2026 की दस्तक के साथ प्रदेश ही नहीं, देश की निगाहें यूपी में 2027 पर होने वाले विधानसभा चुनाव पर रहेंगी। 2027 की परीक्षा से पहले यूपी में भाजपा, सपा, अपना दल (एस), रालोद, सुभासपा, निषाद पार्टी, कांग्रेस, जनसत्ता दल लोकतांत्रिक और बसपा को तीन-तीन बड़े चुनावों से गुजरना होगा। इसी साल सभी पार्टियां दल-बदल से गुजरेंगी। साल की चौमाही में पंचायत चुनाव की परीक्षा में अपना दमखम दिखाना होगा। उसके बाद दीपावली से पहले राज्यसभा चुनाव में अपनी राजनीतिक ताकत का एहसास कराना होगा। फिर साल के आखिर में विधान परिषद चुनाव में भी विद्यार्थियों और युवाओं के बीच अपना वर्चस्व साबित करना होगा। राजनीतिक दलों ने पंचायत चुनाव, विधान परिषद चुनाव और विधानसभा चुनाव की तैयारियां समानांतर शुरू कर दी है। पढ़िए, 2026 में पार्टियों के लिए क्या चैलेंज रहेगा? सरकार और संगठन के लिए कैसा रहेगा? पार्टियों और उनके टॉप लीडर्स के लिए ज्योतिषि के हिसाब से कैसा रहने वाला है नया साल? सरकार और भाजपा के लिए कैसा रहेगा… 1- चुनावी बजट पेश करेगी सरकार
योगी सरकार 2.0 का 5वां बजट फरवरी में पेश होगा। संसदीय कार्य एवं वित्तमंत्री सुरेश खन्ना मार्च के पहले सप्ताह में विधानसभा में बजट पेश करेंगे। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि योगी सरकार का बजट चुनावी बजट होगा। इसमें महिलाओं, किसानों, युवाओं, पिछड़ों और दलितों को साधने के लिए सरकार लोक-लुभावन घोषणाएं कर सकती है। बजट का असर पंचायत से लेकर विधानसभा चुनाव तक होगा। 2- योगी मंत्रिमंडल का विस्तार होगा
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद योगी सरकार 2.0 का दूसरा मंत्रिमंडल विस्तार होगा। जाट समाज से एक मंत्री बनाया जाना है। ओबीसी और दलित चेहरों को भी जगह मिल सकती है। वहीं, कुछ मंत्रियों को हटाकर संगठन के कामकाज में लगाया जा सकता है। 3- भाजपा संगठन की नई टीम का गठन
भाजपा के नवनिर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी अपनी नई प्रदेश टीम का गठन करेंगे। प्रदेश की मौजूदा टीम में से कुछ पदाधिकारियों को बाहर किया जाएगा। कुछ नए चेहरों या क्षेत्रीय पदाधिकारियों को प्रदेश टीम में जगह मिलेगी। पार्टी के युवा मोर्चा, महिला मोर्चा, एससी मोर्चा, एसटी मोर्चा, ओबीसी मोर्चा, अल्पसंख्यक मोर्चा और किसान मोर्चा के साथ सभी 6 क्षेत्रीय टीमों का गठन किया जाएगा। नए प्रदेश अध्यक्ष नई टीम में आगामी पंचायत चुनाव के मद्देनजर जातीय समीकरण और क्षेत्रीय संतुलन बनाने की कोशिश करेंगे। संसद में शून्य हो जाएगी बसपा
बहुजन समाज पार्टी स्थापना के बाद नवंबर, 2026 में पहली बार ऐसा होगा कि संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा में सदस्य संख्या शून्य हो जाएगी। लोकसभा में बसपा का एक भी सदस्य नहीं है। राज्यसभा में एकमात्र सदस्य रामजी गौतम का कार्यकाल भी 25 नवंबर को समाप्त हो जाएगा। यूपी में बसपा के एकमात्र विधायक उमाशंकर सिंह हैं, जबकि राज्यसभा के लिए कम से कम 35 से 40 विधायक होना जरूरी है। एक विधायक के बूते बसपा प्रत्याशी नामांकन भी दाखिल नहीं कर सकते। ऐसे में अगर बसपा को पर्दे के पीछे से भाजपा का सहारा नहीं मिला तो राज्यसभा चुनाव में उसके प्रत्याशी नामांकन भी दाखिल नहीं कर सकेंगे। ऐसे में राज्यसभा में भी बसपा शून्य हो जाएगी। यहां बता दें कि विधान परिषद में भी बसपा का एक भी सदस्य नहीं है। अगर ऐसा होता है, तो यह बसपा सुप्रीमो मायावती के राजनीतिक करियर का सबसे बुरा दौर होगा। 3 चुनाव कौन-कौन से… 1- पंचायत चुनाव में होगा 2027 का पूर्वाभ्यास
प्रदेश में अप्रैल-मई में पंचायत चुनाव होने हैं। पंचायतीराज मंत्री ओमप्रकाश राजभर साफ कर चुके हैं कि पंचायत चुनाव समय पर कराए जाएंगे। वर्तमान में प्रदेश की 75 में से 67 जिलों में भाजपा के जिला पंचायत अध्यक्ष हैं। वहीं, 826 में से 476 से अधिक ब्लॉक में भाजपा के ब्लॉक प्रमुख हैं। भाजपा, सपा, बसपा, कांग्रेस, रालोद, अपना दल (एस), सुभासपा, जनसत्ता दल लोकतांत्रिक और निषाद पार्टी ने पंचायत चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि पंचायत चुनाव राजनीतिक दलों के लिए 2027 का पूर्वाभ्यास होंगे। गांवों में जमीनी स्तर पर किस राजनीतिक दल की स्थिति मजबूत है, इसका आकलन पंचायत चुनाव से होगा। ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में तो सरकार की ताकत काम आती है। इसीलिए दोनों के चुनाव परिणाम सत्तारूढ़ दल के पक्ष में होते हैं। लेकिन, ग्राम प्रधान, बीडीसी सदस्य, जिला पंचायत सदस्य के चुनाव परिणाम से राजनीतिक हवा का पता चलता है कि जमीन पर किस दल का माहौल है। इनके चुनाव परिणाम जिस दल के पक्ष में होंगे, उसी दल का पलड़ा भारी माना जाएगा। 2- अक्टूबर-नवंबर में होंगे राज्यसभा चुनाव
