कौन हैं पूजा पाल, जो भाजपा उपाध्यक्ष बनीं:10 महीने पहले सपा से निकाली गईं, पहला चुनाव पति के हत्यारे के खिलाफ लड़ा

सपा से निकाली गईं विधायक पूजा पाल को भाजपा ने गुरुवार को प्रदेश उपाध्यक्ष बना दिया। यूपी की राजनीति में पूजा पाल की कहानी त्रासदी और संघर्ष भरी रही है। वह शादी के 9 दिन बाद ही विधवा हो गई थीं। न चाहते हुए भी राजनीति में आना पड़ा। पति के हत्यारे के खिलाफ पहला चुनाव लड़ा, लेकिन हार गईं। फिर भी पूजा ने हिम्मत दिखाई, लड़ाई लड़ी। अगले चुनाव में जीत हासिल की। प्रयागराज के सबसे ताकतवर व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा लड़ा। इन सबके बीच उनके राजनीतिक जीवन में कई बदलाव आए। पूजा ने पार्टी बदल ली। सपा से विधायक बनीं। 15 अप्रैल, 2023 की रात करीब 10:30 बजे अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या हो गई। उस दिन के बाद पूजा का मन बदल गया। उन्होंने सपा से किनार कर लिया और भाजपा के साथ खड़ी नजर आईं। 14 अगस्त, 2025 को अखिलेश यादव ने पूजा पाल को सपा से बाहर भी कर दिया था। इसके बाद उन्होंने भाजपा कब जॉइन की, यह बात अभी तक सार्वजनिक नहीं हो पाई है। पंचर बनाने वाले के यहां जन्म, विधायक से शादी की पूजा पाल का जन्म 25 जुलाई, 1979 को प्रयागराज के ही कटघर मोहल्ले में हुआ था। पिता अमृतलाल पाल साइकिल रिपेयरिंग की दुकान चलाते थे। 2000 के दशक की शुरुआत में पूजा की जान-पहचान राजू पाल से हुई। कुछ ही दिनों में दोनों के बीच अच्छी दोस्ती हो गई। राजू राजनीति में एक्टिव थे। 2004 में इलाहाबाद पश्चिम सीट पर उपचुनाव में राजू पाल बसपा के प्रत्याशी थे। इस सीट पर अतीक अहमद का दबदबा था। अतीक साल-2002 में इसी सीट से विधायक बना था। लेकिन, 2004 में फूलपुर से सांसद बनने के बाद उसने इलाहाबाद पश्चिम विधानसभा सीट छोड़ दी थी। अतीक अपने भाई खालिद अजीम उर्फ अशरफ को इस सीट से विधायक बनवाना चाहता था। उसने सपा से भाई का टिकट भी दिलवा दिया था। चुनाव के बाद नतीजे आए, तो लोग हैरान रह गए। राजू पाल ने अतीक के भाई को 4 हजार वोटों से हरा दिया था। इस हार ने राजू पाल को अतीक का दुश्मन बना दिया। इसके बाद कई बार राजू पर कई हमले हुए, लेकिन वह हर बार बच गए। इसी दौरान उन्होंने तय किया कि अब पूजा से शादी कर ली जाए। 15 जनवरी, 2005 को उन्होंने पूजा पाल से शादी कर ली। इसके ठीक 9 दिन बाद राजू पाल की गोली मारकर हत्या कर दी गई। राजू प्रयागराज के एसआरएन हॉस्पिटल में भर्ती किसी परिचित से मिलकर लौट रहे थे। पोस्टमॉर्टम हुआ, तो राजू के शरीर से 19 गोलियां मिलीं। राजू पाल की हत्या के बाद पूरे शहर में हंगामा हो गया। तोड़फोड़ होने लगी। पत्नी पूजा ने जब राजू की लाश को देखी, तो बदहवास हो गईं। उस वक्त मुलायम सिंह यूपी के मुख्यमंत्री थे। मायावती विपक्ष की नेता मायावती थीं। उन्होंने पूजा पाल से मुलाकात की और राजू पाल की राजनीतिक विरासत को संभालने के लिए कहा। उस वक्त पूजा पाल को राजनीति की कोई समझ नहीं थी। वह राजनीति में आना भी नहीं चाहती थीं। पति के हत्यारे ने पहला चुनाव हराया राजू की हत्या के बाद इलाहबाद पश्चिम सीट फिर खाली हो गई थी। सीट पर फिर से उपचुनाव होना था। पूरा शहर जानता था कि राजू पाल की हत्या अशरफ ने की है। लेकिन, अतीक का दबदबा ऐसा था कि उसने भाई को फिर से समाजवादी पार्टी से टिकट दिलवा दिया। बसपा ने राजू की विधवा पूजा पाल को प्रत्याशी बनाया। जून, 2005 में उपचुनाव हुआ। राजू की हत्या के बाद इलाके में अतीक का खौफ बढ़ गया था। नतीजा ये हुआ कि अशरफ ने पूजा पाल को 13 हजार 383 वोटों से हरा दिया। पति के हत्यारे से चुनाव हारने के बाद पूजा टूट गईं। तब बसपा प्रमुख मायावती ने उन्हें हौसला दिया। साथ मिलकर अतीक के खिलाफ मुकदमों में पैरवी की। 