यूपी के बिजली मंत्री एके शर्मा कह रहे हैं- हमारे सामने ट्रांसफॉर्मर जल रहे हैं। हमें विधायक और जनप्रतिनिधि गाली दे रहे हैं। यूपी सरकार को गाली दे रहे हैं। जब मंत्री खुद ही इतने मजबूर हैं, तो ये आम जनता की सुनवाई क्या खाक करेंगे? ऊर्जा मंत्री एके शर्मा के X अकाउंट पर इसी तरह की शिकायतों का अंबार लगा है, जो बिजली विभाग की नाकामी को उजागर करता है। प्रदेश में शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में लोग बिजली कटौती, लो-वोल्टेज, जर्जर तारों और जले हुए ट्रांसफॉर्मरों से जूझ रहे हैं। लखनऊ जैसे महानगर से लेकर सुदूर गांवों तक बिजली की अनियमित आपूर्ति ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। देश में बिजली सप्लाई का रिकॉर्ड बना रहे यूपी में आखिर क्यों उपभोक्ता त्रस्त है? क्यों मंत्री को कहना पड़ा कि “भय बिनु होत न प्रीत”? पढ़िए खास रिपोर्ट… प्रदेश में कहीं भी रोस्टर के मुताबिक बिजली की सप्लाई नहीं हो रही
प्रदेश में मौजूदा समय में बिजली की डिमांड 28 हजार मेगावाट से ऊपर चल रही है। प्रदेश के कई हिस्से में बारिश न होने से भारी उमस हो रही है। ऐसे में बिजली की खपत बढ़ गई है। आलम ये है कि सप्लाई से अधिक बिजली की मांग है, जो सरकार पूरी नहीं कर पा रही। यही कारण है कि इस गैप को पूरा करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की कटौती की जा रही है। हालांकि, ऊर्जा विभाग प्रदेश में बिजली कटौती की बात को सिरे से खारिज करता है। उसका दावा है कि शहरों, कस्बों और शहरी मुख्यालयों के लिए बिजली सप्लाई का रोस्टर बना है। उसी के अनुसार प्रदेश में बिजली की सप्लाई की जा रही है। प्रदेश सरकार ने पूरे प्रदेश में 18 से 24 घंटे बिजली सप्लाई का रोस्टर तैयार किया है। इसमें शहरी फीडर से 24 घंटे, तहसील वाले फीडर से 21.30 घंटे और ग्रामीण फीडर से 18 घंटे बिजली सप्लाई देने का निर्देश है। लेकिन UPPCL की विभागीय वेबसाइट पर अपलोड आंकड़े इस दावे की पोल खोलते हैं। हकीकत यह है कि प्रदेश में कई जिलों में औसतन 13 से 23 घंटे ही बिजली सप्लाई कर पा रहे हैं। बिजली मंत्री का वो बयान, जो उन्होंने विभागीय बैठक में बोला था
ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा 23 जुलाई को प्रदेशभर के पावर कॉर्पोरेशन अधिकारियों के साथ बैठक में बेहद नाराज और आक्रोशित दिखे। उन्होंने चेयरमैन से लेकर एक्सईएन स्तर तक के अफसरों को जमकर फटकार लगाई। कहा, “मैं आज बेहद नाराज और दुखी होकर इस बैठक में आया हूं। ये जो रिपोर्ट आपने बनाई है, इसका कोई मतलब नहीं है।” उन्होंने आगे कहा- “आशीष, मैं तुम्हें भी कह रहा हूं, हम ये कोई प्राइवेट दुकान नहीं चला रहे कि पैसा नहीं तो बिजली नहीं। यह पब्लिक सर्विस है, सेवा देनी पड़ेगी। आपने क्या व्यवस्था बना दी है? एक घर का बिल