कन्नौज में करंट से युवक की मौत के बाद बवाल हो गया। परिजनों और ग्रामीणों ने सड़क पर शव रखकर जाम लगा दिया। मुआवजे की मांग करने लगे। पुलिस मौके पर पहुंची। महिलाओं को समझाने की कोशिश की तो महिलाओं ने धक्का-मुक्की शुरू कर दी। वर्दी नोचीं। एसओ और पुलिसकर्मियों पर चप्पलें चला दीं। तीन थानों का फोर्स मौके पर पहुंचा। करीब ढाई घंटे बाद हालात काबू में आए। मामला ठठिया थाना क्षेत्र के पुंगरा गांव का है। यहां के रहने वाले पौजी राठौर का 24 साल का बेटा बृजेश राठौर निजी लाइनमैन है। शुक्रवार की दोपहर बाद बिजली लाइन ठीक करने के लिए उसने शट डाउन लिया था, लेकिन जैसे ही वह खम्बे पर चढ़ा, तभी बिजली आपूर्ति शुरू कर दी गई। जिससे उसे करंट लग गया। वह झुलस कर नीचे जा गिरा। परिजन उसे तिर्वा स्थित राजकीय मेडिकल कॉलेज ले गए। यहां डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। देखें दो फोटो… बृजेश की मौत को लेकर परिजनों ने विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों पर लापरवाही के आरोप लगाते हुए तिर्वा में पावर हाउस के सामने उसका शव रख दिया। सड़क पर जाम लगा दिया। करीब दो घंटे तक भीड़ हंगामा करती रही। इस दौरान कुछ पुलिसकर्मी वहां पहुंचे और समझाने का प्रयास किया, लेकिन भीड़ जाम खोलने को राजी न हुई। करीब दो घंटे बाद वहां तीन थानों का फोर्स पहुंचा। पुलिसकर्मी जबरदस्ती शव को हटाने का प्रयास करने लगे। जिसको लेकर ग्रामीणों से पुलिस की झड़प हो गई। देखते ही देखते उनमें गुत्थमगुत्था होने लगी। महिलाओं ने हाथ में चप्पलें उठा लीं। इंदरगढ़ एसओ पारुल चौधरी पर चप्पल चला दी। इसके बाद फोर्स ने भी महिलाओं को धक्का दिया तो हाथापाई होने लगी। इनमें कुछ महिलाओं को चोटें भी आईं। इस दौरान कुछ लोगों ने पत्थरबाजी भी की। पुलिसकर्मियों ने लाठी फटकार भीड़ को खदेड़ा। करीब ढाई घंटे बाद हालात काबू में आए। एसपी विनोद कुमार ने बताया– करंट से मौत के बाद युवक के परिजन प्रदर्शन कर रहे थे। इस बीच कुछ अराजकतत्वों ने बवाल को हवा दे दी। फिलहाल हालात नियंत्रण में हैं। दूसरी तरफ अराजकतत्वों को पकड़ने के लिए पुलिस टीम पुंगरा गांव रवाना कर दी गई। 1 साल पहले हुई थी बृजेश की शादी ग्रामीणों ने बताया कि बृजेश की शादी करीब एक साल पहले कानपुर देहात जिले से हुई थी। उसके कोई बच्चे नहीं हैं। पति की मौत के बाद से पत्नी रोशनी का रो-रो कर बुरा हाल है। ऐसे में पुलिस के अत्याचार ने जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया है। पुलिस के तांडव की सम्भावना के चलते अधिकांश युवक और पुरुष गांव छोड़कर कहीं चले गए।