2007 में बसपा ने पूजा पाल को फिर से टिकट दिया। अब तक समीकरण बदल चुके थे। पूजा पाल ने अशरफ को 10 हजार 322 वोटों से हरा दिया। पूजा ने पूरे 5 साल खूब मेहमत से इलाके में काम किया। इसका असर 2012 के चुनाव में देखने को मिला। इस बार उनके सामने खुद अतीक अहमद चुनाव लड़ रहा था। पूजा ने अतीक को 8 हजार 885 वोट से हरा दिया। 2017 में चुनाव हारीं और 2019 में सपा में आ गईं 2017 में पूजा फिर से बसपा के टिकट पर ही चुनाव में उतरीं। इस बार भाजपा के सिद्धार्थनाथ सिंह से हार गईं। पूजा पाल 40 हजार 499 वोट के साथ तीसरे नंबर रहीं। अगले ही साल (फरवरी- 2018) में उन्हें बसपा से निकाल दिया गया। कहा गया कि वे भाजपा नेता और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य से मुलाकात कर रही हैं। इस पर पूजा पाल ने कहा था कि वह दूसरी पार्टी में नहीं जाना चाहतीं। साल- 2019 में पूजा ने सपा जॉइन कर ली। उन्होंने कहा कि मुलायम सिंह के समय अतीक अहमद सपा से सांसद बना था, इसलिए वो उस समय सपा में नहीं गई थीं। जब अखिलेश यादव पार्टी के मुखिया बने, तो लगा कि अखिलेश अपराधियों से नफरत करते हैं, इसलिए सपा जॉइन कर ली। 2019 में संभावना थी कि पूजा पाल को उन्नाव लोकसभा सीट से टिकट दिया जाएगा। लेकिन, ऐसी खबर मिली कि पूजा पाल ने ही टिकट लेने से मना कर दिया था। क्योंकि, उस वक्त उनकी दूसरी शादी का मामला चल रहा था। सपा से विधायक बनीं, अतीक की हत्या के बाद बागी हुईं 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा ने पूजा पाल को कौशांबी की चायल सीट से टिकट दिया। यह प्रयागराज पश्चिम सीट से सटी हुई है। पूजा को इसका फायदा मिला। चायल सीट पर उन्होंने अपना दल के नागेंद्र प्रताप सिंह पटेल को 13 हजार 209 वोटों से हराया। इस तरह पूजा पाल तीसरी बार विधायक बनीं। 2 साल तक वो पार्टी के साथ रहीं। लेकिन, फरवरी, 2024 में जब अतीक अहमद ने राजू पाल हत्याकांड के गवाह उमेश पाल की हत्या करवाई, तो पूजा सपा के खिलाफ हो गईं। इसी महीने उन्होंने राज्यसभा चुनाव में सपा के बजाय भाजपा कैंडिडेट को वोट दिया। उमेश पाल हत्याकांड मामले में यूपी सरकार ने ताबड़तोड़ एक्शन लिया। अतीक के बेटों समेत कुल 6 बदमाशों का एनकाउंटर किया गया सदन में हंगामा हुआ तो सीएम योगी ने खड़े होकर कहा कि माफिया को मिट्टी में मिला देंगे। इसके बाद पूजा ने खुलकर सीएम योगी और उनकी जीरो टॉलरेंस नीति की तारीफ की। 1 साल बाद सपा ने पूजा को निष्कासित कर दिया पूजा पाल धीरे-धीरे समाजवादी पार्टी के कार्यक्रमों से दूरी बनाने लगीं। लेकिन, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने उन्हें पार्टी से नहीं निकाला। पूजा पाल ने भी भाजपा की सदस्यता नहीं ली। लेकिन, सदन में जब भी मौका मिलता, पूजा सीएम योगी की तारीफ करतीं। 14 अगस्त, 2025 को उन्होंने सदन में कहा था- मुख्यमंत्रीजी ने माफिया के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाकर कुख्यात अपराधी अतीक अहमद को समाप्त किया और मुझे न्याय दिलाया। इसके कुछ ही घंटों बाद उन्हें अखिलेश ने पार्टी से निकाल दिया। मई, 2026 में यूपी में मंत्रिमंडल विस्तार होना था। तब कयास लगाए गए कि पूजा पाल को मंत्री बनाया जाएगा। आखिरी वक्त तक उनके नाम की चर्चा रही, लेकिन उन्हें मंत्री नहीं बनाया गया। अब पूजा को यूपी भाजपा की नई टीम में बतौर उपाध्यक्ष शामिल किया गया है। ————————- ये खबर भी पढ़ें… यूपी भाजपा की नई टीम में पूजा पाल उपाध्यक्ष बनीं, राजनाथ के छोटे बेटे की एंट्री, OBC की संख्या 16 से बढ़कर 25, ठाकुर कम हुए विधानसभा चुनाव से पहले यूपी भाजपा ने गुरुवार को अपनी नई टीम का ऐलान कर दिया। 64 नाम की इस लिस्ट में 52 लोगों को प्रदेश कार्यकारिणी यानी प्रदेश टीम में जगह मिली है। इनमें 19 उपाध्यक्ष, 19 मंत्री, 8 महामंत्री और 6 मोर्चा अध्यक्ष हैं। इसके अलावा, 6 क्षेत्रीय उपाध्यक्ष, 3 कार्यालय मंत्री और 3 अन्य पदाधिकारी भी बनाए गए हैं। ये खबर भी पढ़ें…