सिंगर जुबिन नौटियाल वृंदावन पहुंचे। जुबिन सबसे पहले केलि कुंज आश्रम में संत प्रेमानंद महाराज से मिलने पहुंचे। प्रेमानंद महाराज का हालचाल लेने के बाद जुबिन ने माइक थाम लिया। उन्होंने गाया- श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी, हे नाथ नारायण वासुदेवा। इस दौरान प्रेमानंद महाराज बहुत ध्यान से जुबिन का गाना सुनते रहे। फिर हंसते हुए हाथ उठाकर बोले- बहुत सुंदर… बहुत सुंदर। मेरा आशीर्वाद है, आप ऐसे ही गाते रहिए। सबकी मुस्कुराहट का कारण बनते रहिए। इसका वीडियो भी सामने आया है। केलि कुंज आश्रम ने अपने इंस्टाग्राम भजन मार्ग पर शेयर किया है। बता दें कि जनवरी, 2024 में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा से पहले जुबिन नौटियाल राम आएंगे… गीत गाया था, जो बहुत फेमस हुआ था। इसके बाद से जुबिन लगातार सुर्खियों में बने हैं। पढ़िए केलि कुंज आश्रम में क्या-कुछ हुआ… 2 गीत सुनाए, प्रेमानंद महाराज मुग्ध होकर बोले- ऐसे ही सुनाते रहिए
संत प्रेमानंद महाराज के एकांत मुलाकात के वक्त जुबिन पहुंचे थे। जुबिन के साथ उनके परिवार के लोग भी थे। महाराजजी के अनुयायियों ने उन्हें अंदर बुलाया। वह जब महाराजजी के सामने आए तो मौजूदा समय में चल रहे गीत-संगीत पर चर्चा हुई। इसके बाद जुबिन ने माइक थाम लिया। उन्होंने पहले गाया- राम आएंगे तो अंगना सजाऊंगा…। फिर दूसरा गीत सुनाया- श्रीकृष्ण गोविंद हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेवाए….। महाराजजी इस गीत को सुनकर मुग्ध हो गए। कुछ देर ठहरकर बोले- बहुत सुंदर गाया आपने… मेरा आशीर्वाद है…। ऐसे ही लोगों की मुस्कुराहट का कारण बनते रहिए। बांके बिहारी मंदिर में भी दर्शन करने पहुंचे जुबिन
जुबिन नौटियाल कहते हैं- ब्रजभूमि से मेरा खास लगाव रहा है। मैं अक्सर वृंदावन आता रहता हूं। केलि कुंज आश्रम पहुंचने से पहले वह बांके बिहारी मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे थे। पुजारी ने उनके गले में राधा-कृष्ण लिखी हुई पट्टिका भी पहनाई। इसके बाद वह राधा वल्लभ मंदिर और राधा रमण मंदिर गए। वहां करीब 30 मिनट रुके। प्रेमानंद जी महाराज के साथ जुबिन नौटियाल की मुलाकात का वीडियो भजन मार्ग के इंस्टाग्राम चैनल पर भी शेयर किया गया है। इसके कैप्शन में लिखा है- जुबिन नौटियाल ने गाया मनमोहन श्री कृष्ण भजन। वीडियो में दिख रहा है कि जुबिन नौटियाल प्रेमानंद जी महाराज के सामने श्री कृष्ण गोविंद भजन गा रहे हैं। इस दौरान प्रेमानंद महाराज आंख बंद कर इसका लुत्फ उठा रहे हैं। जुबिन नौटियाल की खूबसूरत आवाज को सुनकर वह भाव-विभोर हो जाते हैं। भजन मार्ग के शेयर किए गए इस वीडियो को 1.6 मिलियन लाइक्स मिल चुके हैं। वहीं, 16.3 मिलियन व्यूज आ चुके हैं। प्रेमानंद जी के बचपन से लेकर प्रसिद्ध संत बनने तक की कहानी… 13 साल की उम्र में प्रेमानंद महाराज ने घर छोड़ा
