जातीय जनगणना को लेकर छोटे दल गांवों में करेंगे सम्मेलन:भाजपा के मास्टर स्ट्रोक पर सहयोगी दलों में क्रेडिट लेने की होड़, सपा और कांग्रेस भी एक्टिव

चौपालों की सियासत में अब जात पूछने से कोई परहेज नहीं, बल्कि यही बन गया है नया चुनावी मंत्र। मतलब ‘जात बताओ, हक पाओ।’ यह लाइन आज के समय में सबसे सटीक हो गई है। जातीय जनगणना अब सिर्फ आंकड़ों की कवायद नहीं, बल्कि 2024 के बाद की राजनीति का सबसे बड़ा एजेंडा बन गई है। केंद्र सरकार द्वारा 30 अप्रैल को कैबिनेट में जातीय जनगणना का प्रस्ताव पारित करने के बाद छोटे-छोटे दलों में नई ऊर्जा दौड़ गई है। वे इसे अपनी जीत मान रहे हैं और गांव-गांव जाकर लोगों को यह बताने की तैयारी में हैं कि यह जनगणना क्यों जरूरी है और इससे किसे फायदा होगा। इसी मुद्दे पर विपक्षी पार्टियां भी लामबंद हो गई हैं। वे बीजेपी पर हमला बोल रही हैं, लेकिन सियासी विश्लेषक इसे बीजेपी का ‘मास्टर स्ट्रोक’ मान रहे हैं। एक ऐसा मुद्दा जिसे विपक्ष ने उठाया और फायदा सत्ता पक्ष उठा रहा है। इस रिपोर्ट में जानिए कि कौन-सी पार्टी क्या कह रही है… कांग्रेस : ‘राहुल ने दबाव डाला, केंद्र झुका’ उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय का कहना है कि राहुल गांधी की लगातार मांग और संसद से लेकर सड़क तक संघर्ष ने सरकार को झुकने को मजबूर किया। कांग्रेस कार्यकर्ता अब नुक्कड़ सभा और चौपालों के जरिए लोगों को बताएंगे कि जातीय जनगणना से समाज में समानता की दिशा में बड़ा कदम उठेगा। शुक्रवार को लखनऊ में धन्यवाद यात्रा निकाली। बसपा : ‘हमने पहले उठाया, अब सब पीछे-पीछे’ बसपा के सूत्र बताते हैं कि जातीय जनगणना के ऐलान के बाद मायावती ने कार्यकर्ताओं से साफ कहा है कि बसपा ही वह पहली पार्टी थी जिसने जातीय जनगणना की बात की थी। अब सभी दल उसी लाइन पर चल रहे हैं। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि पार्टी कार्यकर्ता गांवों में सभाएं कर यह बताएं कि यह बसपा की नीति थी, जिससे ओबीसी समेत सभी वर्गों को पहली बार जात आधारित पहचान मिलेगी। सपा : ‘अखिलेश हैं असली नायक’ सपा ने प्रदेशभर में “जातीय जनगणना का नायक अखिलेश” वाले होर्डिंग्स लगाए हैं। सपा नेता पूजा शुक्ला का कहना है कि पार्टी कार्यकर्ता गांवों में जाकर लोगों को बताएंगे कि समाजवादी सरकार के समय से ही यह मांग उठती रही है। वो बता रही हैं कि यह सपा के एजेंडे का हिस्सा रहा है। इसके साथ ही सपा पदाधिकारी कुछ पुरानी तस्वीरें शेयर कर बता रहे हैं कि वह पहले जातीय जनगणना की बात उठाते रहे हैं। अपना दल (एस): ‘हमारी मांग को केंद्र ने माना’ केंद्रीय राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल की अगुआई वाली अपना दल (एस) इस मुद्दे को अपने पक्ष में भुनाने में जुट गई है। शुक्रवार को लखनऊ में पार्टी ने समीक्षा बैठक में तय किया कि हर कार्यकर्ता गांव में जाकर ओबीसी को इस फैसले से होने वाले फायदे की जानकारी देगा। निषाद पार्टी: ‘हमने लगातार आवाज उठाई’ यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद का कहना है कि केंद्र सरकार ने यह फैसला उनकी वर्षों की मेहनत का परिणाम है। निषाद पार्टी अब अपने समुदायों के बीच जाकर बताएगी कि जातीय जनगणना क्यों जरूरी है और इससे किस तरह उनकी सामाजिक स्थिति मजबूत होगी। सुभासपा : ‘ओबीसी में भी हिस्सेदारी का सवाल’ बीजेपी सहयोगी दल से यूपी सरकार में मंत्री ओपी राजभर की पार्टी इस मुद्दे को सिर्फ जनगणना तक नहीं, बल्कि ओबीसी के अंदर भी प्रतिनिधित्व के सवाल से जोड़ रही है। पार्टी गांवों में सभा करके बताएगी कि ओबीसी की अंदरूनी हिस्सेदारी का सवाल अब सबसे अहम बन गया है और सिर्फ सुभासपा ही इसे उठा रही है। आम आदमी पार्टी का प्रयागराज मिशन आम आदमी पार्टी ने जातीय जनगणना पर दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर प्रयागराज में रखने का ऐलान किया है। राज्य सभा सांसद संजय सिंह खुद पदाधिकारियों को समझाएंगे कि इस मुद्दे को कैसे गांव-गांव तक पहुंचाना है। चौपाल और जनजागरूकता अभियान चलाकर बीजेपी की नीयत पर सवाल उठाए जाएंगे। भाजपा का मास्टर स्ट्रोक? राजनीतिक जानकार प्रभा शंकर का मानना है कि विपक्ष इसे अपनी जीत मान रहा है, लेकिन भाजपा समर्थक रणनीतिकार इसे एक ‘पॉलिटिकल मास्टरस्ट्रोक’ बता रहे हैं। क्योंकि मुद्दा विपक्ष का था, लेकिन क्रेडिट सरकार ने ले लिया। और अब जब छोटे दल जनगणना का प्रचार कर रहे हैं, तो परोक्ष रूप से सरकार की नीति का प्रचार हो रहा है। ———————— ये खबर भी पढ़ें… पहलगाम हमले के बाद यूपी भाजपा अध्यक्ष कौन? : पहले लोध, फिर दलित-ब्राह्मण विवाद से अटका यूपी भाजपा अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी का कार्यकाल जनवरी, 2023 में समाप्त हो गया है। तब से नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति में कोई न कोई अड़चन आती रही। साथ ही दावेदारों की लिस्ट बढ़ती गई। प्रदेश से लेकर देश तक हो रही घटनाओं से प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति के समीकरण बदल रहे हैं। ताजा मामले में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले से प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति का मामला फिर अटक गया। पूरी खबर पढ़ें…