कानपुर के वीआईपी रोड पर 8 फरवरी को तेज रफ्तार 14 करोड़ की लेम्बोर्गिनी लोगों को उड़ाती चली गई। एक तो सुपरकार और ऊपर से अरबपति बाप का बेटा होने की वजह से मामला खूब उछला, लेकिन उसके बाद की पुलिस कार्रवाई और फिर कोर्ट से 7 घंटे में छूटने पर बड़े सवाल खड़े किए जा रहे हैं। सबसे ज्यादा चर्चा कथित ड्राइवर मोहन की हो रही है, जिसने कार में 9 गियर बताए। सोशल मीडिया पर इसको लेकर तरह-तरह के सवाल लाेग कर रहे हैं। आखिर ऐसे एक्सीडेंट में कोर्ट से जमानत क्यों लेनी पड़ी, पुलिस ने 14 दिन की रिमांड क्यों मांगी, कोर्ट ने उसे खारिज क्यों किया, धाराएं क्या थीं और क्या बदली जा सकती हैं? लेम्बोर्गिनी जैसी सुपरकार शहर की सड़कों पर कितनी वैध है? इसके फीचर क्या होते हैं और यूपी में कितनी उपलब्ध है? इन्हीं सवालों के जवाब पढ़िए भास्कर एक्सप्लेनर में… सबसे पहले पढ़िए क्या है मामला?
कानपुर की वीआईपी रोड इलाके में 8 फरवरी को लेम्बोर्गिनी से हादसा हुआ। इसके बाद तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा ने अपने इकलौते बेटे शिवम मिश्रा को बचाने की तमाम कोशिशें की। पहले तो हादसे के तुरंत बाद केके मिश्रा ने अपने बेटे को घटनास्थल से हटवाया। मीडिया से बातचीत में दावा किया कि उनका बेटा कार नहीं चला रहा था। इसके बाद पुलिस आयुक्त रघुवीर लाल ने प्रेस के सामने आकर कहा कि जांच में यह पुष्टि हो चुकी है कि हादसे के वक्त लेम्बोर्गिनी कार शिवम मिश्रा ही चला रहा था। 11 फरवरी को मोहन नाम का व्यक्ति कानपुर कोर्ट पहुंचा और उसने खुद को हादसे के समय कार का चालक बताया। हालांकि, कोर्ट ने मोहन की अर्जी खारिज कर दी। पुलिस ने शिवम मिश्रा को 12 फरवरी को गिरफ्तार किया, लेकिन करीब 7 घंटे के भीतर ही उसे रिहा कर दिया गया। सवाल : क्या लेम्बोर्गिनी में 9 गियर होते हैं?
जवाब : नहीं! हालांकि ये सवाल इसलिए क्योंकि कानपुर एक्सीडेंट में कथित तौर पर खुद को आरोपी बताने वाले ड्राइवर मोहन ने ऐसा बताया था। इसके बाद ही सच सामने आया और फिर शिवम की गिरफ्तारी हुई। लेम्बोर्गिनी को ‘लैंबो’ भी कहते हैं। आमतौर पर इसमें 7 गियर होते हैं, जिसे ऑटो की भाषा में 7-स्पीड ट्रांसमिशन कहा जाता है। इटालियन ब्रांड की कुछ गाड़ियों में 8-स्पीड ट्रांसमिशन भी मिलता है। घटना के वक्त आरोपी शिवम मिश्रा जिस Lamborghini Revuelto को चला रहा था, उसमें 8-स्पीड डुअल-क्लच ट्रांसमिशन (DCT) दिया गया है। इसका गियर सिस्टम बेहद स्मूद और तेज है। सवाल : पुलिस ने कौन सी धाराएं लगाईं?
जवाब : इस मामले में प्रत्यक्षदर्शियों के बयान सामने आने के बावजूद पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएं 281, 125(a), 125(b) और 324(4) लगाई थीं। यह मामला लापरवाही से वाहन चलाने से जुड़ा हुआ है। धारा 281 (BNS): तेज रफ्तार या लापरवाही से वाहन चलाना। धारा 125(a) एवं 125(b) (BNS): ऐसे कृत्य करना जिससे दूसरों के जीवन या उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरा हो। धारा 324(4) (BNS): किसी खतरनाक वस्तु (जैसे वाहन) के माध्यम से लापरवाहीपूर्वक चोट पहुंचाना। सवाल: शिवम मिश्रा को कैसे मिल गई जमानत?
