गाजियाबाद में सिपाही लग्जरी कारों की चोरी कराता था। इस गैंग ने 50 से अधिक लग्जरी कारों को चुराया है। पहली सितंबर को पकड़े गए सलमानी गैंग के सदस्यों ने सिपाही का सच बताया। आरोपी सिपाही को शनिवार देर रात को सस्पेंड कर दिया गया। आरोपी सिपाही फरार है। पुलिस के अनुसार, आरोपी सिपाही गाड़ियों की डिमांड वॉट्सऐप पर देता था। इसके बाद गैंग के सदस्य दिल्ली NCR और आसपास के इलाकों से कार चोरी करते। गैंग ने चोरी की इन गाड़ियों को दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान जैसे राज्यों में बेचा है। गाजियाबाद पुलिस के एडिशनल सीपी ने बताया कि सिपाही की कुंडली खंगाली जा रही है। उसके खिलाफ आपराधिक केस चलाने की तैयारी की जा रही है। सिपाही की पूरी करतूत से पुलिस अफसर भी हैरान हैं। दैनिक भास्कर पर पढ़िए वाहन चोरी कराने वाले सिपाही की कहानी… जानिए क्या था पूरा मामला एक सितंबर को पुलिस ने पकड़ा था सलमानी गैंग गाजियाबाद पुलिस ने 1 सितंबर को लोनी में सलमानी गैंग को पकड़ा। जिसमें मोहम्मद चांद, सूफियान, उवेस और बृजमोहन उर्फ बीएम को गिरफ्तार किया था। इनके पास से चोरी की 7 कारें, फर्जी नंबर प्लेट, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए। पकड़े गए चोरों से पूछताछ में खुलासा हुआ कि गैंग अब तक 50 से 60 से अधिक वाहन चोरी किए हैं। चोरी के कारें वेस्ट यूपी, दिल्ली, हरियाणा में बेची गईं हैं। सिपाही बताता था कि कौन सी कार चुरानी है
गिरफ्तार चोरों से पूछताछ में एक बड़ा खुलासा हुआ। सलमानी गैंग के एक सदस्य ने बताया कि लोनी थाने में तैनात सिपाही मनीष कुमार चौहान कार चोरी करवाता था। सिपाही वॉट्सऐप पर कॉल करके बताता था कि कौन सी गाड़ी चाहिए। फिर वे लोग वह गाड़ी चुराते थे। चोरी करके गाड़ी उसके बताए हुए स्थान पर पहुंचा देते थे। तमाम गाड़ियों को वह मुरादनगर की एक फैक्ट्री में रखते थे। इसके अलावा कौशांबी बस स्टैंड के पास एक खाली जगह पर भी गाड़ियों को रखा जाता था। पुलिस को गैंग के एक सदस्य ने बताया कि गाड़ियों को उसके बताए स्थान पर रखने के बाद उनका काम खत्म हो जाता था। मनीष अपने नेटवर्क के जरिए उसे रिसीवर तक पहुंचाता था। देश के कई राज्यों में चोरी का नेटवर्क
पुलिस ने बताया कि गैंग का नेटवर्क दिल्ली, वेस्ट यूपी, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब और झारखंड आदि राज्यों में फैला है। सिपाही पूरे नेटवर्क को ऑपरेट करता था। उसके पास हर इलाके से डिमांड आती थी और फिर डिमांड मिलने के बाद वह गैंग को चोरी के लिए एक्टिवेट करता था। GPS ट्रैकर ने खोला भांडा, मुरादनगर से मिली चोरी की ब्रेजा लिंक रोड थानाक्षेत्र से चोरी हुई ब्रेजा कार तक पहुंचने की कोशिश में पुलिस ने सिपाही के कार लिफ्टिंग गैंग का भंड़ाफोड़ किया है। ब्रेजा कार का सुराग पाने के लिए पुलिस ने करीब 25 किलोमीटर के इलाके में फैले 300 से ज्यादा CCTV फुटेज खंगाले। पुलिस को चोरी गई ब्रेजा कार मुरादनगर की एक फैक्ट्री में खड़ी मिली। पुलिस ने रेड किया। मौके पर सिपाही मनीष भी मिला। पुलिसवालों ने जब सवाल किए तो उसने बताया कि वह भी एक चोरी की कार की तलाश में पहुंचा था। पुलिस को चाय के बहाने हटाकर, कार हटवाया सिपाही मनीष ने वहां पहुंचे अन्य पुलिसवालों को चाय ऑफर किया और सबको चाय पिलाने ले गया। हालांकि, मनीष पर पुलिसवालों को शक हो गया और मौका से हटने के पहले ब्रेजा कार में GPS ट्रैकर लगा दिया। पुलिस ने बताया कि चाय पीने सब पुलिसवाले मनीष के साथ चले गए तो उसने गैंग के सदस्यों से बोलकर गाड़ी वहां से हटवा दी। चोर गाड़ी लेकर निकल गए। चार पीकर वापस लौटे तो गाड़ी नहीं थी। पुलिसवाले वहां से लौट गए। मनीष भी उनके साथ निकला और अपने थाने चला गया। ब्रेजा को पुलिस ने ट्रैकर से ट्रेस किया। कुछ ही देर में गाड़ी को बागपत के चांदीनगर इलाके में बरामद कर लिया। मनीष कुमार का पुलिस महकमे में रसूख
