अमेरिकी टैरिफ ने भदोही के कालीन उद्योग को संकट में डाल दिया है। 2500 करोड़ रुपए के ऑर्डर कैंसिल या होल्ड होने से कारोबार ठप हो गया है। कालीन निर्यातकों ने अपने कारीगरों को काम देना बंद कर दिया है। कुछ निर्यातक वैकल्पिक दिवस में काम उपलब्ध करा रहे हैं। यानी पूरे सप्ताह काम देने की बजाय सप्ताह में 3 दिन का ही काम दे रहे हैं। उसी रेश्यो में दिहाड़ी भी दे रहे हैं। कई कंपनियों ने तो कर्मचारियों की छंटनी भी शुरू कर दी है। ऐसे में क्या असर पड़ रहा है? कितने का नुकसान हो रहा है? कालीन उद्योग से कितने परिवारों की रोजी-रोटी चलती है? पीक टाइम कब होता है? इसका लॉन्ग टर्म में क्या असर होगा? दैनिक भास्कर ने इन सब सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश की। पढ़िए ये खास रिपोर्ट… अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ओर से भारतीय निर्यातों पर लगाए गए 25% और अब 50% तक बढ़ाए गए टैरिफ ने कालीन उद्योग को संकट में डाल दिया है। दरअसल, भदोही और आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में कारपेट एक्सपोर्ट की जाती है। इसमें सबसे बड़ा ग्राहक अमेरिका ही है। वहां 60 फीसदी से ज्यादा कारपेट निर्यात होता है। भदोही में कालीन उद्योग से जुड़े हैं 5 लाख परिवार
कालीन निर्यातक और टेक्सटिको के मालिक इम्तियाज अहमद बताते हैं- कम से कम 2500 करोड़ का ऑर्डर या तो होल्ड कर दिया गया है या फिर कैंसिल कर दिया गया है। इसका सीधा असर कालीन उत्पादन और इस कारोबार से जुड़े लोगों पर पड़ रहा है। इम्तियाज अहमद बताते हैं- केवल भदोही में ही कालीन के कारोबार से करीब 5 लाख परिवार जुड़े हैं। आसपास की बात की जाए, तो कुल 7 लाख परिवारों की रोजी-रोटी इसी से चलती है। इसमें दूसरे राज्यों के भी कारीगर भी हैं, जो अब धीरे-धीरे वापस जाने लगे हैं। कालीन की देश में खपत कुल उत्पादन का मात्र 2 फीसदी
इम्तियाज बताते हैं- भदोही भारत के कालीन निर्यात का एक प्रमुख केंद्र है। यहां के हाथ से बने कालीन, विशेष रूप से हैंड-टफ्टेड और परशियन शैली के हैंड-नॉटेड रग्स, दुनिया भर में अपनी गुणवत्ता और कारीगरी के लिए प्रसिद्ध हैं। भारतीय कालीन उद्योग का लगभग 98% उत्पादन निर्यात के लिए होता है। इसमें से 60 फीसदी हिस्सा अमेरिकी बाजारों को जाता है। भदोही और आसपास के क्षेत्रों में सैकड़ों-हजारों छोटे-बड़े निर्माता और लाखों कारीगर इस उद्योग से अपनी आजीविका चलाते हैं। भारतीय बाजारों में कालीन की खपत कुल उत्पादन का मात्र 2 फीसदी ही होती है। मेन सीजन में ठप हुआ कारोबार
इम्तियाज बताते हैं- कारपेट का जितना बिजनेस पूरे साल में नहीं होता, उतना बिजनेस 3 महीनों (अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर) में होता है। क्योंकि, अमेरिका में ज्यादातर घरों में क्रिसमस से पहले रिनोवेशन होता है। इसमें पुराने सामान को बदला जाता है। इन 3 महीनों के लिए अप्रैल और मई से ऑर्डर फाइनल हो जाते हैं। अगस्त से सितंबर तक माल तैयार होकर शिपमेंट के लिए भेज दिया जाता है। टैरिफ की पड़ी इस मार ने अचानक से पूरे कारोबार पर ही ब्रेक लगा दिया है। टैरिफ तो बहाना, मकसद भारत को इग्नोर करना है