अक्टूबर-नवंबर में राज्यसभा में यूपी कोटे की 11 सीटें खाली हो रही हैं। इनमें केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह, डॉ. दिनेश शर्मा, महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष गीता शाक्य, सीमा द्विवेदी, नीरज शेखर, पूर्व डीजीपी बृजलाल और रामजीलाल सुमन शामिल हैं। इनके अलावा सपा के वरिष्ठ राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव भी शामिल हैं। विधानसभा में एनडीए की सदस्य संख्या 291 है। तीन असंबद्ध विधायक भी भाजपा के साथ हैं। जनसत्ता दल लोकतांत्रिक का भी भाजपा को समर्थन रहता है। ऐसे में एनडीए के वोटों की संख्या 296 तक रहेगी। वहीं, सपा के 103 विधायक हैं। राज्यसभा चुनाव में भाजपा को 8 और सपा की तीन सीट मिलना तय है। लेकिन, 2024 की तर्ज पर भाजपा 9वीं सीट के लिए जद्दोजहद करेगी। सपा को तीसरी सीट बचाने के लिए संघर्ष करना होगा। 3- 2027 का रुख बताएंगे विधान परिषद चुनाव
विधानसभा चुनाव से ठीक पहले दिसंबर, 2026 में विधान परिषद की शिक्षक स्नातक क्षेत्र की 11 सीटों पर चुनाव होगा। इनमें से अभी 6 सीटें भाजपा के पास हैं, जबकि 3 सीटों पर सपा का कब्जा है। एक सीट पर शिक्षक दल गैरराजनीतिक और एक सीट पर निर्दलीय काबिज है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि विधान परिषद चुनाव से ठीक पहले एमएलसी चुनाव होना है। चुनाव में शिक्षक और स्नातक वर्ग के मतदाता मतदान करेंगे। यही मतदाता हैं, जो सोच समझकर और मौके की नजाकत को देखते हुए मतदान करते हैं। लिहाजा इन चुनाव के परिणाम बताएंगे कि 2027 विधानसभा चुनाव में हवा का रुख किस ओर है। ऐसे में भाजपा ने मौजूदा 6 सीटों पर कब्जा बरकरार रखने के साथ सपा के कब्जे वाली तीन सीटों पर भी कब्जा जमाने के लिए रणनीति बनाई है। वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक अनिल कुमार सिंह कहते हैं- अभी जिस तरह की स्थिति दिख रही है, उसमें 2026 में पूरे साल भर राजनीतिक सरगर्मी रहेगी। पंचायत चुनाव से लेकर विधान परिषद चुनाव तक भाजपा और सपा के बीच ही सीधा मुकाबला होगा। लेकिन, सपा को एक्टिव होना होगा। सपा की लड़ाई सोशल मीडिया पर ही चल रही है। पूर्व सूचना आयुक्त एवं वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन शाही का कहना है- 2027 में पंचायत चुनाव में तो सभी दल अलग-अलग लड़ेंगे। लेकिन, पंचायत चुनाव से माहौल बनना शुरू हो जाएगा। राज्यसभा चुनाव से सीधा जनता का जुड़ाव नहीं होगा, लेकिन विधान परिषद चुनाव में रुझान सामने आएंगे। देखने की बात यही होगी कि कांग्रेस और सपा साथ मिलकर लड़ते हैं या इनके रास्ते जुदा होते हैं। अगर सपा और कांग्रेस का गठबंधन होता है, तो भी सपा गठबंधन बनाम भाजपा गठबंधन ही चुनाव होगा। दल-बदल का जमकर दौर चलेगा
विधानसभा चुनाव से पहले माहौल बनाने के लिए भाजपा की ओर से सदस्यता अभियान शुरू किया जाएगा। इसमें सपा, बसपा और कांग्रेस के नेताओं को तोड़कर भाजपा में शामिल कराया जाएगा। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के सामने 2027 की चुनौती है। ऐसे में चौधरी विधानसभा चुनाव से पहले सपा से कुछ कुर्मी नेताओं समेत अन्य जातियों के नेताओं और विधायकों को भी तोड़कर भाजपा में शामिल कराने का हरसंभव प्रयास करेंगे। उधर, सपा की रणनीति है कि भाजपा के कुछ मौजूदा विधायकों के साथ पूर्व विधायक, पूर्व सांसद सहित अन्य नेताओं को तोड़कर साइकिल की सवारी कराई जाए। खासतौर पर जिन विधायकों का टिकट कटने की आशंका होगी, उन्हें पहले ही सपा में शामिल कराया जाए। जानकार मानते हैं कि प्रदेश सरकार को घेरने के लिए ओबीसी और अगड़ी जातियों के कुछ नेता भी भाजपा को छोड़कर सपा का दामन थाम सकते हैं। ज्योतिषियों से जानिए…पार्टियों के लिए 2026 कैसा होगा खास भाजपा के लिए बढ़िया रहेगा साल
