उत्तर भारत की प्रमुख धार्मिक यात्राओं में से एक कांवड़ यात्रा 11 जुलाई (कल) से शुरू हो गई। इससे पहले ही यूपी-उत्तराखंड में होटल-ढाबों और गाड़ियों में तोड़फोड़ की 7 बड़ी घटनाएं हो गईं। 2 ढाबों पर खाने में प्याज का टुकड़ा मिला। 4 जगह गाड़ियों की टक्कर से कांवड़ खंडित हो गई। एक जगह कांवड़ के पास कुछ लोगों ने थूक दिया। ये सब घटनाएं भूलवश हो रही हैं या कोई साजिश है? यह बड़ा सवाल है। पिछले साल इस तरह की 20 से ज्यादा घटनाएं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दिल्ली-देहरादून नेशनल हाईवे पर हुई थीं। उत्तराखंड से शुरू होकर 5 राज्यों में जाने वाली 700 किलोमीटर लंबी कांवड़ यात्रा के मार्गों पर इस बार राज्य सरकारों ने सुरक्षा के इंतजाम भरपूर किए हैं। लेकिन, इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस प्लानिंग नहीं है। ये घटनाएं कानून व्यवस्था के लिए मुसीबत बन रही हैं। ऐसे कितने मामले आए? पुलिस ने क्या एक्शन लिया? कांवड़ यात्रा कितनी पवित्र होती है? कांवड़िए क्या कहते हैं? इस खास रिपोर्ट में पढ़िए… पुलिस ने इन मामलों में क्या किया?
कांवड़ यात्रा मार्ग पर तोड़फोड़ की पहली घटना 5 जुलाई को हरिद्वार के मंगलौर इलाके में हुई। एक परिवार हरिद्वार की तरफ से लौट रहा था। वहीं, मेरठ के कांवड़िए भी गंगाजल लेकर आ रहे थे। आरोप है, कार की टक्कर लगने से कांवड़ खंडित हो गई। इसके बाद कांवड़ियों ने कार तोड़ दी। इस मामले में कार चालक ने कांवड़ियों के खिलाफ मंगलौर पुलिस स्टेशन में FIR कराई। हालांकि कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। 7 जुलाई को मुजफ्फरनगर के ढाबे पर प्याज मिलाकर खाना बनाने के आरोप में तोड़फोड़ में पुलिस ने अज्ञात कांवड़ियों पर मुकदमा दर्ज किया। इसी दिन हरिद्वार के नारसन इलाके में इसी तरह का हंगामा एक ढाबे पर हुआ था। इसमें पुलिस ने ढाबा मालिक और कारीगर को गिरफ्तार किया है। गाजियाबाद के मोदीनगर में 8 जुलाई की रात कांवड़ियों को कार से टक्कर मारने के आरोप में राजीव नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया। पता चला कि ये व्यक्ति शराब के नशे में था। जिस लेन पर कांवड़िए, उसी पर वाहन; इसलिए हो रहे हादसे
कांवड़ियों के साथ सड़क हादसे क्यों हो रहे? यहां ये भी जानने की जरूरत है। दरअसल, हरिद्वार से गंगाजल लेकर कांवड़िए दिल्ली-देहरादून नेशनल हाईवे की एक लेन पर चलते हैं। चूंकि अभी कांवड़ियों की संख्या बहुत कम है, इसलिए हाईवे की दोनों लेन पर वाहन चल रहे हैं। आने वाले दिनों में कुछ जिलों में हाईवे की एक लेन कांवड़ियों के लिए और दूसरी लेन सिर्फ वाहनों के लिए रिजर्व कर दी जाएगी। अभी वाहन और कांवड़िए एक ही लेन पर चल रहे हैं। इस वजह से भी कांवड़ियों के साथ सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं। कांवड़ खंडित होने के मामले सामने आ रहे हैं। पुलिस अफसरों का कहना है कि वो अभी से वाहनों का संचालन बंद कर देंगे तो हाईवे पर लाखों लोगों को दिक्कत होगी। इसलिए