शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर FIR कराने वाले आशुतोष महाराज पर 8 मार्च को चलती ट्रेन में हमला हुआ। प्रयागराज GRP ने 14 मार्च को आशुतोष महाराज का मेडिकल कराया। सवाल उठा कि जिस मामले में खुद शंकराचार्य की साजिश के आरोप लगे, उसकी जांच में इतनी देरी क्यों? इस पर आशुतोष महाराज कहते हैं- मेरे केस में जानबूझकर लापरवाही की जा रही। GRP के लोगों ने पहले FIR लेट लिखी, फिर मेरा मेडिकल भी नहीं कराया। मुझे CMO ऑफिस से लेकिर डिप्टी सीएम तक को फोन करने पड़े। आशुतोष महाराज के आरोपों के बाद प्रयागराज GRP के इंस्पेक्टर ने कहा- रीवा एक्सप्रेस में हमले के बाद मेडिकल के लिए आशुतोष महाराज को कॉल किए गए, लेकिन वो खुद ही नहीं आए। हम उनके हमलावर को ट्रेस करने का प्रयास कर रहे हैं। बता दें, आशुतोष महाराज 8 मार्च की सुबह रीवा एक्सप्रेस की फर्स्ट क्लास बोगी में गाजियाबाद से प्रयागराज जा रहे थे। फतेहपुर और सिराथू स्टेशनों के बीच चलती ट्रेन में एक शख्स ने उनके ऊपर हमला किया। उनकी नाक, चेहरे और हाथ पर चोट आई थी। इसकी जांच GRP प्रयागराज कर रही है। स्टेशनों पर लगे CCTV देखे गए हैं, लेकिन अभी तक कोई संदिग्ध दिखा नहीं है। यही वजह है कि GRP अभी हमलावर तक नहीं पहुंच सकी है। इस पूरे मामले को लेकर दैनिक भास्कर ने आशुतोष महाराज, जीआरपी इंस्पेक्टर और सीएमओ से बात की। पढ़िए रिपोर्ट… पहले पढ़िए, आशुतोष महाराज ने जो कुछ कहा बोले- स्टेशन पर GRP मिली, लेकिन हमलावर को ढूंढा नहीं
आशुतोष महाराज कहते हैं- 8 जनवरी की सुबह 5 बजे मेरे केबिन के बाहर अचानक हमला हो गया। मैं लहूलुहान हो गया था। मैं चिल्लाने लगा, तो वो आदमी बोगी में एक तरफ भाग गया। फिर मैं अपने केबिन की सीट पर आ गया। इसके बाद हमने अपने सहयोगियों को कॉल किया। जब हम प्रयागराज पहुंचे, तब स्टेशन पर पहले से GRP के जवान मौजूद थे। हमने उन्हें बताया कि जिसने मेरे ऊपर हमला किया है, वो बगल की बोगी में भाग निकला है। लेकिन, वो लोग मेरी देखभाल के बहाने मेरे साथ ही रहे। हमलाक रने वाले को पकड़ने के लिए ट्रेन में नहीं गए। हमने शाम करीब 6.15 बजे FIR लिखने के लिए उन्हें शिकायत दे दी थी। लेकिन, उन्होंने मेरी FIR रात 11-12 बजे लिखी। फिर वो मुझे डॉक्टर के पास ले गए, लेकिन वो न जाने किस नींद में थे। मेरा मरहम-पट्टी तो करा दी, लेकिन मेडिकल नहीं कराया। फिर मैं वापस आ गया। मुझे इतना दर्द था कि रात तक मेरी तबीयत बिगड़ गई। मुझे उल्टियां होने लगीं, बुखार भी आ गया। DM, CMO को लिखा, तब ठीक से मेरा मेडिकल हुआ
इसके बाद 9 मार्च को मैंने CMO प्रयागराज को मैसेज किया, लेटर लिखा। फिर मैंने कॉल किया, तो किसी स्टॉफ ने उठाया। कहा कि साहब को बोल रहे हैं, लेकिन न जाने बोला कि नहीं। फिर 10 मार्च की सुबह मैंने DM, प्रयागराज को मैसेज लिखा। जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तब मैंने डिप्टी सीएम को भी मैसेज किया, लगा कि वो ही सुन लें। इतनी लापरवाही के बाद मैंने मेडिकल के लिए डिमांड रखी कि डॉक्टर के पैनल से मेरी जांच करवानी चाहिए। इसके बाद 14 मार्च को सुबह 11.30 बजे प्रयागराज के जिला अस्पताल में मेरा मेडिकल कराया गया। अब प्रयागराज GRP इंस्पेक्टर की बात हमने शिकायत मांगी, आशुतोष ने कहा- वकील से बात करेंगे