गोरखपुर के ज्योतिष नरेंद्र उपाध्याय बताते हैं- 2026 में जून के बाद यूपी की राजनीति में गेरुआ रंग और ज्यादा प्रभावी होता दिखाई देगा। उस समय बृहस्पति उच्च राशि में प्रवेश करेगा, जिसे विस्तार, जनसमर्थन और स्थायित्व का ग्रह माना जाता है। बृहस्पति का उच्च होना आमतौर पर विचारधारा के प्रसार और संगठन की पकड़ मजबूत होने का संकेत देता है। गेरुआ रंग से जुड़ी यह पार्टी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के साथ राजनीति करती है। ऐसे में बृहस्पति की मजबूत स्थिति उसके आधार को और व्यापक बनाने का योग बनाती है। खासकर धर्म, आस्था और सांस्कृतिक मुद्दों के जरिए लोगों को जोड़ने का काम और तेज हो सकता है। जून- 2026 के बाद पार्टी की पहुंच नए वर्गों तक बढ़ने, संगठन के विस्तार और जनसमर्थन में इजाफे के संकेत मिलते हैं। कुल मिलाकर एस्ट्रोलॉजी के हिसाब से यह समय गेरुआ राजनीति के लिए मजबूती और विस्तार का माना जा सकता है। रिसर्चर एस्ट्रोलॉजर मोहम्मद जुनैद के अनुसार, जून तक भाजपा में बड़े संगठनात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इस दौरान पार्टी कुछ आंतरिक चुनौतियों और दबावों के दौर से गुजर सकती है। जिससे अस्थिरता की स्थिति बन सकती है। सपा के लिए 2026 संघर्ष और संतुलन का साल
ज्योतिषाचार्य नरेंद्र उपाध्याय के मुताबिक, 2026 समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के लिए मिला-जुला साल रहेगा। सपा के लिए यह साल औसत संकेत देता है। जनाधार बना रहेगा, लेकिन बड़ा राजनीतिक उछाल या निर्णायक बढ़त के योग कमजोर दिखते हैं। संगठन और रणनीति पर ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी। लखनऊ के एस्ट्रोलॉजर मोहम्मद जुनैद के अनुसार, 2 जून के बाद समाजवादी पार्टी में अखिलेश यादव की लोकप्रियता बढ़ने के संकेत मिलते हैं। जनसमर्थन और राजनीतिक स्वीकार्यता में इजाफा हो सकता है। बसपा की स्थिति में सुधार होगा
बसपा के लिए 2026 तुलनात्मक रूप से बेहतर रहने की संभावना है। पार्टी की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार के संकेत हैं। खासकर मायावती का राजनीतिक कद बढ़ता हुआ दिखता है। उनका नेतृत्व फिर से चर्चा और प्रासंगिकता में आ सकता है। जिससे पार्टी के कोर वोट बैंक में मजबूती आने के योग बनते हैं। मोहम्मद जुनैद बताते हैं कि बसपा में मायावती का राजनीतिक कद मजबूत होता दिखाई देगा। संगठन और नेतृत्व दोनों स्तर पर उनकी स्थिति सशक्त होने के योग बनते हैं। कांग्रेस पार्टी में बड़े स्तर पर परिवर्तन के योग
रिसर्चर एस्ट्रोलॉजर मोहम्मद जुनैद के अनुसार, साल 2026 में कांग्रेस के संगठन में बड़े और मूलभूत बदलाव देखने को मिल सकते हैं। ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति ऐसे संकेत दे रही कि पार्टी के ढांचे, नेतृत्व और कार्यशैली में व्यापक परिवर्तन संभव हैं। अब जानिए, नेताओं के लिए कैसा रहेगा साल
प्रयागराज ग्रह नक्षत्र ज्योतिष शोध संस्थान के निदेशक ज्योतिषाचार्य आशुतोष वार्ष्णेय के अनुसार, 2026 में बृहस्पति का मिथुन, कर्क और सिंह, तीन राशियों में गोचर बहुत लोगों का भाग्य बदल देगा। 12 राशियों पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा। लखनऊ के ज्योतिष गुरु शिव कुमार ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय और चर्चित चेहरों को लेकर बताया है कि साल 2026 उनके लिए कैसा रहने वाला है? किन नेताओं के लिए यह साल अवसरों का है तो किनके लिए चुनौतियों भरा? भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के लिए यह साल काफी सकारात्मक संकेत देता है। साल के शुरुआती दौर में कुछ चुनौतियां और दबाव जरूर सामने आएंगे। लेकिन वे हालात को समझदारी और संगठनात्मक कौशल से संभालने में सफल रहेंगे। पार्टी के भीतर उनके कामकाज, निर्णय क्षमता और नेतृत्व को लेकर सराहना बढ़ेगी। संगठन को मजबूत करने और जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से निभाने के अवसर मिलेंगे। कुल मिलाकर यह साल उनके राजनीतिक कद और पार्टी में भरोसे को और