प्रेमानंद महाराज का कानपुर के नरवल स्थित अखरी गांव में जन्म और पालन-पोषण हुआ। यहीं से निकलकर वो इस देश के करोड़ों लोगों के मन में बस गए। उनके बड़े भाई गणेश दत्त पांडे बताते हैं- मेरे पिता शंभू नारायण पांडे और मां रामा देवी हैं। हम 3 भाई हैं, प्रेमानंद मंझले हैं। प्रेमानंद हमेशा से प्रेमानंद महाराज नहीं थे। बचपन में मां-पिता ने बड़े प्यार से उनका नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे रखा था। हर पीढ़ी में कोई न कोई बड़ा साधु-संत निकला
गणेश पांडे ने बताया- हमारे पिताजी पुरोहित का काम करते थे। मेरे घर की हर पीढ़ी में कोई न कोई बड़ा साधु-संत होकर निकलता है। पीढ़ी दर पीढ़ी अध्यात्म की ओर झुकाव होने के चलते अनिरुद्ध भी बचपन से ही आध्यात्मिक रहे। बचपन में पूरा परिवार रोजाना एक साथ बैठकर पूजा-पाठ करता था। अनिरुद्ध यह सब बड़े ध्यान से देखा-सुना करता था। शिव मंदिर में चबूतरा बनाने से रोका, तो घर छोड़ दिया
बचपन में अनिरुद्ध ने अपनी सखा टोली के साथ शिव मंदिर के लिए एक चबूतरा बनाना चाहा। इसका निर्माण भी शुरू करवाया, लेकिन कुछ लोगों ने रोक दिया। इससे वह मायूस हो गए। उनका मन इस कदर टूटा कि घर छोड़ दिया। घरवालों ने उनकी खोजबीन शुरू की। काफी मशक्कत के बाद पता चला कि वो सरसौल में नंदेश्वर मंदिर पर रुके हैं। घरवालों ने उन्हें घर लाने का हर जतन किया, लेकिन अनिरुद्ध नहीं माने। फिर कुछ दिनों बाद बची-कुची मोह माया छोड़कर वह सरसौल से भी चले गए। नंदेश्वर से महाराजपुर, कानपुर और फिर काशी पहुंचे
आज जिन प्रेमानंद महाराज के भक्तों में आम आदमी से लेकर सेलिब्रिटी तक शुमार हैं, उनकी पढ़ाई-लिखाई सिर्फ 8वीं कक्षा तक हुई है। 9वीं में भास्करानंद विद्यालय में एडमिशन दिलाया गया था, लेकिन 4 महीने में ही उन्होंने स्कूल छोड़ दिया। इसके बाद वह भगवान की भक्ति में लीन हो गए। सरसौल नंदेश्वर मंदिर से जाने के बाद वह महाराजपुर के सैमसी स्थित एक मंदिर में कुछ दिन रुके। फिर कानपुर के बिठूर में रहे। बिठूर के बाद प्रेमानंद जी काशी चले गए। संन्यासी जीवन में कई दिन भूखे रहे
काशी में प्रेमानंद महाराज जी ने करीब 15 महीने बिताए। उन्होंने गुरु गौरी शरण जी महाराज से गुरुदीक्षा ली। वाराणसी में संन्यासी जीवन के दौरान वो रोज गंगा में तीन बार स्नान करते। तुलसी घाट पर भगवान शिव और माता गंगा का ध्यान-पूजन करते। वह दिन में केवल एक बार भोजन करते थे। प्रेमानंद महाराज भिक्षा मांगने की जगह भोजन प्राप्ति की इच्छा से 10-15 मिनट बैठते थे। अगर इतने समय में भोजन मिला तो उसे ग्रहण करते, नहीं तो सिर्फ गंगाजल पीकर रह जाते थे। संन्यासी जीवन की दिनचर्या में प्रेमानंद महाराज ने कई दिन बिना