कांवड़ियों की संख्या बढ़ने पर ही हाईवे पर वाहन संचालन वन-वे किया जाएगा। माना जा रहा है कि 15 जुलाई से दिल्ली-देहरादून हाईवे सभी प्रकार के वाहनों के लिए बंद कर दिया जाएगा। कहां से हुई विवाद की शुरुआत? ढाबों पर नेम-प्लेट और खाने के विवाद की शुरुआत 28 जून से हुई। तब मुजफ्फरनगर के स्वामी यशवीर महाराज दिल्ली-देहरादून हाईवे स्थित पंडित जी वैष्णो ढाबा पर जांच करने पहुंचे। वो चेक कर रहे थे कि मालिक हिंदू है या मुस्लिम। आरोप है, धर्म पता करने के लिए ढाबा कर्मचारियों की पैंट भी उतरवाई गई। इस पर खूब सियासी हंगामा मचा। मुजफ्फरनगर पुलिस ने यशवीर महाराज से जुड़े 6 लोगों को अनधिकृत तरीके से चेकिंग करने पर नोटिस भेजा है। इस प्रकरण के बाद से ही कांवड़ यात्रा मार्ग पर आए दिन होटल-ढाबे मालिकों के नाम और खाने की गुणवत्ता को लेकर विवाद सामने आ रहे हैं। हालांकि, 8 जुलाई को मेरठ पहुंचे यूपी के चीफ सेक्रेटरी ने साफतौर पर कहा कि फूड विभाग के अलावा किसी भी व्यक्ति को होटल-ढाबों की चेकिंग का अधिकार नहीं है। इस बयान के बाद से होटल-ढाबों पर हिंदू संगठनों की सक्रियता कुछ कम हो गई है। हालांकि, खुद को हिंदू साबित करने और शुद्ध शाकाहारी भोजन परोसने का दावा करते हुए तमाम होटल-ढाबा संचालकों ने बोर्ड पर हिंदू देवी-देवताओं के बड़े-बड़े चित्र छपवा रखे हैं। कितनी पवित्र होती है कांवड़? कांवड़ के खंडित हो जाने पर कांवड़िए क्यों भड़क उठते हैं? ये जानने के लिए उस कांवड़ की पवित्रता को समझने की जरूरत है। श्रीपंच दशनाम जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरि बताते हैं- कांवड़ यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार का नशा वर्जित होता है। मांसाहार भोजन से एकदम दूर रहना होता है। यहां तक कि खाने में प्याज और लहसुन तक नहीं खाया जाता। कांवड़ से कांवड़िए के अलावा कोई भी चीज छूती है, तो कांवड़ खंडित मानी जाती है। वह बताते हैं कि अगर कांवड़िए को शौच करने जाना है, तो वापस आकर नहाने के बाद ही वो फिर से कांवड़ उठा पाएगा। अगर कांवड़िए ने कहीं पर भोजन किया है तो उस स्थिति में भी उसे नहाकर ही फिर से कांवड़ उठानी पड़ेगी। कुल मिलाकर इस कांवड़ यात्रा में पवित्रता और शुद्धता का बेहद ख्याल रखा जाता है। गंगनहर पटरी हरिद्वार तक बने, तो खत्म हों कई विवाद
इन सभी विवादों से बचने के लिए करीब 5 साल पहले यूपी सरकार ने कांवड़ यात्रा के लिए एक नया रास्ता सुझाया था। वो था गंगनहर पटरी मार्ग। ये गंगनहर पटरी यूपी में गाजियाबाद जिले के मुरादनगर से शुरू होती है और मेरठ-मुजफ्फरनगर-रुड़की होते हुए सीधे हरिद्वार बैराज तक जाती है। इसकी लंबाई करीब 111 किलोमीटर है। पिछले साल गंगनहर पटरी पर पेड़ों के कटान का काम शुरू हुआ, लेकिन मामला NGT में पहुंच गया। इस वजह से रास्ता चौड़ीकरण का काम थोड़ा प्रभावित हुआ है। सरकार का प्लान है कि दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, राजस्थान के कांवड़िए गंगनहर पटरी के रास्ते हरिद्वार से लौटें। ऐसे में दिल्ली-देहरादून नेशनल हाईवे को कांवड़ यात्रा के दौरान बंद भी नहीं करना पड़ा करेगा। सीएम योगी आदित्यनाथ के इस ड्रीम प्रोजेक्ट पर करीब 700 करोड़ रुपए खर्च होने हैं। कांवड़िए बोले- वाहनों पर रोक लगे, तो रुकें हादसे
