‘मैंने मानसिक रूप से काफी संघर्ष झेला। एंग्जायटी-डिप्रेशन तक फेस किया, लेकिन आज मैं यहां हूं क्योंकि मेरे परिवार ने मेरा साथ दिया। मेरे माता-पिता ने समाज नहीं, मेरी खुशी को चुना। हर लड़की को ऐसा सपोर्ट मिलना चाहिए। जब तक लड़की अपने पैरों पर खड़ी न हो जाए, उसकी शादी नहीं करनी चाहिए।’ ये बातें मेरठ की प्रणिता शर्मा ने कही। प्रणिता का सोमवार को उनके मेजर पति से तलाक हुआ। प्रणिता के पिता रिटायर्ड जज हैं। उन्होंने जिस धूमधाम से बेटी को शादी के बाद विदा किया था, तलाक के बाद भी उसी तरह नाचते-गाते हुए घर लेकर आए। परिवार ने ढोल-नगाड़े बजवाए। जमकर डांस किया। मिठाई बांटी। फूल-मालाओं से बेटी का स्वागत किया। समाज को संदेश देने की कोशिश की कि शादी के बाद भी बेटी पराई नहीं, परिवार का हिस्सा है। ‘दैनिक भास्कर’ ने प्रणिता और उनके परिवार से बातचीत की। पढ़िए ये खास खबर… पहले ये तीन तस्वीरें देखिए…
अब पूरा मामला जानिए… प्रणिता ज्यूडिशियल अकादमी में फाइनेंस डायरेक्टर
मेरठ में प्रणिता शर्मा शास्त्री नगर स्थित प्रणव वशिष्ठ ज्यूडिशियल अकादमी में फाइनेंस डायरेक्टर हैं। उन्होंने मनोविज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। प्रणिता की शादी 14 दिसंबर, 2018 को शाहजहांपुर के आर्मी के मेजर गौरव अग्निहोत्री से हुई थी। गौरव इस समय जालंधर में पोस्टेड हैं। प्रणिता के पिता ज्ञानेंद्र शर्मा रिटायर्ड जज हैं। ज्ञानेंद्र शर्मा का कहना है कि शादी के बाद से ही ससुराल वालों का व्यवहार ठीक नहीं रहा। पिछले 7 सालों में बेटी को कई तरह की परेशानियां झेलनी पड़ीं। पति और परिवार के लोग उसे प्रताड़ित करने लगे। बच्चे के जन्म के बाद भी हालात नहीं बदले। एक साल का बेटा प्रणिता के पास
ससुराल पक्ष की ओर से उसे मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक रूप से परेशान किया जाता रहा। इसी वजह से आखिरकार प्रणिता ने तलाक लेने का फैसला किया। मेरठ फैमिली कोर्ट में अर्जी दाखिल की। 4 अप्रैल को कोर्ट ने तलाक मंजूर कर लिया। इसके बाद परिवार बेटी प्रणिता शर्मा को पूरे सम्मान के साथ घर वापस लाया। प्रणिता और ज्ञानेंद्र का एक साल का बेटा है, जो अब प्रणिता के पास है। अब प्रणिता और परिवार से बातचीत पढ़िए… प्रणिता बोलीं- परिवार का सपोर्ट ही मेरी ताकत
प्रणिता ने बताया, तलाक के बाद जिस तरह मेरा स्वागत हुआ, वो मेरे लिए सरप्राइज था। मुझे नहीं पता था कि परिवार ने इतना कुछ प्लान किया है। यह देखकर बहुत अच्छा लगा कि परिवार अपने बच्चों के साथ इतना खड़ा है। प्रणिता का कहना है कि मैंने मानसिक रूप से काफी संघर्ष झेला। एंग्जायटी-डिप्रेशन तक फेस किया, लेकिन आज मैं यहां हूं क्योंकि मेरे परिवार ने मेरा साथ दिया। अगर मेंटल हेल्थ ठीक नहीं हो तो इंसान कुछ भी सही नहीं कर सकता। माता-पिता ने समाज नहीं, मेरी खुशी चुनी
प्रणिता ने कहा, मेरे माता-पिता ने समाज नहीं, मेरी खुशी को चुना। आज भी कई जगह लड़कियों से कहा जाता है कि ‘वापस ससुराल जाओ’, लेकिन मेरे परिवार ने मुझे चुना। हर लड़की को ऐसा सपोर्ट मिलना चाहिए। मेरे घर में मुझे कभी ‘बेटी’ नहीं, ‘छोटा बेटा’ कहा गया। उसी ने मुझे सिखाया कि मैं किसी से कम नहीं हूं। सेल्फ-लव और मेंटल हेल्थ जरूरी