कालीन एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (CEPC) के पूर्व सदस्य दर्पण बरनवाल कहते हैं- टैरिफ तो एक बहाना है। दरअसल ये इंबारगो है। इंबारगो का मतलब किसी देश काे इग्नोर करना या वहां का सामान नहीं खरीदना है। हैंड नॉटेड कारपेट पर 7% का टैरिफ था। जब ये 25% हुआ तब ही बहुत अधिक था। 50% टैरिफ तो सुसाइडल है। इस पर तो बात करना ही बेकार है। दर्पण बरनवाल कहते हैं- ये हमारे हैंड मेड इंडस्ट्री को बुरी तरह प्रभावित करने वाला है। जो मौजूदा ऑर्डर थे, उन्हें हम लोग कोशिश कर रहे हैं कि जल्द माल डिस्पैच कर दिया जाए। आगे के जो भी ऑर्डर प्रोसेस थे, उन्हें रोक दिया गया है। नए शिपमेंट के लिए भी रोक दिया गया है। इसके लिए सरकार को समाधान निकालना हाेगा। ये इंडस्ट्री पहले से ही बुरे दौर से गुजर रही थी, टैरिफ ने हालात और खराब कर दिए हैं। दूसरे देशों का रुख कर रहे बायर्स
इंडियन एक्सपोर्ट हाउस के मालिक मुश्ताक अंसारी बताते हैं कि वे कई पीढ़ियों से कारपेट का काम कर रहे हैं। अपने जीवन में इतने बड़े संकट का सामना नहीं किया है। पहले 25% टैरिफ ने हमें झकझोर दिया था, लेकिन अब 50% टैरिफ ने स्थिति को असंभव बना दिया है। करोड़ों का माल गोदाम में डंप
कई कारोबारी ऐसे हैं, जिनके यहां कारपेट बनकर तैयार हैं और गोदाम में डंप हैं। ऑर्डर कैंसिल हो चुके हैं। एक-एक कारोबारी के यहां 7 से 10 करोड़ तक का माल डंप है। मुश्ताक बताते हैं कि 5-7% के मार्जिन पर कारोबार होता है। ऐसे में सीधे 50% टैरिफ वहन कर पाना कारोबारियों के लिए संभव नहीं। जहां तक अमेरिकी ग्राहकों की बात है, तो उनके लिए भी कीमत डेढ़ गुना हो गई है। ऐसे में वे भी इसका भार उठाने के लिए तैयार नहीं हैं। कालीन एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के सदस्य असलम महबूब कहते हैं कि इस उद्योग में 80 प्रतिशत से अधिक श्रमिक ग्रामीण क्षेत्रों से हैं। ये लोग खेती के साथ-साथ कालीन बुनाई, रंगाई और डिजाइनिंग जैसे काम करते हैं। कालीन उद्योग ही इनकी आय का जरिया है। टैरिफ के कारण ऑर्डर रुकने से अब इन श्रमिकों की आजीविका खतरे में है। अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो भदोही और आसपास के क्षेत्रों में लाखों लोग बेरोजगार हो सकते हैं। बेलआउट पैकेज की मांग
असलम महबूब ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बेलआउट पैकेज की मांग की गई है। जिससे संकट से निकला जा सके। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव इसके लिए केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा है कि अमेरिका के भारत पर 50% टैरिफ लगाने से देश की अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान हो रहा है। खासकर, भदोही, मुरादाबाद और कानपुर जैसे कारोबारी क्षेत्रों में जहां कारपेट और ब्रास उद्योग संकट में हैं। टैरिफ से किसानों और व्यापारियों को नुकसान हो रहा है। ———————- ये खबर भी पढ़ें… संभल हिंसा से चर्चित ASP अनुज बोले-यहीं कल्कि अवतार होगा, कहा- टिकट ब्लैक करने