यूपी के मथुरा में सांप ने 3 दिन में एक परिवार के 3 लोगों को काट लिया। इसमें एक युवक की मौत हो गई, जबकि 2 लोग हॉस्पिटल में एडमिट हैं। 10 दिन से पूरा परिवार दहशत में है। पूरी रात बैठे-बैठे गुजर रही है। लोग दिन में घर से निकलते हैं। अंधेरा होने से पहले वापस आ जाते हैं। गांव के लोग भी इस अंधविश्वास में आ गए और सांप से बचने के लिए पूजा-पाठ कराने लगे। सांप बदला लेता है, ये बात लंबे समय से लोग कहते आए हैं। ऐसी कई खबरें आ चुकी हैं, जिनमें ये कहा गया है कि एक ही सांप ने 5 या 7 बार डसा है। क्या सांप सच में इंसानों की तरह बदला ले सकते हैं? सांप के बदले की कहानियां कहां से शुरू हुईं? कौन से ग्रंथ सांप या नागों के बदले का प्रमाण देते हैं? यूपी में कितने प्रकार के जहरीले सांप पाए जाते हैं? इन सारे सवालों के जवाब हम जानेंगे भास्कर एक्सप्लेनर में… सवाल: एक ही परिवार के 3 लोगों को सांप काटने का मामला क्या है? जवाब: मथुरा के सिहोरा गांव के रहने वाले सोनपाल ने बताया कि उनके बेटे मनोज की पत्नी ने जून में बेटे को जन्म दिया। पोते के जन्म की खुशी में 2 जुलाई को गांव में कुआं पूजन का कार्यक्रम रखा गया। 3 जुलाई को घर पर एक छोटा सांप दिखाई दिया। उसे हाथरस के रहने वाले मनोज के साले सचिन ने पकड़ लिया। उसे लाठी से पीट-पीटकर मार दिया और दूर ले जाकर फेंक दिया। सांप के बच्चे की मौत के 4 दिन बाद घर में एक सांप दिखाई दिया। सोनपाल ने आगे बताया कि 10 जुलाई को मनोज छत पर सो रहा था। वो नीचे आया और बोला कि कुछ काट लिया है। हमने सांप पकड़ने वालों को दिखाया, तो उसने उसे थप्पड़ मारे। फिर कहने लगे कि इसे अस्पताल में दिखाओ। हम वहां से अस्पताल ले गए। वहां डॉक्टरों ने कहा कि सब ठीक हो जाएगा। अस्पताल में उसकी हालत बिगड़ने लगी तो डॉक्टरों ने जयपुर रेफर कर दिया गया। हम जयपुर पहुंचे, तो वहां मनोज की मौत हो गई। 11 जुलाई को मनोज के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए उसके बहनोई दिनेश पहुंचे। अंतिम संस्कार के बाद दिनेश और मनोज के बड़े भाई पप्पू रात को कमरे में एक ही बेड पर सो गए। देर रात सांप ने दिनेश और पप्पू को डस लिया। इसके बाद सांप के डसने की खबर पूरे गांव में तेजी से फैल गई। वहीं, सपेरों ने गांव वालों से बताया कि अभी 3 सांप और हैं। इस अंधविश्वास की कहानी से गांव वालों में दहशत है। सपेरों ने बताया कि जिस सांप के बच्चे की मौत हुई, उसको पकड़कर डिब्बे में बंद कर दिया गया। वह इसी सांप का बच्चा था। सांप अपने बच्चे की मौत का बदला ले रहा है। उनकी रक्षा के लिए पूजा कराई जा रही है, ताकि खतरे को टाला जा सके। सवाल: कौन से ग्रंथ सांप या नागों के बदले का प्रमाण देते हैं? जवाब: काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पूर्व अध्यक्ष और ज्योतिषाचार्य प्रोफेसर विनय कुमार पांडे कहते हैं कि किसी भी शास्त्रीय ग्रंथ या पुराण में सांपों के बदला लेने जैसा कोई साफ वर्णन नहीं मिलता। न वेदों में, न उपनिषदों में और न ही प्रामाणिक पुराणों में ऐसी बात दर्ज है कि कोई नाग या नागिन किसी इंसान से बदला लेता है। यह पूरी बात सिर्फ लोक साहित्य और गांव-कस्बों की लोककथाओं में सुनने-पढ़ने को मिलती