डॉक्टर साहब…मुझे लड़का ही बनकर रहना है:प्रयागराज में UPSC ने छात्र लड़की बनने के लिए काटा था प्राइवेट पार्ट, अब होगी प्लास्टिक सर्जरी

प्रयागराज में रहकर UPSC की तैयारी करने वाले छात्र ने 2 दिन पहले लड़की बनने के लिए अपने प्राइवेट पार्ट को ही काट दिया था। गंभीर स्थिति में उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसकी जानकारी जब उसके दोस्तों व सगे संबंधियों को हुई तो सब अस्पताल पहुंच गए। उधर, शुक्रवार को मनोचिकित्सकों ने काउंसलिंग भी की। छात्र को अपने किए पर अब शर्म और अफसोस भी हो रहा है। अस्पताल में उसने डॉक्टरों के आगे हाथ जोड़कर कहा, डॉक्टर साहब- मुझे लड़का बनकर ही रहना है प्लीज मुझे पहले की तरह बना दीजिए। वह कभी डॉक्टर तो कभी अपने दोस्त और मां के सामने अपने किए पर माफी मांगता रहा। डॉक्टर्स अब उसकी प्लास्टिक सर्जरी करने की तैयारी में है। डॉक्टरों ने बैठक कर छात्र के इलाज पर किया मंथन
स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल में शुक्रवार को प्लास्टिक सर्जन, सर्जन और मनोचिकित्सक बैठ कर इस छात्र के बेहतर इलाज के बारे में डिस्कस किए। इसमें निर्णय लिया गया कि छात्र को किस तरह से पहले की तरह सामान्य स्थिति में लाया जा सके। अब उसकी प्लास्टिक सर्जरी की जाएगी। प्राइवेट पार्ट जहां पर उसने सर्जरी वाले ब्लेड से काटा है उसे फिर से प्लास्टिक सर्जरी कर ठीक करने का प्रयास किया जाएगा। 14 वर्ष की उम्र से लगा लड़की हूं मैं
छात्र अमेठी का रहने वाला है। उसके मेरे पापा किसान हैं। कोई भाई-बहन नहीं है। उसने बताया था कि मेरी पढ़ाई CBSE बोर्ड से हुई है। जब मैं 14 साल का था, तब मैं एक फंक्शन में गया था। वहां लड़कियों के साथ डांस करते हुए मुझे पहली बार एहसास हुआ कि मैं लड़कों की तरह नहीं हूं। सिर्फ लड़कों की तरह दिखता हूं। वहां से लौटने के बाद मैंने इस बारे में सोचना शुरू किया। चूंकि मां-बाप का इकलौता बेटा हूं, इसलिए परिवार में कुछ भी कहते नहीं बना। फिर ग्रेजुएशन करने के दौरान में अपनी मौसी के घर पर रहने चला गया। फिर मैं UPSC की तैयारी के लिए प्रयागराज आ गया। सिविल लाइन एरिया में एक कमरा किराए पर लिया। आया तो मैं तैयारी करने था, मगर पढ़ाई में मन ही नहीं लग रहा था। डॉक्टर के कहने पर मेडिकल से खरीदा सर्जिकल सामान
छात्र ने बताया, कि वह कटरा स्थित एक डॉक्टर से संपर्क किया जिसका नाम डा. जेनिथ बताया जाता है। छात्र ने जब लड़की बनने की बात बताई तो उसे बहुत आसान तरीका बताते हुए प्राइवेट पार्ट को ही काट देने का तरीका बता दिया। उसके कहने पर छात्र ने एनेस्थिसिया का इंजेक्शन और सर्जिकल ब्लेड मेडिकल स्टोर से खरीद लिया। फिर अकेले अपने किराए के कमरे में इंजेक्शन लगाया और कमरे के नीचे का हिस्सा सुन्न हो गया। इसके बाद उसने अपने हाथों से प्राइवेट पार्ट काे काट दिया। जब तक एनेस्थेसिया इंजेक्शन का असर रहा तब तक वह सामान्य स्थिति में था लेकिन असर खत्म होते ही वह दर्द से पागल होने लगा। बंद कमरे में दर्द से तड़पता रहा छात्र
पहले करीब एक घंटे तक कमरे में छात्र दर्द से तड़पता रहा। पहले दर्द की दवा खाई। फर्श पर पूरा ब्लड बह रहा था। जब उसे लगा कि उसकी जान नहीं बचेगी तो वह छत से ही अपने मकान मालिक को चिल्लाकर बुलाना शुरू किया। वह सिर्फ एम्बुलेंस बुलाने की बात कहता रहा और ऊपर कमरे में किसी को आने से मना कर रहा था। एम्बुलेंस बुलाई गई और मकान मालिक उसे लेकर देर रात तेज बहादुर सप्रू अस्पताल पहुंचा। लेकिन वहां उसकी हालत गंभीर देखते हुए उसे स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। वहां उसे भर्ती कर इलाज में शुरू किया गया।