कांवड़ रूट पर सबसे ज्यादा विवाद रोड एक्सीडेंट को लेकर हो रहे हैं। इसे रोकने के क्या उपाय हो सकते हैं। इसे लेकर हमने कुछ कांवड़ियों से भी बात की। हरिद्वार से कांवड़ लेकर आ रहे विवेक ने कहा- सरकार को वाहन बंद करने चाहिए। जगह-जगह बैरियर लगा देने चाहिए, ताकि वाहन उनसे आगे न बढ़ पाएं। रास्ते में कांवड़ियों को जहां भी दिक्कत आ रही हो, पुलिस को तुरंत वहां पहुंचकर उनकी सेवा करके उसका सॉल्यूशन करना चाहिए। कांवड़ियों को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। हमने पूछा- रास्ते में कैसे इंतजाम मिले? इस पर एक कांवड़िए ने बताया कि मुजफ्फरनगर जिले के मदीना चौक के पास एक कांवड़ सड़क पर रखी थी। उसके करीब पांच-छह मीटर दूर मांस का टुकड़ा किसी ने फेंका हुआ था। ये सब मेरी आंखों के सामने हो रहा था। कांवड़ लेकर दिल्ली जा रहे पीतमपुरा के विशेष ने कहा- सरकार को वाहनों पर तगड़ी पाबंदी लगा देनी चाहिए। इसके बाद ही रोड एक्सीडेंट जैसी घटनाएं रुक पाएंगी। अभी हम जिस लेन पर चल रहे हैं, उसी पर वाहन भी चल रहे हैं। ऐसे में हमें खुद सड़क पर बच-बचकर चलना पड़ रहा है। ——————————- ये खबर भी पढ़ें… छांगुर की PMO तक शिकायत, तब शुरू हुई कार्रवाई, जिगरी दोस्त से दुश्मन बना वसीउद्दीन, उजागर किए काले कारनामे बलरामपुर में गिरफ्तार किए गए धर्मांतरण के मास्टरमाइंड जलालुद्दीन शाह उर्फ छांगुर बाबा की प्रशासन में अच्छी पकड़ थी। इसलिए स्थानीय स्तर पर उसके खिलाफ शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं होती थी। फिर, जब उसका जिगरी दोस्त ठेकेदार वसीउद्दीन खान उर्फ बब्बू चौधरी ही दुश्मन बन गया तो एक-एक कर काले कारनामे उजागर होने लगे। वसीउद्दीन खान उसके अवैध जमीन और धर्मांतरण की लिस्ट लेकर PMO तक पहुंच गया। पढ़िए पूरी खबर…
कांवड़ यात्रा मार्ग पर तोड़फोड़ की पहली घटना 5 जुलाई को हरिद्वार के मंगलौर इलाके में हुई। एक परिवार हरिद्वार की तरफ से लौट रहा था। वहीं, मेरठ के कांवड़िए भी गंगाजल लेकर आ रहे थे। आरोप है, कार की टक्कर लगने से कांवड़ खंडित हो गई। इसके बाद कांवड़ियों ने कार तोड़ दी। इस मामले में कार चालक ने कांवड़ियों के खिलाफ मंगलौर पुलिस स्टेशन में FIR कराई। हालांकि कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। 7 जुलाई को मुजफ्फरनगर के ढाबे पर प्याज मिलाकर खाना बनाने के आरोप में तोड़फोड़ में पुलिस ने अज्ञात कांवड़ियों पर मुकदमा दर्ज किया। इसी दिन हरिद्वार के नारसन इलाके में इसी तरह का हंगामा एक ढाबे पर हुआ था। इसमें पुलिस ने ढाबा मालिक और कारीगर को गिरफ्तार किया है। गाजियाबाद के मोदीनगर में 8 जुलाई की रात कांवड़ियों को कार से टक्कर मारने के आरोप में राजीव नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया। पता चला कि ये व्यक्ति शराब के नशे में था। जिस लेन पर कांवड़िए, उसी पर वाहन; इसलिए हो रहे हादसे