जवाब: इलाहाबाद हाईकोर्ट के एडवोकेट नीरज पांडेय बताते हैं कि आमतौर पर सड़क हादसों के मामलों में लापरवाही से वाहन चलाने से जुड़ी धाराएं लगाई जाती हैं, जो जमानती होती हैं। कानपुर की कोर्ट में शिवम मिश्रा की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट नरेश चंद्र त्रिपाठी ने कहा कि पुलिस ने गिरफ्तारी के सही कारण दर्ज नहीं किए थे, खासकर तब जब अपराधों में 7 साल से कम की सजा का प्रावधान हो। उन्होंने कोर्ट में दलील रखी कि ये गिरफ्तारी सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के प्रावधानों का उल्लंघन है। सवाल: कोर्ट ने रिमांड क्यों खारिज कर दी?
जवाब: क्योंकि कानूनी तौर पर पुलिस रिमांड लेने का आधार ही नहीं बना पाई। आरोपी शिवम मिश्रा के वकील अनंत शर्मा ने बताया- पुलिस ने कोर्ट में 14 दिन की रिमांड मांगी थी। जज ने पूछा कि रिमांड क्यों चाहिए, जबकि सारी धाराएं जमानती हैं? इस पर इन्वेस्टिगेशन अफसर कोई ठोस जवाब नहीं दे पाए। इसके चलते कोर्ट ने रिमांड की अर्जी खारिज कर दी। फिर 20 हजार रुपए का बेल बॉन्ड भरने के बाद पुलिस ने उसे छोड़ दिया। सवाल: फिर पुलिस से क्या चूक हुई?
जवाब: पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह ने इस केस में गंभीर खामियों की ओर इशारा किया है। उनका कहना है कि मामले में धारा 238 क्यों नहीं लगाई गई, जबकि सबूतों से छेड़छाड़ (एविडेंस टैंपरिंग) का एंगल सामने आ सकता था। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि आरोपी चार दिन तक अंडरग्राउंड रहा, इसके बावजूद उसे दिल्ली जाने की अनुमति कैसे दी गई। इस मामले में जानबूझकर हल्की धाराएं लगाई गईं, जिससे आरोपी को राहत मिल गई। विक्रम सिंह ने यह सवाल भी उठाया कि सामने होने के बाद भी शिवम के पिता ने कहा कि शिवम गाड़ी नहीं चला रहा था, तो उसके पिता के खिलाफ कोई कानूनी धारा क्यों नहीं लगाई गई। उनका कहना है कि पूरे मामले में पुलिस जरूरत से ज्यादा उदार नजर आई है, इसलिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि पुलिस आयुक्त रघुवीर लाल ने कहा कि जांच में यह स्पष्ट हो गया है कि शिवम ही ड्राइविंग सीट पर था, जिससे पुलिस की विश्वसनीयता और जांच प्रक्रिया पर भरोसा बढ़ा है। पुलिस को इस मामले में सख्ती से अभी पूछताछ करनी चाहिए।
सवाल : क्या पुलिस बाद में धाराएं बढ़ा सकती है?
जवाब : इलाहाबाद हाईकोर्ट के एडवोकेट नीरज पांडेय बताते हैं कि अगर जांच के दौरान ऐसे नए और ठोस सबूत सामने आते हैं, जो यह साबित कर सकें कि मामला केवल लापरवाही का नहीं बल्कि ज्यादा गंभीर अपराध का है, तो पुलिस मौजूदा धाराओं में बदलाव कर सकती है या नई धाराएं जोड़ सकती है। हालांकि, इसके लिए यह जरूरी होता है कि नए सबूत कानूनी तौर पर मजबूत और न्यायालय में टिकने योग्य हों। सवाल : क्या लेम्बोर्गिनी जैसी सुपरकार सड़क पर चलाना वैलिड है?