मजबूत करने वाला साबित हो सकता है। तुला लग्न और वृश्चिक राशि में जन्मे आजम खान की ग्रह दशा के अनुसार, जून 2026 के बाद ग्रह दशा में कुछ सुधार होगा। वर्तमान में आजम खान की जन्म राशि से देवगुरु बृहस्पति का अष्टम भाव में संचार जून तक के लिए संकटों की सूचना दे रहा है। लेकिन, पूरे साल की बात की जाए तो आजम खान के लिए 2026 अनुकूल नहीं दिखता। साल की शुरुआत से ही शनि और राहु का प्रभाव उनके लिए दबाव और उलझनों को बढ़ाने वाला रहेगा। शनि की कठोर दृष्टि कानूनी मामलों में देरी और तनाव का संकेत देती है। अप्रैल, 2026 के बाद बृहस्पति का आंशिक सहारा मिलने से लीगल मामलों में कुछ राहत के योग बनते हैं। कोर्ट-कचहरी से जुड़ी स्थितियों में थोड़ी नरमी आ सकती है। लेकिन समस्याओं का पूरी तरह खत्म होना इस साल मुश्किल दिखता है। मामला लंबा खिंच सकता है। राजनीतिक दृष्टि से 2026 ठहराव का साल रहेगा। ग्रहों की स्थिति किसी बड़ी पद-प्राप्ति, संगठन में उन्नति या प्रभाव बढ़ने के संकेत नहीं देती। पार्टी के भीतर भी उनकी भूमिका सीमित रह सकती है। स्वास्थ्य के मामले में भी सतर्कता जरूरी रहेगी। कर्क लग्न और मकर राशि में जन्मी मायावती के सितारे 2026 के मध्य में जागृत होंगे और 2027 के अंत में सुखद परिणाम देंगे। मायावती के लिए यह साल काफी सकारात्मक रहने वाला है। ग्रहों की स्थिति संकेत देती है कि यह साल उनके राजनीति में फिर से सक्रिय होने और पार्टी को दोबारा मजबूती देने का है। इस साल मायावती संगठन पर विशेष फोकस करती नजर आएंगी। पार्टी को जमीनी स्तर पर फिर से खड़ा करने, कैडर को सक्रिय करने और पुराने समर्थक वर्ग को दोबारा जोड़ने में उनकी भूमिका अहम रहेगी। खासतौर पर अपने कोर समुदाय को एकजुट करने में उन्हें सफलता मिलने के योग बनते हैं। बृहस्पति और शनि का संतुलित प्रभाव उनके नेतृत्व को स्थायित्व और गंभीरता देगा। इससे उनका राजनीतिक कद बढ़ेगा। बसपा एक बार फिर मजबूत विकल्प के रूप में उभरती दिखाई दे सकती है। चंद्रशेखर आजाद के लिए 2026 सामान्य से अच्छा रहने के संकेत हैं। यह साल उनके लिए संघर्ष से ज्यादा निर्माण और विस्तार का दिखाई देता है। ग्रहों की स्थिति बताती है कि वे इस साल पार्टी संगठन को मजबूत करने, जमीनी कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और अपनी राजनीतिक पकड़ बढ़ाने पर फोकस करेंगे। खासतौर पर युवाओं और अपने समर्थक वर्ग के बीच उनकी स्वीकार्यता में बढ़ोतरी के योग बनते हैं। बृहस्पति का सहयोग उनके राजनीतिक कद को बढ़ाने वाला रहेगा। इससे उन्हें नई संभावनाएं मिल सकती हैं। किसी बड़ी या समान सोच वाली पार्टी के साथ गठबंधन (Alliance) के संकेत भी बनते हैं। यह गठजोड़ उनके लिए राजनीतिक रूप से फायदेमंद साबित हो सकता है। शनि का प्रभाव मेहनत और अनुशासन की मांग करेगा। कुछ चुनौतियां जरूर आएंगी, लेकिन वे धैर्य और रणनीति से उन्हें संभालते नजर आएंगे। इसका नतीजा यह होगा कि साल के अंत तक उनका नेतृत्व और ज्यादा मजबूत होकर उभरेगा। आकाश आनंद के लिए 2026 सीख, जिम्मेदारी और उभार का साल दिखाई देता है। ग्रहों की स्थिति बताती है कि इस साल उनकी भूमिका पार्टी में और मजबूत होगी। बृहस्पति का प्रभाव उन्हें मार्गदर्शन, अनुभव और राजनीतिक समझ देगा। वरिष्ठ नेतृत्व का साथ मिलेगा और संगठनात्मक जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं। इससे उनका राजनीतिक कद धीरे-धीरे मजबूत होता दिखेगा। शनि मेहनत और अनुशासन की परीक्षा लेगा। फैसलों में सावधानी रखनी होगी और जल्दबाजी से बचना जरूरी रहेगा। हालांकि, यही शनि उन्हें परिपक्व नेतृत्व की ओर ले जाएगा। 2026 में आकाश आनंद पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने, युवाओं से जुड़ने और संगठन के भीतर अपनी पकड़ बनाने में सक्रिय नजर आ सकते हैं। सार्वजनिक छवि में भी सुधार और पहचान बढ़ने के संकेत हैं। नोट- यह जनरल प्रिडिक्शन है, जो ज्योतिषीय गणनाओं और ग्रहों की सामान्य स्थिति पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल संभावित संकेत बताना है, न कि किसी निश्चित परिणाम का दावा करना। ————————— ये खबर भी पढ़ें… यूपी में ब्राह्मण MLA की नाराजगी से BJP में खलबली, योगी से मिले पंकज चौधरी यूपी में ब्राह्मण विधायकों की नाराजगी से भाजपा में खलबली मच गई है। टॉप लीडरशिप ने डैमेज कंट्रोल करने का बड़ा फैसला किया है। सरकार, संघ और संगठन से नाराज चल रहे ब्राह्मण विधायकों को मनाने की जिम्मेदारी पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रमापति राम त्रिपाठी को सौंपी गई है। मंगलवार को रमापति राम त्रिपाठी ने देवरिया में भाजपा विधायक शलभ मणि त्रिपाठी से मुलाकात की। शलभ मणि 23 दिसंबर को लखनऊ में हुई बैठक में शामिल हुए थे। पढ़िए पूरी खबर…