प्रणिता फिलहाल एलएलबी के अंतिम सेमेस्टर में हैं। प्रणिता ने संदेश दिया कि आत्मनिर्भर बनना जरूरी है। जब तक लड़की अपने पैरों पर खड़ी न हो जाए, उसकी शादी नहीं करनी चाहिए। सेल्फ-लव और मेंटल हेल्थ सबसे जरूरी है। पिता बोले-कानूनी लड़ाई नहीं, बेटी का भविष्य चुना
प्रणिता के पिता ज्ञानेंद्र शर्मा न्यायिक सेवा से जुड़े रहे हैं। करीब 5 किताबें लिख चुके हैं। ज्ञानेंद्र शर्मा ने बताया कि उन्होंने जानबूझकर कोई कानूनी लड़ाई जैसे एलिमनी, मेंटेनेंस या संपत्ति के अधिकार नहीं चुने। उन्होंने कहा, ‘मैं न्यायिक प्रक्रिया को जानता हूं। अगर हम लीगल रास्ता अपनाते तो 5-10 साल या उससे ज्यादा समय लग सकता था। मुझे अपनी बेटी को तुरंत उस माहौल से निकालना था। मेरे लिए पैसा नहीं, बेटी का जीवन ज्यादा महत्वपूर्ण है। ज्ञानेंद्र शर्मा का कहना है कि कोर्ट-कचहरी की प्रक्रिया मानसिक तनाव को बढ़ा देती है। मैं चाहता था कि वह पढ़ाई करे, आगे बढ़े और अपने पैरों पर खड़ी हो। बाकी चीजें वह खुद हासिल कर लेगी। ‘लोग क्या कहेंगे’…ये सबसे बड़ा रोग
पिता ज्ञानेंद्र शर्मा ने समाज की सोच पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, सबसे बड़ा रोग है ‘लोग क्या कहेंगे’। फैसले लेते समय समाज नहीं, अपने बच्चे की खुशी देखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हर बड़ा फैसला परिवार के साथ मिलकर लिया गया। डाइवोर्स अंत नहीं, नई शुरुआत है। जैसे रिटायरमेंट के बाद नई पारी शुरू होती है, वैसे ही जीवन में भी नया अध्याय शुरू किया जा सकता है। ‘प्री-मैरिज ट्रेनिंग’ का कॉन्सेप्ट साझा किया
ज्ञानेंद्र शर्मा ने ‘प्री-मैरिज ट्रेनिंग’ का कॉन्सेप्ट भी साझा किया। उन्होंने कहा कि मैंने अपनी रिसर्च में पाया कि सही काउंसलिंग से 70% वैवाहिक विवाद रोके जा सकते हैं। अगर शादी से पहले ट्रेनिंग अनिवार्य हो जाए तो कई समस्याएं खत्म हो सकती हैं। प्रणिता की मां बोलीं- बेटी की खुशी सबसे ऊपर
प्रणिता की मां माधवी शर्मा हाउस वाइफ हैं। उनका कहना है हमने कोर्ट-कचहरी के बजाय बेटी की खुशी को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि हमने सोचा कि केस लड़ने से बेहतर है कि बेटी को नया जीवन दिया जाए। अब वह अपनी पढ़ाई और भविष्य पर ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि उनके लिए सबसे बड़ी खुशी यही है कि उनकी बेटी सुरक्षित और खुश है। हम चाहते हैं कि वह आगे बढ़े और खुश रहे। यही हमारे लिए सब कुछ है। दामाद के लिए बोलीं…वह भी खुश रहे
