कानपुर में दलाल शिवम बोला- मैंने 50 किडनी ट्रांसप्लांट कराई:हर केस पर 50 हजार मिलते थे; दिल्ली के बड़े हॉस्पिटल का भी नाम आया

कानपुर के किडनी कांड में पुलिस ने एजेंट शिवम अग्रवाल उर्फ काड़ा से मंगलवार को पूछताछ की। इस दौरान शिवम ने 50 किडनी ट्रांसप्लांट कराने की बात कबूल की। बताया कि उसे हर ऑपरेशन पर 50 हजार रुपए मिलते थे। करीब 2 घंटे चली पूछताछ में उससे 15 सवाल पूछे गए। ज्यादातर सवालों का उसने गोलमोल जवाब दिया। DCP वेस्ट एसएम कासिम आबिदी ने बताया, शिवम पूछताछ में सहयोग नहीं कर रहा है। जल्द ही उसे पुलिस कस्टडी में लेगी, तब विस्तार से पूछताछ की जाएगी। पुलिस को शिवम के मोबाइल से एक कॉल रिकॉर्डिंग मिली है। इसमें शिवम, दिल्ली NCR के एजेंट नवीन पांडेय से बातचीत करता सुनाई दे रहा है। रिकॉर्डिंग किडनी ट्रांसप्लांट के दौरान एक मरीज की मौत के बाद की है। 1 मिनट 36 सेकेंड की रिकॉर्डिंग में शिवम, नवीन से कह रहा है कि रोहित सर (फरार आरोपी डॉक्टर) ने साइलेंट होने के लिए कहा है। पुलिस का दावा है कि ऑडियो में दिल्ली के मैक्स हॉस्पिटल का नाम भी सामने आया है। पुलिस नोटिस भेजकर हॉस्पिटल से जवाब मांगेगी। इसके अलावा पुलिस ने डॉ. अफजल के ड्राइवर परवेज सैफी को गिरफ्तार कर लिया। मामले में अबतक कुल 10 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। अब विस्तार से पढ़िए… सबसे पहले शिवम और नवीन की बातचीत पढ़िए… शिवम: बात हुई रोहित सर से? नवीन: उन्होंने फोन उठाया, फिर काट दिया। वाट्सएप कॉल किया तो उठाया नहीं। शिवम: सुबह हमसे भी बोल रहे थे थोड़ा जल्दी है शिवम। मैसेज बोलकर, फिर बोले कि थोड़ा देख लो। थोड़ा साइलेंट रहना, तो हमने कहा ठीक है। नवीन: तो क्या करूं, साइलेंट हो जाऊं? शिवम: नहीं, हमसे बोल रहे थे। कह रहे थे कि देखे रहना…। बाकी जैसा भी हो देखते हैं। जाना नवीन भाई इसलिए बेहतर रहेगा, कि मान लो कोई बात होगी तो निपट जाएगी। नवीन: पेशेंट बड़े प्यार से बात कर रहा है, अभी फोन किया था। बोल रहा है कि मेरा पेशेंट जो मैक्स में एडमिट कर दिया है, उसको डिस्चार्ज कर दो। बस हो गया, नहीं तो हम भी फंसेंगे और तुम भी फंसोगे। शिवम: तो मैक्स में एडमिट हो गया था क्या? नवीन: हां हो गया। मैंने बात कर ली है डॉक्टर से। शिवम: क्या कह रहे हैं डॉक्टर? नवीन: डॉक्टर से बात कर लिया, बोल रहे हैं कि हम डिस्चार्ज करा दे रहे हैं बिना कागज के, इसमें क्या दिक्कत है। शिवम: अच्छा, तो MAX में जब एडमिट हुआ है तो उन्होंने क्या दिखाया है? नवीन: जब पहुंचे हैं, तभी एक्सपायर हुआ है। शिवम: इमरजेंसी में एक्सपायर हुआ है या एडमिट होने के बाद आईसीयू में एक्सपायर हुआ है? नवीन: पहले ये एक्सपायर हुआ है, लेकिन इमरजेंसी में लेकर गए हैं न वो लोग। शिवम: हां…। नवीन: कुछ मैटर है, वो बोले डिस्चार्ज कराना क्या है, लेकर जाएं मैं करा दे रहा हूं। शिवम: तुमने रोहित सर से बात की? नवीन: रोहित सर से बात ही नहीं हो रही है। थोड़ा आपसे बात हो तो बोलो कि एक मिनट बात कर लें हमसे। शिवम: हमारे पास भी वही नंबर है। दूसरा नंबर ही नहीं है उनका। नवीन: चलिए बात होगी तो देखेंगे, फिलहाल अभी तो हम नहीं जा रहे हैं। शिवम: ठीक है। अब जानिए पूछताछ में शिवम ने क्या बताया… हर ऑपरेशन पर कानपुर आता था डॉ रोहित
