गोंडा से योग-दिवस पर योगाचार्य पतंजलि के गांव से रिपोर्ट:महर्षि पतंजलि को माना जाता है शेषावतार, पूरे विश्व में योग की शुरुआत की थी

एक तरफ पूरा विश्व 21 जून को 11वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के लिए तैयार है। वहीं दूसरी ओर, योग के जनक माने जाने वाले महर्षि पतंजलि की जन्मस्थली आज भी विकास के इंतजार में है। दैनिक भास्कर की टीम महर्षि पतंजलि की जन्मस्थली कोड़र गांव पहुंची। यहां के हालातों के बारे में जाना। वहां पर क्या क्या विकास हुआ है। कल के कार्यक्रम को लेकर क्या तैयारी है। श्री पतंजलि जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष से बात की। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…. अयोध्या से महज 22 किलोमीटर की दूरी पर गोंडा जिले के कोड़र गांव में स्थित है। महर्षि पतंजलि का आश्रम। यह वही स्थल है, जिसे शेषावतार माने गए महर्षि पतंजलि की जन्मस्थली माना जाता है। कोड़र गांव में आज भी उनकी याद में प्रतिदिन योग कार्यशालाएं चलती हैं, जहां बड़ी संख्या में लोग आकर योग सीखते हैं और इसके साथ प्रकृति का आनंद भी लेते हैं। लेकिन अब पर्यटन विभाग यहां पर करोड़ों रुपए की लागत से धर्मशाला सहित अन्य निर्माण करा रहा है। साथ ही साथ लगभग 30 लाख रुपए के निजी खर्चे से स्थानीय लोगों ने महर्षि पतंजलि की मूर्ति मंगवा है। मंदिर भी स्थानीय लोगों द्वारा बनवाया जा रहा है। कल पहली बार डीएम नेहा शर्मा के अथक प्रयास से महर्षि पतंजलि की जन्मस्थली से 200 मीटर की दूरी पर कंपोजिट विद्यालय कोडर में पहली बार अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाएगा। जहां पर उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री दारा सिंह चौहान, डीएम नेहा शर्मा सहित जिले के हजारों की संख्या में लोग उपस्थित रहेंगे। पर्यटन विभाग द्वारा भी यहां पर एक बड़े धर्मशाला का निर्माण कराया जा रहा है वह भी स्थानीय लोगों के काफी कहने और काफी प्रस्ताव देने के बाद यह निर्माण कराया जा रहा है। अब जानिए क्या है मान्यता..
महर्षि पतंजलि की जन्मस्थली के ठीक सामने कोड़र झील है। यह नदी सर्पाकार की तरह है, क्योंकि महर्षि पतंजलि को शेषावतार माना जाता है। बच्चों को योग की शिक्षा देने के दौरान महर्षि पतंजलि को कोई देख नहीं पाया, वह पर्दे के पीछे रहते थे और आगे बच्चे बैठकर की योगी की शिक्षा लेते थे। एक बार एक बच्चे ने जैसे ही उसे पर्दे को उठाकर के देखने का प्रयास किया, वह लड़का तत्काल भस्म हो गया और उसके बाद से महर्षि पतंजलि अंतरध्यान हो गए थे। इसके बात गोंडा से योग की शुरुआत हुई और पूरे विश्व तक पहुंची। देश-विदेश से लोग आते हैं लोग
आज भी उनकी जन्मस्थली पर उनकी समाधि बनी हुई है। जहां पर गोंडा ही नहीं बल्कि देश-विदेश से लोग आते हैं और महर्षि पतंजलि के बारे में जानकारी करके यहां पर जाते हैं, लेकिन पर्यटन की दृष्टिगत इसे अभी फिलहाल जिस तरीके से डेवलप करना चाहिए था, डेवलप नहीं किया गया है। महर्षि पतंजलि के गांव में विकास नहीं
