‘हमारे पड़ोस के 3 लोग कांवड़ लेकर जाते थे, उनकी सरकारी नौकरी लग गई। अब हम भी कांवड़ लेकर जा रहे हैं। 3 दिन से पैदल चल रहे हैं। उम्मीद है, भगवान भोलेनाथ हमारी मन्नत सुनेंगे। हमारी भी सरकारी नौकरी लगेगी।’ ये शब्द शुभम गुप्ता के हैं। भदोही के शुभम गुप्ता प्रयागराज के दशाश्वमेध घाट से जल लेकर काशी विश्वनाथ के लिए निकले हैं। इसी तरह से लाखों युवा कांवड़ लेकर अलग-अलग शिवालयों में जल चढ़ा रहे हैं। भगवान शिव से सबकी ऐसी ही कुछ मन्नत है। हमें कई ऐसे लोग भी मिले, जिनकी मन्नत दिलचस्प है। कोई शादी के लिए आया है, तो कोई देश को हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए प्रार्थना कर रहा। वाराणसी में ऐसे ही युवाओं से दैनिक भास्कर की टीम ने बात की। आइए उन युवाओं की इच्छा जानते हैं… जब तक सांसद नहीं बन जाता, कांवड़ उठाता रहूंगा
वाराणसी में इस वक्त अलग माहौल है। काशी विश्वनाथ मंदिर के आसपास करीब 10 वर्ग किलोमीटर में भगवा वस्त्र धारण किए कांवड़िए ही नजर आते हैं। हर दिन हजारों कांवड़िए भगवान विश्वनाथ का जलाभिषेक कर रहे हैं। सोमवार को तो यह संख्या लाखों में पहुंच जाती है। कई कांवड़िए ऐसे भी मिले, जिन्होंने यहां जल चढ़ाया और अब यहीं से कांवड़ लेकर अलग-अलग शिवालयों पर जल चढ़ाने के लिए निकले हैं। ऐसे ही आजमगढ़ के एक युवा श्रीवेश राजभर से हमारी मुलाकात हुई। श्रीवेश से हमने बात की। वह कहता है- मेरा घर आजमगढ़ में है। मैं वाराणसी से जल लेकर आजमगढ़ के चितारा में चढ़ाऊंगा। अबकी दूसरी बार आया हूं। करीब 150 किलोमीटर पैदल चलना होता है। हमारा सपना है कि हम लालगंज संसदीय सीट से एक बार सांसद बन जाएं। विधायक या फिर प्रधान नहीं बनना, सीधा सांसद बनना है। हमने कहा कि क्यों बनना है? श्रीवेश का कहना है कि हमारी तरफ सड़क, बिजली और शिक्षा हर घर तक नहीं पहुंची है। मैं सांसद बनकर यह सब पहुंचाना चाहता हूं। पड़ोसी कांवड़ लेकर गए तो नौकरी मिल गई, हम भी आए हैं
भदोही जिले से शुभम गुप्ता कांवड़ लेकर चले हैं। उम्र अब 27 साल हो गई है। पढ़ाई-लिखाई करते हैं, साथ ही पिता की दुकान पर भी बैठते हैं। कांवड़ उठाने के बारे में पूछा तो शुभम ने कहा, भोले बाबा से प्रेम है, इसलिए उठा लिया। 4 दिन से लगातार चल रहे हैं। अब बस किसी तरह से बाबा के दरबार में पहुंच जाएं। इतना चलते-चलते पैर में छाले पड़ गए हैं। रास्ते में कई स्थानों पर गिट्टी पैर में चुभ गई। शुभम कांवड़ ले जाने की मन्नत को लेकर कहते हैं, मेरे पड़ोस के 3 लड़कों ने कांवड़ उठाई थी। तीनों को सरकारी नौकरी मिल गई। कोई बिजली विभाग में है, तो कोई किसी और विभाग में है। हम भी भगवान शिव से सरकारी नौकरी मांगने आए हैं। देश हिंदू राष्ट्र बन जाए, इसलिए कांवड़ उठाई
