धुरंधर में अतीक ISI एजेंट..सच्चाई में क्या?:उमेश पाल हत्याकांड की चार्जशीट में पाकिस्तान कनेक्शन; नकली नोटों में कभी अरेस्टिंग नहीं

‘धुरंधरः द रिवेंज’ फिल्म में 7-8 मिनट अतीफ अहमद नाम का कैरेक्टर दिखता है। रील का अतीफ अहमद, रियल लाइफ में यूपी के प्रयागराज का माफिया अतीक अहमद से मिलता है। फिल्म में अतीफ अहमद का मर्डर ठीक वैसे ही दिखाया गया है, जैसे प्रयागराज में अतीक और उसके भाई अशरफ का हुआ था। फिल्म में ऐसा दिखाया कि ये सब राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजय सान्याल की प्लानिंग से हुआ। जबकि, यूपी में माना जाता है कि सीएम योगी के सख्त रवैए की वजह से माफिया का आतंक खत्म होता चला गया। फिल्म में अतीफ अहमद का कनेक्शन पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से दिखाया गया है। हथियारों का बड़ा सप्लायर, नकली नोट खपाने वाला, यूपी में किसकी सरकार बनेगी, इसमें हस्तक्षेप रखने वाला। शायद यही वजह है कि इस फिल्म को कांग्रेस और सपा के नेता प्रोपेगेंडा बता रहे हैं। सपा के पूर्व सांसद डॉ. एसटी हसन कहते हैं- अतीक अहमद के मामले में अब तक किसी भारतीय जांच एजेंसी ने ऐसा कोई खुलासा नहीं किया। विवाद खड़ा कर सिर्फ फिल्म चलाने की कोशिश की जा रही है। सियासी बयानों के बीच नया विवाद पैदा हो गया है। हकीकत क्या है? क्या अतीक का ISI से कनेक्शन था? क्या वो नेपाल के रास्ते नकली नोट यूपी में खपा रहा था? फिल्म में क्या दिखाया, हकीकत में क्या था? आज संडे बिग स्टोरी में समझते हैं… फैक्ट 1. पाकिस्तान की AK-47 इंडिया में सप्लाई करने वाला अतीफ
फिल्म: इसमें शुरुआत में दिखाया गया है कि जसकीरत सिंह रांगी बदला लेने के लिए अपने दोस्त के साथ अतीफ अहमद के पास AK-47 खरीदने आता है। अतीफ के पास ये हथियार पाकिस्तान की एजेंसी ISI के इशारे पर बलूच माफिया सप्लाई करते हुए दिखाए गए हैं। हकीकत: हथियारों की तस्करी के मामले में माफिया अतीक की कहानी थोड़ा अलग नजर आती है। अतीक की हत्या 15 अप्रैल, 2023 को हुई थी। इसके ठीक 15 दिन पहले उमेश पाल हत्याकांड में प्रयागराज पुलिस ने चार्जशीट लगाई थी। उसमें अतीक और उसके भाई अशरफ को हथियारों की तस्करी का आरोपी बनाया गया था। चार्जशीट के मुताबिक, अतीक ने अपने बयान में कहा था कि उसके पास हथियारों की कोई कमी नहीं है। इसमें यह भी जिक्र है कि पाकिस्तान की ISI और लश्कर-ए-तैयबा से उसके कनेक्शन हैं। ISI के एजेंट से फोन पर बात होती थी। पाकिस्तान से हथियार ड्रोन के जरिए पंजाब में गिराए जाते थे। फिर वहां से लोकल एजेंट के जरिए हथियार अतीक गैंग के पास आते थे। जम्मू-कश्मीर में मौजूद आतंकियों को भी इसी खेप से हथियार मिलते थे। वहां के दशरथगढ़ से भी हथियार मिलते थे। अतीक ने जांच एजेंसी से यह भी कहा था कि अगर उन्हें इन जगहों पर लेकर चला जाए तो वह हथियार, गोला-बारूद बरामद करवाने में मदद कर सकता है। पुलिस ने इसी बयान के आधार उसके ISI से लिंक होने को लेकर एक FIR लिखी थी। इसमें लिखा गया था कि ISI ने अतीक अहमद को AK-47 हथियार, .45 बोर की पिस्टल, स्टेनगन और RDX सप्लाई किया था। उमेश पाल की हत्या में .45 पिस्टल का इस्तेमाल हुआ था। अतीक के पास से 58 कारतूस मिले थे। ये सभी पाकिस्तान मेड 9 एमएम के कारतूस थे। फैक्ट 2. जेल से चलता था अतीक का साम्राज्य