नहीं भरा, तो पूरे गांव की बिजली काट दी। ये किस तरह की मानसिकता है?” ऊर्जा मंत्री शर्मा यहीं नहीं रुके। बोले- “गलत जगह विजिलेंस के छापे मारे जा रहे हैं। जहां असली बिजली चोरी हो रही, वहां कोई नहीं जाता। वहां से FIR दर्ज करने के नाम पर पैसा वसूला जा रहा है।” “आप लोग अंधे, बहरे, काने बन बैठे हो! हम जनसेवा चला रहे हैं, मुनाफे की दुकान नहीं! ट्रांसफॉर्मर जल जाए और हफ्तों तक न बदला जाए, ये कौन सा न्याय है? क्या आप लोगों ने सरकार को बदनाम करने की सुपारी ले रखी है?” “जनता को फेस करिए, उनके बीच जाइए। कुर्सी पर बैठकर ‘ऑल इज वेल’ की झूठी रिपोर्ट बनाने से कुछ नहीं होगा।” ऊर्जा मंत्री के इस तेवर के बाद सवाल उठ रहे हैं कि आखिर उनकी नाराजगी की वजह क्या है? क्या वाकई में प्रदेश में बिजली की हालत बहुत बदहाल हो चुकी है? गांव से शहर तक एक जैसी कहानी अंबेडकर नगर: तेंदुआईकला गांव के लकीकांत ने सोशल मीडिया X पर अपनी व्यथा शेयर की। उन्होंने लिखा- 3 महीने से बिजली ट्रिपिंग की समस्या है। 2 हजार की आबादी वाले इस गांव में हर आधे घंटे में बिजली गुल हो जाती है। रात 10 बजे कटती है, सुबह 3 बजे आती है। गर्मी में नींद तक पूरी नहीं हो पाती। कई शिकायतों के बाद भी समाधान नहीं हुआ। इसी जिले के कल्याणपुर गांव के गुड्डू ने बताया- हमें 4-5 घंटे ही बिजली मिल रही। पावर हाउस वाले कहते हैं कि ओवरलोड की वजह से सप्लाई बाधित है। लेकिन कोई समाधान नहीं। लखनऊ: राजधानी में भी हालात बदतर हैं। मोहम्मद नौशाद लखनवी ने ऊर्जा मंत्री को X पर तंज कसते हुए लिखा- महोदय, आप सिर्फ झूठे फोटो डालते हैं। लखनऊ की बिजली व्यवस्था यूपी में सबसे खराब है। कई साल से एक फेस की समस्या का समाधान नहीं हुआ। चिनहट के ईश्वर पांडेय ने कहा- नए मोहल्लों में 2-4 घंटे की कटौती आम है। टोल-फ्री नंबर पर कोई सुनता नहीं। कोई मॉनिटरिंग नहीं होती। प्रयागराज: हाईकोर्ट के वकील मयंक ने लिखा- 2 महीने से पोर्टल पर शिकायत कर रहा हूं, लेकिन सुनवाई नहीं। ऊर्जा मंत्री को X पर टैग किया, फिर भी कोई जवाब नहीं। क्या यही है जनता सर्वोपरि? आजमगढ़: एक उपभोक्ता ने तंज कसते हुए लिखा- मंत्रीजी, ट्विटर से बिजली व्यवस्था नहीं चलती। 12 जुलाई से बिजली गायब है। भ्रष्टाचार चरम पर है। नया ट्रांसफॉर्मर 4 घंटे ही चलता है। जौनपुर: शुभम कुमार अग्रहरि ने बताया- पिलकिछा पावर हाउस के पास 25 केवीए का ट्रांसफॉर्मर 144 घंटे से जला पड़ा है। शिकायत (PU19072515028) के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं। मैनपुरी: पुष्पेंद्र देवा ने गलत बिलिंग की शिकायत की- महीने का बिल 15-20 हजार आ रहा है। दो बार शिकायत की, लेकिन समाधान नहीं। बिजली विभाग सबसे भ्रष्ट है। किसानों की मुश्किलें: खेती पर संकट
