काशी में बूचड़खाने की जगह अब हॉस्पिटल:लोग बोले- मांस-हडि्डयां सीवर में बहाते थे, 90 साल पहले अंग्रेजों ने बनवाया

काशी विश्वनाथ मंदिर से 600 मीटर दूर अब बूचड़खाना नहीं चलेगा। यहां ‘आरोग्य मंदिर’ हॉस्पिटल तैयार हो गया है। 1 मंजिल की इमारत में डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ मौजूद रहेगा। इसके बनने के बाद लोगों ने कहा- अब जान ली नहीं जाएगी, बल्कि बचाई जाएगी। बूचड़खाना 90 साल पुराना था, मगर 2017 में योगी सरकार बनने के बाद यहां जानवरों की कटाई रोक दी गई थी। मीट बेचने वाले लोगों को दूसरी जगह शिफ्ट किया गया। इसके बाद भूमाफिया इस जगह को कब्जा करना चाहते थे। BJP विधायक नीलकंठ तिवारी की पहल पर यहां हॉस्पिटल बन सका। 19 जून, 2025 को इसका उद्घाटन किया गया। विधायक कहते हैं- जहां एक वक्त पर मीट काटा जाता था, गंदगी यूं ही फेंक दी जाती थी। वहां आज वहां लोगों का इलाज किया जाएगा। इसके 2 फायदे होंगे। पहला – पहले लोग बताते थे कि हम बूचड़खाने के पास रहते हैं। मगर अब कहेंगे कि अस्पताल के पास रहते हैं। डेस्टिनेशन बदल गया। दूसरा – लोग गंदगी से परेशान होकर अपने घर बेचकर जा रहे थे। अब लोगों को ऐसा नहीं करना होगा। 600 मीटर की दूरी पर काशी विश्वनाथ मंदिर है। इसके चारों तरफ 5-6 मंदिर है, करीब में घाट है। अब यहां स्वच्छता रहेगी। दैनिक भास्कर ने ग्राउंड जीरो पर बूचड़खाने और फिर हॉस्पिटल बनने को लेकर लोगों से बातचीत की। पढ़िए रिपोर्ट… एक वक्त पर अंग्रेज यहां मीट लेने आते थे
वाराणसी में अयोग्य मंदिर हॉस्पिटल जिस गली में तैयार हुआ है, उसको पत्थर गली कहते हैं। यही पर हमारी मुलाकात पप्पू खां से हुई। उनका घर इस बूचड़खाने के ठीक सामने है। उनके दादा हकीम मोहम्मद शरीफ अंग्रेजों का इलाज करते थे। वह कहते हैं- हमारे दादा हकीम थे और उनके यहां अंग्रेज अपना इलाज कराने के लिए आया करते थे। दादाजी ने बताया था कि साल 1936 में इस बूचड़खाने को खोला गया था। तब कई सारे अंग्रेज अफसर इस गली में आया करते थे। इस बूचड़खाने का एक दरवाजा हमारे घर के सामने था। जिसे बंद करवाया गया था और दूसरी जगह शिफ्ट कराया गया। अब बूचड़खाना की जगह अस्पताल बन गया है। सबको सुविधा मिलेगी। मगर इसमें इमरजेंसी सुविधा नहीं है, शाम को स्टाफ चला जाता है। हालांकि पास में कौड़िया, मारवाड़ी और सेवा-सदन भी है। वहां ही हम लोग जाते हैं। इसी बूचड़खाने से थोड़ा दूर रहने वाले रईस कहते हैं- हमने जब से होश संभाल, तब से इसके अंदर 3 दुकानदारों को मीट बेचते देखा। 8 से 10 साल पहले यह जगह बंद करवा दी गई, जानवर कटते हुए तो हमने नहीं देखा। मगर गंदगी तो हो ही जाती थी, निगम वाले साफ करवाते थे। नंदलाल बोले- सीवर में बहाते थे मांस-हडि्डयां
यही रहने वाले 80 साल के बुजुर्ग नंदलाल यादव ने बताया- 100 साल से ज्यादा पुराने इस बूचड़खाने में मांस बिकता था। उससे मोहल्ले में मांस की बदबू फैली रहती थी। दिक्कत तो सबको होती थी, मगर कोई कुछ कहता नहीं था। पहले यहां मांस बेचने वाले सीवर में मलबा बहाते थे। जिससे सीवर ओवरफ्लो हो जाता था। इसकी शिकायत हमने नगर निगम में कर चुके थे, मगर यह बंद तब हुआ, जब योगी की सरकार बनी। अब अस्पताल और स्टाफ के बारे भी जानिए…
आयुष्मान आरोग्य मंदिर हॉस्पिटल के इंचार्ज डॉ. सौरभ द्विवेदी को बनाया गया है। फोन पर उन्होंने बताया कि यहां मुझे लेकर 6 स्टाफ काम करेंगे। जिसमें 3 एएनएम, एक स्टाफ नर्स, एक एलटी, एक सपोर्टिंग स्टाफ भी रहेगा। ये सभी लोग 9 से शाम 5 बजे की शिफ्ट में काम करेंगे। यहां लोगों को फ्री ट्रीटमेंट होगा। कुत्ता काटने के इंजेक्शन भी यहां उपलब्ध रहेंगे। सभी अहम मेडिसिन दी जाएंगी। बुजुर्ग मरीजों का आयुष्मान कार्ड भी इस सेंटर पर बनाया जा रहा है। इमरजेंसी में पेशेंट आने पर सेवा सदन में ट्रांसफर किया जाता है। जल्द ही ऊपर की मंजिल पर मरीजों को भर्ती करने की सुविधा दी जाएगी। अब BJP विधायक की बात 3600 स्क्वायर फीट जमीन पर बना है हॉस्पिटल
विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी ने कहा- 3600 स्क्वायर फीट एरिया को लोग कब्जा करना चाहते थे। अब इसे अस्पताल का रूप दिया गया है। जिसमें 6 मेडिकल स्टाफ सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक मरीजों को देखेंगे। इससे लोगों को फायदा होगा। CMO से हम बात कर रहे हैं कि ऊपर की मंजिल में कंस्ट्रक्शन करवाकर लोगों को भर्ती करने की सुविधा भी दी जाए। इस पर भी विचार चल रहा है। …………. यह भी पढ़ें : वाराणसी में ट्रक ने बाइक सवार दंपती को रौंदा, मौत:खरीदारी करके वापस जौनपुर लौट रहे थे पति-पत्नी, सड़क पर गिरकर तड़पते रहे दोनों वाराणसी-जौनपुर हाईवे में शुक्रवार दोपहर तेज रफ्तार ट्रक ने बाइक सवार दंपती को रौंद दिया। ट्रक दोनों को टक्कर मारते हुए निकल गया जिससे दोनों सड़क पर गिरकर तड़पने लगे। दोनों लहूलुहान होकर अचेत हो गए। आसपास के लोगों ने घेराबंदी कर ट्रक को पकड़ लिया। पढ़िए पूरी खबर…