एक साल के बच्चे को चाहिए 9 करोड़ का इंजेक्शन:मिर्जापुर में माता-पिता ने रोते हुए मदद मांगी; महज 8.12 लाख जुटा पाए

मिर्जापुर में एक दंपती पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उनके इकलौते 13 महीने के बच्चे को स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) नाम की दुर्लभ बीमारी है। यह बीमारी 10 लाख बच्चों में एक को होती है। दिल्ली AIIMS के डॉक्टरों ने 9 करोड़ रुपए का इंजेक्शन लगाने की बात कही है। इतने महंगे इंजेक्शन की कीमत सुनकर बच्चे के माता-पिता के होश उड़ गए। वो परेशान हो गए। इकलौते बेटे की जान बचाने के लिए माता-पिता ने लोगों से मदद की अपील की है। मदद मांगते हुए दोनों भावुक हो गए। पूरा मामला जमालपुर ब्लॉक स्थित करजी गांव का है। 2 फोटो देखिए… अब समझिए पूरा मामला
करजी गांव के आलोक वाराणसी में एक निजी बैंक में काम करते हैं। उनकी शादी साल 2020 में चंदौली जिले की रहने वाली प्रतिभा के साथ हुई थी। शादी के लगभग 3 साल बाद उनके परिवार में बेटे का जन्म हुआ। बेटे का नाम विनायक रखा गया। हंसी खुशी पति पत्नी मिलकर बेटे को पाल रहे थे। AIIMS की जांच में पता चली बीमारी
प्रतिभा ने बताया- बच्चे की उम्र बढ़ी तो उसे सांस लेने में तकलीफ होने लगी। जिले में कई डॉक्टरों को दिखाया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। एक डॉक्टर ने बीमारी का पता तो लगाया, लेकिन इलाज कराने के लिए उन्होंने दिल्ली AIIMS ले जाने की सलाह दी। कितना खर्च आएगा, कहां इलाज होगा, इसके बारे में कुछ नहीं बताया। हम लोग परेशान होकर बीते 9 सितंबर को दिल्ली AIIMS लेकर पहुंचे। जहां डॉक्टरों ने बच्चे की जांच की। जिसमें बच्चे को दुर्लभतम बीमारी का पता चला। 2 साल की उम्र तक ही इलाज संभव
डॉक्टरों के अनुसार, बच्चे को स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) नाम की बीमारी है। इस बीमारी में बच्चे की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं, बढ़ती उम्र के साथ बच्चा सामान्य रूप से बैठ उठ नहीं सकता। सांस लेने में समस्या होती है। अगर दो साल की उम्र के अंदर इसका इलाज नहीं हुआ तो बच्चे की मांसपेशियां काम करना बंद देंगी, जिससे आधा शरीर या कई अंग निष्क्रिय हो सकते हैं। इंडिया में इलाज नहीं, यूरोप से आएगा इंजेक्शन
डॉक्टरों ने बताया, इंडिया में इसका इलाज नहीं है। इसके लिए यूरोप में साल 2020 में इंजेक्शन तैयार हुआ है, जिसकी कीमत 9 करोड़ रुपए है। ये रकम सुनते ही परिवार के होश उड़ गए। इतनी बड़ी रकम जुटाने के लिए परिवार की हिम्मत टूट गई। हिम्मत हारकर चले आए माता पिता
आलोक और प्रतिभा ने रोते हुए बताया- हम लोगों के पास जो कुछ था सब बेच दिया। फिर भी इतने पैसे नहीं जुटा पाए। इसके बाद हम लोगों ने हिम्मत जुटाकर क्राउड फंडिंग करने के बारे में सोचा। बेटे के नाम से खाता खुलवाकर लोगों से चंदा मांगने लगे। लेकिन 20 दिन बाद भी 8.12 लाख रुपए ही जमा हो पाए हैं। विधायक ने 15 दिन पहले सीएम को लिखा लेटर
आलोक और प्रतिभा ने बेटे के इलाज के लिए मड़िहान विधायक रमाशंकर सिंह पटेल से संपर्क किया। विधायक ने बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर सरकारी सहायता मदद करने का अनुरोध किया है। विधायक ने बताया कि लगभग 15 दिन पहले मुख्यमंत्री आपदा कोष से आर्थिक मदद के लिए पत्र भेजा गया था। लेकिन अभी तक कोई रिस्पांस नहीं आया है। दंपती ने रोते हुए कहा- 100-100 रुपए देंगे मिल जाएगी मदद
दंपती ने थक हारकर अपने बेटे को गोद में लेकर वीडियो बनाया और रोते हुए अपना दर्द बताया है। आलोक ने कहा- मेरे इकलौते बेटे की जिंदगी आप लोगों के हाथ में है। इंडिया इतना बड़ा देश है। यहां करोड़ों लोग रहते हैं। अगर 9 लाख लोगों ने मेरे बेटे के लिए 100-100 रुपए की मदद कर दी ताे 9 करोड़ रुपए हो जाएंगे और बेटे की जिंदगी बच जाएगी। प्लीज हमारी मदद करिए। अभी तक मुख्यमंत्री सांसद और विधायक की तरफ से कोई मदद नहीं मिली है। ————– ये खबर भी पढ़ें बाराबंकी में एक साथ जलीं ज्वेलर परिवार की 4 चिताएं:पति-पत्नी और बेटों के शव देख महिलाएं बेसुध, अर्टिगा सवार 8 लोगों की हुई मौत बाराबंकी में बेकाबू अर्टिगा कार और ट्रक की आमने-सामने टक्कर में 8 लोगों की मौत हो गई। इनमें ज्वेलर, उनकी पत्नी और 2 बेटों के अलावा ड्राइवर और 3 अन्य लोग शामिल हैं। दोपहर 3 बजे ज्वेलर परिवार के चारों शव पोस्टमॉर्टम हाउस से फतेहपुर कस्बे के मोहल्ला मुंशी गंज लाए गए। शवों को देखकर मोहल्ले में चीख-पुकार मच गई। महिलाएं रोते-रोते बेसुध हो गईं। थोड़ी देर बाद शवों को श्मशान घाट ले जाया गया, जहां चारों की बराबर में चिताएं बनाई गईं। भतीजे ने चारों को मुखाग्नि दी। पूरी खबर पढ़ें