गोरखपुर के बिजनेसमैन के बेटे को गैंबलिंग डिसऑर्डर:60 लाख हारा; ये बीमारी ड्रग्स और सिगरेट के लत जैसी, ऐसे पहचानें लक्षण

गोरखपुर AIIMS में 7 फरवरी को एक बिजनेसमैन अपने 19 साल के इकलौते बेटे को लेकर पहुंचे। वह पागलों जैसी हरकत कर रहा था। परिवार ने बताया कि वह 4 साल से गेम खेल रहा था। ऑनलाइन गेमिंग और ट्रेडिंग में उसने 60 लाख रुपए गंवा दिए। पिता से बार-बार पैसे मांगे और मना करने पर आत्महत्या की धमकी देने लगा। बाद में उसने रिश्तेदारों से भी पैसे मांगने शुरू कर दिए। उसे गैंबलिंग डिसऑर्डर है। अब उसका इलाज चल रहा। डॉक्टरों के मुताबिक, मोबाइल गेमिंग और ऑनलाइन ट्रेडिंग को अक्सर लोग मनोरंजन या कमाई का आसान जरिया मानते हैं। लेकिन, जब यही आदत कंट्रोल से बाहर हो जाए तो यह एक गंभीर मानसिक बीमारी का रूप ले सकती है। यह मामला सवाल खड़े करता है कि गैंबलिंग डिसऑर्डर क्या होता है? क्या ऑनलाइन गेमिंग और ट्रेडिंग भी इसकी कैटगरी में आती है? यह बीमारी मानसिक रूप से कितनी खतरनाक है? परिवार समय रहते इसे शौक से अलग बीमारी के रूप में कैसे पहचान सकता है? पढ़िए सारे सवालों के जवाब भास्कर एक्सप्लेनर में… लखनऊ का यह केस भी पढ़िए… सितंबर- 2025 में लखनऊ के धनुवासाड़ गांव में ऑनलाइन गेमिंग की लत के चलते 14 साल के यश ने आत्महत्या कर ली थी। सुरेश कुमार यादव का इकलौता बेटा यश अपने पिता के मोबाइल से फ्री-फायर गेम खेलता था। ऑनलाइन गेम में 13 लाख रुपए हार गया था। खाते से पैसे गायब मिलने पर घरवालों ने पूछताछ की, तो यश ने गलती स्वीकार की। फिर उसी दिन उसने फांसी लगाकर जान दे दी। सवाल: गैंबलिंग डिसऑर्डर क्या और कितना खतरनाक होता है? जवाब: गोरखपुर AIIMS के न्यूरो साइकेट्रिस्ट डॉ. राशिद आलम कहते हैं- गैंबलिंग डिसऑर्डर एक तरह की गंभीर लत है। इसे मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या माना जाता है। जिस तरह किसी व्यक्ति को नशे की लत लग जाती है। उसी तरह इस बीमारी में व्यक्ति को जुआ या ऑनलाइन गेमिंग खेलने की आदत पड़ जाती है। यह लत इतनी बढ़ जाती है कि नुकसान होने के बाद भी व्यक्ति खुद को रोक नहीं पाता। लगातार जुआ खेलता रहता है। इसका असर सिर्फ पैसों तक सीमित नहीं रहता। धीरे-धीरे व्यक्ति की आर्थिक स्थिति खराब हो जाती है। रिश्तों में तनाव बढ़ता है और सामाजिक जीवन प्रभावित होता है। कई मामलों में व्यक्ति कर्ज में डूब जाता है। उसकी मानसिक के साथ शारीरिक सेहत भी बिगड़ने लगती है। डॉ. राशिद आलम के अनुसार, ये उतना ही खतरनाक होता है जितना शराब, सिगरेट, गुटखा, और ड्रग्स आदि का नशा। बस इस नशे में शख्स को बेहोशी छाती है, फिर वह धीरे-धीरे बीमार पड़ने लगता है। जैसे नशा करने पर उसकी क्रेविंग होती है, वैसे ही इसमें भी क्रेविंग होती है। बार-बार फोन देखने और गेम खेलने का मन करता है। हर समय उसी चीज के बारे में ख्याल आता है। कहीं भी और मन नहीं लगता। सवाल: कैसे पता चलता है कि कोई गैंबलिंग डिसऑर्डर का शिकार है? जवाब: गोरखपुर AIIMS के न्यूरो-साइकेट्रिस्ट डॉ. राशिद आलम के अनुसार, गैंबलिंग डिसऑर्डर एक तरह का बिहेवियर डिसऑर्डर है। इसे पहचानने के लिए कुछ क्राइटेरिया होते हैं। सवाल: क्या ऑनलाइन गेमिंग और ट्रेडिंग भी इसकी कैटेगरी में आती है? जवाब: मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, जब कोई व्यक्ति ऑनलाइन गेमिंग या ट्रेडिंग में लगातार ज्यादा समय देने लगे, नुकसान होने के बावजूद खुद को रोक न पाए। पैसे वापस पाने के लिए बार-बार जोखिम