चंडीगढ़ में रिटायर्ड ब्रिगेडियर की वाइफ को वीडियो कॉल करके 1 करोड़ ठग लिए गए। ठगने वाले ने खुद को सीबीआई अफसर बताकर यह वारदात की। मामला रिटायर्ड ब्रिगेडियर से जुड़ा होने की वजह से पुलिस तुरंत एक्टिव हुई और 18 दिन में ही 10 स्कैमर को धर दबोचा। इन आरोपियों के पास से 6 सिम बॉक्स, 400 सिम कार्ड, लैपटॉप और मोबाइल फोन बरामद हुए हैं। ये स्कैमर फर्जी पहचान बनाकर लोगों को ऑनलाइन डराकर उनसे पैसे ठगते थे। विदेशों से कॉल करने के लिए ये सिम बॉक्स का इस्तेमाल करते थे। पुलिस जांच में पता चला कि यह गिरोह सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दूसरे देशों में भी लोगों को निशाना बना रहा था। इसके बाद क्रिप्टोकरेंसी (USDT) में भुगतान मिलता था। एसपी के मुताबिक, इससे देश को हर महीने करीब ₹1,000 करोड़ का नुकसान हो रहा था। सिलसिलेवार ढंग से जानिए कैसे पकड़ा गया स्कैम… 11 जुलाई को चंडीगढ़ की महिला से की ठगी
सेक्टर-33-डी की निवासी मंजीत कौर ने पुलिस को शिकायत दी थी। मंजीत ने बताया कि 11 जुलाई 2025 को मोबाइल नंबर 7626808695 से एक वॉयस कॉल और बाद में 8414020165 से वॉट्सऐप वीडियो कॉल आया। कॉलर ने खुद को सीबीआई अधिकारी सुनील बताकर पेश किया और कहा कि उनके आधार कार्ड, मोबाइल नंबर और आईसीआईसीआई बैंक खाते का उपयोग मनी लॉन्ड्रिंग में हो रहा है। इसके बाद फर्जी दस्तावेज और पासबुक भेज उन्हें डरा-धमका कर ₹1,01,65,094 अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवा लिए गए। लुधियाना और मिजोरम से एक्टिवेट हुए सिम
महिला से एक करोड़ की ठगी की शिकायत मिलते ही पुलिस ने तुरंत जांच शुरू की। एसपी गीतांजलि खंडेलवाल ने बताया कि जिस मोबाइल नंबर 7626808695 से महिला को कॉल करके ठगा गया, वो लुधियाना (पंजाब) से एक्टिवेट हुआ था। जांच में यह भी पता चला कि इसी एक मोबाइल डिवाइस (आईएमआई नंबर) से करीब 180 सिम कार्ड चलाए जा रहे है। इसके अलावा, वॉट्सऐप वीडियो कॉल के लिए जो नंबर इस्तेमाल हुआ, वह मिजोरम से एक्टिवेट किया गया था। इसी नंबर से खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर महिला मंजीत कौर को वीडियो कॉल की गई थी और नकली दस्तावेज व सरकारी मुहरें दिखाकर उसे झांसे में लिया गया। 24 जुलाई को लोकेशन के आधार पर मेरठ में छापा मारा
एसपी गीतांजलि खंडेलवाल ने बताया कि बताया कि तकनीकी जांच और टावर लोकेशन के आधार पर यूपी के मेरठ से मामले का लिंक मिला। इस पर पुलिस टीम ने 24 जुलाई को मेरठ में छापा मारा, जहां से परवेज चौहान (33) को गिरफ्तार किया। पूछताछ में उसने बताया कि बिना भुगतान वाले सिम कार्ड का उपयोग करके अंतर्राष्ट्रीय कॉल को स्थानीय कॉल के रूप में नेटवर्क में वापस रूट करता है, जो अक्सर जाली पहचान के साथ प्राप्त किए जाते हैं। इसके बदले उसे क्रिप्टोकरेंसी (USDT) में भुगतान मिलता था। 27 को लुधियाना और 29 जुलाई अमृतसर में छापेमारी
एसपी के मुताबिक, इसके बाद 27 जुलाई को लुधियाना में की गई कार्रवाई में विजय कुमार शाह (22 साल) को पकड़ा गया। यहां जांच में सामने आया कि विजय ने एक ही व्यक्ति के नाम पर अलग-अलग टेलीकॉम कंपनियों के सिम कार्ड फर्जी तरीके से एक्टिवेट किए थे। ये सिम कार्ड बाद में साइबर ठगी में इस्तेमाल हुए। 29 जुलाई को अमृतसर में छापेमारी कर शुभम मेहरा उर्फ सनी (25 वर्ष) को गिरफ्तार किया गया। मौके से 6 डिनस्टार कंपनी के सिम बॉक्स, लगभग 400 सिम कार्ड, 11 मोबाइल फोन, 1 लैपटॉप, 2 मोडेम और 1 राउटर बरामद किए गए। सात और दबोचे, टेलीग्राम के जरिए करते थे ठगी