फिल्म: इसमें दिखाया गया है कि अतीफ जेल के बरामदे में खाना खा रहा है। एक कॉन्स्टेबल उसको खाना परोस रहा। इस बीच ISI चीफ की कॉल उसके मोबाइल पर आती है। वह नेपाल के रास्ते हथियार और चरस सप्लाई की बात करता है। अतीफ कहता है कि आज उसका मेडिकल है, डॉक्टर से सेटिंग हो गई है। ऐसा दिखाया गया कि पूरे नेटवर्क की हैंडलिंग अतीफ जेल के अंदर से कर रहा था। हकीकत: ये फैक्ट सही लगता है। 2007 में राजू पाल की हत्या के बाद 2023 तक उसका ज्यादातर वक्त प्रयागराज की नैनी जेल, देवरिया, बांदा और चित्रकूट जेल में ही बीता। अतीक अहमद 3 अप्रैल, 2013 को देवरिया जेल में शिफ्ट किया गया था। अतीक के गुर्गे लखनऊ के आलमबाग के रियल स्टेट कारोबारी मोहित जायसवाल का अपहरण करके उसके पास देवरिया जेल पहुंचे थे। यहां अतीक ने मोहित को बहुत पीटा था। इसमें मोहित के दाएं हाथ की उंगलियों की हड्डियां टूट गई थीं। उनकी एमजे इंफ्रा के नाम से जो पांच कंपनियां थीं, उसे फारुख और जकी के नाम करवा दिया था। यह मामला इतना हाईलाइट हुआ था कि 4 दिन बाद 30 दिसंबर, 2018 को अतीक अहमद को बरेली जेल भेज दिया गया था। 2019 में कोर्ट ने अतीक को गुजरात की साबरमती जेल में भेज दिया था। फैक्ट 3. पाकिस्तान के नकली नोट नेपाल के रास्ते यूपी में खपा रहा
फिल्म: दिखाया है कि दाऊद इब्राहिम 60 हजार करोड़ रुपए के नकली नोट भारत में खपाने की तैयारी करता है। यह जानकारी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजय सान्याल को मिल जाती है। इसके बाद 8 नवंबर, 2016 की रात 8 बजे पीएम नरेंद्र मोदी 500 और 1000 रुपए के नोट बंद करने का ऐलान करते हैं। इसको ISI चीफ पाकिस्तान में टीवी पर देखता है। यूपी में अतीफ अहमद से टेलीफोन पर बात होती है। अतीफ कहता है- भट्ठा बैठा दिया इन हरा*** ने। दाऊद भाई से बोल दीजिए कि अब इनको रोकना नामुमकिन है। अगर रोकना है तो बहुत बड़ा करना पड़ेगा। चाय वाला घुस के फट गया है हमारे अंदर। हकीकत: माफिया अतीक अहमद पर पाकिस्तान से फर्जी नोटों को यूपी लाकर चलाने का कोई मुकदमा दर्ज नहीं हुआ था। अतीक अहमद पर हवाला कारोबार के जरिए करोड़ों लेन-देन के मुकदमें जरूर दर्ज हुए थे। लोगों से वसूली करना और फिर उन पैसों को शेल कंपनियों में लगाकर विदेश भेजना। फिर दूसरे रास्ते से वापस लाने के काम में अतीक अहमद की मिलीभगत रही है। फैक्ट 4. यूपी की सरकार में दखलअंदाजी रखता था अतीक
फिल्म: 500 और 1000 के नोट बंद होने के सीन के बाद ISI चीफ और माफिया की बातचीत होती है। अतीफ कहता है- यूपी गया हमारे हाथ से, हार जाएंगे इलेक्शन। अब अल्लाह ही मालिक है…। इसको देखकर लगता है कि यूपी में कौन मुख्यमंत्री होगा? इसमें अतीक का हस्तक्षेप था। हकीकत: अतीक 1989 में पहली बार इलाहाबाद पश्चिम सीट से विधायक बना था। विधायक के तौर पर उसका दबदबा था। 1989, 1991, 1993, 1996, 2002 के चुनाव भी उसने जीते थे। 2004 में वो सपा के टिकट पर फूलपुर सीट से सांसद बना। राजू पाल हत्याकांड में जेल जाने के बाद भी उसने राजनीति जारी रखी थी। लेकिन फिल्म से जुड़े 2 तरह के फैक्ट कभी भी सामने नहीं आए। पहला- उसके सियासी करियर के पीछे नकली नोटों का कारोबार था। दूसरा- यूपी की सत्ता में बड़े चेहरों को अतीक अहमद ही सेट करता था। फिल्म को प्रोपगेंडा क्यों बताया जा रहा… पूर्व IPS बोले- जो हिंसक, वह तस्कर भी हो सकता है
