2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में अभी 8 महीने से ज्यादा का समय है। लेकिन, पूर्वांचल की सियासत में नई जंग छिड़ती दिख रही है। चर्चा है, बाहुबली नेता धनंजय सिंह के गढ़ जौनपुर में उनके विरोधी बृजेश सिंह एंट्री लेने वाले हैं। वह बेटे सिद्धार्थ सिंह को जिला पंचायत चुनाव लड़ाने की प्लानिंग कर रहे हैं। बृजेश सिंह ‘जौनपुर का कंट्रोल’ अपने हाथ में लेना चाहते हैं। सूत्रों के मुताबिक, भाजपा नेता कृपाशंकर सिंह और अपना दल के पूर्व सांसद कुंवर हरिवंश सिंह इस रणनीति में अहम भूमिका निभा रहे हैं। हरिवंश सिंह और धनंजय सिंह का रिश्ता लंबे समय से ठीक नहीं हैं। कृपाशंकर सिंह भी धनंजय के विरोधी माने जाते हैं। पढ़िए खास रिपोर्ट… जौनपुर में एक्टिव हो रहे बृजेश सिंह जौनपुर लंबे समय से धनंजय सिंह का मजबूत राजनीतिक गढ़ माना जाता है। मल्हनी विधानसभा सीट से लेकर जिला पंचायत तक उनका असर साफ दिखाई देता है। उनकी पत्नी श्रीकला रेड्डी इस समय जिला पंचायत अध्यक्ष हैं। अब पूर्व MLC बृजेश सिंह और उनके बेटे सिद्धार्थ सिंह भी जौनपुर में एक्टिव हो गए हैं। बृजेश सिंह 9 मई को बेटे सिद्धार्थ के साथ जौनपुर पहुंचे थे। वे बदलापुर में महाराणा प्रताप जयंती के कार्यक्रम में शामिल हुए थे। इस दौरान भाजपा विधायक रमेशचंद्र मिश्र, पूर्व सांसद हरिवंश सिंह समेत कई दिग्गज नेताओं ने उनका स्वागत किया था। चर्चा है, सिद्धार्थ सिंह को जौनपुर की केराकत ब्लॉक सीट या भदोही से जिला पंचायत चुनाव लड़ाया जा सकता है। सिद्धार्थ 2021 में भी भदोही जिला पंचायत चुनाव लड़ने की तैयारी कर चुके हैं, लेकिन बाद में चुनावी मैदान में उतरे नहीं थे। बृजेश सिंह को लेकर क्या सोचते हैं धनंजय? एक पॉडकास्ट में जब धनंजय सिंह से पूछा गया कि बृजेश सिंह की राजनीति में एंट्री को लेकर क्या सोचते हैं? उन्होंने बिना लाग-लपेट के जवाब दिया- अरे, कौन बृजेश सिंह? ये लोकतंत्र है, यहां हर किसी को राजनीति करने और जनता के लिए काम करने का हक है। सिर्फ हम ही राजनीति करेंगे, ऐसा थोड़ी है। जो भी मैदान में आना चाहता है, उसका स्वागत है। लोग आएं, चुनाव लड़ें और समाज के लिए काम करें। जब मुझे बड़ी-बड़ी राजनीतिक पार्टियों से डर नहीं लगता, तो फिर किसी एक आदमी से डरने का सवाल ही नहीं। धनंजय के दो विरोधी पर्दे के पीछे कर रहे प्लानिंग सूत्रों के मुताबिक, भाजपा नेता कृपा शंकर सिंह और अपना दल के पूर्व सांसद हरिवंश सिंह इस रणनीति में अहम भूमिका निभा रहे हैं। हरिवंश सिंह और धनंजय सिंह के रिश्ते लंबे समय से तल्ख रहे हैं। वहीं, कृपा शंकर सिंह के भी धनंजय से अच्छे संबंध नहीं रहे हैं। कृपा शंकर सिंह महाराष्ट्र से कांग्रेस सरकार में गृह राज्य मंत्री और विधायक रह चुके हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर जौनपुर से लड़ा और हार गए थे। उनके समर्थक आरोप लगाते हैं कि धनंजय के कारण कृपा शंकर सिंह हार गए थे। धनंजय सिंह और