कुछ खाए-पीए बिताए। ————————- ये खबर भी पढ़िए- फर्जी IAS ने 5 करोड़ की रिश्वत ली:AI से पेपर बनाकर ठेके दिए; 4 राज्यों में जालसाजी गोरखपुर में फर्जी IAS अधिकारी को पुलिस ने अरेस्ट किया। उसका जालसाजी का नेटवर्क यूपी, बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश तक फैला था। सरकारी कॉन्ट्रैक्ट, नौकरी और शादियां कराने की आड़ में उसने 40 से ज्यादा लोगों से ठगी की। यूपी के पूर्वांचल में वह ज्यादा एक्टिव था। पढ़ें पूरी खबर…
संत प्रेमानंद महाराज के एकांत मुलाकात के वक्त जुबिन पहुंचे थे। जुबिन के साथ उनके परिवार के लोग भी थे। महाराजजी के अनुयायियों ने उन्हें अंदर बुलाया। वह जब महाराजजी के सामने आए तो मौजूदा समय में चल रहे गीत-संगीत पर चर्चा हुई। इसके बाद जुबिन ने माइक थाम लिया। उन्होंने पहले गाया- राम आएंगे तो अंगना सजाऊंगा…। फिर दूसरा गीत सुनाया- श्रीकृष्ण गोविंद हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेवाए….। महाराजजी इस गीत को सुनकर मुग्ध हो गए। कुछ देर ठहरकर बोले- बहुत सुंदर गाया आपने… मेरा आशीर्वाद है…। ऐसे ही लोगों की मुस्कुराहट का कारण बनते रहिए। बांके बिहारी मंदिर में भी दर्शन करने पहुंचे जुबिन
जुबिन नौटियाल कहते हैं- ब्रजभूमि से मेरा खास लगाव रहा है। मैं अक्सर वृंदावन आता रहता हूं। केलि कुंज आश्रम पहुंचने से पहले वह बांके बिहारी मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे थे। पुजारी ने उनके गले में राधा-कृष्ण लिखी हुई पट्टिका भी पहनाई। इसके बाद वह राधा वल्लभ मंदिर और राधा रमण मंदिर गए। वहां करीब 30 मिनट रुके। प्रेमानंद जी महाराज के साथ जुबिन नौटियाल की मुलाकात का वीडियो भजन मार्ग के इंस्टाग्राम चैनल पर भी शेयर किया गया है। इसके कैप्शन में लिखा है- जुबिन नौटियाल ने गाया मनमोहन श्री कृष्ण भजन। वीडियो में दिख रहा है कि जुबिन नौटियाल प्रेमानंद जी महाराज के सामने श्री कृष्ण गोविंद भजन गा रहे हैं। इस दौरान प्रेमानंद महाराज आंख बंद कर इसका लुत्फ उठा रहे हैं। जुबिन नौटियाल की खूबसूरत आवाज को सुनकर वह भाव-विभोर हो जाते हैं। भजन मार्ग के शेयर किए गए इस वीडियो को 1.6 मिलियन लाइक्स मिल चुके हैं। वहीं, 16.3 मिलियन व्यूज आ चुके हैं। प्रेमानंद जी के बचपन से लेकर प्रसिद्ध संत बनने तक की कहानी… 13 साल की उम्र में प्रेमानंद महाराज ने घर छोड़ा
प्रेमानंद महाराज का कानपुर के नरवल स्थित अखरी गांव में जन्म और पालन-पोषण हुआ। यहीं से निकलकर वो इस देश के करोड़ों लोगों के मन में बस गए। उनके बड़े भाई गणेश दत्त पांडे बताते हैं- मेरे पिता शंभू नारायण पांडे और मां रामा देवी हैं। हम 3 भाई हैं, प्रेमानंद मंझले हैं। प्रेमानंद हमेशा से प्रेमानंद महाराज नहीं थे। बचपन में मां-पिता ने बड़े प्यार से उनका नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे रखा था। हर पीढ़ी में कोई न कोई बड़ा साधु-संत निकला