प्रणिता की मां माधवी का कहना है कि ये भी आगे बढ़े…वो भी (दामाद) आगे बढ़े। खुश रहे। ऐसा नहीं है कि हम उसके लिए कुछ गलत बोल रहे हैं। वह भी तो पहले हमसे जुड़ा हुआ ही था। हमारी खुशी का ठिकाना नहीं, भगवान का बहुत-बहुत धन्यवाद देती हूं कि मेरी बच्ची मेरे साथ है। ——————– ये खबर भी पढ़ें… बेटी के तलाक पर रिटायर्ड जज पिता ने ढोल-नगाड़े बजवाए:परिवार ने जमकर डांस किया; 8 साल पहले मेजर से हुई थी शादी मेरठ में शनिवार को तलाक का एक अनोखा मामला सामने आया। यहां एक परिवार ने तलाक के बाद बेटी का फूल-मालाओं से स्वागत किया। ढोल की थाप पर लोग कोर्ट से घर तक नाचते-गाते नजर आए। मिठाइयां बांटी गईं। रिटायर्ड जज पिता ने फूल-माला पहनाकर घर में बेटी का स्वागत किया। इस मौके पर परिवार के सभी सदस्य ब्लैक कलर की टी-शर्ट पहने दिखे। जिस पर बेटी की तस्वीर थी और लिखा था- “आई लव माय डॉटर”। पढ़ें पूरी खबर
अब पूरा मामला जानिए… प्रणिता ज्यूडिशियल अकादमी में फाइनेंस डायरेक्टर
मेरठ में प्रणिता शर्मा शास्त्री नगर स्थित प्रणव वशिष्ठ ज्यूडिशियल अकादमी में फाइनेंस डायरेक्टर हैं। उन्होंने मनोविज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। प्रणिता की शादी 14 दिसंबर, 2018 को शाहजहांपुर के आर्मी के मेजर गौरव अग्निहोत्री से हुई थी। गौरव इस समय जालंधर में पोस्टेड हैं। प्रणिता के पिता ज्ञानेंद्र शर्मा रिटायर्ड जज हैं। ज्ञानेंद्र शर्मा का कहना है कि शादी के बाद से ही ससुराल वालों का व्यवहार ठीक नहीं रहा। पिछले 7 सालों में बेटी को कई तरह की परेशानियां झेलनी पड़ीं। पति और परिवार के लोग उसे प्रताड़ित करने लगे। बच्चे के जन्म के बाद भी हालात नहीं बदले। एक साल का बेटा प्रणिता के पास
ससुराल पक्ष की ओर से उसे मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक रूप से परेशान किया जाता रहा। इसी वजह से आखिरकार प्रणिता ने तलाक लेने का फैसला किया। मेरठ फैमिली कोर्ट में अर्जी दाखिल की। 4 अप्रैल को कोर्ट ने तलाक मंजूर कर लिया। इसके बाद परिवार बेटी प्रणिता शर्मा को पूरे सम्मान के साथ घर वापस लाया। प्रणिता और ज्ञानेंद्र का एक साल का बेटा है, जो अब प्रणिता के पास है। अब प्रणिता और परिवार से बातचीत पढ़िए… प्रणिता बोलीं- परिवार का सपोर्ट ही मेरी ताकत
प्रणिता ने बताया, तलाक के बाद जिस तरह मेरा स्वागत हुआ, वो मेरे लिए सरप्राइज था। मुझे नहीं पता था कि परिवार ने इतना कुछ प्लान किया है। यह देखकर बहुत अच्छा लगा कि परिवार अपने बच्चों के साथ इतना खड़ा है। प्रणिता का कहना है कि मैंने मानसिक रूप से काफी संघर्ष झेला। एंग्जायटी-डिप्रेशन तक फेस किया, लेकिन आज मैं यहां हूं क्योंकि मेरे परिवार ने मेरा साथ दिया। अगर मेंटल हेल्थ ठीक नहीं हो तो इंसान कुछ भी सही नहीं कर सकता। माता-पिता ने समाज नहीं, मेरी खुशी चुनी
प्रणिता ने कहा, मेरे माता-पिता ने समाज नहीं, मेरी खुशी को चुना। आज भी कई जगह लड़कियों से कहा जाता है कि ‘वापस ससुराल जाओ’, लेकिन मेरे परिवार ने मुझे चुना। हर लड़की को ऐसा सपोर्ट मिलना चाहिए। मेरे घर में मुझे कभी ‘बेटी’ नहीं, ‘छोटा बेटा’ कहा गया। उसी ने मुझे सिखाया कि मैं किसी से कम नहीं हूं। सेल्फ-लव और मेंटल हेल्थ जरूरी
प्रणिता फिलहाल एलएलबी के अंतिम सेमेस्टर में हैं। प्रणिता ने संदेश दिया कि आत्मनिर्भर बनना जरूरी है। जब तक लड़की अपने पैरों पर खड़ी न हो जाए, उसकी शादी नहीं करनी चाहिए। सेल्फ-लव और मेंटल हेल्थ सबसे जरूरी है। पिता बोले-कानूनी लड़ाई नहीं, बेटी का भविष्य चुना