पुलिस पूछताछ में एजेंट शिवम अग्रवाल ने बताया- अफ्रीकी महिला अरेबिका को डॉ रोहित ने भेजा था। उसने फोन करके कहा था कि एक अफ्रीकी महिला किडनी ट्रांसप्लांट के लिए कानपुर आ रही है। उसके लिए होटल और अस्पताल की व्यवस्था करो। ट्रांसप्लांट के लिए आहूजा हॉस्पिटल में इंतजाम कर दिया था। शिवम ने बताया अरेबिका से रोहित की मुलाकात दिल्ली में ही हुई थी। डॉ रोहित हर ऑपरेशन में कानपुर आता था। अरेबिका के ट्रांसप्लांट के दौरान भी वो आया था। उसके साथ करीब 50 ट्रांसप्लांट कानपुर में कराए हैं। पारुल तोमर के ट्रांसप्लांट में भी डॉ रोहित और डॉ अफजल कानपुर आए थे और करीब 8-10 दिन रुके थे। हर ऑपरेशन पर मिलते थे 50 हजार रुपए
शिवम ने ये भी बताया कि रोहित अलग-अलग नंबरों से बात करता था। मैं उन्हें ठीक से नहीं जानता था। मेरी जिम्मेदारी उन्हें हॉस्पिटल मुहैया कराने की थी। हर ऑपरेशन में मुझे 50 हजार रुपए मिलते थे। मेडी लाइफ हॉस्पिटल में महिला की मौत के बारे में शिवम ने बताया कि वो भी रोहित के जरिए ही आई थी। अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई। रोहित के ही कहने पर उसे मैक्स हॉस्पिटल रेफर किया गया था। वहां पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई। एजेंट नवीन पांडेय के बारे में शिवम ने बताया कि वो दिल्ली NCR का एजेंट है और डॉ रोहित का करीबी है। पुलिस को शिवम के मोबाइल में कई फोल्डर मिले थे, जिनमें पासवर्ड लगा था। पासवर्ड के बारे में पूछने पर उसने बताया कि फोल्डर में पैटर्न लॉक है। उसे वह ही खोल पाएगा। हर टीमें के हिस्से में था एक अलग टास्क
डीसीपी वेस्ट ने बताया, अब तक की जांच में सामने आया है कि डॉ. रोहित का काम किडनी ट्रांसप्लांट के लिए टीमें डिवाइड करना था। मेरठ के डॉ. अफजल, डॉ. अली का काम डोनर और रिसीवर का इंतजाम करना था। परवेज सैफी और फिरोज का काम गाड़ियों का इंतजाम करना, जबकि शिवम और नवीन का काम हॉस्पिटल को मैनेज करने का था। 10वां आरोपी परवेज सैफी भी गिरफ्तार
पुलिस ने मंगलवार रात डॉ. अफजल के ड्राइवर परवेज सैफी को गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से 10 लाख रुपए भी बरामद हुए हैं। बुधवार को उसे कोर्ट में पेश किया जाएगा। पूछताछ में सैफी ने बताया कि ये वही रुपए हैं, जो मुजफ्फरनगर की पारुल तोमर के ऑपरेशन के बाद मिले थे। डॉ. अफजल को 22 लाख रुपए मिले थे, जिसमें से 10 लाख रुपए उसने परवेज सैफी को दिए थे। परवेज ने बताया कि पुलिस के आहूजा अस्पताल में छापा मारने के बाद डॉ. अफजल का मोबाइल बंद हो गया था। सैफी के पास 10 लाख रुपए थे, इसलिए वो खुद को बचाने के लिए वकीलों के मिल रहा था। एक वकील ने उसे अग्रिम जमानत दिलाने का भरोसा भी दिया था। इसके बाद वह रुपए लेकर मेरठ से कानपुर आ गया। डीसीपी एसएम कासिम आबिदी के मुताबिक वकील से बात करने के लिए सैफी ने ने मोबाइल का स्विच ऑन किया तो पुलिस को उसकी लोकेशन मिल गई। लोकेशन मिलने के 15 मिनट के भीतर रावतपुर थाना पुलिस ने उसे दबोच लिया। वीडियो वायरल होने के बाद आया था चर्चा में