गणेश पांडे ने बताया- हमारे पिताजी पुरोहित का काम करते थे। मेरे घर की हर पीढ़ी में कोई न कोई बड़ा साधु-संत होकर निकलता है। पीढ़ी दर पीढ़ी अध्यात्म की ओर झुकाव होने के चलते अनिरुद्ध भी बचपन से ही आध्यात्मिक रहे। बचपन में पूरा परिवार रोजाना एक साथ बैठकर पूजा-पाठ करता था। अनिरुद्ध यह सब बड़े ध्यान से देखा-सुना करता था। शिव मंदिर में चबूतरा बनाने से रोका, तो घर छोड़ दिया
बचपन में अनिरुद्ध ने अपनी सखा टोली के साथ शिव मंदिर के लिए एक चबूतरा बनाना चाहा। इसका निर्माण भी शुरू करवाया, लेकिन कुछ लोगों ने रोक दिया। इससे वह मायूस हो गए। उनका मन इस कदर टूटा कि घर छोड़ दिया। घरवालों ने उनकी खोजबीन शुरू की। काफी मशक्कत के बाद पता चला कि वो सरसौल में नंदेश्वर मंदिर पर रुके हैं। घरवालों ने उन्हें घर लाने का हर जतन किया, लेकिन अनिरुद्ध नहीं माने। फिर कुछ दिनों बाद बची-कुची मोह माया छोड़कर वह सरसौल से भी चले गए। नंदेश्वर से महाराजपुर, कानपुर और फिर काशी पहुंचे
आज जिन प्रेमानंद महाराज के भक्तों में आम आदमी से लेकर सेलिब्रिटी तक शुमार हैं, उनकी पढ़ाई-लिखाई सिर्फ 8वीं कक्षा तक हुई है। 9वीं में भास्करानंद विद्यालय में एडमिशन दिलाया गया था, लेकिन 4 महीने में ही उन्होंने स्कूल छोड़ दिया। इसके बाद वह भगवान की भक्ति में लीन हो गए। सरसौल नंदेश्वर मंदिर से जाने के बाद वह महाराजपुर के सैमसी स्थित एक मंदिर में कुछ दिन रुके। फिर कानपुर के बिठूर में रहे। बिठूर के बाद प्रेमानंद जी काशी चले गए। संन्यासी जीवन में कई दिन भूखे रहे
काशी में प्रेमानंद महाराज जी ने करीब 15 महीने बिताए। उन्होंने गुरु गौरी शरण जी महाराज से गुरुदीक्षा ली। वाराणसी में संन्यासी जीवन के दौरान वो रोज गंगा में तीन बार स्नान करते। तुलसी घाट पर भगवान शिव और माता गंगा का ध्यान-पूजन करते। वह दिन में केवल एक बार भोजन करते थे। प्रेमानंद महाराज भिक्षा मांगने की जगह भोजन प्राप्ति की इच्छा से 10-15 मिनट बैठते थे। अगर इतने समय में भोजन मिला तो उसे ग्रहण करते, नहीं तो सिर्फ गंगाजल पीकर रह जाते थे। संन्यासी जीवन की दिनचर्या में प्रेमानंद महाराज ने कई दिन बिना कुछ खाए-पीए बिताए। ————————- ये खबर भी पढ़िए- फर्जी IAS ने 5 करोड़ की रिश्वत ली:AI से पेपर बनाकर ठेके दिए; 4 राज्यों में जालसाजी गोरखपुर में फर्जी IAS अधिकारी को पुलिस ने अरेस्ट किया। उसका जालसाजी का नेटवर्क यूपी, बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश तक फैला था। सरकारी कॉन्ट्रैक्ट, नौकरी और शादियां कराने की आड़ में उसने 40 से ज्यादा लोगों से ठगी की। यूपी के पूर्वांचल में वह ज्यादा एक्टिव था। पढ़ें पूरी खबर…