जवाब : हां अगर ऐसी कारें देश में आरटीओ से रजिस्टर्ड, वैलिड नंबर प्लेट, बीमा, पॉल्यूशन सर्टिफिकेट और ड्राइविंग लाइसेंस के साथ चलाई जा रही हैं तो वैलिड है। हालांकि इससे जुड़ी कुछ शर्तें हैं जैसे कि वाहन में कोई अवैध मॉडिफिकेशन (इंजन, ECU, साइलेंसर आदि) नहीं होना चाहिए। स्पीड लिमिट और ट्रैफिक नियमों का पालन अनिवार्य है। रैश या लापरवाह ड्राइविंग की स्थिति में मोटर व्हीकल एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत कार्रवाई हो सकती है। एक्सपर्ट बताते हैं कि कानून कार के ब्रांड या कीमत को नहीं, बल्कि ड्राइवर के आचरण को देखता है। नियमों के भीतर चलने पर सुपरकार भी सामान्य वाहन की तरह वैध मानी जाती है। भारत में लेम्बोर्गिनी से जुड़े हादसे कानपुर के मामले के अलावा, मुंबई में एक लेम्बोर्गिनी को पुलिस ने जब्त किया था, क्योंकि वह 200 किमी/घंटा से ज्यादा रफ्तार में चल रही थी, जो तय सीमा से काफी अधिक थी। बेंगलुरु में 3 अगस्त 2025 को एक Lamborghini Aventador के इंजन में चलते-चलते आग पकड़ने का वीडियो भी वायरल हुआ था। हालांकि, इसमें किसी को गंभीर चोट नहीं आई। इसके अलावा विदेशों में भी लेम्बोर्गिनी जैसी सुपरकार्स के तेज रफ्तार में चलने से कई हादसे सामने आए हैं। इनमें गाड़ी का कंट्रोल खो जाना, हवा में उछल जाना और भारी नुकसान जैसी घटनाएं शामिल हैं। इन मामलों से साफ है कि बहुत तेज स्पीड अपने आप में बड़ा खतरा होती है। ……….. ये खबर भी पढ़ें… कानपुर लेम्बोर्गिनी कांड-अरबपति का बेटा 7 घंटे में छूटा:रिमांड की वजह नहीं बता पाई पुलिस, घटना के 4 दिन बाद गिरफ्तार किया था कानपुर में तेज रफ्तार लेम्बोर्गिनी से 6 लोगों को टक्कर मारने वाले अरबपति कारोबारी का बेटा 7 घंटे में ही रिहा हो गया। आरोपी के वकील अनंत शर्मा ने बताया- पुलिस ने कोर्ट में 14 दिन की रिमांड मांगी थी। जज ने पूछा कि रिमांड क्यों चाहिए, जबकि सारी धाराएं जमानती हैं? इस पर इन्वेस्टिगेशन अफसर कोई ठोस जवाब नहीं दे पाए। इसके चलते कोर्ट ने रिमांड की अर्जी खारिज कर दी। फिर 20 हजार रुपए का बेल बॉन्ड भरने के बाद पुलिस ने उसे छोड़ दिया। पढ़िए पूरी खबर…
कानपुर की वीआईपी रोड इलाके में 8 फरवरी को लेम्बोर्गिनी से हादसा हुआ। इसके बाद तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा ने अपने इकलौते बेटे शिवम मिश्रा को बचाने की तमाम कोशिशें की। पहले तो हादसे के तुरंत बाद केके मिश्रा ने अपने बेटे को घटनास्थल से हटवाया। मीडिया से बातचीत में दावा किया कि उनका बेटा कार नहीं चला रहा था। इसके बाद पुलिस आयुक्त रघुवीर लाल ने प्रेस के सामने आकर कहा कि जांच में यह पुष्टि हो चुकी है कि हादसे के वक्त लेम्बोर्गिनी कार शिवम मिश्रा ही चला रहा था। 11 फरवरी को मोहन नाम का व्यक्ति कानपुर कोर्ट पहुंचा और उसने खुद को हादसे के समय कार का चालक बताया। हालांकि, कोर्ट ने मोहन की अर्जी खारिज कर दी। पुलिस ने शिवम मिश्रा को 12 फरवरी को गिरफ्तार किया, लेकिन करीब 7 घंटे के भीतर ही उसे रिहा कर दिया गया। सवाल : क्या लेम्बोर्गिनी में 9 गियर होते हैं?