योगी सरकार 2.0 का 5वां बजट फरवरी में पेश होगा। संसदीय कार्य एवं वित्तमंत्री सुरेश खन्ना मार्च के पहले सप्ताह में विधानसभा में बजट पेश करेंगे। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि योगी सरकार का बजट चुनावी बजट होगा। इसमें महिलाओं, किसानों, युवाओं, पिछड़ों और दलितों को साधने के लिए सरकार लोक-लुभावन घोषणाएं कर सकती है। बजट का असर पंचायत से लेकर विधानसभा चुनाव तक होगा। 2- योगी मंत्रिमंडल का विस्तार होगा
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद योगी सरकार 2.0 का दूसरा मंत्रिमंडल विस्तार होगा। जाट समाज से एक मंत्री बनाया जाना है। ओबीसी और दलित चेहरों को भी जगह मिल सकती है। वहीं, कुछ मंत्रियों को हटाकर संगठन के कामकाज में लगाया जा सकता है। 3- भाजपा संगठन की नई टीम का गठन
भाजपा के नवनिर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी अपनी नई प्रदेश टीम का गठन करेंगे। प्रदेश की मौजूदा टीम में से कुछ पदाधिकारियों को बाहर किया जाएगा। कुछ नए चेहरों या क्षेत्रीय पदाधिकारियों को प्रदेश टीम में जगह मिलेगी। पार्टी के युवा मोर्चा, महिला मोर्चा, एससी मोर्चा, एसटी मोर्चा, ओबीसी मोर्चा, अल्पसंख्यक मोर्चा और किसान मोर्चा के साथ सभी 6 क्षेत्रीय टीमों का गठन किया जाएगा। नए प्रदेश अध्यक्ष नई टीम में आगामी पंचायत चुनाव के मद्देनजर जातीय समीकरण और क्षेत्रीय संतुलन बनाने की कोशिश करेंगे। संसद में शून्य हो जाएगी बसपा
बहुजन समाज पार्टी स्थापना के बाद नवंबर, 2026 में पहली बार ऐसा होगा कि संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा में सदस्य संख्या शून्य हो जाएगी। लोकसभा में बसपा का एक भी सदस्य नहीं है। राज्यसभा में एकमात्र सदस्य रामजी गौतम का कार्यकाल भी 25 नवंबर को समाप्त हो जाएगा। यूपी में बसपा के एकमात्र विधायक उमाशंकर सिंह हैं, जबकि राज्यसभा के लिए कम से कम 35 से 40 विधायक होना जरूरी है। एक विधायक के बूते बसपा प्रत्याशी नामांकन भी दाखिल नहीं कर सकते। ऐसे में अगर बसपा को पर्दे के पीछे से भाजपा का सहारा नहीं मिला तो राज्यसभा चुनाव में उसके प्रत्याशी नामांकन भी दाखिल नहीं कर सकेंगे। ऐसे में राज्यसभा में भी बसपा शून्य हो जाएगी। यहां बता दें कि विधान परिषद में भी बसपा का एक भी सदस्य नहीं है। अगर ऐसा होता है, तो यह बसपा सुप्रीमो मायावती के राजनीतिक करियर का सबसे बुरा दौर होगा। 3 चुनाव कौन-कौन से… 1- पंचायत चुनाव में होगा 2027 का पूर्वाभ्यास
प्रदेश में अप्रैल-मई में पंचायत चुनाव होने हैं। पंचायतीराज मंत्री ओमप्रकाश राजभर साफ कर चुके हैं कि पंचायत चुनाव समय पर कराए जाएंगे। वर्तमान में प्रदेश की 75 में से 67 जिलों में भाजपा के जिला पंचायत अध्यक्ष हैं। वहीं, 826 में से 476 से अधिक ब्लॉक में भाजपा के ब्लॉक प्रमुख हैं। भाजपा, सपा, बसपा, कांग्रेस, रालोद, अपना दल (एस), सुभासपा, जनसत्ता दल लोकतांत्रिक और निषाद पार्टी ने पंचायत चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि पंचायत चुनाव राजनीतिक दलों के लिए 2027 का पूर्वाभ्यास होंगे। गांवों में जमीनी स्तर पर किस राजनीतिक दल की स्थिति मजबूत है, इसका आकलन पंचायत चुनाव से होगा। ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में तो सरकार की ताकत काम आती है। इसीलिए दोनों के चुनाव परिणाम सत्तारूढ़ दल के पक्ष में होते हैं। लेकिन, ग्राम प्रधान, बीडीसी सदस्य, जिला पंचायत सदस्य के चुनाव परिणाम से राजनीतिक हवा का पता चलता है कि जमीन पर किस दल का माहौल है। इनके चुनाव परिणाम जिस दल के पक्ष में होंगे, उसी दल का पलड़ा भारी माना जाएगा। 2- अक्टूबर-नवंबर में होंगे राज्यसभा चुनाव
