राजीव मल्होत्रा ने कहा- मैं तो सूझबूझ से बच गया। लेकिन आप लोगों को सतर्क होने की जरूरत है। ऐसे में “अगर कोई CBI, ट्राई या बैंक से बताकर कॉल करे, तो तुरंत सतर्क हो जाइए। अनजान नंबर की कॉल और वीडियो कॉल उठाने से बचिए। किसी भी हालत में डरिए मत, घबराइए मत। बात करते हुए स्क्रीनशॉट लीजिए और तत्काल साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर शिकायत करें।” IVRI वैज्ञानिक के बाद अब एक और हाई प्रोफाइल डिजिटल फ्रॉड का मामला बरेली में कुछ दिन पहले इंडियन वेटरनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (IVRI) के रिटायर्ड वैज्ञानिक को डिजिटल अरेस्ट करने का मामला सामने आया था। अब दूसरा हाई प्रोफाइल केस सामने आया है। इस बार शिकार बने बरेली कॉलेज के रिटायर्ड प्रोफेसर, जिनकी जिंदगीभर की जमा पूंजी पर साइबर ठग डाका डालने ही वाले थे, लेकिन वक्त रहते उन्हें अंदाजा हो गया कि यह सब एक साइबर फ्रॉड है। पहले समझते हैं क्या होता है डिजिटल अरेस्ट SP क्राइम बोले: देशभर में सक्रिय है डिजिटल अरेस्ट गैंग एसपी क्राइम मनीष चंद्र सोनकर ने बताया- प्रो. राजीव मल्होत्रा के मामले को गंभीरता से लिया गया है। जिस तरह से उन्हें वीडियो कॉलिंग, फर्जी अधिकारी और गिरफ्तारी की धमकी के जरिए मानसिक दबाव में लेने की कोशिश की गई, वह ‘डिजिटल अरेस्ट’ का केस है। इस तरह के गैंग देशभर में फैले हुए हैं। जो रिटायर्ड अफसरों, प्रोफेसरों, डॉक्टरों और वरिष्ठ नागरिकों को ज्यादा टारगेट करते हैं। इन अपराधियों के पास एक पूरा स्क्रिप्टेड सिस्टम होता है- कॉल करने वाला, ‘सुपरवाइजर’, ‘थाना प्रभारी’, ‘एसपी’, सब फर्जी किरदार होते हैं। पीछे नकली पुलिस स्टेशन जैसा बैकग्राउंड, वायरलेस की आवाजें और सरकारी भाषा इस्तेमाल करके ऐसा माहौल बना देते हैं कि सामने वाला डर जाए और उनकी बातों में आकर बैंक डिटेल्स या UPI एक्सेस दे दे। यह गैंग सबसे पहले मानसिक तौर पर दबाव बनाते हैं- आपकी गिरफ्तारी, FIR, कोर्ट, सेक्सुअल हैरेसमेंट, या मनी लॉन्ड्रिंग जैसे शब्दों से। फिर वीडियो कॉलिंग से डराने की कोशिश करते हैं। जैसे ही कोई पैनिक करता है, ये बैंक खातों पर हाथ साफ कर देते हैं। …………………… ये खबर भी पढ़ें… कांवड़ लेकर मत जाना गाने वाले टीचर बोले-सरकार फांसीवादी; कावड़ को बढ़ावा दे रही, आवाज उठानी होगी, अखिलेश का तंज- क्या यही अमृतकाल सरकार स्कूल बंद कर शराब की दुकानें खुलवा रही है। कांवड़ यात्रा को बढ़ावा दे रही है। इसके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। सारे बुद्धिजीवी वर्ग को जाग जाना चाहिए। जहां-जहां भी शिक्षक वर्ग बोल रहा है, सरकार उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करवा रही है। सरकार की जो फांसीवादी मानसिकता है, उसका जनता को डटकर जवाब देना चाहिए। यह कहना है बरेली के एमजीएम इंटर कॉलेज में हिंदी के प्रवक्ता डॉ. रजनीश गंगवार का। पढ़िए पूरी खबर