अंबेडकरनगर जिले के दोस्तपुर के कृष्णा पांडेय बिहार के सुल्तानगंज से झारखंड के देवघर जल चढ़ा चुके हैं। वहां से वाराणसी आकर बाबा विश्वनाथ का भी जलाभिषेक कर रहे हैं। ऐसी मान्यता है कि यहां जल चढ़ाने से यात्रा पूरी होती है। कृष्णा पांडेय से हमने पूछा कि कांवड़ ले जाने के पीछे आपकी क्या मनौती है? कृष्णा कहते हैं- हमारा देश हिंदू राष्ट्र हो जाए, बस इसलिए हम कांवड़ लेकर चले हैं। जैसे पिछले साल G-20 हुआ था, उसी तरह से लगातार मोदी-योगी इस देश को आगे बढ़ाते चलें। भारत खुशहाल हो जाएगा। शादी हो जाए, इसलिए कांवड़ लेकर आया हूं
अमेठी जिले से युवाओं का एक ग्रुप कांवड़ लेकर काशी विश्वनाथ पहुंचा है। सारे युवा ही इसमें शामिल हैं। इसी में से एक युवा प्रज्ज्वल मिले। हमने पूछा कि कांवड़ लेकर आने के पीछे क्या वजह है? प्रज्ज्वल ने साफ कहा- शादी के लिए आए हैं। जल चढ़ाने के बाद शादी करूंगा। भगवान कहीं न कहीं तो शादी सेट ही करवा देंगे। बाकी भगवान से पढ़ने-लिखने और नौकरी के बारे में भी बात करूंगा। भदोही से सनी गुप्ता काशी पहुंचे हैं। वह प्रयागराज से जल लेकर 3 दिन तक पैदल चलने के बाद काशी पहुंचे हैं। सनी कहता है- भगवान भोलेनाथ हमें 12वीं पास कर दें बस। हम भगवान के दरबार में आए हैं, वह सुन लेंगे। हमने वाराणसी में ऐसे ही दर्जनों और कांवड़ियों से बात की। कई और ऐसे मिले, जो पढ़ाई-लिखाई और भगवान से बोर्ड परीक्षा में पास करवाने की उम्मीद लेकर आए हैं। इसके अलावा तमाम ऐसी महिलाएं मिलीं, जो किसी दुर्घटना या फिर घटना से प्रभावित होकर कांवड़ लेकर चल रही हैं। सबको उम्मीद है कि भगवान उनकी सुनेंगे और मनोकामना को पूरा करेंगे। ———————– ये खबर भी पढ़ें… मन्नत मांगी, बेटी हुई तो कांवड़ लेने निकलीं, वॉकर में बच्चे लेकर चल रहीं मां, कभी राम-रावण, परशुराम ने उठाई थी कांवड़ सावन…भगवान शिव की भक्ति का महीना। हर तरफ कंधे पर कांवड़ उठाए लोग शिवालयों की तरफ नंगे पांव चल पड़े हैं। हर भक्त की अपनी एक कहानी और मान्यता है। कोई भगवान से चाहता है कि उसकी बेटी ठीक हो जाए। तो कोई चाहता है कि उसके गांव से कभी सरकारी नौकरी न पाने वाला कलंक मिट जाए। पढ़ें पूरी खबर
वाराणसी में इस वक्त अलग माहौल है। काशी विश्वनाथ मंदिर के आसपास करीब 10 वर्ग किलोमीटर में भगवा वस्त्र धारण किए कांवड़िए ही नजर आते हैं। हर दिन हजारों कांवड़िए भगवान विश्वनाथ का जलाभिषेक कर रहे हैं। सोमवार को तो यह संख्या लाखों में पहुंच जाती है। कई कांवड़िए ऐसे भी मिले, जिन्होंने यहां जल चढ़ाया और अब यहीं से कांवड़ लेकर अलग-अलग शिवालयों पर जल चढ़ाने के लिए निकले हैं। ऐसे ही आजमगढ़ के एक युवा श्रीवेश राजभर से हमारी मुलाकात हुई। श्रीवेश से हमने बात की। वह कहता है- मेरा घर आजमगढ़ में है। मैं वाराणसी से जल लेकर आजमगढ़ के चितारा में चढ़ाऊंगा। अबकी दूसरी बार आया हूं। करीब 150 किलोमीटर पैदल चलना होता है। हमारा सपना है कि हम लालगंज संसदीय सीट से एक बार सांसद बन जाएं। विधायक या फिर प्रधान नहीं बनना, सीधा सांसद बनना है। हमने कहा कि क्यों बनना है? श्रीवेश का कहना है कि हमारी तरफ सड़क, बिजली और शिक्षा हर घर तक नहीं पहुंची है। मैं सांसद बनकर यह सब पहुंचाना चाहता हूं। पड़ोसी कांवड़ लेकर गए तो नौकरी मिल गई, हम भी आए हैं
