गांव वाले बोले- यादव जाति देखकर डब्लू का एनकाउंटर किया:सलाखों से पत्नी ने किए अंतिम दर्शन; जेल में खुद सिंदूर धोया, चूड़ियां तोड़ीं

बेगूसराय के कुख्यात अपराधी डब्लू यादव को 28 जुलाई को पुलिस ने एनकाउंटर में ढेर कर दिया था। यूपी STF की स्पेशल टीम और बेगूसराय STF, DIU की टीम से उसकी मुठभेड़ हुई थी। डब्लू पर साहेबपुर कमाल में हम पार्टी के नेता राकेश कुमार की हत्या का आरोप था। उसके ऊपर 50 हजार रुपए का इनाम था। आज उसका अंतिम संस्कार किया गया। डब्लू के बेटे राजकुमार का हाथ पकड़ा कर भतीजे राहुल ने मुखाग्नि दी। दरअसल, डब्लू यादव HAM नेता राकेश कुमार की हत्या के मामले में फरार चल रहा था। बेगूसराय पुलिस ने उसे भगोड़ा घोषित किया था। मंगलवार शाम को एंबुलेंस से उसकी बॉडी बेगूसराय पहुंची। शव पहुंचते ही ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। इस दौरान लोगों ने अमर रहे के नारे लगाए। ग्रामीणों का कहना है, ‘यादव जाति का होने के कारण डब्लू को मौत की सजा दी गई।’ उन्होंने कहा, ‘जब‎ किसी दूसरी जाति के लोग यादव जाति के लोगों का मर्डर कर देते हैं तो ‎उसका एनकाउंटर क्यों नहीं होता है।’ डब्लू की पत्नी सीता देवी संदलपुर पंचायत की सरपंच हैं। वो हम नेता राकेश हत्याकांड में जेल में बंद है। पति की मौत के बाद भी उसे पैरोल नहीं मिली। उसे कल यानी मंगलवार तक पति के मौत की जानकारी नहीं दी थी। कल एंबुलेंस से जेल में लाश पहुंची। परिवार के एक सदस्य ने पत्नी को एनकाउंटर के बारे में बताया। इसके बाद उसने खुद अपनी मांग को धोया और चूड़ी तोड़ ली। कल रात पत्नी ने खाया भी नहीं खाया और जेल में गुमसुम होकर बैठी है। आज भी उसने खाना नहीं खाया है। सीता देवी को एंबुलेंस में रखे उसके पति की लाश का सलाखों के पीछे से ही अंतिम दर्शन कराया गया। पढ़िए डब्लू यादव और उसके अपराध की पूरी कहानी… पुलिस के खिलाफ नारेबाजी, अमर रहे के नारे लगे डब्लू यादव का शव जब साहेबपुर कमाल के संदलपुर गांव शव पहुंचा तो ‎अमर रहे के नारे लगाए गए। शव के पहुंचते ही हजारों की भीड़ जमा हो गई। मां के ‎अलावा चारों बेटी और बाकी परिवार को लोग दहाड़ मारकर रो रहे थे। वहीं लोगों के चेहरे ‎पर पुलिस प्रशासन के प्रति काफी आक्रोश देखने को मिला। लोगों ने‎ पुलिस-प्रशासन के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे भी लगाए। ग्रामीणों ने कहा,‎ ‘यादव जाति का होने के कारण डब्लू को मौत की सजा दी गई। जब‎ किसी दूसरी जाति के लोग यादव जाति के लोगों का मर्डर कर देते हैं तो ‎उसका एनकाउंटर क्यों नहीं होता है।’ मं बोली- पुलिस ने घर तोड़ा अब बेटे को मार दिया डब्लू की मां एक ही रट लगाए ‎बदहवास रोती जा रही थी कि ‘एक ते पुलिस डब्लू के घोर तोड़ देलकै,‎सब समान कुर्की-जब्ती कैर कै ले गेलै। आब हमरा बेटो के मार‎ देलकै। आब हम्मर 4 गो पोती आरो एगो पोता के के देखतै।’ मां केी चित्कार के बीच चारों बेटियां भी बदहवास होकर रो रही थीं। एनकाउंटर कर के पुलिस ने पूरे परिवार को सजा दी लोगों ने कहा कि हत्या करने का गुनाह डब्लू ने‎ किया तो उसे पकड़कर जेल में डाल दिया जाता। उसका एनकाउंटर कर के उसकी सजा उसके बच्चे को दी गई। परिजनों के आक्रोश को देखते हुए किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए‎ मृतक हम नेता के घरों के आसपास और गांव में जगह-जगह पुलिस बल की तैनाती की गई थी। ASI राघव कुमार सिंह, SI सुभाष चंद्र सिंह, SI अनिल पासवान, SI कौशलेंद्र‎कुमार सिंह सहित भारी मात्रा में पुलिस पदाधिकारी भी स्थिति पर नजर ‎बनाए हुए थे।‎ दोस्त बोला- डब्लू गलत होता तो भीड़ नहीं जुटती वहीं, खगड़िया के रहने वाले डब्लू के दोस्त सुनिल कुमार ने बताया, ‘वो खुद एक न्यायिक व्यक्ति थे। यहां पर सरपंच के पद पर कार्यरत थे। उनको यूपी में पकड़ा गया था और रास्ते में उन्हें मार दिया गया।’ ‘अगर एनकाउंटर हुआ है, तो सत्यापित हो। जातिवाद के कारण इन्हें बहुत टॉर्चर किया गया है। वो न्यायिक व्यक्ति थे। उनके लिए भीड़ जमा हुई है। अगर वो गलत होते तो भीड़ जमा नहीं होती।’ पत्नी को नहीं मिली पैरोल बता दें कि डब्लू के ‎एनकाउंटर में मारे जाने के बाद उसकी ‎पत्नी सीता देवी के वकील की ओर से‎ पैरोल की मांग की गई थी। बताया जाता ‎है कि जून में दी गई जमानत आवेदन ‎पर सुनवाई पर 7 अगस्त को फैसला‎ होना था, इसके चलते सीता देवी को‎ पैरोल नहीं मिली। डब्लू यादव के मारे जाने के बाद उसके गांव संदलपुर के अलावा साहेबपुर कमाल थाना के अलावा सीमावर्ती खगड़िया और मुंगेर में भी सन्नाटा पसरा है। गांव के लोगों के मुताबिक, रंगदारी डब्लू यादव के लिए साधारण बात थी, अपने करीब 25 साल के आपराधिक जीवन में उसने हत्या तो दर्जन भर की होगी, लेकिन डर से लोग उसे नामजद भी नहीं कर पाते थे। फिलहाल, उस पर हत्या समेंत अलग-अलग संगीन अपराध के 24 मामले दर्ज हैं। इनमें साहेबपुर कमाल थाना में आर्म्स एक्ट और अन्य धाराओं के तहत 22 जबकि बलिया और मुंगेर मुफस्सिल थाना में अलग-अलग धाराओं के तहत एक-एक केस दर्ज हैं। मां बोली- बेटा तो गया बहू को छोड़ दीजिए मई महीने के आखिरी सप्ताह में ही डब्लू यादव पर आरोप लगा था कि उसने जीतन राम मांझी की पार्टी HAM नेता राकेश उर्फ विकास की 24 मई को अपहरण के 5 दिन बाद यानी 29 मई को हत्या कर दी गई थी। हत्या के बाद लाश को मुंगेर के लाल दियारा के बालू में गाड़ दिया था। डब्लू यादव के मारे जाने के बाद विकास के परिवार के लोगों का ऑफ कैमरा कहते हैं, ‘भगवान के घर देर है अंधेर नहीं।’ उधर, डब्लू यादव के घर में उसकी मां, भाई, तीन बेटियां और एक बेटा मंगलवार रातभर लाश के पास बिलखते रहे। डब्लू यादव की मां ने कहा, ‘मेरा बेटा तो चला गया है, लेकिन जिस अपराध में मेरी बहू सीता देवी को जेल में रखा गया है, पुलिस अब उसे छोड़ दे। अपराधी को तो सजा मिल ही गई। मेरी बहू का क्या कसूर?’ सीता देवी के वकील की ओर से पैरोल की मांग की गई थी, लेकिन जून में दिए गए जमानत आवेदन पर सुनवाई चल रही है। 