राजीव मल्होत्रा कहते हैं- 13 जुलाई की सुबह 10:30 बजे मेरे पास एक कॉल आई, ट्रूकॉलर पर उस नंबर के साथ भारत सरकार का लोगो और ‘टेलीफोन अथॉरिटी ऑफ इंडिया’ लिखा था। राजीव बताते हैं- कॉल पर वो लगातार यह जताता रहा कि यह केस बहुत ही गंभीर है। वो लगातार मुझे डराने की कोशिश कर रहा था। ताकि मैं उनकी बातों फंस जाऊं। फिर कॉल पर उसने कहा- हमारी रिपोर्ट के आधार पर अब आपकी आईडी से जितने भी सिम इशू हुए हैं, हम उन्हें ब्लॉक कर रहे हैं। मैनेजर बोला- FIR मुंबई के कोलाबा थाने में है मैंने उससे पूछा- ऐसा आप कैसे कर सकते हैं? तो उसने जवाब दिया कि कोलाबा थाने में आपके खिलाफ केस दर्ज है। आप वहां थाने आ जाइए। मैंने कहा- मैं कैसे आ सकता हूं? मैं रिटायर्ड हूं। मेरी उम्र 65 साल है और पैरालाइज्ड हूं। जिस तारीख को आप सिम जारी होना बता रहे हैं, उस दिन मैं कनाडा में अपने बेटे के पास था। उसने पूछा- फिर सिम कैसे जारी हो गया? मैंने कहा- ये आप ही बताइए। अब तो बायोमेट्रिक से सिम जारी होता है। फिर उसने कहा कि आप ऑनलाइन कंप्लेंट कर सकते हैं। मैंने पूछा- कैसे? तो बोला, लिंक भेज देते हैं। आप उसे फॉलो कीजेगा। ‘पुलिस अधीक्षक क्राइम’ से जोड़ा, माहौल बनाया जैसे वो थाने से बात कर रहे फिर इन लोगों ने थाने जैसा माहौल बनाने के लिए मुझे वीडियो कॉल से जोड़ा। कॉल पर एक सब इंस्पेक्टर जैसा व्यक्ति था। जो बोल रहा था कि वायरलेस आ रही है, कॉलिंग हो रही है। इसके बाद उसने कहा- मैं आपको SP क्राइम से जोड़ रहा हूं। उधर से ‘SP क्राइम’ आया और उसने दरोगा को डांट लगाई। ताकि मुझ पर मानसिक दबाव पड़े और मैं डर सकूं।” कोलाबा थाना लिखा था… पर मराठी गायब थी
जब वीडियो कॉल पर जोड़ा गया तो पीछे कोलाबा थाना, मुंबई लिखा दिखाई दिया। हिंदी और अंग्रेज़ी में। लेकिन पीछे लगे बोर्ड पर कहीं भी मराठी नहीं लिखी थी। महाराष्ट्र में मराठी जरूरी होती है। यहीं से मुझे शक हुआ कि यह सेटअप फर्जी है।” पूछा गया- घर में कौन-कौन है? दिखाइए कैमरे से “SP क्राइम ने कहा- आपकी वीडियो रिकॉर्डिंग कोर्ट में जाएगी। जो पूछेंगे, सच-सच बताइएगा। कैमरे से घर का पूरा एरिया दिखाइए। मैंने कहा- मेरी वाइफ हैं। वीडियो कॉल पर उसने कहा- उन्हें भी बैठा दीजिए। अब जो भी पूछेंगे, सच बताइए। उसने हमारी मानसिक स्थिति को हिप्नोटाइज जैसा कर दिया।” ‘तुम्हारा अकाउंट केनरा बैंक में है’, मैंने कहा- है ही नहीं “वीडियो कॉल पर उसने कहा- तुमने हमारा आधार कार्ड देखा है। तुम्हारा केनरा बैंक में अकाउंट है। जिसमें नरेश गोयल पैसे भेजता है। इस पर मैंने कहा- मेरा तो केनरा बैंक में कोई अकाउंट है ही नहीं। इस पर उसने कहा- हमने नरेश गोयल को अरेस्ट किया है। वह कह रहा है कि वो आपके अकाउंट में 15% कमीशन देता है। मैंने कहा- आप मनी लॉन्ड्रिंग की बात कर रहे हैं और शुरुआत में सेक्सुअल हैरेसमेंट की कर रहे थे। दोनों में कंट्राडिक्शन कैसे है? इस पर वो बोला- जवाब दीजिए, कोर्ट में जो लगेगा, उसका स्टेटमेंट दीजिए। राजीव बोले- वीडियो कॉल पर मैं उससे जो सवाल पूछ रहा था, वो उनको इग्नोर कर रहा था। उसे लग रहा था कि मैं वीडियो पर हिप्नोटाइस हो जाऊंगा। डिजिटल अरेस्ट का एहसास यही से हो गया