बिजली संकट ने किसानों को भी नहीं बख्शा है। फतेहपुर के ललौली गांव के मोहम्मद रिजवान खान ने कहा- आपके बड़े अधिकारी काम नहीं कर रहे। हमारे गांव में बिजली की हालत खराब है। खेती प्रभावित हो रही है। रायबरेली के रंजीत सैनी ने लिखा- चार दिन से दिन में 2 घंटे ही बिजली मिल रही। किसान विरोधी बन रही है सरकार। विभाग का जवाब- ट्रांसफॉर्मर ओवरलोड है। देवरिया के खुखुंदू गांव के मनोज शर्मा राय ने कहा- बिजली आती ही नहीं, और आती है तो लो-वोल्टेज। नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। इटावा के सैफई के निर्माद कुमार ने बताया- 18 घंटे का रोस्टर है, लेकिन 8-9 घंटे ही बिजली मिलती है। शिकायत का कोई जवाब नहीं। मंत्री के गृह जिले मऊ में भी बदहाली
ऊर्जा मंत्री एके शर्मा के गृह जिले मऊ में भी बिजली की हालत बदतर है। मित्तूपुर गांव के रजनीश मौर्य ने X पर लिखा- सितंबर, 2022 से टूटा पोल और केबल नहीं बदला गया। हम खुद केबल लगाकर काम चला रहे हैं। 3 साल से कोई समाधान नहीं। शाहजहांपुर की सुभाषनगर कॉलोनी के बलबीर सिंह ने बताया- हमारे मोहल्ले में आज तक बिजली कनेक्शन नहीं पहुंचा। न घर में लाइट, न गलियों में स्ट्रीट लाइट। अंधेरे में जीने को मजबूर हैं। जर्जर ढांचा और मनमाने बिल से लोग परेशान
प्रदेश में बिजली का बुनियादी ढांचा जर्जर है। रायबरेली के मखदुमपुर गांव के सतेंद्र ने बताया- 70 घरों की बिजली जर्जर केबल पर टिकी है। वोल्टेज 100 से ऊपर नहीं जाता। शिकायत के बाद भी 3 महीने में केबल नहीं बदला। मीरजापुर के सुजीत विश्वकर्मा ने कहा- 5 साल से मीटर रीडिंग नहीं। परिवार मुंबई में रहता है, गांव का घर बंद था, फिर भी 28 हजार का बिल जारी कर दिया। सिद्धार्थनगर के प्रदीप श्रीवास्तव ने लिखा- लोटन ब्लॉक में रात में बिजली आती ही नहीं। मुश्किल से 10 घंटे मिलती है। सरकारी दावे और हकीकत सरकार ने बिजली उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए बिल सुधार कैंप, 1912 हेल्पलाइन और कंज्यूमर ऐप जैसे उपायों का दावा किया है। लेकिन, उपभोक्ताओं का कहना है कि ये सुविधाएं कागजों तक सीमित हैं। एक उपभोक्ता ने लिखा- 3 महीने से शिकायत कर रहे हैं, लेकिन जर्जर केबल नहीं बदली गई। जबकि प्रदेश सरकार ने खराब ट्रांसफॉर्मर बदलने के लिए “Standard of Performance Regulations, 2019” के तहत समय-सीमा निर्धारित की है। इसे 2020 में संशोधित किया गया था। इसके अनुसार- ‘A’ क्लास शहरों (जैसे लखनऊ, प्रयागराज, कानपुर, वाराणसी, आगरा) में खराब ट्रांसफॉर्मर को 6 घंटे के भीतर बदलना अनिवार्य है। अगर ऐसा नहीं होता, तो उपभोक्ताओं को प्रति दिन 150 रुपए का मुआवजा देने का नियम है। इसी तरह अन्य शहरी क्षेत्र में खराब ट्रांसफॉर्मर को 8 घंटे के भीतर न बदलने पर 150 रुपए प्रतिदिन की दर से मुआवजा देना होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में खराब ट्रांसफॉर्मर को 24 घंटे के भीतर ना बदलने पर 150 रुपए प्रतिदिन की दर से मुआवजा देने का प्रावधान बना है। लेकिन, न तो इसका पालन हो रहा है और न ही क्षतिपूर्ति दी जा रही है। अब गृह जिले मऊ में ऊर्जा मंत्री के तीखे तेवर
ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने 24 घंटे में दूसरी बार बिजली अफसरों को सख्त चेतावनी दी। अपने गृह जिले मऊ में एक कार्यक्रम के मंच से कहा- अगर आपको लगता है कि आप किसी के संरक्षण में रहकर बिजली विभाग और जनता को परेशान करते रहेंगे, तो ये आपका भ्रम है। चाहे राष्ट्रपति भवन तक भाग लें, अब कोई नहीं बचाएगा। उन्होंने रामायण का उल्लेख करते हुए कहा- भगवान राम ने जब जयंत पर तीर छोड़ा तो वह तीनों लोक घूम आया, पर कोई उसे नहीं बचा सका। अंत में प्रभु के चरणों में गिरकर ही बच पाया। उसी तरह हम भी अब ‘तीर’ छोड़ चुके हैं। मंत्री ने कहा कि तीन साल विनम्रता से आग्रह किया, लेकिन अब ‘भय बिनु होई न प्रीति’ की नीति अपनाएंगे। बदमाशी करने वालों पर अब सख्ती तय है। जनता से आह्वान करते हुए कहा- आप हमारी आंख-कान बनिए। जो अफसर लापरवाही या गड़बड़ी करे, उसकी जानकारी दीजिए। कुछ लोग आदतन गड़बड़ी करते हैं, जिन्हें अब बख्शा नहीं जाएगा। ————————– ये खबर भी पढ़ें: ऊर्जा मंत्री एके शर्मा बोले- कहीं चले जाओ, बचोगे नहीं, 24 घंटे में दूसरी बार बिजली अफसरों को हड़काया यूपी के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा 24 घंटे में दूसरी बार बिजली अफसरों को चेतावनी दी। अपने गृह जिले मऊ में कहा कि यहां से आप दिल्ली तक भागेंगे। राष्ट्रपति भवन तक भागेंगे तो आपको कोई बचाने वाला नहीं मिलेगा। ना तो कोई आपके साथ खड़ा रहेगा। अगर आपको लगता है आप किसी के संरक्षण में बिजली विभाग को और आम जनता को परेशान करके सुरक्षित रह सकते हैं। तो आपकी बहुत बड़ी भूल और भ्रम है। पढ़िए पूरी खबर…
प्रदेश में मौजूदा समय में बिजली की डिमांड 28 हजार मेगावाट से ऊपर चल रही है। प्रदेश के कई हिस्से में बारिश न होने से भारी उमस हो रही है। ऐसे में बिजली की खपत बढ़ गई है। आलम ये है कि सप्लाई से अधिक बिजली की मांग है, जो सरकार पूरी नहीं कर पा रही। यही कारण है कि इस गैप को पूरा करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की कटौती की जा रही है। हालांकि, ऊर्जा विभाग प्रदेश में बिजली कटौती की बात को सिरे से खारिज करता है। उसका दावा है कि शहरों, कस्बों और शहरी मुख्यालयों के लिए बिजली सप्लाई का रोस्टर बना है। उसी के अनुसार प्रदेश में बिजली की सप्लाई की जा रही है। प्रदेश सरकार ने पूरे प्रदेश में 18 से 24 घंटे बिजली सप्लाई का रोस्टर तैयार किया है। इसमें शहरी फीडर से 24 घंटे, तहसील वाले फीडर से 21.30 घंटे और ग्रामीण फीडर से 18 घंटे बिजली सप्लाई देने का निर्देश है। लेकिन UPPCL की विभागीय वेबसाइट पर अपलोड आंकड़े इस दावे की पोल खोलते हैं। हकीकत यह है कि प्रदेश में कई जिलों में औसतन 13 से 23 घंटे ही बिजली सप्लाई कर पा रहे हैं। बिजली मंत्री का वो बयान, जो उन्होंने विभागीय बैठक में बोला था
ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा 23 जुलाई को प्रदेशभर के पावर कॉर्पोरेशन अधिकारियों के साथ बैठक में बेहद नाराज और आक्रोशित दिखे। उन्होंने चेयरमैन से लेकर एक्सईएन स्तर तक के अफसरों को जमकर फटकार लगाई। कहा, “मैं आज बेहद नाराज और दुखी होकर इस बैठक में आया हूं। ये जो रिपोर्ट आपने बनाई है, इसका कोई मतलब नहीं है।” उन्होंने आगे कहा- “आशीष, मैं तुम्हें भी कह रहा हूं, हम ये कोई प्राइवेट दुकान नहीं चला रहे कि पैसा नहीं तो बिजली नहीं। यह पब्लिक सर्विस है, सेवा देनी पड़ेगी। आपने क्या व्यवस्था बना दी है? एक घर का बिल नहीं भरा, तो पूरे गांव की बिजली काट दी। ये किस तरह की मानसिकता है?” ऊर्जा मंत्री शर्मा यहीं नहीं रुके। बोले- “गलत जगह विजिलेंस के छापे मारे जा रहे हैं। जहां असली बिजली चोरी हो रही, वहां कोई नहीं जाता। वहां से FIR दर्ज करने के नाम पर पैसा वसूला जा रहा है।” “आप लोग अंधे, बहरे, काने बन बैठे हो! हम जनसेवा चला रहे हैं, मुनाफे की दुकान नहीं! ट्रांसफॉर्मर जल जाए और हफ्तों तक न बदला जाए, ये कौन सा न्याय है? क्या आप लोगों ने सरकार को बदनाम करने की सुपारी ले रखी है?” “जनता को फेस करिए, उनके बीच जाइए। कुर्सी पर बैठकर ‘ऑल इज वेल’ की झूठी रिपोर्ट बनाने से कुछ नहीं होगा।” ऊर्जा मंत्री के इस तेवर के बाद सवाल उठ रहे हैं कि आखिर उनकी नाराजगी की वजह क्या है? क्या वाकई में प्रदेश में बिजली की हालत बहुत बदहाल हो चुकी है? गांव से शहर तक एक जैसी कहानी अंबेडकर नगर: तेंदुआईकला गांव के लकीकांत ने सोशल मीडिया X पर अपनी व्यथा शेयर की। उन्होंने लिखा- 3 महीने से बिजली ट्रिपिंग की समस्या है। 2 हजार की आबादी वाले इस गांव में हर आधे घंटे में बिजली गुल हो जाती है। रात 10 बजे कटती है, सुबह 3 बजे आती है। गर्मी में नींद तक पूरी नहीं हो पाती। कई शिकायतों के बाद भी समाधान नहीं हुआ। इसी जिले के कल्याणपुर गांव के गुड्डू ने बताया- हमें 4-5 घंटे ही बिजली मिल रही। पावर हाउस वाले कहते हैं कि ओवरलोड की वजह से सप्लाई बाधित है। लेकिन कोई समाधान नहीं। लखनऊ: राजधानी में भी हालात बदतर हैं। मोहम्मद नौशाद लखनवी ने ऊर्जा मंत्री को X पर तंज कसते हुए लिखा- महोदय, आप सिर्फ झूठे फोटो डालते हैं। लखनऊ की बिजली व्यवस्था यूपी में सबसे खराब है। कई साल से एक फेस की समस्या का समाधान नहीं हुआ। चिनहट के ईश्वर पांडेय ने कहा- नए मोहल्लों में 2-4 घंटे की कटौती आम है। टोल-फ्री नंबर पर कोई सुनता नहीं। कोई मॉनिटरिंग नहीं होती। प्रयागराज: हाईकोर्ट के वकील मयंक ने लिखा- 2 महीने से पोर्टल पर शिकायत कर रहा हूं, लेकिन सुनवाई नहीं। ऊर्जा मंत्री को X पर टैग किया, फिर भी कोई जवाब नहीं। क्या यही है जनता सर्वोपरि? आजमगढ़: एक उपभोक्ता ने तंज कसते हुए लिखा- मंत्रीजी, ट्विटर से बिजली व्यवस्था नहीं चलती। 