प्रतापगढ़ के पूर्व सांसद हरिवंश सिंह के बीच 2017 में विवाद शुरू हुआ था। उस समय खुटहन ब्लॉक प्रमुख सरजू देवी यादव (सपा नेता और पूर्व मंत्री ललई यादव की करीबी थीं) के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। इसके पीछे हरिवंश सिंह का दिमाग था। वे अपनी बहू नीलम सिंह को ब्लॉक प्रमुख बनाना चाहते थे। दूसरी तरफ, सपा नेता ललई यादव और बाहुबली धनंजय सिंह उस अविश्वास प्रस्ताव को रोकने के लिए एक साथ थे। इसी के चलते दोनों गुटों में अंधाधुंध फायरिंग हुई। हरिवंश ने धनंजय पर जानलेवा हमले का केस किया। लेकिन, 2023 में आपसी समझौते के तहत कोर्ट में मुकर गए और धनंजय बरी हो गए। अब माना जा रहा है कि जौनपुर में बृजेश सिंह की एंट्री के जरिए धनंजय सिंह के प्रभाव को चुनौती देने की कोशिश हो रही है। धनंजय को चुनौती देना आसान नहीं जौनपुर की राजनीति लंबे समय से जमींदारी, ठेकेदारी और बाहुबल के इर्द-गिर्द घूमती रही है। 90 के दशक से लेकर आज तक जिले के पीडब्ल्यूडी, रेलवे ठेकों, खनन और स्थानीय व्यापारिक सिंडिकेट्स पर ठाकुर नेताओं का सीधा कंट्रोल रहा है। आर्थिक रूप से मजबूत होने के कारण ये नेता चुनावी फंडिंग और मैनेजमेंट में पूरे जिले को प्रभावित करते हैं। यहां धनंजय सिंह ठाकुर राजनीति का सबसे बड़ा चेहरा हैं। रारी (अब मल्हनी) विधानसभा सीट उनका मजबूत किला रही है। धनंजय सिंह ने अपनी राजनीति को सिर्फ ‘ठाकुरवाद’ तक सीमित नहीं रखा, बल्कि ‘रॉबिनहुड’ वाली छवि बनाकर ब्राह्मण, यादव और दलितों के एक बड़े वर्ग में भी अपनी पैठ बनाई। यही वजह है कि धनंजय सिंह चाहे जेल में हों, निर्दलीय लड़ें या उनकी पत्नी श्रीकला चुनाव मैदान में हों, पूरा जिला उनकी राजनीतिक चालों पर नजर रखता है। ऐसे में अगर बृजेश सिंह अपने बेटे को मैदान में उतारते हैं, तो मुकाबला सिर्फ चुनावी नहीं, बल्कि दो बाहुबली परिवारों की प्रतिष्ठा की लड़ाई बन सकता है। दोनों खेमे भाजपा के करीबी दिलचस्प बात यह है कि दोनों पक्ष खुद को भाजपा के करीब मानते हैं। बृजेश सिंह का परिवार लंबे समय से भाजपा समर्थक माना जाता है। वहीं, धनंजय सिंह भाजपा नेता बृजभूषण शरण सिंह से नजदीकियां बढ़ा रहे हैं। कुछ दिनों से दोनों नेता एक साथ दिख रहे हैं। 11 मई को धनंजय सिंह की पत्नी श्रीकला रेड्डी ने सीएम योगी से मुलाकात की थी। ऐसे में जौनपुर की सियासत आने वाले दिनों में और दिलचस्प होने के संकेत दे रही है। ————————- यह खबर भी पढ़ें… कुश्ती संघ के मुख्य टूर्नामेंट गोंडा में ही क्यों?, 1 हजार पहलवानों के रहने की व्यवस्था; बृजभूषण अध्यक्ष नहीं लेकिन दबदबा बरकरार यूपी के गोंडा में सीनियर नेशनल रैंकिंग कुश्ती प्रतियोगिता चल रही है। 2018 से अबतक ये प्रतियोगिता सिर्फ 3 बार हुई है और तीनों ही बार गोंडा में हुई। अब सवाल उठता है कि भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) ये प्रतियोगिता गोंडा में ही क्यों करवाता है? पढ़िए पूरी खबर…