एक थप्पड़ का इंतकाम, मेरठ का सेंट्रल मार्केट धड़ाम:1990 में बना कॉम्प्लेक्स, गिराने में लगे 35 साल; व्यापारी बोले- अब कहां जाएं?

मेरठ की प्रमुख सेंट्रल मार्केट में 22 दुकानों वाला अवैध कॉम्प्लेक्स 25-26 अक्टूबर को ढहा दिया गया। व्यापारियों, आवास-विकास परिषद और अदालतों के बीच करीब 35 साल तक कानूनी लड़ाई चली। अब व्यापारी फूट-फूटकर रो रहे हैं। बुलडोजर नीति का विरोध कर रहे हैं। इस कॉम्प्लेक्स पर कानूनी लड़ाई की शुरुआत साल-1990 से हुई थी। जब निर्माण रुकवाने पहुंचे आवास-विकास परिषद के अधीक्षण अभियंता को एक व्यापारी ने थप्पड़ मार दिया था। हालांकि, वो अभियंता और थप्पड़ मारने वाले व्यापारी अब जीवित नहीं हैं। इन 2 लोगों के बीच शुरू हुई लड़ाई में 22 व्यापारियों का परिवार फिलहाल सड़क पर आ गया है। इस बीच आवास-विकास ने मेरठ के कई नामचीन प्रतिष्ठानों को अवैध बताते हुए खाली करने के नोटिस दिए हैं। बड़ा सवाल यही है कि इन व्यापारियों का अब क्या होगा? दैनिक भास्कर ने ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर ये पूरी कंट्रोवर्सी समझी। आंदोलन कर रहे व्यापारियों का दर्द जाना। पूरी रिपोर्ट पढ़िए… एक थप्पड़ और 35 साल की कानूनी लड़ाई साल-1990 की बात है। मेरठ में आवास-विकास को सूचना मिली कि आवासीय भूखंड पर कॉम्प्लेक्स का निर्माण सेंट्रल मार्केट में किया जा रहा है। अधीक्षण अभियंता अरविंद कुमार भूखंड संख्या 661/6 पर पहुंचे। उन्होंने लेंटर कार्य रुकवाने का प्रयास किया। इस पर स्थानीय व्यापारियों ने हंगामा खड़ा कर दिया। बात इतनी बढ़ गई कि व्यापारियों ने अधीक्षण अभियंता को थप्पड़ मार दिया। इस मामले में नौचंदी थाने में FIR दर्ज हुई। इसके बाद आवास विकास ने कई बार अवैध कॉम्प्लेक्स को गिराना चाहा, लेकिन कुछ न कुछ अड़चन आ गई। ऐसे में आवास-विकास ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिट दायर की। साल-2014 में हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि 2 महीने में ये अवैध इमारत गिराई जाए। व्यापारियों ने इस आदेश को चुनौती दी और सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए। करीब 10 साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने 17 सितंबर, 2025 को कॉम्प्लेक्स नंबर 661/6 सहित सभी अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने का आदेश दिया। 25 अक्टूबर, 2025 को 22 दुकानों वाले इस कॉम्प्लेक्स को ढहा दिया गया। कई दिन से बंद है सेंट्रल मार्केट 25 अक्टूबर को सेंट्रल मार्केट के अवैध कॉम्प्लेक्स पर बुलडोजर कार्रवाई शुरू हुई, जो 26 अक्टूबर, 2025 तक चली। तभी से सेंट्रल मार्केट पूरी तरह बंद है। यहां के व्यापारी आंदोलन कर रहे हैं। कैलाश डेयरी के पास व्यापारियों ने टेंट लगाया हुआ है। यहां दिनभर सभा चलती है। तमाम राजनीतिक और व्यापारिक संगठन आकर समर्थन दे रहे हैं। वो मंच पर माइक से अपनी बात रख रहे हैं। 28 अक्टूबर को इन व्यापारियों ने एक रैली भी निकाली। धरनास्थल के पास ही व्यापारियों ने भट्ठी चढ़ाई है। यहीं पर उनका नाश्ता-खाना तैयार होता है। मार्केट बंद रहने से कस्टमर वापस जा रहे हैं। वहीं, रोजाना करोड़ों रुपए का कारोबार प्रभावित हो रहा है। अब व्यापारियों की बात ‘अधिकारी पैसा कमाने के लिए दुकान तोड़ने के नोटिस दे रहे’