सिपाही मनीष कुमार, 2006 बैच का हेड कॉन्स्टेबल है। वह मुजफ्फरनगर के खतौली का रहने वाला है। गाजियाबाद में तैनाती के दौरान एक चर्चित इंस्पेक्टर का करीबी माना जाता था। लोनी और मुरादनगर थाने में भी उसकी काफी चलती थी। कार चोरी गैंग के सदस्यों के पुलिस के सामने दिए गए बयान के बाद शनिवार देर रात को उसे सस्पेंड कर दिया गया। हालांकि, गैंग के सदस्यों के पकड़े जाने के बाद से ही वह फरार है। हापुड़ में भी विवादों में रहा है सिपाही मनीष गाजियाबाद के लोनी थाने में तैनात सिपाही मनीष कुमार चौहान पहले भी विवादों में रह चुका है। गाजियाबाद से पहले वह हापुड़ में तैनात था। हापुड़ में तैनाती के दौरान अक्टूबर 2019 में उसके खिलाफ पिलखुवा थाने में कस्टडी में मौत पर हत्या का केस दर्ज किया गया था। 18 अक्टूबर 2019 को हापुड़ पुलिस ने सिपाही को जेल भेजा था। इससे पहले गढ़ थाने में तैनाती के समय भी सस्पेंड हो चुका है। विभागीय जांच शुरू, केस दर्ज करने की तैयारी
एडिशनल पुलिस कमिश्नर आलोक प्रियदर्शी ने बताया, “सिपाही मनीष कुमार की भूमिका की जांच की जा रही है। उसे सस्पेंड कर दिया गया है। यह सिपाही पहले किन-किन थानों में तैनात रहा, उसकी रिपोर्ट भी मांगी गई है। जांच के बाद आगे की कार्रवाई होगी।” ————————— ये खबर भी पढ़िए… भाइयों की नौकरी छूटी, बच्चों ने स्कूल नहीं देखा:हाथरस कांड का पीड़ित परिवार बोला- 5 साल से कैदी बने, घर पर CRPF का पहरा ‘हमारा पूरा परिवार 5 साल से CRPF की सुरक्षा में कैद है। हम घर के गेट पर खड़े ठेले से सब्जी खरीदने जाएंगे, तो CRPF के रजिस्टर में एंट्री करनी होगी। दवा लेने अस्पताल या मेडिकल स्टोर जाना है, तो CRPF की गाड़ी में जाएंगे। ऐसे में हम खेती-बाड़ी कैसे करें? नौकरी कैसे करें? अपने बच्चों को कैसे पढ़ाएं? सबसे बेहतर है कि हमें दूसरे शहर में शिफ्ट कर दिया जाए। जिससे हम बिना सुरक्षा रहकर नौकरी करके अपना घर चला सकें।’ (पूरी खबर पढ़िए)
गिरफ्तार चोरों से पूछताछ में एक बड़ा खुलासा हुआ। सलमानी गैंग के एक सदस्य ने बताया कि लोनी थाने में तैनात सिपाही मनीष कुमार चौहान कार चोरी करवाता था। सिपाही वॉट्सऐप पर कॉल करके बताता था कि कौन सी गाड़ी चाहिए। फिर वे लोग वह गाड़ी चुराते थे। चोरी करके गाड़ी उसके बताए हुए स्थान पर पहुंचा देते थे। तमाम गाड़ियों को वह मुरादनगर की एक फैक्ट्री में रखते थे। इसके अलावा कौशांबी बस स्टैंड के पास एक खाली जगह पर भी गाड़ियों को रखा जाता था। पुलिस को गैंग के एक सदस्य ने बताया कि गाड़ियों को उसके बताए स्थान पर रखने के बाद उनका काम खत्म हो जाता था। मनीष अपने नेटवर्क के जरिए उसे रिसीवर तक पहुंचाता था। देश के कई राज्यों में चोरी का नेटवर्क