वाले बड़े नेता बन गए संभल हिंसा के बाद चर्चा में आए अपर पुलिस अधीक्षक (ASP) अनुज चौधरी का कहना है कि संभल में ही भगवान कल्कि का अवतार होगा। ये बात मैंने भी पौराणिक ग्रंथों में पढ़ी है। ग्रंथों में जो लिखा है, उसको हम कैसे मना कर सकते हैं। अनुज चौधरी से ‘दैनिक भास्कर’ ने एक्सक्लूसिव बातचीत की। पॉलिटिक्स में आने के सवाल पर कहा- मुझे पॉलिटिक्स में आने की कोई जरूरत नहीं है। टिकट ब्लैक करने वाले लोग बड़े नेता बन गए, मैं तो फिर भी राष्ट्रभक्त रहा और देश के लिए खेला। पॉलिटिक्स भविष्य की बात है। अभी उसके बारे में क्या कह सकता हूं। पूरी खबर पढ़ें…
कालीन निर्यातक और टेक्सटिको के मालिक इम्तियाज अहमद बताते हैं- कम से कम 2500 करोड़ का ऑर्डर या तो होल्ड कर दिया गया है या फिर कैंसिल कर दिया गया है। इसका सीधा असर कालीन उत्पादन और इस कारोबार से जुड़े लोगों पर पड़ रहा है। इम्तियाज अहमद बताते हैं- केवल भदोही में ही कालीन के कारोबार से करीब 5 लाख परिवार जुड़े हैं। आसपास की बात की जाए, तो कुल 7 लाख परिवारों की रोजी-रोटी इसी से चलती है। इसमें दूसरे राज्यों के भी कारीगर भी हैं, जो अब धीरे-धीरे वापस जाने लगे हैं। कालीन की देश में खपत कुल उत्पादन का मात्र 2 फीसदी
इम्तियाज बताते हैं- भदोही भारत के कालीन निर्यात का एक प्रमुख केंद्र है। यहां के हाथ से बने कालीन, विशेष रूप से हैंड-टफ्टेड और परशियन शैली के हैंड-नॉटेड रग्स, दुनिया भर में अपनी गुणवत्ता और कारीगरी के लिए प्रसिद्ध हैं। भारतीय कालीन उद्योग का लगभग 98% उत्पादन निर्यात के लिए होता है। इसमें से 60 फीसदी हिस्सा अमेरिकी बाजारों को जाता है। भदोही और आसपास के क्षेत्रों में सैकड़ों-हजारों छोटे-बड़े निर्माता और लाखों कारीगर इस उद्योग से अपनी आजीविका चलाते हैं। भारतीय बाजारों में कालीन की खपत कुल उत्पादन का मात्र 2 फीसदी ही होती है। मेन सीजन में ठप हुआ कारोबार
इम्तियाज बताते हैं- कारपेट का जितना बिजनेस पूरे साल में नहीं होता, उतना बिजनेस 3 महीनों (अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर) में होता है। क्योंकि, अमेरिका में ज्यादातर घरों में क्रिसमस से पहले रिनोवेशन होता है। इसमें पुराने सामान को बदला जाता है। इन 3 महीनों के लिए अप्रैल और मई से ऑर्डर फाइनल हो जाते हैं। अगस्त से सितंबर तक माल तैयार होकर शिपमेंट के लिए भेज दिया जाता है। टैरिफ की पड़ी इस मार ने अचानक से पूरे कारोबार पर ही ब्रेक लगा दिया है। टैरिफ तो बहाना, मकसद भारत को इग्नोर करना है
कालीन एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (CEPC) के पूर्व सदस्य दर्पण बरनवाल कहते हैं- टैरिफ तो एक बहाना है। दरअसल ये इंबारगो है। इंबारगो का मतलब किसी देश काे इग्नोर करना या वहां का सामान नहीं खरीदना है। हैंड नॉटेड कारपेट पर 7% का टैरिफ था। जब ये 25% हुआ तब ही बहुत अधिक था। 50% टैरिफ तो सुसाइडल है। इस पर तो बात करना ही बेकार है। दर्पण बरनवाल कहते हैं- ये हमारे हैंड मेड इंडस्ट्री को बुरी तरह प्रभावित करने वाला है। जो मौजूदा ऑर्डर थे, उन्हें हम लोग कोशिश कर रहे हैं कि जल्द माल डिस्पैच कर दिया जाए। आगे के जो भी ऑर्डर प्रोसेस थे, उन्हें रोक दिया गया है। नए शिपमेंट के लिए भी रोक दिया गया है। इसके लिए सरकार को समाधान निकालना हाेगा। ये इंडस्ट्री पहले से ही बुरे दौर से गुजर रही थी, टैरिफ ने हालात और खराब कर दिए हैं। दूसरे देशों का रुख कर रहे बायर्स