किडनी कांड से जुड़ा 19 सेकेंड का एक वीडियो 5 अप्रैल को वायरल हुआ था। इसमें डॉ. अफजल कल्याणपुर के एक होटल में सैफी के मौजूद था। वीडियो में दिख रहा था कि बेड पर पांच सौ के नोटों की कई गड्डियां बिछी हैं और अफजल एक गड्डी उठाकर अपने चेहरे पर हवा कर रहा है। कमरे में मौजूद परवेज सैफी अपने मोबाइल से वीडियो बना रहा था। कुछ देर बाद सैफी भी वीडियो में नजर आता है। वीडियो पारुल तोमर के ट्रांसप्लांट के बाद का है। वीडियो सामने आने के बाद से पुलिस सैफी के पीछे लगी थी। लूट डकैती में जेल जा चुका है परवेज सैफी
डीसीपी के मुताबिक परवेज सैफी पेशे ड्राइवर है, लेकिन अपराधी भी है। वह एक ट्रैवल एजेंसी के लिए काम करता है। मेरठ, गाजियाबाद में उस पर 7-8 आपराधिक मामले दर्ज हैं। गाजियाबाद में हुई लूट के एक मामले में वह करीब ढाई साल जेल में भी रहा है। परवेज सैफी किडनी रैकेट से जुड़े डॉक्टरों, ओटी टेक्नीशियन को कानपुर लाने-ले जाने का काम करता था। पूछताछ में सैफी ने बताया कि आहूजा अस्पताल में हुए 7 ऑपरेशन में वो डॉ. अफजल को कानपुर लाया था। इस दौरान वे लोग कल्याणपुर के एक होटल में 8-10 दिन ठहरे थे। वहीं रुपयों के साथ वीडियो बनाया था। क्लीनिक-घर पर ताला लगाकर डॉ. अफजल फरार
डीसीपी के मुताबिक मेरठ का डॉ. अफजल अपने क्लीनिक और घर पर ताला लगाकर फरार है। उसके साथ ही मुद्स्सर अली सिद्दीकी उर्फ डॉ. अली, मेरठ में मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल चलाने वाला डॉ. अमित और डेंटिस्ट डॉ. वैभव मुद्गल फरार हैं। इनकी तलाश में टीम छापेमारी कर रही है। डोनर और रिसीवर तलाशने में पुलिस नाकाम
किडनी गिरोह के चंगुल में फंसे डोनर और रिसीवर का पुलिस को अबतक पता नहीं चला है। पुलिस ने किडनी रैकेट से जुड़े अस्पतालों से जांच के लिए लैब में भेजे गए सैंपल और रिपोर्ट के जरिए उनका पता लगाने की कोशिश की, लेकिन कुछ खास हाथ नहीं लगा। डीसीपी वेस्ट एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि कई लैब से डेटा मंगाया गया है, लेकिन सैंपल स्लिप में मरीज का नाम और उम्र के अलावा कोई जानकारी न होने से डोनर और रिसीवर को तलाशने में दिक्कत हो रही है। ——————————————— ये खबर भी पढ़ें… किस हॉस्पिटल में किसका ट्रांसप्लांट, सब सीक्रेट:ढाई करोड़ में अफ्रीकी महिला का ऑपरेशन; किडनी गैंग विदेश तक फैला कानपुर किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का कनेक्शन सिर्फ यूपी ही नहीं, विदेश से भी जुड़ रहा है। विदेशों के मरीज भी यहां चोरी-छिपे किडनी ट्रांसप्लांट कराने आते थे। तस्करों ने दिल्ली, मुंबई, पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में किडनी ट्रांसप्लांट का खेल करने के लिए हॉस्पिटल और डॉक्टरों का पैनल बना रखा है। पूरी खबर पढ़ें…