12 जुलाई से बिजली गायब है। भ्रष्टाचार चरम पर है। नया ट्रांसफॉर्मर 4 घंटे ही चलता है। जौनपुर: शुभम कुमार अग्रहरि ने बताया- पिलकिछा पावर हाउस के पास 25 केवीए का ट्रांसफॉर्मर 144 घंटे से जला पड़ा है। शिकायत (PU19072515028) के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं। मैनपुरी: पुष्पेंद्र देवा ने गलत बिलिंग की शिकायत की- महीने का बिल 15-20 हजार आ रहा है। दो बार शिकायत की, लेकिन समाधान नहीं। बिजली विभाग सबसे भ्रष्ट है। किसानों की मुश्किलें: खेती पर संकट
बिजली संकट ने किसानों को भी नहीं बख्शा है। फतेहपुर के ललौली गांव के मोहम्मद रिजवान खान ने कहा- आपके बड़े अधिकारी काम नहीं कर रहे। हमारे गांव में बिजली की हालत खराब है। खेती प्रभावित हो रही है। रायबरेली के रंजीत सैनी ने लिखा- चार दिन से दिन में 2 घंटे ही बिजली मिल रही। किसान विरोधी बन रही है सरकार। विभाग का जवाब- ट्रांसफॉर्मर ओवरलोड है। देवरिया के खुखुंदू गांव के मनोज शर्मा राय ने कहा- बिजली आती ही नहीं, और आती है तो लो-वोल्टेज। नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। इटावा के सैफई के निर्माद कुमार ने बताया- 18 घंटे का रोस्टर है, लेकिन 8-9 घंटे ही बिजली मिलती है। शिकायत का कोई जवाब नहीं। मंत्री के गृह जिले मऊ में भी बदहाली
ऊर्जा मंत्री एके शर्मा के गृह जिले मऊ में भी बिजली की हालत बदतर है। मित्तूपुर गांव के रजनीश मौर्य ने X पर लिखा- सितंबर, 2022 से टूटा पोल और केबल नहीं बदला गया। हम खुद केबल लगाकर काम चला रहे हैं। 3 साल से कोई समाधान नहीं। शाहजहांपुर की सुभाषनगर कॉलोनी के बलबीर सिंह ने बताया- हमारे मोहल्ले में आज तक बिजली कनेक्शन नहीं पहुंचा। न घर में लाइट, न गलियों में स्ट्रीट लाइट। अंधेरे में जीने को मजबूर हैं। जर्जर ढांचा और मनमाने बिल से लोग परेशान
प्रदेश में बिजली का बुनियादी ढांचा जर्जर है। रायबरेली के मखदुमपुर गांव के सतेंद्र ने बताया- 70 घरों की बिजली जर्जर केबल पर टिकी है। वोल्टेज 100 से ऊपर नहीं जाता। शिकायत के बाद भी 3 महीने में केबल नहीं बदला। मीरजापुर के सुजीत विश्वकर्मा ने कहा- 5 साल से मीटर रीडिंग नहीं। परिवार मुंबई में रहता है, गांव का घर बंद था, फिर भी 28 हजार का बिल जारी कर दिया। सिद्धार्थनगर के प्रदीप श्रीवास्तव ने लिखा- लोटन ब्लॉक में रात में बिजली आती ही नहीं। मुश्किल से 10 घंटे मिलती है। सरकारी दावे और हकीकत सरकार ने बिजली उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए बिल