शास्त्रीनगर-जागृति विहार संयुक्त व्यापार संघ के संरक्षक सतीश गर्ग कहते हैं- सुप्रीम कोर्ट में भूखंड संख्या 661/6 का मुकदमा चल रहा था। सुप्रीम कोर्ट ने उस भूखंड पर बने कॉम्प्लेक्स को ध्वस्त करने का आदेश दिया। हमारा ये कहना है कि जब उक्त भूखंड ध्वस्त कर दिया, तो आवास-विकास बाकी दुकानदारों को क्यों परेशान कर रहा है। इनका तो कोई मुकदमा सुप्रीम कोर्ट में भी नहीं है। आवास-विकास के अधिकारी अनावश्यक रूप से पैसा कमाने के लिए इन बाकी दुकानों को तोड़ने का दबाव बना रहे हैं। हमारी सरकार से मांग है कि वो इस पर ध्यान दे। आवास-विकास के अधिकारी करीब 2250 दुकानों को नोटिस दे चुके हैं। ‘मेयर पुनर्वास की रूपरेखा बनाकर प्रस्ताव पास करें’
व्यापारी नेता विजय गांधी कहते हैं- कॉम्प्लेक्स ढहाना बहुत दुखदायी है। हम उधर से निकलते हैं, तो घर के अंदर मातम जैसा चित्र दिख रहा। अब सरकार को चाहिए कि वो इन व्यापारियों को रिलीफ देने के लिए कोई कदम उठाए। चाहे तो मर्सी अपील दायर की जा सकती है। उसमें इन व्यापारियों को थोड़ा बहुत अर्थदंड लगाकर माफ किया जा सकता है। दूसरा विकल्प पुनर्वास का है। मेयर ने पुनर्वास का विकल्प दिया है, लेकिन उसकी रूपरेखा नहीं बताई। मेयर को चाहिए कि पीड़ित व्यापारियों के पुनर्वासन का मसौदा तैयार करके उसका प्रस्ताव नगर निगम से तत्काल पास कराकर लखनऊ भेजें। जिन व्यापारियों की दुकानें टूटीं, उनका क्या? मेयर बोले– नए कॉम्प्लेक्स में प्रमुखता से देंगे दुकानें
अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि जिन 22 व्यापारियों की दुकानें टूटी हैं, उनका अब क्या होगा? वे कहां जाएंगे? इस कॉम्प्लेक्स के प्रमुख किरदार रहे दिवंगत व्यापारी विनोद अरोड़ा के बेटे रजत अरोड़ा ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा- जब 2012 में मैंने कुछ दुकानें बनाई थीं। जिंदगी सुरक्षित और आगे बढ़ने की उम्मीदों से भरी हुई लगती थी। लेकिन, आज समझ नहीं आ रहा कि कहां जाएं और क्या करें? एक पूरा दौर आज समाप्त हो गया। इधर, ध्वस्तीकरण के बाद BJP के कुछ नेता अब व्यापारियों संग नजर आने लगे हैं। BJP व्यापार प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक विनीत अग्रवाल शारदा ने 5 लाख रुपए की आर्थिक मदद की है। ये भी कहा कि वो ऐसी मदद आगे भी करेंगे। वहीं, मेरठ के BJP मेयर हरिकांत अहलूवालिया ने बताया कि शास्त्रीनगर नई सड़क पर नगर निगम का अत्याधुनिक कार्यालय बनकर तैयार है। इसी के पास एक कॉम्प्लेक्स भी बनाया जाएगा। इस नए कॉम्प्लेक्स में उन व्यापारियों को दुकान आवंटन में प्रमुखता दी जाएगी, जिनकी दुकानें सेंट्रल मार्केट में ध्वस्त हुई हैं। पार्षद बोले- नई बिल्डिंग में इन व्यापारियों को समायोजित करेंगे
इस क्षेत्र के पार्षद और व्यापारी वीरेंद्र शर्मा बिल्लू कहते हैं- सुप्रीम कोर्ट का आदेश था, उसके तहत डिमॉलिशन हुआ। अब भाजपा के लोगों ने संज्ञान लिया है। मेयर ने कहा है कि जो नगर निगम की नई सड़क पर बिल्डिंग बन रही, वहां इन व्यापारियों का समायोजन करने का प्रयास किया जाएगा। इस बिल्डिंग पर काम तेजी से चल रहा है। बिल्डिंग का निर्माण कार्य आखिरी चरण में है। थोड़ा समय जरूर लगेगा, लेकिन कोई और विकल्प नहीं। सरकार जरूर इन व्यापारियों के पुनर्वास के बारे में सोच सकती है, तो उसका प्रयास भी पार्टी स्तर पर किया जा रहा है। जैना ज्वैलर्स समेत कई दुकानों को खाली करने का नोटिस
