दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला शहर बना प्रयागराज:पूरी रात धरने पर अविमुक्तेश्वरानंद, 4.52 करोड़ ने किया स्नान, रिकॉर्ड टूटे

प्रयागराज के माघ मेला यानि मिनि महाकुंभ में अबकी बार कई रिकॉड टूटे हैं। सबसे बड़े धार्मिक मेले में इस बार आस्था की बयान यूं बही की मौनी अमावस्या पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। मौनी अमावस्या के स्नान पर्व पर 4 करोड़ 52 लाख लोगों ने आस्था की डुबकी लगाई। यह अपने आप में रिकॉर्ड ही है। प्रयागराज शहर इस आंकड़ों के हिसाब से रविवार को पूरी दुनिया के शहरों के हिसाब से सबसे बड़ी आबादी वाला शहर रहा। यानि रविवार की रात तक प्रयागराज शहर की आबादी यूं ही कि देश के सारे देश के शहर की आबादी पीछे छूट गई। हाल के आंकड़ों पर नजर डालें तो विश्व का सबसे अधिक आबादी वाला शहर इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता रहा है। जिसने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र (UN) की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार जापान के टोक्यो को पीछे छोड़ दिया है, जकार्ता की आबादी लगभग 4.2 करोड़ जबकि बांग्लादेश का ढाका दूसरे और जापान का टोक्यो तीसरे स्थान पर है।। इस हिसाब से रविवार को आस्था के इस महा समुद्र में प्रयागराज में संगम स्नान करने वालों का आंकड़ा शाम 06:00 बजे तक लगभग 4 करोड़ 36 लाख रहा। इस हिसाब से देश के शहरों की आबादी का रिकॉर्ड अपने आप ही टूट गया। आधी रात तक विरोध जारी, बात नहीं बनी प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या के स्नान के लिए आए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी यानि रथ यात्रा को रोकने का बवाल जारी रहा। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने पंडाल में देर रात तक धरने पर बैठे रहे। उनके अनुयायी और समर्थक पूरी रात विरोध प्रदर्शन करते रहे। अनशन पर श्रद्धालु योगी सरकार पर आरोप लगाते रहे। प्रशासन के अधिकारियों पर जमकर आरोप लगाए। कहा कि सबकुछ साजिश के तहत हुआ है। देर रात तक अधिकारी भी वार्तालाप में लगे थे लेकिन बात नहीं बनी। वापसी की भीड़ का सैलाब भी कम नहीं माघ मेला के मौनी अमावस्या स्नान पर्व के बाद श्रद्धालुओं की भीड़ देर रात तक वापसी में जुटी रही। 4 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं की भीड़ एकाएक वापसी की राह पड़ने लगी तो प्रशासन के इंतजाम भी नाकाफी नजर आए। हालांकि क्राउंड मैनेजमेंट की टीम पूरी रात जुटी रही। मौनी पर क्या हुआ जानिए प्रयागराज माघ मेले में रविवार को मौनी अमावस्या के स्नान के लिए आए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी पुलिस ने रोक दी। पुलिस ने उनसे पैदल संगम जाने को कहा। शंकराचार्य के शिष्य नहीं माने और पालकी लेकर आगे बढ़ने लगे। इस पर शिष्यों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। पुलिस ने कई शिष्यों को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने एक साधु को चौकी में पीटा। इससे शंकराचार्य नाराज हो गए और शिष्यों को छुड़वाने पर अड़ गए। अफसरों ने उन्हें समझाने की कोशिश की, हाथ जोड़े, लेकिन वे नहीं माने। करीब 2 घंटे तक गहमा-गहमी रही। इसके बाद पुलिस ने शंकराचार्य के कई और समर्थकों को हिरासत में ले लिया। शंकराचार्य की पालकी को खींचते हुए संगम से 1 किमी दूर ले जाया गया। इस दौरान पालकी का क्षत्रप भी टूट गया। शंकराचार्य स्नान भी नहीं कर पाए। इस पूरे मामले से नाराज शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अपने शिविर में धरने पर बैठ गए हैं। उन्होंने कहा कि जब तक पुलिस प्रशासन ससम्मान प्रोटोकॉल के साथ नहीं ले जाएगा, तब तक गंगा स्नान नहीं करूंगा। वहीं, प्रयागराज के DM मनीष कुमार वर्मा ने कहा- स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद बिना इजाजत पालकी पर आए थे। उस समय संगम पर बहुत ज्यादा भीड़ थी। उनके समर्थकों ने बैरियर तोड़े, पुलिस के साथ धक्का-मुक्की की। हम इस पूरे मामले की जांच कर रहे हैं। पुलिस ने शंकराचार्य को पैदल जाने को कहा था विवाद की शुरुआत में पुलिस ने भीड़ को देखते हुए शंकराचार्य को रथ से उतरकर पैदल जाने को कहा था, लेकिन शिष्य नहीं माने और आगे बढ़ने लगे। इस पर बहस हुई, फिर देखते ही देखते धक्का-मुक्की शुरू हो गई। शंकराचार्य ने कहा- बड़े-बड़े अधिकारी हमारे संतों को मार रहे थे। पहले तो हम लौट रहे थे, लेकिन अब स्नान करेंगे और कहीं नहीं जाएंगे। वे हमें रोक नहीं पाएंगे। इनको ऊपर से आदेश होगा कि इन्हें परेशान करो। यह सरकार के इशारे पर हो रहा है, क्योंकि वे हमसे नाराज हैं। जब महाकुंभ में भगदड़ मची थी, तो मैंने उन्हें जिम्मेदार ठहराया था। अब वे बदला निकालने के लिए अधिकारियों से कह रहे होंगे।” माघ मेले में अविमुक्तेश्वरानंद ​​​​​​ के शिष्यों ​और पुलिस की झड़प और स्नान से जुड़े अपडेट्स के लिए लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…