यूपी का वो नेता, जिसकी भैंस तक पुलिस ढूंढती थी। रुतबा ऐसा कि IAS अफसर से जूते साफ करने का दम भरा था। रसूख ऐसा कि खुद को आजीवन अपनी ही यूनिवर्सिटी का कुलाधिपति घोषित करवा लिया। नाम है मोहम्मद आजम खान। 32 साल पहले छोटी-सी लाइब्रेरी जौहर से शुरू हुआ यूनिवर्सिटी का ख्वाब 2006 में आजम ने पूरा तो कर लिया। लेकिन, उन्हें क्या पता था कि जिस यूनिवर्सिटी को वह अपने रसूख की सबसे बड़ी इमारत मान रहे थे। वही एक दिन उनके सियासी साम्राज्य के ढहने की सबसे बड़ी वजह बन जाएगी। जौहर को बनाते-बनाते आजम खान कैसे अर्श से फर्श पर आ गए, संडे बिग स्टोरी में पढ़िए… सियासत के ‘आजम’ कैसे बने इमरजेंसी में जेल, बाहर आए तो नेता बन चुके थे भारत की आजादी के ठीक 1 साल बाद 14 अगस्त, 1948 को अमीर जहां और मुमताज खान के घर पर आजम खान का जन्म हुआ। मध्यमवर्गीय परिवार था। 70 के दशक में आजम अलीगढ़ यूनिवर्सिटी पढ़ने पहुंच गए। अपनी उर्दू जबान के चलते जल्द ही छात्रों में लोकप्रिय हो गए। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी लगाई, तो आजम ने तीखे तंजों से विरोध जताया। सरकार ने उन्हें जेल भेज दिया। इमरजेंसी खत्म होने के बाद आजम नेता बनकर बाहर निकले। 1977 में चुनाव लड़े, लेकिन हार गए। 1980 में जनता दल (सेक्युलर) से जीतकर 32 साल की उम्र में ही विधायक बन गए। इसके बाद लोकदल, जनता दल और जनता पार्टी से जीते। 1992 में मुलायम सिंह ने समाजवादी पार्टी बनाई। आजम खान इस पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक रहे। लगातार इसी पार्टी से चुनाव लड़ा और जीते। 2003 में मुलायम सिंह ने उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया। उनके मन में यूनिवर्सिटी बनाने का जो सपना था, उसे मानो पंख लग गए हों। आजम ने रामपुर में पैदा हुए आजादी आंदोलन के नेता मोहम्मद अली जौहर के नाम का खूब इस्तेमाल किया। आजम ने मौलाना अली जौहर के नाम से ट्रस्ट बना दिया। वह अक्सर कहते थे- यूनिवर्सिटी का ख्वाब जमीन पर उतारा जिन्होंने जमीन नहीं दी, उन्हें थाने में रखा गया 2006 में आजम खान ने मुलायम सिंह यादव को बुलाकर यूनिवर्सिटी का शिलान्यास करा दिया। कुल 78 हेक्टेयर यानी करीब 300 बीघा जमीन का अधिग्रहण शुरू हुआ। आलियागंज में कुछ किसानों ने तो जमीन दे दी, लेकिन ज्यादातर अपनी जमीन देना नहीं चाहते थे। लोग कहते थे कि रामपुर के इस एरिया में आजम ने कभी सर्किल रेट बढ़ने नहीं दिए। दूसरे एरिया की तुलना में यहां 33% कम रेट रहे। आलियागंज के लोगों ने 2019 में आजम खान के खिलाफ मुकदमा लिखवा दिया था। आरोप लगाया था कि उनसे जबरदस्ती जमीनें ली गईं। लोग कहते हैं कि उस वक्त गांव में पुलिस की बहुत दहशत थी। पुलिस गांव आती और लोगों को उठा ले जाती थी। वहां तब तक रखते, जब तक वो लोग जमीन की रजिस्ट्री के कागज पर साइन नहीं कर देते थे। कई बार तो गांव के नाबालिग बच्चों को भी उठा ले जाते थे। 