है। धीरे-धीरे इन्हीं किस्सों को फिल्मों ने और मसालेदार बना दिया। फिर लोगों ने इसे सच मानकर इस अंधविश्वास को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ा दिया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण और शास्त्र दोनों ही इस बात को खारिज करते हैं कि कोई सांप इंसानों की तरह बदला लेते हैं। सवाल: सांप के बदले की कहानियां कहां से शुरू हुईं? जवाब: एक्सपर्ट मानते हैं, सांप के बदला लेने की कहानियां असल में सांपों को बचाने के लिए गढ़ी गई थीं। पुराने समय में जब लोग जंगलों और खेतों में काम करते थे, तो सांपों से डरकर उन्हें मार देते थे। तभी गांवों में यह कहानी फैलाई गई कि अगर कोई सांप को मारेगा, तो नागिन या नाग उसका पीछा करके बदला लेगा। इस कहानी से लोग डर जाते थे और सांप को मारने से बचते थे। हालांकि, वैज्ञानिक नजरिए से देखें तो सांप के पास किसी को पहचान कर बदला लेने की ना तो याददाश्त होती है और ना ही ऐसी कोई योजना बनाने की क्षमता। इसके बावजूद आज भी लोगों का ऐसा मानना है कि सांप बदले की भावना रखते हैं। अगर उनको किसी ने नुकसान पहुंचाया, तो वो उस व्यक्ति की तस्वीर अपनी आंखों में खींच कर उसके पूरे परिवार को डस लेते हैं। ऐसी तमाम कहानियां और लोककथाएं पढ़ने और सुनने को मिल जाती हैं। इन्हीं लोककथाओं से बॉलीवुड इंडस्ट्री में बड़ी-बड़ी फिल्में और सीरियल बना दिए गए। इन नाटकों ने सांप के बदले की लोककथाओं को नई पीढ़ी में दोबारा जगा दिया। सांपों के बदले के मिथक को इतना मजबूत किया कि आज भी गांवों-कस्बों में लोग मानते हैं कि सांप बदला लेता है। साल- 1976 में एक फिल्म आई थी नागिन। इसमें रीना रॉय ने नागिन और जितेंद्र ने नाग का रोल निभाया था। इसका निर्देशन राजकुमार कोहली ने किया था। यह फिल्म भारतीय सिनेमा में नाग-नागिन की लोककथाओं और पुनर्जन्म की थीम पर आधारित थी, जो उस समय बहुत लोकप्रिय हुई थी। इस फिल्म की कहानी के मुताबिक, एक दिन कुछ दोस्त जंगल में शिकार के लिए आते हैं। ये लोग शहर से हैं और मनोरंजन के लिए जंगल में समय बिताने आए हैं। इनमें से एक दोस्त नाग (जितेंद्र) को देखता है और उसे मारने का फैसला करता है। शिकार के दौरान वह नाग को गोली मार देता है और नाग की मौत हो जाती है। नागिन (रीना रॉय) अपने प्रेमी की मौत से गहरे सदमे में चली जाती है और बदला लेने की कसम खाती है। इसके बाद नागिन एक-एक कर सबसे नाग की मौत का बदला लेती है। सवाल: क्या सांप इंसानों की तरह बदला ले सकता है? जवाब: नहीं, यह पूरी तरह से एक मिथक है। कुशीनगर के रेंज ऑफिसर अमित श्रीवास्तव बताते हैं- सांपों की मेमोरी बहुत सीमित होती है। वैज्ञानिक तौर पर देखा जाए तो सांप किसी इंसान या हमलावर को लंबे समय तक पहचान कर नहीं रख सकते। उनका दिमाग सिर्फ खतरे को पहचानने और खुद को बचाने के लिए काम करता है। सांप तब काटता है, जब उसे अचानक खतरा महसूस होता है या कोई उसे छेड़ता है। दरअसल, सांप की प्रवृत्ति खुद से हमला करने की नहीं होती। वह इंसान से दूर ही रहना चाहता है। जंगल या खेतों में अगर कोई व्यक्ति उनके बिल या रास्ते में आ जाता है, तभी काटने की घटनाएं होती हैं। लोगों के बीच यह भी कहा जाता है कि सांप ने जहर