भदोही जिले से शुभम गुप्ता कांवड़ लेकर चले हैं। उम्र अब 27 साल हो गई है। पढ़ाई-लिखाई करते हैं, साथ ही पिता की दुकान पर भी बैठते हैं। कांवड़ उठाने के बारे में पूछा तो शुभम ने कहा, भोले बाबा से प्रेम है, इसलिए उठा लिया। 4 दिन से लगातार चल रहे हैं। अब बस किसी तरह से बाबा के दरबार में पहुंच जाएं। इतना चलते-चलते पैर में छाले पड़ गए हैं। रास्ते में कई स्थानों पर गिट्टी पैर में चुभ गई। शुभम कांवड़ ले जाने की मन्नत को लेकर कहते हैं, मेरे पड़ोस के 3 लड़कों ने कांवड़ उठाई थी। तीनों को सरकारी नौकरी मिल गई। कोई बिजली विभाग में है, तो कोई किसी और विभाग में है। हम भी भगवान शिव से सरकारी नौकरी मांगने आए हैं। देश हिंदू राष्ट्र बन जाए, इसलिए कांवड़ उठाई
अंबेडकरनगर जिले के दोस्तपुर के कृष्णा पांडेय बिहार के सुल्तानगंज से झारखंड के देवघर जल चढ़ा चुके हैं। वहां से वाराणसी आकर बाबा विश्वनाथ का भी जलाभिषेक कर रहे हैं। ऐसी मान्यता है कि यहां जल चढ़ाने से यात्रा पूरी होती है। कृष्णा पांडेय से हमने पूछा कि कांवड़ ले जाने के पीछे आपकी क्या मनौती है? कृष्णा कहते हैं- हमारा देश हिंदू राष्ट्र हो जाए, बस इसलिए हम कांवड़ लेकर चले हैं। जैसे पिछले साल G-20 हुआ था, उसी तरह से लगातार मोदी-योगी इस देश को आगे बढ़ाते चलें। भारत खुशहाल हो जाएगा। शादी हो जाए, इसलिए कांवड़ लेकर आया हूं
अमेठी जिले से युवाओं का एक ग्रुप कांवड़ लेकर काशी विश्वनाथ पहुंचा है। सारे युवा ही इसमें शामिल हैं। इसी में से एक युवा प्रज्ज्वल मिले। हमने पूछा कि कांवड़ लेकर आने के पीछे क्या वजह है? प्रज्ज्वल ने साफ कहा- शादी के लिए आए हैं। जल चढ़ाने के बाद शादी करूंगा। भगवान कहीं न कहीं तो शादी सेट ही करवा देंगे। बाकी भगवान से पढ़ने-लिखने और नौकरी के बारे में भी बात करूंगा। भदोही से सनी गुप्ता काशी पहुंचे हैं। वह प्रयागराज से जल लेकर 3 दिन तक पैदल चलने के बाद काशी पहुंचे हैं। सनी कहता है- भगवान भोलेनाथ हमें 12वीं पास कर दें बस। हम भगवान के दरबार में आए हैं, वह सुन लेंगे। हमने वाराणसी में ऐसे ही दर्जनों और कांवड़ियों से बात की। कई और ऐसे मिले, जो पढ़ाई-लिखाई और भगवान से बोर्ड परीक्षा में पास करवाने की उम्मीद लेकर आए हैं। इसके अलावा तमाम ऐसी महिलाएं मिलीं, जो किसी दुर्घटना या फिर घटना से प्रभावित होकर कांवड़ लेकर चल रही हैं। सबको उम्मीद है कि भगवान उनकी सुनेंगे और मनोकामना को पूरा करेंगे। ———————– ये खबर भी पढ़ें… मन्नत मांगी, बेटी हुई तो कांवड़ लेने निकलीं, वॉकर में बच्चे लेकर चल रहीं मां, कभी राम-रावण, परशुराम ने उठाई थी कांवड़ सावन…भगवान शिव की भक्ति का महीना। हर तरफ कंधे पर कांवड़ उठाए लोग शिवालयों की तरफ नंगे पांव चल पड़े हैं। हर भक्त की अपनी एक कहानी और मान्यता है। कोई भगवान से चाहता है कि उसकी बेटी ठीक हो जाए। तो कोई चाहता है कि उसके गांव से कभी सरकारी नौकरी न पाने वाला कलंक मिट जाए। पढ़ें पूरी खबर