कांवड़ियों के साथ सड़क हादसे क्यों हो रहे? यहां ये भी जानने की जरूरत है। दरअसल, हरिद्वार से गंगाजल लेकर कांवड़िए दिल्ली-देहरादून नेशनल हाईवे की एक लेन पर चलते हैं। चूंकि अभी कांवड़ियों की संख्या बहुत कम है, इसलिए हाईवे की दोनों लेन पर वाहन चल रहे हैं। आने वाले दिनों में कुछ जिलों में हाईवे की एक लेन कांवड़ियों के लिए और दूसरी लेन सिर्फ वाहनों के लिए रिजर्व कर दी जाएगी। अभी वाहन और कांवड़िए एक ही लेन पर चल रहे हैं। इस वजह से भी कांवड़ियों के साथ सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं। कांवड़ खंडित होने के मामले सामने आ रहे हैं। पुलिस अफसरों का कहना है कि वो अभी से वाहनों का संचालन बंद कर देंगे तो हाईवे पर लाखों लोगों को दिक्कत होगी। इसलिए कांवड़ियों की संख्या बढ़ने पर ही हाईवे पर वाहन संचालन वन-वे किया जाएगा। माना जा रहा है कि 15 जुलाई से दिल्ली-देहरादून हाईवे सभी प्रकार के वाहनों के लिए बंद कर दिया जाएगा। कहां से हुई विवाद की शुरुआत? ढाबों पर नेम-प्लेट और खाने के विवाद की शुरुआत 28 जून से हुई। तब मुजफ्फरनगर के स्वामी यशवीर महाराज दिल्ली-देहरादून हाईवे स्थित पंडित जी वैष्णो ढाबा पर जांच करने पहुंचे। वो चेक कर रहे थे कि मालिक हिंदू है या मुस्लिम। आरोप है, धर्म पता करने के लिए ढाबा कर्मचारियों की पैंट भी उतरवाई गई। इस पर खूब सियासी हंगामा मचा। मुजफ्फरनगर पुलिस ने यशवीर महाराज से जुड़े 6 लोगों को अनधिकृत तरीके से चेकिंग करने पर नोटिस भेजा है। इस प्रकरण के बाद से ही कांवड़ यात्रा मार्ग पर आए दिन होटल-ढाबे मालिकों के नाम और खाने की गुणवत्ता को लेकर विवाद सामने आ रहे हैं। हालांकि, 8 जुलाई को मेरठ पहुंचे यूपी के चीफ सेक्रेटरी ने साफतौर पर कहा कि फूड विभाग के अलावा किसी भी व्यक्ति को होटल-ढाबों की चेकिंग का अधिकार नहीं है। इस बयान के बाद से होटल-ढाबों पर हिंदू संगठनों की सक्रियता कुछ कम हो गई है। हालांकि, खुद को हिंदू साबित करने और शुद्ध शाकाहारी भोजन परोसने का दावा करते हुए तमाम होटल-ढाबा संचालकों ने बोर्ड पर हिंदू देवी-देवताओं के बड़े-बड़े चित्र छपवा रखे हैं। कितनी पवित्र होती है कांवड़? कांवड़ के खंडित हो जाने पर कांवड़िए क्यों भड़क उठते हैं? ये जानने के लिए उस कांवड़ की पवित्रता को समझने की जरूरत है। श्रीपंच दशनाम जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरि बताते हैं- कांवड़ यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार का नशा वर्जित होता है। मांसाहार भोजन से एकदम दूर रहना होता है। यहां तक कि खाने में प्याज और लहसुन तक नहीं खाया जाता। कांवड़ से कांवड़िए के अलावा कोई भी चीज छूती है, तो कांवड़ खंडित मानी जाती है। वह बताते हैं कि अगर कांवड़िए को शौच करने जाना है, तो वापस आकर नहाने के बाद ही वो फिर से कांवड़ उठा पाएगा। अगर कांवड़िए ने कहीं पर भोजन किया है तो उस स्थिति में भी उसे नहाकर ही फिर से कांवड़ उठानी पड़ेगी। कुल मिलाकर इस कांवड़ यात्रा में पवित्रता और शुद्धता का बेहद ख्याल रखा जाता है। गंगनहर पटरी हरिद्वार तक बने, तो खत्म हों कई विवाद