वापस चूस लिया। या किसी इंसान ने ऐसा किया। लेकिन, यह पूरी तरह से मिथ्या (गलत धारणा) है। सांप के काटने के बाद उसका जहर शरीर में नसों के जरिए फैलता है। जिसे कोई भी वापस खींच या चूस नहीं सकता। ज्यादातर सांप सिर्फ खतरे से बचाव के लिए काटते हैं। लेकिन किंग कोबरा एकमात्र ऐसा सांप है, जो बिना किसी वजह भी खुद से अटैक करता है। गोरखपुर जू के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. योगेश प्रताप सिंह बताते हैं- सांपों की दृष्टि सीमित होती है। वे अपने शिकार या खतरे को पहचानने के लिए मुख्य रूप से अपनी जीभ और अन्य संवेदी अंगों का इस्तेमाल करते हैं। डॉ. सिंह के मुताबिक, ‘सांप फोटो खींच लेते हैं या बदला लेते हैं’ यह धारणा असल में इसलिए भी बनाई गई थी, ताकि लोग सांपों को बेवजह न मारें। हजारों सांपों का रेस्क्यू कर चुके सपेरे शत्रुघ्न यादव बताते हैं- सांप कभी बदला नहीं लेते। यह सिर्फ इंसानों के मन का वहम होता है। अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि सांप ने दोबारा काटा है या वह बदला लेने आया है। हकीकत में ऐसा कुछ नहीं होता। सर्पदंश से ज्यादातर मौतें जहर से कम और डर की वजह से ज्यादा होती हैं। अगर किसी के मन में यह डर बैठ जाए कि उसे सांप ने काटा है, तो कई बार डर ही जानलेवा साबित हो जाता है। सवाल: क्या एक ही सांप किसी को बार-बार काट सकता है? जवाब: 15 जुलाई को यूपी के हमीरपुर जिले के राठ कोतवाली क्षेत्र में की इटाइल गांव में एक मामला आया। यहां रहने वाली डॉली सैनी को सांप ने काट लिया। डॉली की मां ने बताया कि डरकर बेटी को रिश्तेदारी में भेज दिया। वहां भी सांप ने उसे काट लिया। इसी तरह फतेहपुर से पिछले साल एक मामला सामने आया था। विकास दुबे नाम के शख्स ने दावा किया कि उसे 40 दिन में एक सांप ने 7 बार काटा। वह जहां भी जाता है, सांप उसका पीछा करता और उसे डस लेता। हालांकि, इस मामले में डॉक्टरों ने बताया कि विकास दुबे को स्नैक फोबिया है। सांप ने उसे 7 बार नहीं, सिर्फ 1 बार ही काटा था। बीएचयू के न्यूरोलॉजिस्ट डिपार्टमेंट में प्रोफेसर डॉ. वीएन मिश्रा बताते हैं- सांपों के पास देखने की सामान्य क्षमता नहीं होती। उनकी जीभ सेंसर की तरह काम करती है। जो हवा में मौजूद कण, गंध को पकड़कर रास्ते और शिकार को ढूंढती है। सांप हीट और गंध से ही अपने आसपास की चीजों को पहचानते हैं। कई बार जब सांप घर में आता है और लोग उसे लाठी-डंडे से मारते हैं, तो उस सांप की गंध उस लाठी या जगह पर रह जाती है। यही गंध नर या मादा सांप को खींच सकती है। इसलिए अक्सर लोग मान लेते हैं कि वही सांप वापस आया है। असल में वो कोई दूसरा सांप भी हो सकता है। सांपों में किसी इंसान को पहचानने या याद रखने की क्षमता नहीं होती। सांप आमतौर पर अपने इलाके में ही बिल बनाकर रहते हैं, बहुत दूर तक नहीं जाते। सांप के लिए 10-12 किलोमीटर दूर जाकर किसी को पहचान कर काटना वैज्ञानिक तौर पर संभव नहीं। ये सिर्फ एक अंधविश्वास है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सांप के काटने से होने वाली मौतों में सिर्फ 25-30% मामलों में ही असली वजह जहर होता है। बाकी करीब 70% मौतें डर, झाड़-फूंक, गलत इलाज या समय पर