38 हेक्टेयर सरकारी जमीन पर बना दी यूनिवर्सिटी 2012 में सपा की सरकार बनी, तो सारे सपने पूरे हो गए 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने तत्कालीन DM आन्जनेय सिंह पर निशाना साधते हुए रोड शो में कहा था- ये तनखैय्या हैं, इनसे मत डरियो, उन्हीं के साथ गठबंधन है, जो जूते साफ करा लेती हैं, इंशा अल्लाह चुनाव के बाद इनसे जूते साफ करवाऊंगा। इस बयान के बाद ऐसा माना जाता है कि यूपी सरकार ने आन्जनेय सिंह को आजम के खिलाफ कार्रवाई करने की खुली छूट दे दी। आन्जनेय सिंह ने आजम के खिलाफ जांच शुरू कर दी। स्कूल-कॉलेज से लेकर जमीन तक, हर चीज की जांच की। आजम के शहर में ‘रामपुर पब्लिक स्कूल’ नाम से कुल 4 स्कूल थे। सारे अवैध जमीनों पर बने थे। 2019 से 2023 के बीच ये सील कर दिए गए। आजम की सियासत पूरी तरह से खत्म फर्जी प्रमाण पत्र मामले में सजा होते ही विधायकी गई 2020 में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र के मामले में आजम खान, पत्नी तंजीन फातिमा और बेटे अब्दुल्ला आजम को जेल जाना पड़ा। 2022 के चुनाव में आजम खान रामपुर सीट से उतरे। बेटा स्वार सीट से। दोनों जीत गए। लेकिन, कुछ दिन बाद ही प्रमाण पत्र मामले में फैसला आया और दोनों की विधायकी चली गई। रामपुर सीट पर उपचुनाव हुआ। आजम अब तक जिसे चाहते थे, उसे जिता देते थे। लेकिन, पहली बार उपचुनाव में उनका कैंडिडेट हार गया। आजम की सियासत में यह सबसे बड़ा डेंट था। इसका असर यह हुआ कि 2024 में सपा ने उनके कहने पर किसी को कैंडिडेट नहीं बनाया। सपा ने मोहिबुल्लाह को प्रत्याशी बनाया, जो आजम खान के विरोधी थे। मोहिबुल्लाह चुनाव जीत भी गए। 100 करोड़ रुपए देने पर बचेगी यूनिवर्सिटी 15 जुलाई, 2026 को रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने नक्शा पास नहीं होने के चलते यूनिवर्सिटी के अंदर बने 40 में 38 भवनों को गिराने का आदेश दिया। आजम खान को इस आदेश के खिलाफ अब उन्हीं आन्जनेय सिंह के पास जाना होगा, जिन्हें कभी उन्होंने तनखैय्या कहा था। आन्जनेय सिंह इस वक्त मुरादाबाद मंडल के कमिश्नर हैं। वह रामपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष भी हैं। आजम खान अगर कोर्ट भी जाएंगे, तो नक्शा पास करवाने के लिए उन्हें RDA के पास ही जाना होगा। एक अधिकारी कहते हैं- अगर नक्शा पास करवाने की नौबत आती है, तो आजम खान को करीब 100 करोड़ रुपए देने होंगे। इसमें डेवलपमेंट चार्ज, कंपाउंडिंग फीस, इंपैक्ट फीस और अन्य शुल्क शामिल हैं। अगर मार्च- 2026 से पहले आजम खान ने इन बिल्डिंग का नक्शा पास करवाया होता, तो 5-6 करोड़ रुपए में काम हो जाता। क्योंकि, उस वक्त सींगनखेड़ी गांव RDA में नहीं आता था, तब जिला पंचायत में आता था। मार्च- 2026 में ही इसे विकास प्राधिकरण में शामिल किया गया। ————————— यह खबर भी पढ़ें – आजम ने जिसे तनखैय्या कहा, वही IAS करेगा यूनिवर्सिटी का फैसला, 100 करोड़ चुकाने होंगे पुरुष बली नहि होत है, समय होत बलवान…। जिस IAS अफसर को आजम खान ने 2019 में तनखैय्या कहा था, अपने जूते साफ कराने की हसरत पाली थी, वही अधिकारी अब रामपुर की जौहर यूनिवर्सिटी के मुस्तकबिल का फैसला करेगा। रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) के अध्यक्ष मुरादाबाद मंडल के कमिश्नर आन्जनेय सिंह हैं। वहीं अपीलीय अधिकारी भी हैं। पढ़िए पूरी खबर…