इस पूरे मामले में GRP इंस्पेक्टर अखिलेश सिंह से बात की गई। वह कहते हैं- हमने ट्रेन के स्टेशन पहुंचते ही महाराजजी से FIR के लिए कहा था। उन्होंने जवाब दिया कि पहले मेडिकल करवाएंगे, वकील से बात करेंगे। इसके बाद उन्होंने मीडिया के लोगों से बात की। प्रयागराज स्टेशन से सर्किट हाउस चले गए। वहां से कॉल्विन हॉस्पिटल गए। वहीं पर उनकी जांच हुई। एक्स-रे हुआ। फिर GRP को देर शाम को शिकायत मिली, इसलिए रात में 11 बजे FIR लिखी गई। वो मेडिकल बोर्ड बनवाना चाहते थे, इसलिए लेट हुआ
जब GRP इंस्पेक्टर से पूछा गया कि महाराज आरोप लगा रहे हैं कि 8 मार्च को हमले के बाद मेडिकल 14 मार्च को करवाया गया, इतना लेट क्यों हुआ? इस पर इंस्पेक्टर कहते हैं- उनका कहना था कि मेरा मेडिकल डॉक्टर का बोर्ड करेगा। CMO के स्तर से बोर्ड बनाने में टाइम लगा। इसके बाद उनका मेडिकल दोबारा कराया गया। पहला मेडिकल तो 8 मार्च को ही हो गया था। बाकी आशुतोष महाराज को कई बार बुलाया गया, वो आए नहीं। हम मिलने गए, तो वह मिले ही नहीं। रहा सवाल हमलावर को ट्रेस करने का तो GRP ने स्टेशन पर लगे CCTV देखे, मगर कोई संदिग्ध व्यक्ति नजर नहीं आया है। हम पूरी कोशिश कर रहे हैं कि उनके ऊपर हमला करने वाला जल्द पकड़ा जाए। अब जानिए मेडिकल में क्या हुआ CMO बोले- लेटर मिला, महाराज को दिक्कत है, इसलिए पैनल से मेडिकल कराया
प्रयागराज के CMO डॉ. एके तिवारी कहते हैं- आशुतोष महाराज ने 9 मार्च को लेटर लिखा। वह चाहते थे कि उनको जो चोट लगी हैं, उनकी जांच एक मेडिकल बोर्ड करें। उन्होंने ये भी लिखा कि उन्हें नाक और सिर में दर्द है। सांस लेने में दिक्कत हो रही है। आंखों से कम दिखाई दे रहा है और चक्कर आ रहे हैं। इसके बाद 6 डॉक्टरों का पैनल बनाया गया। इसमें फिजीशियन, ऑर्थोपेडिक सर्जन, नेत्र विशेषज्ञ, ईएनटी सर्जन, जनरल सर्जन और दंत चिकित्सक शामिल थे। डॉक्टरों ने नाक, आंख, दांत और शरीर के अन्य हिस्सों की चोटों की बारीकी से जांच की। इसकी वीडियोग्राफी भी कराई गई। पैनल जो रिपोर्ट तैयार कर रहा है, उसको जांच एजेंसियों को भेजा जाएगा, क्योंकि आगे की कार्रवाई उन्हें करनी है। शंकराचार्य ने कहा था- आरोप फर्जी, यात्रा से ध्यान भटकाने की कोशिश
वहीं, शंकराचार्य ने 8 मार्च (रविवार) को कहा था- ट्रेन का अटेंडेंट कह रहा है कि बाथरूम में गए तब तक तो ठीक थे। बाहर निकलने के बाद इनका यह हाल हो गया। बाहर आने के बाद किसने मार दिया बताइए? यह बनावट है, माहौल बनाने के लिए, सुरक्षा पाने के लिए। दूसरी बात- क्या भारत सरकार की रेल सुरक्षित नहीं रह गई है? आशुतोष हों या कोई और, अगर कोई टिकट लेकर यात्रा कर रहा है तो सुरक्षा में लगी जीआरपी कहां है? कैसे हमला हो जाएगा? इसका जवाब केंद्र को देना होगा। आशुतोष महाराज ने आरोप लगाया था कि वो सबूत देने जा रहे थे, इसलिए हमला हुआ। इस पर शंकराचार्य ने कहा था कि निष्पक्ष जांच हो, दूध का दूध और पानी का पानी किया जाए। जो शुरू से ही जांच के साथ है, वो हमला क्यों करवाएगा? हम तो यात्रा लेकर निकले हैं, हमें क्या पता वो कब कहां जा रहे हैं? ऐसे में हमारे ऊपर आरोप लगाने का मतलब सिर्फ मीडिया का अटेंशन पाना है। यह यात्रा से ध्यान भटकाने की कोशिश है। शंकराचार्य को लेकर जारी विवाद का ताजा मामला विस्तार से पढ़िए ————————— यह खबर भी