अक्टूबर-नवंबर में राज्यसभा में यूपी कोटे की 11 सीटें खाली हो रही हैं। इनमें केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह, डॉ. दिनेश शर्मा, महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष गीता शाक्य, सीमा द्विवेदी, नीरज शेखर, पूर्व डीजीपी बृजलाल और रामजीलाल सुमन शामिल हैं। इनके अलावा सपा के वरिष्ठ राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव भी शामिल हैं। विधानसभा में एनडीए की सदस्य संख्या 291 है। तीन असंबद्ध विधायक भी भाजपा के साथ हैं। जनसत्ता दल लोकतांत्रिक का भी भाजपा को समर्थन रहता है। ऐसे में एनडीए के वोटों की संख्या 296 तक रहेगी। वहीं, सपा के 103 विधायक हैं। राज्यसभा चुनाव में भाजपा को 8 और सपा की तीन सीट मिलना तय है। लेकिन, 2024 की तर्ज पर भाजपा 9वीं सीट के लिए जद्दोजहद करेगी। सपा को तीसरी सीट बचाने के लिए संघर्ष करना होगा। 3- 2027 का रुख बताएंगे विधान परिषद चुनाव
विधानसभा चुनाव से ठीक पहले दिसंबर, 2026 में विधान परिषद की शिक्षक स्नातक क्षेत्र की 11 सीटों पर चुनाव होगा। इनमें से अभी 6 सीटें भाजपा के पास हैं, जबकि 3 सीटों पर सपा का कब्जा है। एक सीट पर शिक्षक दल गैरराजनीतिक और एक सीट पर निर्दलीय काबिज है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि विधान परिषद चुनाव से ठीक पहले एमएलसी चुनाव होना है। चुनाव में शिक्षक और स्नातक वर्ग के मतदाता मतदान करेंगे। यही मतदाता हैं, जो सोच समझकर और मौके की नजाकत को देखते हुए मतदान करते हैं। लिहाजा इन चुनाव के परिणाम बताएंगे कि 2027 विधानसभा चुनाव में हवा का रुख किस ओर है। ऐसे में भाजपा ने मौजूदा 6 सीटों पर कब्जा बरकरार रखने के साथ सपा के कब्जे वाली तीन सीटों पर भी कब्जा जमाने के लिए रणनीति बनाई है। वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक अनिल कुमार सिंह कहते हैं- अभी जिस तरह की स्थिति दिख रही है, उसमें 2026 में पूरे साल भर राजनीतिक सरगर्मी रहेगी। पंचायत चुनाव से लेकर विधान परिषद चुनाव तक भाजपा और सपा के बीच ही सीधा मुकाबला होगा। लेकिन, सपा को एक्टिव होना होगा। सपा की लड़ाई सोशल मीडिया पर ही चल रही है। पूर्व सूचना आयुक्त एवं वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन शाही का कहना है- 2027 में पंचायत चुनाव में तो सभी दल अलग-अलग लड़ेंगे। लेकिन, पंचायत चुनाव से माहौल बनना शुरू हो जाएगा। राज्यसभा चुनाव से सीधा जनता का जुड़ाव नहीं होगा, लेकिन विधान परिषद चुनाव में रुझान सामने आएंगे। देखने की बात यही होगी कि कांग्रेस और सपा साथ मिलकर लड़ते हैं या इनके रास्ते जुदा होते हैं। अगर सपा और कांग्रेस का गठबंधन होता है, तो भी सपा गठबंधन बनाम भाजपा गठबंधन ही चुनाव होगा। दल-बदल का जमकर दौर चलेगा
विधानसभा चुनाव से पहले माहौल बनाने के लिए भाजपा की ओर से सदस्यता अभियान शुरू किया जाएगा। इसमें सपा, बसपा और कांग्रेस के नेताओं को तोड़कर भाजपा में शामिल कराया जाएगा। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के सामने 2027 की चुनौती है। ऐसे में चौधरी विधानसभा चुनाव से पहले सपा से कुछ कुर्मी नेताओं समेत अन्य जातियों के नेताओं और विधायकों को भी तोड़कर भाजपा में शामिल कराने का हरसंभव प्रयास करेंगे। उधर, सपा की रणनीति है कि भाजपा के कुछ मौजूदा विधायकों के साथ पूर्व विधायक, पूर्व सांसद सहित अन्य नेताओं को तोड़कर साइकिल की सवारी कराई जाए। खासतौर पर जिन विधायकों का टिकट कटने की आशंका होगी, उन्हें पहले ही सपा में शामिल कराया जाए। जानकार मानते हैं कि प्रदेश सरकार को घेरने के लिए ओबीसी और अगड़ी जातियों के कुछ नेता भी भाजपा को छोड़कर सपा का दामन थाम सकते हैं। ज्योतिषियों से जानिए…पार्टियों के लिए 2026 कैसा होगा खास भाजपा के लिए बढ़िया रहेगा साल
