ठंड बढ़ने के साथ ही हाई ब्लड प्रेशर (बीपी) के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। बड़ी संख्या में ऐसे मरीज बेचैनी और उलझन जैसी समस्याओं के साथ अस्पताल में पहुंच रहे हैं। बड़ी बात यह है कि शाम ढलने के बाद रात में इन मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी देखी जा रही है। इनमें ज्यादातर ऐसे मरीज है जिन्हें पहले से बीपी और शुगर जैसी समस्याएं हैं। वहीं, एक्सपर्ट कहते है कि कुछ मरीजों में ये समस्या दवा के सेवन को लेकर की जाने वाली लापरवाही के चलते हो रही है। सिविल अस्पताल में ठंड के 35% तक मरीज लखनऊ के डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविल अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अध्यक्ष डॉ.एसके पांडेय कहते है कि सर्दी लगने के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। शाम होने के बाद इन मरीजों की संख्या में इजाफा भी देखा जा रहा है। इनमें सांस के रोगियों के अलावा बीपी और हार्ट की समस्या के मरीज भी शामिल हैं। हालांकि अभी कोई पैनिक जैसे हालात नहीं हैं। ठंड में दवा की न करें गैप ऐसे ही हालत लखनऊ के सबसे बड़े चिकित्सालय बलरामपुर अस्पताल के हैं। यहां के चिकित्सा अधीक्षक डॉ.देबाशीष शुक्ला कहते हैं कि ठंड के दौरान इसकी चपेट में आने वाले मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। ऐसे मरीज के इलाज को लेकर इमरजेंसी में तैनात मेडिकल अफसर को भी निर्देश दिए गए हैं। बलरामपुर अस्पताल में भी मरीजों की संख्या में इजाफा कई बार ये देखा गया है कि ठंड में देर रात तक ऐसे मरीज सामने आते हैं, जिन्हें बेचैनी और अनिद्रा जैसे लक्षण देखे जा रहे हैं। इन मरीजों की जांच में बीपी हाई मिल रहा है। ऐसे में ब्लड प्रेशर के मरीजों को नियमित इसकी मॉनिटरिंग करने को कहा गया है। इन मरीजों को ठंड के दौरान दवा में गैप न करने की सलाह दी गई है। लोकबंधु में भी बढ़े मरीज राजनारायण लोकबंधु संयुक्त अस्पताल की OPD और इमरजेंसी में भी ठंड के लक्षण के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ.राजीव दीक्षित कहते हैं ठंड के समय कुछ समस्याएं बेहद कॉमन होती है। इनमें हाई बीपी, शुगर में इजाफा, जोड़ों में दर्द शामिल है। इन मरीजों को लेकर पहले से सावधानी बरतने की हिदायत दी जाती है। यदि कोई मरीज इसकी गंभीर लक्षण के साथ आते हैं तो उनका अस्पताल में इलाज भी किया जाता है। OPD के फिजिशियन क्लिनिक में भी ऐसे मरीजों की तादाद बढ़ी है। इसके अलावा इमरजेंसी में भी कुछ मरीज ऐसे ही लक्षण के सामने आते हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि दवाओं से इन्हें आराम भी मिल जाता है। ठंड में क्यों बढ़ता है बीपी लखनऊ के सिविल अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अध्यक्ष डॉ.एसके पांडेय कहते हैं कि ठंड के दौरान शरीर के तापमान को मेंटेन करने के लिए पेरीफेरल वेसल सिकुड़ जाती हैं। जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है, इसके अलावा ब्लड कोगुलेशन की संभावना भी बढ़ जाती हैं। ऐसे में हाई बीपी का होना बेहद खतरनाक हो जाता है। इसके चलते कई अन्य बीमारियां भी अटैक कर सकती हैं। को-मोरबीडीटी खड़ी कर सकता है समस्या सबसे अहम बात यह है कि जिन्हें पहले से कोई गंभीर समस्या है यानी वो पेशेंट जो पहले से को-मोरबीडीटी से जूझ रहे हैं। उनके लिए बीपी का बढ़ जाना और भी खतरनाक रहता है। यही कारण है कि इसको लेकर लापरवाही बरतना ठीक नहीं है। यदि आप पहले से इसके लिए कोई मेडिकेशन ले रहे हैं तो ठंड के दौरान एक बार अपने एक्सपर्ट डॉक्टर से पुनः परामर्श लेकर और मेडिकेशन को तय कर ले। इसके बाद उसका नियमित सेवन करते रहें। हाई बीपी से ब्रेन हैमरेज का खतरा लखनऊ के मेदांता अस्पताल के चिकित्सक डॉ.शोभित शाक्य कहते हैं कि हाई बीपी को लेकर लापरवाही बरतना ठीक नहीं है। ठंड के दौरान ऐसी कई समस्याएं आती है। जिनको लेकर बेहद सतर्क रहना होगा। हल्की सी भी लापरवाही भारी पड़ सकती है। कुछ ऐसे मामले हाल के दिनों में सामने आए हैं जिन्हें हाई बीपी के कारण अचानक से ब्रेन हेमरेज हो गया। इसलिए बेहद अलर्ट रहना होगा। अलाव की व्यवस्था में कमी तीमारदार यशपाल सिंह ने बताया- पिता के कूल्हे की हड्डी टूटने के कारण उन्हें भर्ती कराया है। अभी तीन से चार दिन और रहना होगा। मरीजों की संख्या अधिक रहने के कारण तीमारदारों को थोड़ी परेशानी होती है पर किसी न किसी तरह काम चलाते हैं। अलाव की बहुत ज्यादा व्यवस्था भी नहीं दिखती। इसको सुधारने की जरूरत है।