गोरखपुर के पीपीगंज थानाक्षेत्र में 21 फरवरी को 06 साल की मासूम के साथ युवक ने दरिंदगी की थी। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने 5 दिन में चार्जशीट कोर्ट में दाखिल किया। वहीं 16 दिन की सुनवाई के बाद मंगलवार को विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट अशोक कुमार यादव ने आरोपी अशोक निषाद को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। आरोपी पर 55 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। इस अपराध में सहयोग और सबूत मिटाने की दोषी पाई गई उसकी मां सुनीता देवी को 04 साल के कठोर कारावास और 5 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया गया है। ऑपरेशन कनविक्शन अभियान के तहत पीपीगंज थाना प्रभारी अरुण कुमार सिंह, एडीजीसी राघवेंद्र राम त्रिपाठी और एडीजीसी अरविंद्र कुमार श्रीवास्तव का सजा दिलाने में अहम योगदान रहा। वहीं पीड़ित बच्ची के परिवार के लोग आरोपियों को सजा मिलने के बाद संतुष्ट दिखे। बुजुर्ग दादी ने बताया कि जिद करके नातिन मेरे मायके गई थी। दंरिदे ने मेरी बच्ची को बचपन ही छीन लिया। यह कहते हुए वह रोने लगीं। दादी के मायके शादी में आई थी बच्ची
अभियोजन पक्ष के विशेष लोक अभियोजक के अनुसार, घटना 20-21 फरवरी की रात की है। बच्ची 20 फरवरी को अपनी दादी के पीपीगंज स्थित मायके में आयोजित शादी समारोह में आई थी। बुजुर्ग दादी ने बताया कि रात करीब 12 से 2 बजे के बीच 06 साल की नातिन अचानक शादी समारोह से गायब हो गई। परिजनों ने जब घबराकर तलाश शुरू की, तो पंडाल के पीछे का नजारा देख उनकी रूह कांप गई। वहां आरोपी अशोक निषाद मासूम के साथ दुष्कर्म कर रहा था। परिजनों को देखते ही वह बच्ची को छोड़कर भाग निकला। बच्ची अचेत अवस्था में मिली और गंभीर रूप से घायल थी, उसके शरीर से खून बह रहा था। बच्ची को गंभीर हालत में तत्काल बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। घटना के बाद तुरंत पुलिस में आरोपी के खिलाफ मासूम संग दुष्कर्म, साक्ष्य छिपाने, पॉक्सो एक्ट की धारा में प्राथमिकी दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था। जांच के बाद पुलिस ने 05 दिन में आरोप पत्र अदालत में प्रस्तुत किया। केस में 13 गवाहों ने दिया बयान
सुनवाई के दौरान अदालत ने सभी साक्ष्यों, 13 गवाहों की गवाही और परिस्थितियों का गहन परीक्षण किया। चलने में असमर्थ होने की वजह से पीड़ित बच्ची का बयान बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ही कराया गया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यह अपराध अत्यंत जघन्य और अमानवीय है। जिसमें किसी भी प्रकार की नरमी की गुंजाइश नहीं है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अशोक निषाद को पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत आजीवन कारावास, जो उसके शेष जीवनकाल तक प्रभावी रहेगा, दिया जाता है। साथ ही अन्य धाराओं में चार वर्ष की अतिरिक्त सजा भी सुनाई गई, हालांकि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। मां ने छिपाया था खून से सना कपड़ा वहीं, सह-अभियुक्ता उसकी मां सुनीता देवी को साक्ष्य छिपाने के तहत चार वर्ष की कठोर कारावास की सजा दी गई। घटना के बाद आरोपी अशोक निषाद घर पर आया था। तब उसका खून से सना कपड़ा उसकी मां सुनीता देवी ने छिपाया था। महत्वपूर्ण बात यह रही कि अदालत ने दोषियों से वसूली गई पूरी जुर्माना राशि पीड़िता के पुनर्वास, शिक्षा और भविष्य के लिए देने का आदेश दिया। दोनों दोषियों को सजा भुगतने के लिए जिला कारागार गोरखपुर भेज दिया गया है। इस संबंध में सीओ कैंपियरगंज अनुराग सिंह ने बताया कि आरोपी युवक और उसकी मां को कोर्ट से सजा सुनाई गई है। घटना की गंभीरता को देखते हुए ऑपरेशन कनविक्शन के तहत केस की तेजी से पैरवी कराकर आरोपियों को सजा दिलाई गई है।
अभियोजन पक्ष के विशेष लोक अभियोजक के अनुसार, घटना 20-21 फरवरी की रात की है। बच्ची 20 फरवरी को अपनी दादी के पीपीगंज स्थित मायके में आयोजित शादी समारोह में आई थी। बुजुर्ग दादी ने बताया कि रात करीब 12 से 2 बजे के बीच 06 साल की नातिन अचानक शादी समारोह से गायब हो गई। परिजनों ने जब घबराकर तलाश शुरू की, तो पंडाल के पीछे का नजारा देख उनकी रूह कांप गई। वहां आरोपी अशोक निषाद मासूम के साथ दुष्कर्म कर रहा था। परिजनों को देखते ही वह बच्ची को छोड़कर भाग निकला। बच्ची अचेत अवस्था में मिली और गंभीर रूप से घायल थी, उसके शरीर से खून बह रहा था। बच्ची को गंभीर हालत में तत्काल बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। घटना के बाद तुरंत पुलिस में आरोपी के खिलाफ मासूम संग दुष्कर्म, साक्ष्य छिपाने, पॉक्सो एक्ट की धारा में प्राथमिकी दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था। जांच के बाद पुलिस ने 05 दिन में आरोप पत्र अदालत में प्रस्तुत किया। केस में 13 गवाहों ने दिया बयान
सुनवाई के दौरान अदालत ने सभी साक्ष्यों, 13 गवाहों की गवाही और परिस्थितियों का गहन परीक्षण किया। चलने में असमर्थ होने की वजह से पीड़ित बच्ची का बयान बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ही कराया गया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यह अपराध अत्यंत जघन्य और अमानवीय है। जिसमें किसी भी प्रकार की नरमी की गुंजाइश नहीं है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अशोक निषाद को पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत आजीवन कारावास, जो उसके शेष जीवनकाल तक प्रभावी रहेगा, दिया जाता है। साथ ही अन्य धाराओं में चार वर्ष की अतिरिक्त सजा भी सुनाई गई, हालांकि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। मां ने छिपाया था खून से सना कपड़ा वहीं, सह-अभियुक्ता उसकी मां सुनीता देवी को साक्ष्य छिपाने के तहत चार वर्ष की कठोर कारावास की सजा दी गई। घटना के बाद आरोपी अशोक निषाद घर पर आया था। तब उसका खून से सना कपड़ा उसकी मां सुनीता देवी ने छिपाया था। महत्वपूर्ण बात यह रही कि अदालत ने दोषियों से वसूली गई पूरी जुर्माना राशि पीड़िता के पुनर्वास, शिक्षा और भविष्य के लिए देने का आदेश दिया। दोनों दोषियों को सजा भुगतने के लिए जिला कारागार गोरखपुर भेज दिया गया है। इस संबंध में सीओ कैंपियरगंज अनुराग सिंह ने बताया कि आरोपी युवक और उसकी मां को कोर्ट से सजा सुनाई गई है। घटना की गंभीरता को देखते हुए ऑपरेशन कनविक्शन के तहत केस की तेजी से पैरवी कराकर आरोपियों को सजा दिलाई गई है।