एसपी ने आगे बताया कि इसके बाद पुलिस टीम ने मेरठ निवासी सुहैल अख्तर, लुधियाना निवासी कृष्णा शाह, आकाश कुमार, अजीत कुमार, विपिन कुमार, सरोज कुमार और अभिषेक कुमार को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी परवेज चौहान से 1 सिम बॉक्स, ब्रॉडबैंड राउटर, 70-80 सिम कार्ड, 3 मोबाइल फोन वहीं आरोपी शुभम मेहरा से 6 डिनस्टार सिम बॉक्स, लगभग 400 सिम कार्ड, 11 मोबाइल फोन, 1 लैपटॉप, 2 मोडेम, 1 राउटर और अन्य आरोपियों के पर्सनल मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। पकड़े गए शुभम ने पूछताछ में बताया कि उसने फेसबुक पर वर्क-फ्रॉम-होम जॉब के विज्ञापन के माध्यम से संपर्क किया था और बाद में उसे टेलीग्राम के जरिए विदेशी हेंडलर्स द्वारा सिम बॉक्स ऑपरेशन की जिम्मेदारी दी गई थी।
सेक्टर-33-डी की निवासी मंजीत कौर ने पुलिस को शिकायत दी थी। मंजीत ने बताया कि 11 जुलाई 2025 को मोबाइल नंबर 7626808695 से एक वॉयस कॉल और बाद में 8414020165 से वॉट्सऐप वीडियो कॉल आया। कॉलर ने खुद को सीबीआई अधिकारी सुनील बताकर पेश किया और कहा कि उनके आधार कार्ड, मोबाइल नंबर और आईसीआईसीआई बैंक खाते का उपयोग मनी लॉन्ड्रिंग में हो रहा है। इसके बाद फर्जी दस्तावेज और पासबुक भेज उन्हें डरा-धमका कर ₹1,01,65,094 अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवा लिए गए। लुधियाना और मिजोरम से एक्टिवेट हुए सिम
महिला से एक करोड़ की ठगी की शिकायत मिलते ही पुलिस ने तुरंत जांच शुरू की। एसपी गीतांजलि खंडेलवाल ने बताया कि जिस मोबाइल नंबर 7626808695 से महिला को कॉल करके ठगा गया, वो लुधियाना (पंजाब) से एक्टिवेट हुआ था। जांच में यह भी पता चला कि इसी एक मोबाइल डिवाइस (आईएमआई नंबर) से करीब 180 सिम कार्ड चलाए जा रहे है। इसके अलावा, वॉट्सऐप वीडियो कॉल के लिए जो नंबर इस्तेमाल हुआ, वह मिजोरम से एक्टिवेट किया गया था। इसी नंबर से खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर महिला मंजीत कौर को वीडियो कॉल की गई थी और नकली दस्तावेज व सरकारी मुहरें दिखाकर उसे झांसे में लिया गया। 24 जुलाई को लोकेशन के आधार पर मेरठ में छापा मारा
एसपी गीतांजलि खंडेलवाल ने बताया कि बताया कि तकनीकी जांच और टावर लोकेशन के आधार पर यूपी के मेरठ से मामले का लिंक मिला। इस पर पुलिस टीम ने 24 जुलाई को मेरठ में छापा मारा, जहां से परवेज चौहान (33) को गिरफ्तार किया। पूछताछ में उसने बताया कि बिना भुगतान वाले सिम कार्ड का उपयोग करके अंतर्राष्ट्रीय कॉल को स्थानीय कॉल के रूप में नेटवर्क में वापस रूट करता है, जो अक्सर जाली पहचान के साथ प्राप्त किए जाते हैं। इसके बदले उसे क्रिप्टोकरेंसी (USDT) में भुगतान मिलता था। 27 को लुधियाना और 29 जुलाई अमृतसर में छापेमारी
एसपी के मुताबिक, इसके बाद 27 जुलाई को लुधियाना में की गई कार्रवाई में विजय कुमार शाह (22 साल) को पकड़ा गया। यहां जांच में सामने आया कि विजय ने एक ही व्यक्ति के नाम पर अलग-अलग टेलीकॉम कंपनियों के सिम कार्ड फर्जी तरीके से एक्टिवेट किए थे। ये सिम कार्ड बाद में साइबर ठगी में इस्तेमाल हुए। 29 जुलाई को अमृतसर में छापेमारी कर शुभम मेहरा उर्फ सनी (25 वर्ष) को गिरफ्तार किया गया। मौके से 6 डिनस्टार कंपनी के सिम बॉक्स, लगभग 400 सिम कार्ड, 11 मोबाइल फोन, 1 लैपटॉप, 2 मोडेम और 1 राउटर बरामद किए गए। सात और दबोचे, टेलीग्राम के जरिए करते थे ठगी
एसपी ने आगे बताया कि इसके बाद पुलिस टीम ने मेरठ निवासी सुहैल अख्तर, लुधियाना निवासी कृष्णा शाह, आकाश कुमार, अजीत कुमार, विपिन कुमार, सरोज कुमार और अभिषेक कुमार को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी परवेज चौहान से 1 सिम बॉक्स, ब्रॉडबैंड राउटर, 70-80 सिम कार्ड, 3 मोबाइल फोन वहीं आरोपी शुभम मेहरा से 6 डिनस्टार सिम बॉक्स, लगभग 400 सिम कार्ड, 11 मोबाइल फोन, 1 लैपटॉप, 2 मोडेम, 1 राउटर और अन्य आरोपियों के पर्सनल मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। पकड़े गए शुभम ने पूछताछ में बताया कि उसने फेसबुक पर वर्क-फ्रॉम-होम जॉब के विज्ञापन के माध्यम से संपर्क किया था और बाद में उसे टेलीग्राम के जरिए विदेशी हेंडलर्स द्वारा सिम बॉक्स ऑपरेशन की जिम्मेदारी दी गई थी।