सही इलाज न मिलने के कारण होती हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर किसी को कितना भी जहरीला सांप क्यों न काट ले, अगर वक्त रहते सही इलाज और एंटी वेनम लग जाए तो मरीज के बचने की पूरी संभावना होती है। इसलिए झाड़-फूंक या देरी करने की बजाय तुरंत डॉक्टर को दिखाना सबसे जरूरी है। सवाल: क्या सांप फोटो खींच लेते हैं? जवाब: नहीं, सांपों के पास इंसानों जैसा दिमाग नहीं होता। उनके पास नियोकॉर्टेक्स नहीं होता, जो इंसानों को सोचने-समझने और चेहरे पहचानने में मदद करता है। यही वजह है, सांप चेहरे को नहीं पहचानते। ये सब सिर्फ मिथ्या है कि सांप आंखों में किसी की तस्वीर खींच लेते हैं। सवाल: यूपी में कितने प्रकार के सांप पाए जाते हैं? जवाब: उत्तर प्रदेश में करीब 60 सांपों की प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें से 4 प्रजातियां जहरीली मानी जाती हैं। यूपी में आमतौर पर मिलने वाले जहरीले सांपों में कोबरा, करैत, रसल वाइपर और सॉ स्केल्ड वाइपर हैं। करैत को लेकर खास बात यह है कि यह अक्सर गांवों में बिस्तरों के पास पाया जाता है, इसलिए रात में सोते समय सावधानी जरूरी होती है। बाकी ज्यादातर सांप गैर-जहरीले होते हैं जैसे रैट स्नेक, वुल्फ स्नेक, वाटर स्नेक जो इंसानों के लिए नुकसानदेह नहीं होते। फिर भी लोगों में डर के कारण इन्हें भी मार दिया जाता है। जबकि ये पर्यावरण के लिए बहुत जरूरी होते हैं। क्योंकि ये चूहों और छोटे जीवों की आबादी नियंत्रित रखते हैं। सवाल: नागपंचमी पर नाग देवता की पूजा क्यों की जाती है? जवाब: ज्योतिषाचार्य प्रोफेसर विनय कुमार पांडे बताते हैं- नाग पंचमी पर जिनकी पूजा की जाती है वो कीट योनि के नहीं, बल्कि देव प्रजाति के सांप है। नागपंचमी पर अष्टनाग यानी की 8 नागों (अनंत, वासुकी, शेष, पद्म, कंबल, शंखपाल, कालिया, तक्षक) की पूजा की जाती है। जिससे इनके जहर से रक्षा हो सके। सांप जहरीला जीव है, फिर भी शिवजी ने नाग देव को अपने गले में धारण किया है। इसका संदेश ये है कि हमें सभी जीवों का सम्मान करना चाहिए। सभी जीवों का सृष्टि के संचालन में योगदान रहता है। सांप भी आहार श्रृंखला का मुख्य जीव है। ये चूहों को खा जाता है। नागों की वजह से ही चूहों की संख्या नियंत्रित रहती है। अगर सांप नहीं होंगे, तो चूहे बढ़ जाएंगे। चूहे ज्यादा हो जाएंगे, तो हमारा सारा अनाज खा जाएंगे। इस नजरिए से सांप का होना भी हमारे जीवन के लिए जरूरी है। ——————————– ये खबर भी पढ़ें… PCS ज्योति मौर्य के पति को क्या मिलेगा गुजारा भत्ता?, पुरुष को भी भत्ता मांगने का अधिकार? दावा कितना मजबूत? यूपी की PCS अफसर ज्योति मौर्या के सफाईकर्मी पति आलोक मौर्या ने गुजारा भत्ता मांगा है। आलोक ने इसके लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिका पर हाईकोर्ट ने ज्योति मौर्या को नोटिस जारी किया है। अगली सुनवाई 8 अगस्त को होगी। भारतीय समाज में पत्नी को गुजारा भत्ता मिलने की बात चलन में है। लेकिन, आलोक मौर्या की अपील ने नई बहस छेड़ दी है। क्या पुरुष को भी पत्नी से गुजारा भत्ता मांगने का अधिकार है? कौन-कौन से एक्ट में इसका प्रावधान है? नियम और कानून क्या कहते हैं ? पढ़िए पूरी खबर…