पढ़ें – शंकराचार्य पर FIR कराने वाले आशुतोष महाराज पर हमला, चलती ट्रेन में चाकू मारे, नाक काटने की कोशिश शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर बटुकों से यौन उत्पीड़न की FIR कराने वाले आशुतोष महाराज पर रविवार को चलती ट्रेन में जानलेवा हमला हुआ। आशुतोष महाराज ने बताया- मैं रीवा एक्सप्रेस ट्रेन से गाजियाबाद से प्रयागराज जा रहा था। फर्स्ट AC कोच में बैठा था। रास्ते में सिराथू रेलवे स्टेशन के पास सुबह करीब 5 बजे टॉयलेट के लिए उठा। बाहर गेट पर एक आदमी खड़ा था। आगे बढ़ा तो उसने पीछे से हमला कर दिया। धारदार हथियार से उसने मेरी नाक काटने की कोशिश की। चेहरे और हाथ पर कई वार किए। गंभीर चोटें आईं। काफी खून बहा। पढ़ें पूरी खबर
आशुतोष महाराज कहते हैं- 8 जनवरी की सुबह 5 बजे मेरे केबिन के बाहर अचानक हमला हो गया। मैं लहूलुहान हो गया था। मैं चिल्लाने लगा, तो वो आदमी बोगी में एक तरफ भाग गया। फिर मैं अपने केबिन की सीट पर आ गया। इसके बाद हमने अपने सहयोगियों को कॉल किया। जब हम प्रयागराज पहुंचे, तब स्टेशन पर पहले से GRP के जवान मौजूद थे। हमने उन्हें बताया कि जिसने मेरे ऊपर हमला किया है, वो बगल की बोगी में भाग निकला है। लेकिन, वो लोग मेरी देखभाल के बहाने मेरे साथ ही रहे। हमलाक रने वाले को पकड़ने के लिए ट्रेन में नहीं गए। हमने शाम करीब 6.15 बजे FIR लिखने के लिए उन्हें शिकायत दे दी थी। लेकिन, उन्होंने मेरी FIR रात 11-12 बजे लिखी। फिर वो मुझे डॉक्टर के पास ले गए, लेकिन वो न जाने किस नींद में थे। मेरा मरहम-पट्टी तो करा दी, लेकिन मेडिकल नहीं कराया। फिर मैं वापस आ गया। मुझे इतना दर्द था कि रात तक मेरी तबीयत बिगड़ गई। मुझे उल्टियां होने लगीं, बुखार भी आ गया। DM, CMO को लिखा, तब ठीक से मेरा मेडिकल हुआ
इसके बाद 9 मार्च को मैंने CMO प्रयागराज को मैसेज किया, लेटर लिखा। फिर मैंने कॉल किया, तो किसी स्टॉफ ने उठाया। कहा कि साहब को बोल रहे हैं, लेकिन न जाने बोला कि नहीं। फिर 10 मार्च की सुबह मैंने DM, प्रयागराज को मैसेज लिखा। जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तब मैंने डिप्टी सीएम को भी मैसेज किया, लगा कि वो ही सुन लें। इतनी लापरवाही के बाद मैंने मेडिकल के लिए डिमांड रखी कि डॉक्टर के पैनल से मेरी जांच करवानी चाहिए। इसके बाद 14 मार्च को सुबह 11.30 बजे प्रयागराज के जिला अस्पताल में मेरा मेडिकल कराया गया। अब प्रयागराज GRP इंस्पेक्टर की बात हमने शिकायत मांगी, आशुतोष ने कहा- वकील से बात करेंगे
इस पूरे मामले में GRP इंस्पेक्टर अखिलेश सिंह से बात की गई। वह कहते हैं- हमने ट्रेन के स्टेशन पहुंचते ही महाराजजी से FIR के लिए कहा था। उन्होंने जवाब दिया कि पहले मेडिकल करवाएंगे, वकील से बात करेंगे। इसके बाद उन्होंने मीडिया के लोगों से बात की। प्रयागराज स्टेशन से सर्किट हाउस चले गए। वहां से कॉल्विन हॉस्पिटल गए। वहीं पर उनकी जांच हुई। एक्स-रे हुआ। फिर GRP को देर शाम को शिकायत मिली, इसलिए रात में 11 बजे FIR लिखी गई। वो मेडिकल बोर्ड बनवाना चाहते थे, इसलिए लेट हुआ