राजीव ने बताया- “यहीं से हमें समझ आया कि यह एक प्लांड डिजिटल अरेस्ट है। हम रोज न्यूज में देखते हैं कि लोग ऐसे डिजिटल गिरफ्तारी के झांसे में आ जाते हैं। तभी मैंने पत्नी से कहा- सारे नंबर नोट करो। तभी उधर से आवाज आई- क्या कर रहे हो? स्क्रीनशॉट नहीं ले सकते। सब रिकॉर्ड कोर्ट में जाएगा। 45 मिनट तक रखा ‘डिजिटल अरेस्ट’ “करीब 45 मिनट तक मैं और मेरी पत्नी डिजिटल अरेस्ट में रहे। 15 मिनट कॉल पर और 30 मिनट वीडियो कॉल पर। मेरी वाइफ से कहा गया- अभी 10 मिनट में पुलिस आ रही है आपको अरेस्ट करने। मैंने कहा- भेजो, मैं यहीं बैठा हूं। इसके बाद कॉल काट दी गई। अननोन नंबर की कॉल और वीडियो कॉल से सतर्क रहें प्रो. राजीव मल्होत्रा ने कहा- मैं तो सूझबूझ से बच गया। लेकिन आप लोगों को सतर्क होने की जरूरत है। ऐसे में “अगर कोई CBI, ट्राई या बैंक से बताकर कॉल करे, तो तुरंत सतर्क हो जाइए। अनजान नंबर की कॉल और वीडियो कॉल उठाने से बचिए। किसी भी हालत में डरिए मत, घबराइए मत। बात करते हुए स्क्रीनशॉट लीजिए और तत्काल साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर शिकायत करें।” IVRI वैज्ञानिक के बाद अब एक और हाई प्रोफाइल डिजिटल फ्रॉड का मामला बरेली में कुछ दिन पहले इंडियन वेटरनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (IVRI) के रिटायर्ड वैज्ञानिक को डिजिटल अरेस्ट करने का मामला सामने आया था। अब दूसरा हाई प्रोफाइल केस सामने आया है। इस बार शिकार बने बरेली कॉलेज के रिटायर्ड प्रोफेसर, जिनकी जिंदगीभर की जमा पूंजी पर साइबर ठग डाका डालने ही वाले थे, लेकिन वक्त रहते उन्हें अंदाजा हो गया कि यह सब एक साइबर फ्रॉड है। पहले समझते हैं क्या होता है डिजिटल अरेस्ट SP क्राइम बोले: देशभर में सक्रिय है डिजिटल अरेस्ट गैंग एसपी क्राइम मनीष चंद्र सोनकर ने बताया- प्रो. राजीव मल्होत्रा के मामले को गंभीरता से लिया गया है। जिस तरह से उन्हें वीडियो कॉलिंग, फर्जी अधिकारी और गिरफ्तारी की धमकी के जरिए मानसिक दबाव में लेने की कोशिश की गई, वह ‘डिजिटल अरेस्ट’ का केस है। इस तरह के गैंग देशभर में फैले हुए हैं। जो रिटायर्ड अफसरों, प्रोफेसरों, डॉक्टरों और वरिष्ठ नागरिकों को ज्यादा टारगेट करते हैं। इन अपराधियों के पास एक पूरा स्क्रिप्टेड सिस्टम होता है- कॉल करने वाला, ‘सुपरवाइजर’, ‘थाना प्रभारी’, ‘एसपी’, सब फर्जी किरदार होते हैं। पीछे नकली पुलिस स्टेशन जैसा बैकग्राउंड, वायरलेस की आवाजें और सरकारी भाषा इस्तेमाल करके ऐसा माहौल बना देते हैं कि सामने वाला डर जाए और उनकी बातों में आकर बैंक डिटेल्स या UPI एक्सेस दे दे। यह गैंग सबसे पहले मानसिक तौर पर दबाव बनाते हैं- आपकी गिरफ्तारी, FIR, कोर्ट, सेक्सुअल हैरेसमेंट, या मनी लॉन्ड्रिंग जैसे शब्दों से। फिर वीडियो कॉलिंग से डराने की कोशिश करते हैं। जैसे ही कोई पैनिक करता है, ये बैंक खातों पर हाथ साफ कर देते हैं। …………………… ये खबर भी पढ़ें… कांवड़ लेकर मत जाना गाने वाले टीचर बोले-सरकार फांसीवादी; कावड़ को बढ़ावा दे रही, आवाज उठानी होगी, अखिलेश का तंज- क्या यही अमृतकाल सरकार स्कूल बंद कर शराब की दुकानें खुलवा रही है। कांवड़ यात्रा को बढ़ावा दे रही है। इसके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। सारे बुद्धिजीवी वर्ग को जाग जाना चाहिए। जहां-जहां भी शिक्षक वर्ग बोल रहा है, सरकार उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करवा रही है। सरकार की जो फांसीवादी मानसिकता है, उसका जनता को डटकर जवाब देना चाहिए। यह कहना है बरेली के एमजीएम इंटर कॉलेज में हिंदी के प्रवक्ता डॉ. रजनीश गंगवार का। पढ़िए पूरी खबर