हमने इस फिल्म और अतीक के जीवन को लेकर पूर्व IPS लालजी शुक्ला से बात की। प्रयागराज में पोस्टिंग के दौरान लालजी ने अतीक से जुड़े कई मामलों की जांच की थी। नकली नोट की तस्करी को लेकर लालजी कहते हैं- इसमें कोई दो राय नहीं कि पाकिस्तान से नकली नोट भारत में आते हैं। इसके लिए बांग्लादेश और नेपाल सबसे आसान रास्ते हैं। जब मेरी तैनाती बहराइच में थी, हमने नेपाल के रास्ते आ रही नकली नोटों की कई बार खेप पकड़ी थी। हालांकि, कभी भी डायरेक्ट अतीक अहमद का नाम नहीं आया। हथियारों को लेकर लालजी कहते हैं- अतीक इसका बहुत शौकीन था। हथियार से ही तो वह अपनी ताकत स्थापित करता था। उसके पास से कई बार हथियार पकड़े गए थे। हमने एक बार उसके पास से .30 पिस्टल पकड़ी थी। यह प्रतापगढ़ के किसी व्यक्ति के नाम लाइसेंस पर थी। जहां तक फिल्म की बात है, वह वास्तविकता से प्रेरित होती है, लेकिन वास्तविक नहीं होती। बाकी जो हिंसा कर सकता है। लोगों की जमीनों पर कब्जा कर सकता है। धर्म के खिलाफ काम कर सकता है। वह हथियार और नकली नोट की तस्करी भी कर सकता है, क्योंकि कर तो यह सब पैसे के लिए ही रहा है। अतीक का पाकिस्तान कनेक्शन सामने क्यों नहीं आया?
फिल्म के तमाम फैक्ट पर सीनियर जर्नलिस्ट और राइटर मनोज राजन त्रिपाठी कहते हैं- फिल्म जब शुरू होती है, तभी डिस्क्लेमर आता है कि फिल्म का किसी जीवित-मृत व्यक्ति से कोई संबंध नहीं है। अगर ऐसा होता है, तो यह एक संयोग है। ठीक इसी तरह से धुरंधर फिल्म में जो कुछ दिखाया गया है, वह पूरी तरह से सही नहीं है। मनोज कहते हैं- अतीक अहमद सांसद और विधायक रहा। पौने दो सौ से ज्यादा मुकदमे दर्ज हुए, लेकिन कोई एक भी मुकदमा पाकिस्तान से हथियारों की तस्करी से जुड़ा नहीं रहा। जांच एजेंसियां तो काफी वक्त तक अतीक के पीछे लगी रहीं, कहीं न कहीं से ऐसा पता चलता है। वह आगे कहते हैं- फिर इस फिल्म में जो दिखाया गया, वह 2016 के आसपास का दिखाया गया है। इसके बाद 7 साल तक अतीक जिंदा रहा। मरने से कुछ वक्त पहले पुलिस अपनी चार्जशीट में अतीक के पाकिस्तान से हथियार लाने की बात लिखती है। इस फिल्म में अतीक के कई अपराधों की चर्चा नहीं है। उसमें मदरसा कांड था, जहां बच्चियों के साथ रेप हुआ। राजू पाल, उमेश पाल हत्याकांड की भी कोई चर्चा नहीं हुई। इसलिए इसे फिल्म की ही तरह समझा जाए। ————————- यग खबर भी पढ़िए- धुरंधर-2 रिव्यू; रणवीर की फिर दमदार परफॉर्मेंस, नोटबंदी और राजनीतिक कड़ियों से जुड़ी कहानी रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ यानी धुरंधर 2 पहले पार्ट की ब्लॉकबस्टर सफलता के बाद बड़े स्केल पर लौटी है। इस बार फिल्म सिर्फ गैंगवार या बदले की कहानी नहीं रहती, बल्कि नोटबंदी से लेकर देश की कई बड़ी घटनाओं को जोड़ते हुए एक बड़ा नैरेटिव पेश करती है। उम्मीदें जितनी ऊंची थीं, फिल्म कई जगह उन्हें पूरा करती है, तो कुछ जगह थोड़ा चूक भी जाती है। पढ़ें पूरी खबर