पुलिस ने बताया कि गैंग का नेटवर्क दिल्ली, वेस्ट यूपी, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब और झारखंड आदि राज्यों में फैला है। सिपाही पूरे नेटवर्क को ऑपरेट करता था। उसके पास हर इलाके से डिमांड आती थी और फिर डिमांड मिलने के बाद वह गैंग को चोरी के लिए एक्टिवेट करता था। GPS ट्रैकर ने खोला भांडा, मुरादनगर से मिली चोरी की ब्रेजा लिंक रोड थानाक्षेत्र से चोरी हुई ब्रेजा कार तक पहुंचने की कोशिश में पुलिस ने सिपाही के कार लिफ्टिंग गैंग का भंड़ाफोड़ किया है। ब्रेजा कार का सुराग पाने के लिए पुलिस ने करीब 25 किलोमीटर के इलाके में फैले 300 से ज्यादा CCTV फुटेज खंगाले। पुलिस को चोरी गई ब्रेजा कार मुरादनगर की एक फैक्ट्री में खड़ी मिली। पुलिस ने रेड किया। मौके पर सिपाही मनीष भी मिला। पुलिसवालों ने जब सवाल किए तो उसने बताया कि वह भी एक चोरी की कार की तलाश में पहुंचा था। पुलिस को चाय के बहाने हटाकर, कार हटवाया सिपाही मनीष ने वहां पहुंचे अन्य पुलिसवालों को चाय ऑफर किया और सबको चाय पिलाने ले गया। हालांकि, मनीष पर पुलिसवालों को शक हो गया और मौका से हटने के पहले ब्रेजा कार में GPS ट्रैकर लगा दिया। पुलिस ने बताया कि चाय पीने सब पुलिसवाले मनीष के साथ चले गए तो उसने गैंग के सदस्यों से बोलकर गाड़ी वहां से हटवा दी। चोर गाड़ी लेकर निकल गए। चार पीकर वापस लौटे तो गाड़ी नहीं थी। पुलिसवाले वहां से लौट गए। मनीष भी उनके साथ निकला और अपने थाने चला गया। ब्रेजा को पुलिस ने ट्रैकर से ट्रेस किया। कुछ ही देर में गाड़ी को बागपत के चांदीनगर इलाके में बरामद कर लिया। मनीष कुमार का पुलिस महकमे में रसूख
सिपाही मनीष कुमार, 2006 बैच का हेड कॉन्स्टेबल है। वह मुजफ्फरनगर के खतौली का रहने वाला है। गाजियाबाद में तैनाती के दौरान एक चर्चित इंस्पेक्टर का करीबी माना जाता था। लोनी और मुरादनगर थाने में भी उसकी काफी चलती थी। कार चोरी गैंग के सदस्यों के पुलिस के सामने दिए गए बयान के बाद शनिवार देर रात को उसे सस्पेंड कर दिया गया। हालांकि, गैंग के सदस्यों के पकड़े जाने के बाद से ही वह फरार है। हापुड़ में भी विवादों में रहा है सिपाही मनीष गाजियाबाद के लोनी थाने में तैनात सिपाही मनीष कुमार चौहान पहले भी विवादों में रह चुका है। गाजियाबाद से पहले वह हापुड़ में तैनात था। हापुड़ में तैनाती के दौरान अक्टूबर 2019 में उसके खिलाफ पिलखुवा थाने में कस्टडी में मौत पर हत्या का केस दर्ज किया गया था। 18 अक्टूबर 2019 को हापुड़ पुलिस ने सिपाही को जेल भेजा था। इससे पहले गढ़ थाने में तैनाती के समय भी सस्पेंड हो चुका है। विभागीय जांच शुरू, केस दर्ज करने की तैयारी
एडिशनल पुलिस कमिश्नर आलोक प्रियदर्शी ने बताया, “सिपाही मनीष कुमार की भूमिका की जांच की जा रही है। उसे सस्पेंड कर दिया गया है। यह सिपाही पहले किन-किन थानों में तैनात रहा, उसकी रिपोर्ट भी मांगी गई है। जांच के बाद आगे की कार्रवाई होगी।” ————————— ये खबर भी पढ़िए… भाइयों की नौकरी छूटी, बच्चों ने स्कूल नहीं देखा:हाथरस कांड का पीड़ित परिवार बोला- 5 साल से कैदी बने, घर पर CRPF का पहरा ‘हमारा पूरा परिवार 5 साल से CRPF की सुरक्षा में कैद है। हम घर के गेट पर खड़े ठेले से सब्जी खरीदने जाएंगे, तो CRPF के रजिस्टर में एंट्री करनी होगी। दवा लेने अस्पताल या मेडिकल स्टोर जाना है, तो CRPF की गाड़ी में जाएंगे। ऐसे में हम खेती-बाड़ी कैसे करें? नौकरी कैसे करें? अपने बच्चों को कैसे पढ़ाएं? सबसे बेहतर है कि हमें दूसरे शहर में शिफ्ट कर दिया जाए। जिससे हम बिना सुरक्षा रहकर नौकरी करके अपना घर चला सकें।’ (पूरी खबर पढ़िए)