गोरखपुर के ज्योतिष नरेंद्र उपाध्याय बताते हैं- 2026 में जून के बाद यूपी की राजनीति में गेरुआ रंग और ज्यादा प्रभावी होता दिखाई देगा। उस समय बृहस्पति उच्च राशि में प्रवेश करेगा, जिसे विस्तार, जनसमर्थन और स्थायित्व का ग्रह माना जाता है। बृहस्पति का उच्च होना आमतौर पर विचारधारा के प्रसार और संगठन की पकड़ मजबूत होने का संकेत देता है। गेरुआ रंग से जुड़ी यह पार्टी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के साथ राजनीति करती है। ऐसे में बृहस्पति की मजबूत स्थिति उसके आधार को और व्यापक बनाने का योग बनाती है। खासकर धर्म, आस्था और सांस्कृतिक मुद्दों के जरिए लोगों को जोड़ने का काम और तेज हो सकता है। जून- 2026 के बाद पार्टी की पहुंच नए वर्गों तक बढ़ने, संगठन के विस्तार और जनसमर्थन में इजाफे के संकेत मिलते हैं। कुल मिलाकर एस्ट्रोलॉजी के हिसाब से यह समय गेरुआ राजनीति के लिए मजबूती और विस्तार का माना जा सकता है। रिसर्चर एस्ट्रोलॉजर मोहम्मद जुनैद के अनुसार, जून तक भाजपा में बड़े संगठनात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इस दौरान पार्टी कुछ आंतरिक चुनौतियों और दबावों के दौर से गुजर सकती है। जिससे अस्थिरता की स्थिति बन सकती है। सपा के लिए 2026 संघर्ष और संतुलन का साल
ज्योतिषाचार्य नरेंद्र उपाध्याय के मुताबिक, 2026 समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के लिए मिला-जुला साल रहेगा। सपा के लिए यह साल औसत संकेत देता है। जनाधार बना रहेगा, लेकिन बड़ा राजनीतिक उछाल या निर्णायक बढ़त के योग कमजोर दिखते हैं। संगठन और रणनीति पर ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी। लखनऊ के एस्ट्रोलॉजर मोहम्मद जुनैद के अनुसार, 2 जून के बाद समाजवादी पार्टी में अखिलेश यादव की लोकप्रियता बढ़ने के संकेत मिलते हैं। जनसमर्थन और राजनीतिक स्वीकार्यता में इजाफा हो सकता है। बसपा की स्थिति में सुधार होगा
बसपा के लिए 2026 तुलनात्मक रूप से बेहतर रहने की संभावना है। पार्टी की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार के संकेत हैं। खासकर मायावती का राजनीतिक कद बढ़ता हुआ दिखता है। उनका नेतृत्व फिर से चर्चा और प्रासंगिकता में आ सकता है। जिससे पार्टी के कोर वोट बैंक में मजबूती आने के योग बनते हैं। मोहम्मद जुनैद बताते हैं कि बसपा में मायावती का राजनीतिक कद मजबूत होता दिखाई देगा। संगठन और नेतृत्व दोनों स्तर पर उनकी स्थिति सशक्त होने के योग बनते हैं। कांग्रेस पार्टी में बड़े स्तर पर परिवर्तन के योग
रिसर्चर एस्ट्रोलॉजर मोहम्मद जुनैद के अनुसार, साल 2026 में कांग्रेस के संगठन में बड़े और मूलभूत बदलाव देखने को मिल सकते हैं। ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति ऐसे संकेत दे रही कि पार्टी के ढांचे, नेतृत्व और कार्यशैली में व्यापक परिवर्तन संभव हैं। अब जानिए, नेताओं के लिए कैसा रहेगा साल
प्रयागराज ग्रह नक्षत्र ज्योतिष शोध संस्थान के निदेशक ज्योतिषाचार्य आशुतोष वार्ष्णेय के अनुसार, 2026 में बृहस्पति का मिथुन, कर्क और सिंह, तीन राशियों में गोचर बहुत लोगों का भाग्य बदल देगा। 12 राशियों पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा। लखनऊ के ज्योतिष गुरु शिव कुमार ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय और चर्चित चेहरों को लेकर बताया है कि साल 2026 उनके लिए कैसा रहने वाला है? किन नेताओं के लिए यह साल अवसरों का है तो किनके लिए चुनौतियों भरा? भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के लिए यह साल काफी सकारात्मक संकेत देता है। साल के शुरुआती दौर में कुछ चुनौतियां और दबाव जरूर सामने आएंगे। लेकिन वे हालात को समझदारी और संगठनात्मक कौशल से संभालने में सफल रहेंगे। पार्टी के भीतर उनके कामकाज, निर्णय क्षमता और नेतृत्व को लेकर सराहना बढ़ेगी। संगठन को मजबूत करने और जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से निभाने के अवसर मिलेंगे। कुल मिलाकर यह साल उनके राजनीतिक कद और पार्टी में भरोसे को और मजबूत करने वाला साबित हो सकता है। तुला लग्न और वृश्चिक राशि में जन्मे आजम खान की ग्रह दशा के अनुसार, जून 2026 के बाद ग्रह दशा में कुछ सुधार होगा। वर्तमान में आजम खान की जन्म राशि से देवगुरु बृहस्पति का अष्टम भाव में संचार जून तक के लिए संकटों की सूचना दे रहा है। लेकिन, पूरे साल की बात की जाए तो आजम खान के लिए 2026 अनुकूल नहीं दिखता। साल की शुरुआत से ही शनि और राहु का प्रभाव उनके लिए दबाव और उलझनों को बढ़ाने वाला रहेगा। शनि की कठोर दृष्टि कानूनी मामलों में