प्रणिता के पिता ज्ञानेंद्र शर्मा न्यायिक सेवा से जुड़े रहे हैं। करीब 5 किताबें लिख चुके हैं। ज्ञानेंद्र शर्मा ने बताया कि उन्होंने जानबूझकर कोई कानूनी लड़ाई जैसे एलिमनी, मेंटेनेंस या संपत्ति के अधिकार नहीं चुने। उन्होंने कहा, ‘मैं न्यायिक प्रक्रिया को जानता हूं। अगर हम लीगल रास्ता अपनाते तो 5-10 साल या उससे ज्यादा समय लग सकता था। मुझे अपनी बेटी को तुरंत उस माहौल से निकालना था। मेरे लिए पैसा नहीं, बेटी का जीवन ज्यादा महत्वपूर्ण है। ज्ञानेंद्र शर्मा का कहना है कि कोर्ट-कचहरी की प्रक्रिया मानसिक तनाव को बढ़ा देती है। मैं चाहता था कि वह पढ़ाई करे, आगे बढ़े और अपने पैरों पर खड़ी हो। बाकी चीजें वह खुद हासिल कर लेगी। ‘लोग क्या कहेंगे’…ये सबसे बड़ा रोग
पिता ज्ञानेंद्र शर्मा ने समाज की सोच पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, सबसे बड़ा रोग है ‘लोग क्या कहेंगे’। फैसले लेते समय समाज नहीं, अपने बच्चे की खुशी देखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हर बड़ा फैसला परिवार के साथ मिलकर लिया गया। डाइवोर्स अंत नहीं, नई शुरुआत है। जैसे रिटायरमेंट के बाद नई पारी शुरू होती है, वैसे ही जीवन में भी नया अध्याय शुरू किया जा सकता है। ‘प्री-मैरिज ट्रेनिंग’ का कॉन्सेप्ट साझा किया
ज्ञानेंद्र शर्मा ने ‘प्री-मैरिज ट्रेनिंग’ का कॉन्सेप्ट भी साझा किया। उन्होंने कहा कि मैंने अपनी रिसर्च में पाया कि सही काउंसलिंग से 70% वैवाहिक विवाद रोके जा सकते हैं। अगर शादी से पहले ट्रेनिंग अनिवार्य हो जाए तो कई समस्याएं खत्म हो सकती हैं। प्रणिता की मां बोलीं- बेटी की खुशी सबसे ऊपर
प्रणिता की मां माधवी शर्मा हाउस वाइफ हैं। उनका कहना है हमने कोर्ट-कचहरी के बजाय बेटी की खुशी को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि हमने सोचा कि केस लड़ने से बेहतर है कि बेटी को नया जीवन दिया जाए। अब वह अपनी पढ़ाई और भविष्य पर ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि उनके लिए सबसे बड़ी खुशी यही है कि उनकी बेटी सुरक्षित और खुश है। हम चाहते हैं कि वह आगे बढ़े और खुश रहे। यही हमारे लिए सब कुछ है। दामाद के लिए बोलीं…वह भी खुश रहे
प्रणिता की मां माधवी का कहना है कि ये भी आगे बढ़े…वो भी (दामाद) आगे बढ़े। खुश रहे। ऐसा नहीं है कि हम उसके लिए कुछ गलत बोल रहे हैं। वह भी तो पहले हमसे जुड़ा हुआ ही था। हमारी खुशी का ठिकाना नहीं, भगवान का बहुत-बहुत धन्यवाद देती हूं कि मेरी बच्ची मेरे साथ है। ——————– ये खबर भी पढ़ें… बेटी के तलाक पर रिटायर्ड जज पिता ने ढोल-नगाड़े बजवाए:परिवार ने जमकर डांस किया; 8 साल पहले मेजर से हुई थी शादी मेरठ में शनिवार को तलाक का एक अनोखा मामला सामने आया। यहां एक परिवार ने तलाक के बाद बेटी का फूल-मालाओं से स्वागत किया। ढोल की थाप पर लोग कोर्ट से घर तक नाचते-गाते नजर आए। मिठाइयां बांटी गईं। रिटायर्ड जज पिता ने फूल-माला पहनाकर घर में बेटी का स्वागत किया। इस मौके पर परिवार के सभी सदस्य ब्लैक कलर की टी-शर्ट पहने दिखे। जिस पर बेटी की तस्वीर थी और लिखा था- “आई लव माय डॉटर”। पढ़ें पूरी खबर