आवास-विकास परिषद, मेरठ में सिर्फ एक कॉम्प्लेक्स गिराकर ही नहीं थमा है। अब कई और अवैध निर्माणों को भी नोटिस देना शुरू किया है। परिषद ने 27 अक्टूबर को सेंट्रल मार्केट स्थित जैना ज्वैलर्स पर नोटिस चिपका दिया। नोटिस में कॉमर्शियल प्रयोग को 15 दिन के भीतर स्वयं हटा लेने की बात कही गई है। 22 सितंबर को इस शोरूम का उद्घाटन बॉलीवुड एक्ट्रेस हेमा मालिनी ने किया था। इसके अलावा आवास-विकास ने शास्त्रीनगर योजना में कुल 1468 अवैध निर्माण चिह्नित किए हुए हैं। ये भी अब रडार पर आ गए हैं। जागृति विहार और माधवपुरम में भी 150 से ज्यादा आवंटियों को अवैध निर्माण पर नोटिस दिए गए हैं। आवास-विकास परिषद के अधीक्षण अभियंता राजीव कुमार ने बताया- सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ही सेंट्रल मार्केट में अवैध कॉम्प्लेक्स ढहाया गया। बाकी अवैध निर्माण भी लगातार चिह्नित किए जा रहे हैं। ये कार्रवाई अब लगातार जारी रहेगी। ‘जिन्हें हम गद्दियों पर बैठा रहे, वही धोखा कर रहे’
सेंट्रल मार्केट में 25 साल से फास्ट फूड शॉप चला रहीं शशि जग्गी को भी आवास-विकास परिषद की तरफ से दुकान खाली करने का नोटिस मिला है। शशि जग्गी बताती हैं- मैंने 25 साल पहले ये दुकान खरीदी थी। अब कई बार नोटिस आ चुका है। लखनऊ में केस चल रहा। शशि जग्गी का कहना है- अगर दुकान गई, तो हमारे पास कुछ और साधन नहीं। हम सड़क पर आ जाएंगे। मेरे बेटे के छोटे-छोटे बच्चे हैं। मेरा पोता दुकानदार बनना चाहता था, फिर वो कहां जाएगा? मकान तो कहीं भी किराए का लेकर रह सकते हैं। दुकानों से मकान बनते हैं, मकानों से दुकान नहीं। बुलडोजर कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए शशि कहती हैं- मुझे अच्छा नहीं लग रहा। प्रशासन की सारी कमी है। जिनको हम गद्दियों पर बैठाते हैं, वही हमारे साथ धोखा कर रहे। आवास-विकास के एक अधिकारी को थप्पड़ मारने की घटना का जिक्र करते हुए वो कहती हैं- उसकी सजा और भी तो दे सकते थे। इतने व्यापारियों को सजा क्यों दी गई? जिनकी 39 साल से दुकानें थीं, उन्हें क्यों सजा मिली? जिसने थप्पड़ मारा, सिर्फ उसी को सजा देते। उसको जेल में डाल देते। आखिर ये सब कब तक चलेगा। ———————- ये खबर भी पढ़ें… ‘भीख मांगें या डकैती डालें, अब कैसे परिवार पालें’, सेंट्रल मार्केट में कॉम्प्लेक्स ध्वस्त होने से बेरोजगार परिवारों का दर्द ‘क्या हमने कहीं चोरी की है? डाका डालकर ये दुकान बनाई है? हमने किसी का पैसा नहीं छीना, न कोई गलत काम किया है। अपना मकान बेचकर ये दुकान खरीदी थी अब हम कहां जाएं? अब इस उम्र में हम किसके आगे भीख मांगे, हाथ फैलाएं? हमारे बच्चों की पढ़ाई, शादियां कैसे होंगी? उनका गुजारा कैसे चलेगा’? पिछले 35 साल से अपने खून-पसीने से सींची दुकान को धराशायी होते देखकर उन 22 व्यापारियों और घर वालों का दिल बैठा जा रहा था, जिनकी दुकानें खाली करवाकर जमींदोज कर दी गईं। पढ़ें पूरी खबर