इन सभी विवादों से बचने के लिए करीब 5 साल पहले यूपी सरकार ने कांवड़ यात्रा के लिए एक नया रास्ता सुझाया था। वो था गंगनहर पटरी मार्ग। ये गंगनहर पटरी यूपी में गाजियाबाद जिले के मुरादनगर से शुरू होती है और मेरठ-मुजफ्फरनगर-रुड़की होते हुए सीधे हरिद्वार बैराज तक जाती है। इसकी लंबाई करीब 111 किलोमीटर है। पिछले साल गंगनहर पटरी पर पेड़ों के कटान का काम शुरू हुआ, लेकिन मामला NGT में पहुंच गया। इस वजह से रास्ता चौड़ीकरण का काम थोड़ा प्रभावित हुआ है। सरकार का प्लान है कि दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, राजस्थान के कांवड़िए गंगनहर पटरी के रास्ते हरिद्वार से लौटें। ऐसे में दिल्ली-देहरादून नेशनल हाईवे को कांवड़ यात्रा के दौरान बंद भी नहीं करना पड़ा करेगा। सीएम योगी आदित्यनाथ के इस ड्रीम प्रोजेक्ट पर करीब 700 करोड़ रुपए खर्च होने हैं। कांवड़िए बोले- वाहनों पर रोक लगे, तो रुकें हादसे
कांवड़ रूट पर सबसे ज्यादा विवाद रोड एक्सीडेंट को लेकर हो रहे हैं। इसे रोकने के क्या उपाय हो सकते हैं। इसे लेकर हमने कुछ कांवड़ियों से भी बात की। हरिद्वार से कांवड़ लेकर आ रहे विवेक ने कहा- सरकार को वाहन बंद करने चाहिए। जगह-जगह बैरियर लगा देने चाहिए, ताकि वाहन उनसे आगे न बढ़ पाएं। रास्ते में कांवड़ियों को जहां भी दिक्कत आ रही हो, पुलिस को तुरंत वहां पहुंचकर उनकी सेवा करके उसका सॉल्यूशन करना चाहिए। कांवड़ियों को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। हमने पूछा- रास्ते में कैसे इंतजाम मिले? इस पर एक कांवड़िए ने बताया कि मुजफ्फरनगर जिले के मदीना चौक के पास एक कांवड़ सड़क पर रखी थी। उसके करीब पांच-छह मीटर दूर मांस का टुकड़ा किसी ने फेंका हुआ था। ये सब मेरी आंखों के सामने हो रहा था। कांवड़ लेकर दिल्ली जा रहे पीतमपुरा के विशेष ने कहा- सरकार को वाहनों पर तगड़ी पाबंदी लगा देनी चाहिए। इसके बाद ही रोड एक्सीडेंट जैसी घटनाएं रुक पाएंगी। अभी हम जिस लेन पर चल रहे हैं, उसी पर वाहन भी चल रहे हैं। ऐसे में हमें खुद सड़क पर बच-बचकर चलना पड़ रहा है। ——————————- ये खबर भी पढ़ें… छांगुर की PMO तक शिकायत, तब शुरू हुई कार्रवाई, जिगरी दोस्त से दुश्मन बना वसीउद्दीन, उजागर किए काले कारनामे बलरामपुर में गिरफ्तार किए गए धर्मांतरण के मास्टरमाइंड जलालुद्दीन शाह उर्फ छांगुर बाबा की प्रशासन में अच्छी पकड़ थी। इसलिए स्थानीय स्तर पर उसके खिलाफ शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं होती थी। फिर, जब उसका जिगरी दोस्त ठेकेदार वसीउद्दीन खान उर्फ बब्बू चौधरी ही दुश्मन बन गया तो एक-एक कर काले कारनामे उजागर होने लगे। वसीउद्दीन खान उसके अवैध जमीन और धर्मांतरण की लिस्ट लेकर PMO तक पहुंच गया। पढ़िए पूरी खबर…