उठाता रहे, तो इसे गैंबलिंग डिसऑर्डर माना जाता है। केजीएमयू के कंसल्टेंट साइकेट्रिस्ट डॉ. आदर्श त्रिपाठी के मुताबिक, हर सप्ताह दो-तीन ऐसे मरीज सामने आ रहे हैं, जो ऑनलाइन गेमिंग और ट्रेडिंग की लत से जूझ रहे होते हैं। डॉ. बताते हैं कि ऑनलाइन कई ऐसे ऐप मौजूद हैं, जो लोगों को ज्यादा कमाई और जीत का लालच देकर फंसाते हैं। इस डिसऑर्डर में व्यक्ति एक तरह की साइकोलॉजिकल कंडीशन में चला जाता है। जिसमें वह हुए नुकसान को स्वीकार नहीं कर पाता। नुकसान की भरपाई के लिए वह बार-बार और पैसे लगाता जाता है। जिसे लॉस रिकवरी ट्रैप कहा जाता है। इसी चक्कर में वह और ज्यादा फंसता चला जाता है। सवाल: कैसे लोग इसमें फंसते चले जाते हैं? जवाब: डॉ. आदर्श त्रिपाठी का कहना है कि गैंबलिंग ऐप्स में आमतौर पर कोई भी व्यक्ति लगातार पैसे नहीं जीत सकता। ये ऐप्स लोगों को जीत का लालच दिखाकर हुक करते हैं। फिर धीरे-धीरे उन्हें खेलने की आदत में फंसा लेते हैं। कई गैंबलिंग ऐप्स यूजर के व्यवहार को समझने के लिए साइकोलॉजिकल तरीके अपनाते हैं। ये ऐप्स भांप लेते हैं कि यूजर कब ज्यादा खेलता है? कब हार के बाद दोबारा पैसा लगाने को तैयार होता है? उसी हिसाब से ऑफर और नोटिफिकेशन भेजते हैं। ऐसे कई ऐप्स यूजर की आर्थिक गतिविधियों पर भी नजर रखते हैं। जिससे उन्हें अंदाजा हो जाता है कि व्यक्ति कितनी रकम खर्च कर सकता है? इसी वजह से लोग धीरे-धीरे ज्यादा पैसा लगा बैठते हैं। इस जाल में फंसते चले जाते हैं। सवाल: गैंबलिंग डिसऑर्डर को लेकर क्या कहती है स्टडी? जवाब: मेडिकल जर्नल द लैंसेट में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर में करीब 8 करोड़ (80 मिलियन) युवा गैंबलिंग डिसऑर्डर से प्रभावित हैं। इस मानसिक बीमारी के कारण व्यक्ति लगातार तनाव में रहता है। उसकी मानसिक सेहत खराब होती है। धीरे-धीरे शारीरिक समस्याएं भी सामने आने लगती हैं। स्टडी में बताया गया कि गैंबलिंग डिसऑर्डर सिर्फ पैसों के नुकसान तक सीमित नहीं रहता। इसकी वजह से घर-परिवार में झगड़े बढ़ते हैं। रिश्ते टूटते हैं और कई मामलों में आत्महत्या के विचार भी पैदा होते हैं। कुछ लोगों में घरेलू हिंसा और अपराध की प्रवृत्ति तक देखी गई है। जुए की लत व्यक्ति को गलत और गैरकानूनी रास्तों पर भी ले जा सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, जुए की लत से पैदा हुआ यह डिसऑर्डर लंबे समय तक असर डाल सकता है। बिना इलाज के इससे बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। अलग-अलग तरह के जुए का बढ़ता ट्रेंड स्टडी में यह भी सामने आया है कि गैंबलिंग डिसऑर्डर से जूझ रहे करीब 80 मिलियन लोग किसी न किसी तरह के जुए से जुड़े हैं। इसमें बच्चों और युवाओं के मोबाइल पर खेले जाने वाले ऑनलाइन गेम्स से लेकर कैसीनो और सट्टे जैसे पारंपरिक जुए तक शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कैसीनो और रियल मनी गेमिंग में सबसे ज्यादा पैसा खर्च होता है, जो कई लोगों को आर्थिक रूप से पूरी तरह बर्बाद कर सकता है। ————————- ये खबर भी पढ़ें… मोबाइल गेमिंग की लत कितनी खतरनाक, स्क्रीन पर टकटकी-एक्साइटमेंट से हो सकती है मौत लखनऊ में 13 साल के लड़के विवेक कश्यप की मोबाइल फोन चलाते-चलाते मौत हो गई। वह बिस्तर पर बेहोश पड़ा था। बहन कुछ देर में आई, तो उसने बिस्तर पर पड़े फोन को चार्जिंग पर लगा दिया। भाई को चादर ओढ़ाकर चली गई। कुछ देर बाद कामकाज से फुरसत पाकर भाई को खाना खाने के लिए उठाने पहुंची। पढ़िए पूरी खबर…