जवाब : नहीं! हालांकि ये सवाल इसलिए क्योंकि कानपुर एक्सीडेंट में कथित तौर पर खुद को आरोपी बताने वाले ड्राइवर मोहन ने ऐसा बताया था। इसके बाद ही सच सामने आया और फिर शिवम की गिरफ्तारी हुई। लेम्बोर्गिनी को ‘लैंबो’ भी कहते हैं। आमतौर पर इसमें 7 गियर होते हैं, जिसे ऑटो की भाषा में 7-स्पीड ट्रांसमिशन कहा जाता है। इटालियन ब्रांड की कुछ गाड़ियों में 8-स्पीड ट्रांसमिशन भी मिलता है। घटना के वक्त आरोपी शिवम मिश्रा जिस Lamborghini Revuelto को चला रहा था, उसमें 8-स्पीड डुअल-क्लच ट्रांसमिशन (DCT) दिया गया है। इसका गियर सिस्टम बेहद स्मूद और तेज है। सवाल : पुलिस ने कौन सी धाराएं लगाईं?
जवाब : इस मामले में प्रत्यक्षदर्शियों के बयान सामने आने के बावजूद पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएं 281, 125(a), 125(b) और 324(4) लगाई थीं। यह मामला लापरवाही से वाहन चलाने से जुड़ा हुआ है। धारा 281 (BNS): तेज रफ्तार या लापरवाही से वाहन चलाना। धारा 125(a) एवं 125(b) (BNS): ऐसे कृत्य करना जिससे दूसरों के जीवन या उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरा हो। धारा 324(4) (BNS): किसी खतरनाक वस्तु (जैसे वाहन) के माध्यम से लापरवाहीपूर्वक चोट पहुंचाना। सवाल: शिवम मिश्रा को कैसे मिल गई जमानत?
जवाब: इलाहाबाद हाईकोर्ट के एडवोकेट नीरज पांडेय बताते हैं कि आमतौर पर सड़क हादसों के मामलों में लापरवाही से वाहन चलाने से जुड़ी धाराएं लगाई जाती हैं, जो जमानती होती हैं। कानपुर की कोर्ट में शिवम मिश्रा की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट नरेश चंद्र त्रिपाठी ने कहा कि पुलिस ने गिरफ्तारी के सही कारण दर्ज नहीं किए थे, खासकर तब जब अपराधों में 7 साल से कम की सजा का प्रावधान हो। उन्होंने कोर्ट में दलील रखी कि ये गिरफ्तारी सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के प्रावधानों का उल्लंघन है। सवाल: कोर्ट ने रिमांड क्यों खारिज कर दी?
जवाब: क्योंकि कानूनी तौर पर पुलिस रिमांड लेने का आधार ही नहीं बना पाई। आरोपी शिवम मिश्रा के वकील अनंत शर्मा ने बताया- पुलिस ने कोर्ट में 14 दिन की रिमांड मांगी थी। जज ने पूछा कि रिमांड क्यों चाहिए, जबकि सारी धाराएं जमानती हैं? इस पर इन्वेस्टिगेशन अफसर कोई ठोस जवाब नहीं दे पाए। इसके चलते कोर्ट ने रिमांड की अर्जी खारिज कर दी। फिर 20 हजार रुपए का बेल बॉन्ड भरने के बाद पुलिस ने उसे छोड़ दिया। सवाल: फिर पुलिस से क्या चूक हुई?
जवाब: पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह ने इस केस में गंभीर खामियों की ओर इशारा किया है। उनका कहना है कि मामले में धारा 238 क्यों नहीं लगाई गई, जबकि सबूतों से छेड़छाड़ (एविडेंस टैंपरिंग) का एंगल सामने आ सकता था। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि आरोपी चार दिन तक अंडरग्राउंड रहा, इसके बावजूद उसे दिल्ली जाने की अनुमति कैसे दी गई। इस मामले में जानबूझकर हल्की धाराएं लगाई गईं, जिससे आरोपी को राहत मिल गई। विक्रम सिंह ने यह सवाल भी उठाया कि सामने होने के बाद भी शिवम के पिता ने कहा कि शिवम गाड़ी नहीं चला रहा था, तो उसके पिता के खिलाफ कोई कानूनी धारा क्यों नहीं लगाई गई। उनका कहना है कि पूरे मामले में पुलिस जरूरत से ज्यादा उदार नजर आई है, इसलिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि पुलिस आयुक्त रघुवीर लाल ने कहा कि जांच में यह स्पष्ट हो गया है कि शिवम ही ड्राइविंग सीट पर था, जिससे पुलिस की विश्वसनीयता और जांच प्रक्रिया पर भरोसा बढ़ा है। पुलिस को इस मामले में सख्ती से अभी पूछताछ करनी चाहिए।
सवाल : क्या पुलिस बाद में धाराएं बढ़ा सकती है?