इंडियन एक्सपोर्ट हाउस के मालिक मुश्ताक अंसारी बताते हैं कि वे कई पीढ़ियों से कारपेट का काम कर रहे हैं। अपने जीवन में इतने बड़े संकट का सामना नहीं किया है। पहले 25% टैरिफ ने हमें झकझोर दिया था, लेकिन अब 50% टैरिफ ने स्थिति को असंभव बना दिया है। करोड़ों का माल गोदाम में डंप
कई कारोबारी ऐसे हैं, जिनके यहां कारपेट बनकर तैयार हैं और गोदाम में डंप हैं। ऑर्डर कैंसिल हो चुके हैं। एक-एक कारोबारी के यहां 7 से 10 करोड़ तक का माल डंप है। मुश्ताक बताते हैं कि 5-7% के मार्जिन पर कारोबार होता है। ऐसे में सीधे 50% टैरिफ वहन कर पाना कारोबारियों के लिए संभव नहीं। जहां तक अमेरिकी ग्राहकों की बात है, तो उनके लिए भी कीमत डेढ़ गुना हो गई है। ऐसे में वे भी इसका भार उठाने के लिए तैयार नहीं हैं। कालीन एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के सदस्य असलम महबूब कहते हैं कि इस उद्योग में 80 प्रतिशत से अधिक श्रमिक ग्रामीण क्षेत्रों से हैं। ये लोग खेती के साथ-साथ कालीन बुनाई, रंगाई और डिजाइनिंग जैसे काम करते हैं। कालीन उद्योग ही इनकी आय का जरिया है। टैरिफ के कारण ऑर्डर रुकने से अब इन श्रमिकों की आजीविका खतरे में है। अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो भदोही और आसपास के क्षेत्रों में लाखों लोग बेरोजगार हो सकते हैं। बेलआउट पैकेज की मांग
असलम महबूब ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बेलआउट पैकेज की मांग की गई है। जिससे संकट से निकला जा सके। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव इसके लिए केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा है कि अमेरिका के भारत पर 50% टैरिफ लगाने से देश की अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान हो रहा है। खासकर, भदोही, मुरादाबाद और कानपुर जैसे कारोबारी क्षेत्रों में जहां कारपेट और ब्रास उद्योग संकट में हैं। टैरिफ से किसानों और व्यापारियों को नुकसान हो रहा है। ———————- ये खबर भी पढ़ें… संभल हिंसा से चर्चित ASP अनुज बोले-यहीं कल्कि अवतार होगा, कहा- टिकट ब्लैक करने वाले बड़े नेता बन गए संभल हिंसा के बाद चर्चा में आए अपर पुलिस अधीक्षक (ASP) अनुज चौधरी का कहना है कि संभल में ही भगवान कल्कि का अवतार होगा। ये बात मैंने भी पौराणिक ग्रंथों में पढ़ी है। ग्रंथों में जो लिखा है, उसको हम कैसे मना कर सकते हैं। अनुज चौधरी से ‘दैनिक भास्कर’ ने एक्सक्लूसिव बातचीत की। पॉलिटिक्स में आने के सवाल पर कहा- मुझे पॉलिटिक्स में आने की कोई जरूरत नहीं है। टिकट ब्लैक करने वाले लोग बड़े नेता बन गए, मैं तो फिर भी राष्ट्रभक्त रहा और देश के लिए खेला। पॉलिटिक्स भविष्य की बात है। अभी उसके बारे में क्या कह सकता हूं। पूरी खबर पढ़ें…