सुधार कैंप, 1912 हेल्पलाइन और कंज्यूमर ऐप जैसे उपायों का दावा किया है। लेकिन, उपभोक्ताओं का कहना है कि ये सुविधाएं कागजों तक सीमित हैं। एक उपभोक्ता ने लिखा- 3 महीने से शिकायत कर रहे हैं, लेकिन जर्जर केबल नहीं बदली गई। जबकि प्रदेश सरकार ने खराब ट्रांसफॉर्मर बदलने के लिए “Standard of Performance Regulations, 2019” के तहत समय-सीमा निर्धारित की है। इसे 2020 में संशोधित किया गया था। इसके अनुसार- ‘A’ क्लास शहरों (जैसे लखनऊ, प्रयागराज, कानपुर, वाराणसी, आगरा) में खराब ट्रांसफॉर्मर को 6 घंटे के भीतर बदलना अनिवार्य है। अगर ऐसा नहीं होता, तो उपभोक्ताओं को प्रति दिन 150 रुपए का मुआवजा देने का नियम है। इसी तरह अन्य शहरी क्षेत्र में खराब ट्रांसफॉर्मर को 8 घंटे के भीतर न बदलने पर 150 रुपए प्रतिदिन की दर से मुआवजा देना होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में खराब ट्रांसफॉर्मर को 24 घंटे के भीतर ना बदलने पर 150 रुपए प्रतिदिन की दर से मुआवजा देने का प्रावधान बना है। लेकिन, न तो इसका पालन हो रहा है और न ही क्षतिपूर्ति दी जा रही है। अब गृह जिले मऊ में ऊर्जा मंत्री के तीखे तेवर
ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने 24 घंटे में दूसरी बार बिजली अफसरों को सख्त चेतावनी दी। अपने गृह जिले मऊ में एक कार्यक्रम के मंच से कहा- अगर आपको लगता है कि आप किसी के संरक्षण में रहकर बिजली विभाग और जनता को परेशान करते रहेंगे, तो ये आपका भ्रम है। चाहे राष्ट्रपति भवन तक भाग लें, अब कोई नहीं बचाएगा। उन्होंने रामायण का उल्लेख करते हुए कहा- भगवान राम ने जब जयंत पर तीर छोड़ा तो वह तीनों लोक घूम आया, पर कोई उसे नहीं बचा सका। अंत में प्रभु के चरणों में गिरकर ही बच पाया। उसी तरह हम भी अब ‘तीर’ छोड़ चुके हैं। मंत्री ने कहा कि तीन साल विनम्रता से आग्रह किया, लेकिन अब ‘भय बिनु होई न प्रीति’ की नीति अपनाएंगे। बदमाशी करने वालों पर अब सख्ती तय है। जनता से आह्वान करते हुए कहा- आप हमारी आंख-कान बनिए। जो अफसर लापरवाही या गड़बड़ी करे, उसकी जानकारी दीजिए। कुछ लोग आदतन गड़बड़ी करते हैं, जिन्हें अब बख्शा नहीं जाएगा। ————————– ये खबर भी पढ़ें: ऊर्जा मंत्री एके शर्मा बोले- कहीं चले जाओ, बचोगे नहीं, 24 घंटे में दूसरी बार बिजली अफसरों को हड़काया यूपी के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा 24 घंटे में दूसरी बार बिजली अफसरों को चेतावनी दी। अपने गृह जिले मऊ में कहा कि यहां से आप दिल्ली तक भागेंगे। राष्ट्रपति भवन तक भागेंगे तो आपको कोई बचाने वाला नहीं मिलेगा। ना तो कोई आपके साथ खड़ा रहेगा। अगर आपको लगता है आप किसी के संरक्षण में बिजली विभाग को और आम जनता को परेशान करके सुरक्षित रह सकते हैं। तो आपकी बहुत बड़ी भूल और भ्रम है। पढ़िए पूरी खबर…