जवाब : इलाहाबाद हाईकोर्ट के एडवोकेट नीरज पांडेय बताते हैं कि अगर जांच के दौरान ऐसे नए और ठोस सबूत सामने आते हैं, जो यह साबित कर सकें कि मामला केवल लापरवाही का नहीं बल्कि ज्यादा गंभीर अपराध का है, तो पुलिस मौजूदा धाराओं में बदलाव कर सकती है या नई धाराएं जोड़ सकती है। हालांकि, इसके लिए यह जरूरी होता है कि नए सबूत कानूनी तौर पर मजबूत और न्यायालय में टिकने योग्य हों। सवाल : क्या लेम्बोर्गिनी जैसी सुपरकार सड़क पर चलाना वैलिड है?
जवाब : हां अगर ऐसी कारें देश में आरटीओ से रजिस्टर्ड, वैलिड नंबर प्लेट, बीमा, पॉल्यूशन सर्टिफिकेट और ड्राइविंग लाइसेंस के साथ चलाई जा रही हैं तो वैलिड है। हालांकि इससे जुड़ी कुछ शर्तें हैं जैसे कि वाहन में कोई अवैध मॉडिफिकेशन (इंजन, ECU, साइलेंसर आदि) नहीं होना चाहिए। स्पीड लिमिट और ट्रैफिक नियमों का पालन अनिवार्य है। रैश या लापरवाह ड्राइविंग की स्थिति में मोटर व्हीकल एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत कार्रवाई हो सकती है। एक्सपर्ट बताते हैं कि कानून कार के ब्रांड या कीमत को नहीं, बल्कि ड्राइवर के आचरण को देखता है। नियमों के भीतर चलने पर सुपरकार भी सामान्य वाहन की तरह वैध मानी जाती है। भारत में लेम्बोर्गिनी से जुड़े हादसे कानपुर के मामले के अलावा, मुंबई में एक लेम्बोर्गिनी को पुलिस ने जब्त किया था, क्योंकि वह 200 किमी/घंटा से ज्यादा रफ्तार में चल रही थी, जो तय सीमा से काफी अधिक थी। बेंगलुरु में 3 अगस्त 2025 को एक Lamborghini Aventador के इंजन में चलते-चलते आग पकड़ने का वीडियो भी वायरल हुआ था। हालांकि, इसमें किसी को गंभीर चोट नहीं आई। इसके अलावा विदेशों में भी लेम्बोर्गिनी जैसी सुपरकार्स के तेज रफ्तार में चलने से कई हादसे सामने आए हैं। इनमें गाड़ी का कंट्रोल खो जाना, हवा में उछल जाना और भारी नुकसान जैसी घटनाएं शामिल हैं। इन मामलों से साफ है कि बहुत तेज स्पीड अपने आप में बड़ा खतरा होती है। ……….. ये खबर भी पढ़ें… कानपुर लेम्बोर्गिनी कांड-अरबपति का बेटा 7 घंटे में छूटा:रिमांड की वजह नहीं बता पाई पुलिस, घटना के 4 दिन बाद गिरफ्तार किया था कानपुर में तेज रफ्तार लेम्बोर्गिनी से 6 लोगों को टक्कर मारने वाले अरबपति कारोबारी का बेटा 7 घंटे में ही रिहा हो गया। आरोपी के वकील अनंत शर्मा ने बताया- पुलिस ने कोर्ट में 14 दिन की रिमांड मांगी थी। जज ने पूछा कि रिमांड क्यों चाहिए, जबकि सारी धाराएं जमानती हैं? इस पर इन्वेस्टिगेशन अफसर कोई ठोस जवाब नहीं दे पाए। इसके चलते कोर्ट ने रिमांड की अर्जी खारिज कर दी। फिर 20 हजार रुपए का बेल बॉन्ड भरने के बाद पुलिस ने उसे छोड़ दिया। पढ़िए पूरी खबर…