जी हां योग सूत्र और महाभाष्य की रचना करने वाले महर्षि पतंजलि का गांव ही विकास से खुद ही अछूता है। बल्कि महर्षि पतंजलि का आश्रम व परिसर भी विकास के बिना वीरान पड़ा हुआ है। आश्रम में न ही बाउंडरी वाल है न ही सोलर लाइट की व्यवस्था है और ना ही किसी प्रकार की कोई इंटरलॉकिंग है। उबड़ खाबड़ जमीन में पेड़ों के घेरे में आश्रम को चलाया जाता है। महर्षि पतंजलि जन्मस्थल की पहचान इतनी है कि उनके नाम पर एक चबूतरा बना ही नजर आता है। ये चबूतरा भी श्रीपतंजलि जन्म भूमि न्यास के अध्यक्ष डॉ भगवदाचार्य के प्रयास से ही बन सका था। पास ही बहने वाली कोडर झील नौ किलोमीटर के क्षेत्र में फैली है, लेकिन ये भी अपने उद्धार का इंतजार कर रही है। डीएम ने कहा- कल यहां होगा बड़ा योग कार्यक्रम
गोंडा जिला अधिकारी नेहा शर्मा ने बताया- कल हम लोग अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का कार्यक्रम महर्षि पतंजलि की जन्मस्थली कोडर गांव में मिलकर के मना रहे हैं। महर्षि पतंजलि की जन्मस्थली को पर्यटन के रूप में विकसित किया जा रहा है। मेरे द्वारा भी लगातार कार्यों का निरीक्षण किया जा रहा है। यह हम लोगों का सौभाग्य की महर्षि पतंजलि की हमारे गोंडा के कोडर गांव में मौजूद है। झील के पास कल एक बड़ा योगाभ्यास सामूहिक रूप से किया जाएगा। कल पहली बार उनकी जन्मस्थली पर पूरे जिले के लोग एकत्रित होकर के एक साथ योगाभ्यास करेंगे। स्वस्थ शरीर के लिए योग जरूरी है और सभी लोग कल इस योग कार्यक्रम में शामिल हो सकते है। श्रीपतंजलि जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष ने कहा- जन्मस्थली विकास से कोसों दूर
श्री पतंजलि जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष डॉ स्वामी भगवताचार्य से बात की तो उन्होंने बताया कि यहां पर उस तरीके से विकास नहीं कराया गया, जिस तरीके से यहां पर विकास कराया जाना चाहिए। तरबगंज भाजपा विधायक के अध्यक्ष प्रयास से एक करोड़ से अधिक रुपए यहां पर मिला है, जिससे धर्मशाला का निर्माण यहां पर कराया जा रहा है। स्थानीय लोग अपने खर्चे से मंदिर का निर्माण करवा रहे हैं। महर्षि पतंजलि की नई मूर्ति यहां पर लेकर आई गई है। हमारी सरकार से मांग है कि इसको पर्यटन के रूप में अच्छे से डेवलप किया जाए, क्योंकि जिनके नाम से पूरे विश्व में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। उनकी ही जन्मस्थली विकास से कोसों दूर है। हमारी मांग है कि यहां पर एक अंतरराष्ट्रीय योग विश्वविद्यालय बनाया जाए। यहां पर एक संस्कृत महाविद्यालय बनाया जाए। यहां से एक पतंजलि एक्सप्रेस ट्रेन चलाई जाए, ताकि जो देश-विदेश से लोग आ रहे हैं। उनको आने में दिक्कत ना हो। महर्षि पतंजलि की जन्मस्थली को इतिहास में और अच्छे से दर्ज करते हुए। इसे पर्यटन स्थल घोषित किया जाए। इस स्थान का विकास पर्यटकों की संख्या को देखते हुए कराया जाए, क्योंकि यहां पर भी काफी संख्या में लोग आते हैं। ——————– ये खबर भी पढ़ें… 91 KM लंबे गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे का ड्रोन VIDEO:योगी ने इनॉगरेशन किया, अब गोरखपुर से तीन घंटे में पहुंचेंगे लखनऊ सीएम योगी ने शुक्रवार को गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन किया। यह 91.35KM लंबा है। यह दूरी अब महज 50 मिनट में पूरी कर सकेंगे। इस एक्सप्रेस-वे से आजमगढ़ में पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से होते हुए गोरखपुर से लखनऊ पहुंचने में महज साढ़े 3 घंटे का समय लगेगा। माइल स्टोन 25KM पर यात्रियों के लिए रेस्ट एरिया बनाया गया है। एक्सप्रेस-वे की क्या खासियत है? यहां पर यात्रियों के लिए क्या-क्या सुविधाएं हैं? पढ़ें पूरी खबर..