7 अगस्त को जमानत आवेदन पर फैसला होना था। इसके कारण पैरोल नहीं दिया गया। 18 जुलाई को बिहार पुलिस ने डब्लू यादव को भगोड़ा घोषित किया था बेगूसराय SP मनीष ने बताया, ‘हम नेता राकेश की हत्या मामले में पुलिस लगातार मुख्य आरोपी डब्लू यादव की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही थी। 50 हजार का इनाम घोषित करने के साथ ही 18 जुलाई को बिहार पुलिस की ओर से डब्लू यादव को भगोड़ा घोषित कर दिया गया था। इसके बाद बिहार पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की विशेष टीम और बेगूसराय DIU की टीम बिहार से बाहर उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा में लगातार छापेमारी कर रही थी, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। डब्लू पर जमीन कब्जा करने का था आरोप दियारा के बालू से लेकर कुरहा बाजार के फोरलेन तक वही होता था, जो डब्लू चाहता था। दियारा में किसी की जमीन कब्जा करना, बालू का धंधा या फिर कुरहा बाजार और आसपास के इलाके रंगदारी वसूली में डब्लू का नाम सामने आ चुका है। डब्लू साल 2018-19 में राजनीति में पैठ बनाने की कोशिश करने लगा और राजद के करीब आया था। अपने राजनीति की धमक दिखाने के लिए उसने साल 2021 में पत्नी सीता देवी को सरपंच का चुनाव जितवाया था। इससे आगे राजनीतिक पैठ बनाता कि उससे पहले ही उसका एनकाउंटर हो गया। फौजी की उसके बेटे के सामने ही गोली मारकर हत्या कराई थी संदलपुर के हम पार्टी के प्रखंड अध्यक्ष राकेश उर्फ विकास की अपहरण के बाद हत्या के अलावा, डब्लू यादव ने साल 2017 में ज्ञानटोल के रहने वाले फौजी महेंद्र यादव की कुरहा बाजार से लौटने के दौरान बेटे के सामने ही गोली मारकर हत्या करवा दी थी। डब्लू यादव उस समय जेल में था और महेंद्र यादव ने उसके खिलाफ किसी मामले में कोर्ट में गवाही दी थी। इसी से आक्रोशित डब्लू ने अपने गुर्गों से महेंद्र की हत्या करवाई थी, जिसमें वह नामजद हुआ था। डब्लू ने दिसंबर 2014 में सलेमपुर निवासी योगेंद्र यादव से रंगदारी मांगी थी और नहीं देने पर उसे गोली मारकर घायल कर दिया था। इसके अलावा, नवंबर 2015 में डब्लू यादव ने ज्ञानटोल के रहने वाले चिमनी भट्टा मालिक रूपेश कुमार से हथियार के बल पर 2 लाख रुपए की रंगदारी मांगी थी। नहीं देने पर जान से मारने की धमकी भी दी थी। राकेश की अपहरण के एक दिन बाद ही चला गया था NCR पुलिस सूत्रों के अनुसार, हम नेता राकेश उर्फ विकास की हत्या करने के बाद डब्लू यादव अपने सहयोगियों के साथ 25 मई को ही दिल्ली एनसीआर चला गया। वहां भी अपना गैंग बना रहा था। उसका गैंग हापुड़, नोएडा, गुड़गांव आदि के आसपास एक्टिव होने लगा था। जिसका इनपुट यूपी एसटीएफ को पहले से था तो वह उसकी खोजबीन में जुटी थी, उसका नेटवर्क खंगाला जा रहा था। इसी दौरान जब बिहार से भी एसटीएफ और बेगूसराय डीआईयू को टीम पहुंच गई तो खोजने में और आसानी हुई।