देरी और तनाव का संकेत देती है। अप्रैल, 2026 के बाद बृहस्पति का आंशिक सहारा मिलने से लीगल मामलों में कुछ राहत के योग बनते हैं। कोर्ट-कचहरी से जुड़ी स्थितियों में थोड़ी नरमी आ सकती है। लेकिन समस्याओं का पूरी तरह खत्म होना इस साल मुश्किल दिखता है। मामला लंबा खिंच सकता है। राजनीतिक दृष्टि से 2026 ठहराव का साल रहेगा। ग्रहों की स्थिति किसी बड़ी पद-प्राप्ति, संगठन में उन्नति या प्रभाव बढ़ने के संकेत नहीं देती। पार्टी के भीतर भी उनकी भूमिका सीमित रह सकती है। स्वास्थ्य के मामले में भी सतर्कता जरूरी रहेगी। कर्क लग्न और मकर राशि में जन्मी मायावती के सितारे 2026 के मध्य में जागृत होंगे और 2027 के अंत में सुखद परिणाम देंगे। मायावती के लिए यह साल काफी सकारात्मक रहने वाला है। ग्रहों की स्थिति संकेत देती है कि यह साल उनके राजनीति में फिर से सक्रिय होने और पार्टी को दोबारा मजबूती देने का है। इस साल मायावती संगठन पर विशेष फोकस करती नजर आएंगी। पार्टी को जमीनी स्तर पर फिर से खड़ा करने, कैडर को सक्रिय करने और पुराने समर्थक वर्ग को दोबारा जोड़ने में उनकी भूमिका अहम रहेगी। खासतौर पर अपने कोर समुदाय को एकजुट करने में उन्हें सफलता मिलने के योग बनते हैं। बृहस्पति और शनि का संतुलित प्रभाव उनके नेतृत्व को स्थायित्व और गंभीरता देगा। इससे उनका राजनीतिक कद बढ़ेगा। बसपा एक बार फिर मजबूत विकल्प के रूप में उभरती दिखाई दे सकती है। चंद्रशेखर आजाद के लिए 2026 सामान्य से अच्छा रहने के संकेत हैं। यह साल उनके लिए संघर्ष से ज्यादा निर्माण और विस्तार का दिखाई देता है। ग्रहों की स्थिति बताती है कि वे इस साल पार्टी संगठन को मजबूत करने, जमीनी कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और अपनी राजनीतिक पकड़ बढ़ाने पर फोकस करेंगे। खासतौर पर युवाओं और अपने समर्थक वर्ग के बीच उनकी स्वीकार्यता में बढ़ोतरी के योग बनते हैं। बृहस्पति का सहयोग उनके राजनीतिक कद को बढ़ाने वाला रहेगा। इससे उन्हें नई संभावनाएं मिल सकती हैं। किसी बड़ी या समान सोच वाली पार्टी के साथ गठबंधन (Alliance) के संकेत भी बनते हैं। यह गठजोड़ उनके लिए राजनीतिक रूप से फायदेमंद साबित हो सकता है। शनि का प्रभाव मेहनत और अनुशासन की मांग करेगा। कुछ चुनौतियां जरूर आएंगी, लेकिन वे धैर्य और रणनीति से उन्हें संभालते नजर आएंगे। इसका नतीजा यह होगा कि साल के अंत तक उनका नेतृत्व और ज्यादा मजबूत होकर उभरेगा। आकाश आनंद के लिए 2026 सीख, जिम्मेदारी और उभार का साल दिखाई देता है। ग्रहों की स्थिति बताती है कि इस साल उनकी भूमिका पार्टी में और मजबूत होगी। बृहस्पति का प्रभाव उन्हें मार्गदर्शन, अनुभव और राजनीतिक समझ देगा। वरिष्ठ नेतृत्व का साथ मिलेगा और संगठनात्मक जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं। इससे उनका राजनीतिक कद धीरे-धीरे मजबूत होता दिखेगा। शनि मेहनत और अनुशासन की परीक्षा लेगा। फैसलों में सावधानी रखनी होगी और जल्दबाजी से बचना जरूरी रहेगा। हालांकि, यही शनि उन्हें परिपक्व नेतृत्व की ओर ले जाएगा। 2026 में आकाश आनंद पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने, युवाओं से जुड़ने और संगठन के भीतर अपनी पकड़ बनाने में सक्रिय नजर आ सकते हैं। सार्वजनिक छवि में भी सुधार और पहचान बढ़ने के संकेत हैं। नोट- यह जनरल प्रिडिक्शन है, जो ज्योतिषीय गणनाओं और ग्रहों की सामान्य स्थिति पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल संभावित संकेत बताना है, न कि किसी निश्चित परिणाम का दावा करना। ————————— ये खबर भी पढ़ें… यूपी में ब्राह्मण MLA की नाराजगी से BJP में खलबली, योगी से मिले पंकज चौधरी यूपी में ब्राह्मण विधायकों की नाराजगी से भाजपा में खलबली मच गई है। टॉप लीडरशिप ने डैमेज कंट्रोल करने का बड़ा फैसला किया है। सरकार, संघ और संगठन से नाराज चल रहे ब्राह्मण विधायकों को मनाने की जिम्मेदारी पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रमापति राम त्रिपाठी को सौंपी गई है। मंगलवार को रमापति राम त्रिपाठी ने देवरिया में भाजपा विधायक शलभ मणि त्रिपाठी से मुलाकात की। शलभ मणि 23 दिसंबर को लखनऊ में हुई बैठक में शामिल हुए थे। पढ़िए पूरी खबर…