जब GRP इंस्पेक्टर से पूछा गया कि महाराज आरोप लगा रहे हैं कि 8 मार्च को हमले के बाद मेडिकल 14 मार्च को करवाया गया, इतना लेट क्यों हुआ? इस पर इंस्पेक्टर कहते हैं- उनका कहना था कि मेरा मेडिकल डॉक्टर का बोर्ड करेगा। CMO के स्तर से बोर्ड बनाने में टाइम लगा। इसके बाद उनका मेडिकल दोबारा कराया गया। पहला मेडिकल तो 8 मार्च को ही हो गया था। बाकी आशुतोष महाराज को कई बार बुलाया गया, वो आए नहीं। हम मिलने गए, तो वह मिले ही नहीं। रहा सवाल हमलावर को ट्रेस करने का तो GRP ने स्टेशन पर लगे CCTV देखे, मगर कोई संदिग्ध व्यक्ति नजर नहीं आया है। हम पूरी कोशिश कर रहे हैं कि उनके ऊपर हमला करने वाला जल्द पकड़ा जाए। अब जानिए मेडिकल में क्या हुआ CMO बोले- लेटर मिला, महाराज को दिक्कत है, इसलिए पैनल से मेडिकल कराया
प्रयागराज के CMO डॉ. एके तिवारी कहते हैं- आशुतोष महाराज ने 9 मार्च को लेटर लिखा। वह चाहते थे कि उनको जो चोट लगी हैं, उनकी जांच एक मेडिकल बोर्ड करें। उन्होंने ये भी लिखा कि उन्हें नाक और सिर में दर्द है। सांस लेने में दिक्कत हो रही है। आंखों से कम दिखाई दे रहा है और चक्कर आ रहे हैं। इसके बाद 6 डॉक्टरों का पैनल बनाया गया। इसमें फिजीशियन, ऑर्थोपेडिक सर्जन, नेत्र विशेषज्ञ, ईएनटी सर्जन, जनरल सर्जन और दंत चिकित्सक शामिल थे। डॉक्टरों ने नाक, आंख, दांत और शरीर के अन्य हिस्सों की चोटों की बारीकी से जांच की। इसकी वीडियोग्राफी भी कराई गई। पैनल जो रिपोर्ट तैयार कर रहा है, उसको जांच एजेंसियों को भेजा जाएगा, क्योंकि आगे की कार्रवाई उन्हें करनी है। शंकराचार्य ने कहा था- आरोप फर्जी, यात्रा से ध्यान भटकाने की कोशिश
वहीं, शंकराचार्य ने 8 मार्च (रविवार) को कहा था- ट्रेन का अटेंडेंट कह रहा है कि बाथरूम में गए तब तक तो ठीक थे। बाहर निकलने के बाद इनका यह हाल हो गया। बाहर आने के बाद किसने मार दिया बताइए? यह बनावट है, माहौल बनाने के लिए, सुरक्षा पाने के लिए। दूसरी बात- क्या भारत सरकार की रेल सुरक्षित नहीं रह गई है? आशुतोष हों या कोई और, अगर कोई टिकट लेकर यात्रा कर रहा है तो सुरक्षा में लगी जीआरपी कहां है? कैसे हमला हो जाएगा? इसका जवाब केंद्र को देना होगा। आशुतोष महाराज ने आरोप लगाया था कि वो सबूत देने जा रहे थे, इसलिए हमला हुआ। इस पर शंकराचार्य ने कहा था कि निष्पक्ष जांच हो, दूध का दूध और पानी का पानी किया जाए। जो शुरू से ही जांच के साथ है, वो हमला क्यों करवाएगा? हम तो यात्रा लेकर निकले हैं, हमें क्या पता वो कब कहां जा रहे हैं? ऐसे में हमारे ऊपर आरोप लगाने का मतलब सिर्फ मीडिया का अटेंशन पाना है। यह यात्रा से ध्यान भटकाने की कोशिश है। शंकराचार्य को लेकर जारी विवाद का ताजा मामला विस्तार से पढ़िए ————————— यह खबर भी पढ़ें – शंकराचार्य पर FIR कराने वाले आशुतोष महाराज पर हमला, चलती ट्रेन में चाकू मारे, नाक काटने की कोशिश शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर बटुकों से यौन उत्पीड़न की FIR कराने वाले आशुतोष महाराज पर रविवार को चलती ट्रेन में जानलेवा हमला हुआ। आशुतोष महाराज ने बताया- मैं रीवा एक्सप्रेस ट्रेन से गाजियाबाद से प्रयागराज जा रहा था। फर्स्ट AC कोच में बैठा था। रास्ते में सिराथू रेलवे स्टेशन के पास सुबह करीब 5 बजे टॉयलेट के लिए उठा। बाहर गेट पर एक आदमी खड़ा था। आगे बढ़ा तो उसने पीछे से हमला कर दिया। धारदार हथियार से उसने मेरी नाक काटने की कोशिश की। चेहरे और हाथ पर कई वार किए। गंभीर चोटें आईं। काफी खून बहा। पढ़ें पूरी खबर