निषाद पार्टी के 4 विधायकों ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीरें लगा रखी हैं। लेकिन, निषाद पार्टी का नाम और झंडा दोनों गायब हैं। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद का कहना है- ‘मेरी पार्टी के कुछ विधायकों को अपना झंडा-बैनर लगाने में शर्म आती है। वे पार्टी की बैठकों में शामिल नहीं होते। ऐसे नेताओं को दोबारा टिकट देने से पहले सोचना पड़ेगा।’ जिन विधायकों से संजय निषाद नाराज हैं, उनमें संत कबीर नगर की मेंहदावल सीट से विधायक अनिल कुमार त्रिपाठी, महराजगंज की नौतनवा सीट से ऋषि त्रिपाठी, कुशीनगर की खड्डा सीट से विवेकानंद पांडेय और जौनपुर की शाहगंज सीट से रमेश सिंह शामिल हैं। पहले जानिए UP में निषाद पार्टी के कुल कितने विधायक हैं 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में निषाद पार्टी भाजपा के साथ गठबंधन में थी। उसको 16 सीटें मिली थीं। इनमें 2 तरह की सहमति बनी थी अब उन विधायकों को जानिए, जो निषाद पार्टी को प्रमोट नहीं कर रहे निषाद पार्टी के विधायक अनिल कुमार त्रिपाठी भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता रह चुके हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में वह भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। लेकिन, गठबंधन में यह सीट निषाद पार्टी के खाते में चली गई। इसके बाद अनिल त्रिपाठी निषाद पार्टी से चुनाव लड़े और जीते। विधायक के तौर पर उनका साढ़े चार साल का कार्यकाल पूरा हो चुका है। अब आखिरी के 6 महीने बचे हैं। लेकिन, अनिल त्रिपाठी के फेसबुक पेज के बायो में निषाद पार्टी का कहीं जिक्र नहीं है। फेसबुक पेज के कवर पर विधानसभा के सामने बैठे सभी विधायकों की तस्वीर लगी है। विधायक बोले- मेरी गाड़ी पर दोनों दलों के झंडे लगे विधायक अनिल त्रिपाठी कहते हैं- ‘निषाद पार्टी और भाजपा गठबंधन के साथी हैं। मेरी गाड़ी पर दोनों दलों के झंडे लगे हैं। मैं निषाद पार्टी और भाजपा, दोनों के कार्यक्रमों और बैठकों में शामिल होता हूं। डॉ. संजय निषाद के बेटे प्रवीण निषाद के हर कार्यक्रम में मेरी सक्रिय भागीदारी रहती है। मैं तीन साल तक निषाद पार्टी के विधानमंडल दल का नेता रह चुका हूं। यह डॉ. संजय निषाद के विश्वास का ही परिणाम है।’ विधायक ऋषि त्रिपाठी 2022 में चुनाव लड़ने से पहले भाजपा के संगठन में सक्रिय थे। वे जिले के महामंत्री रहे। गठबंधन में ये सीट निषाद पार्टी के पास चली गई। मजबूरी में ऋषि त्रिपाठी को निषाद पार्टी में शामिल होना पड़ा। ऋषि त्रिपाठी ने फेसबुक प्रोफाइल के कवर में गृहमंत्री अमित शाह के साथ ली तस्वीर लगा रखी है। उनकी गाड़ी पर अक्सर भाजपा का झंडा दिखता है। भाजपा की बैठकों में भी वे अक्सर देखे जाते हैं। यहां तक कि जब बूथ अभियान में विधायकों को लगाया गया, तो उन्होंने भी सक्रिय भूमिका निभाई। ‘मैं तकनीकी रूप से निषाद पार्टी का विधायक’ ऋषि त्रिपाठी कहते हैं- ‘मैं तकनीकी रूप से निषाद पार्टी का विधायक हूं। भाजपा के संगठन में महामंत्री रह चुका हूं। अमित शाह देश के गृहमंत्री हैं। भाजपा और निषाद पार्टी सहयोगी दल हैं। अभी निषाद पार्टी के कार्यकर्ता आरक्षण के मुद्दे पर मिलने आए थे। भाजपा-निषाद पार्टी की ओर से जो भी बैठक या कार्यक्रम की सूचना मिलती है, मैं जरूर शामिल होता हूं।’ निषाद पार्टी के विधायक विवेकानंद पांडेय भी भाजपा के संगठन से आए व्यक्ति हैं। उनके फेसबुक पेज के कवर पर पीएम मोदी के साथ ली गई उनकी तस्वीर लगी है। वहीं, प्रोफाइल तस्वीर में वे सीएम योगी के साथ नजर आ रहे हैं। लेकिन, उनकी गाड़ी पर भाजपा और निषाद पार्टी दोनों का झंडा लगा है। ‘गठबंधन में दोनों पार्टी बड़े भाई व छोटे भाई की तरह’ विवेकानंद पांडेय ने दैनिक भास्कर से कहा कि गठबंधन में दोनों पार्टी बड़े भाई और छोटे भाई की तरह हैं। मैं अभी पार्टी के स्थापना दिवस में शामिल हुआ था। दोनों पार्टियों के हर कार्यक्रम में शामिल होता हूं। मैं भाजपा के संगठन से जुड़ा व्यक्ति हूं, लेकिन विधायक तो निषाद पार्टी से ही चुना गया हूं। मेरे लिए दोनों पार्टी के नेताओं का सम्मान है। निषाद पार्टी के विधायक रमेश सिंह अभी विधानमंडल दल के नेता हैं। उनके पिता कुंवर हरिबंश सिंह प्रतापगढ़ लोकसभा से अपना दल (एस) से सांसद रह चुके हैं। रमेश सिंह ने फेसबुक पेज के कवर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, यूपी भाजपा के अध्यक्ष पंकज चौधरी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दोनों उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य की तस्वीर है। रमेश सिंह प्रोफाइल पिक्चर में भी सीएम योगी के साथ हैं। ‘विकास कार्यों के लिए सीएम से मिलता रहता हूं’ विधायक रमेश सिंह ने कहा- ‘मेरी गाड़ी में निषाद पार्टी का झंडा लगा है। मैं आगे भी निषाद पार्टी से ही चुनाव लड़ूंगा। योगी आदित्यनाथ हमारे सीएम हैं। हम सरकार के सहयोगी दल हैं। क्षेत्र के विकास कार्यों के चलते अक्सर सीएम से मिलना होता रहता है। अपनी पार्टी के हर सम्मेलन और कार्यक्रम में हमारा तन-मन-धन तीनों तरह का सहयोग रहता है।’ भाजपा छोड़कर आए सिर्फ एक विधायक, ईमानदारी से निषाद पार्टी के साथ भदोही (संत रविदास नगर) जिले की ज्ञानपुर सीट से विधायक विपुल दुबे भी 2022 में चुनाव से पहले भाजपा छोड़कर निषाद पार्टी में शामिल हुए थे। 2015 में उन्होंने ग्राम प्रधान का चुनाव जीतकर सक्रिय राजनीति में कदम रखा था। 2021 में जिला पंचायत सदस्य का चुनाव हार गए थे। फिर निषाद पार्टी ने अपने मौजूदा विधायक विजय मिश्रा का टिकट काटकर उतारा और वे जीत गए। विपुल दुबे ने फेसबुक पेज के कवर पर निषाद पार्टी की टोपी लगाए कार्यकर्ताओं के साथ अपनी तस्वीर लगा रखी है। प्रोफाइल पिक्चर में भी वह अकेले हैं। ————————— यह खबर भी पढ़ें- भास्कर एक्सक्लूसिव यूपी में भाजपा 328 सीटों पर खुद लड़ेगी चुनाव, सहयोगियों को 80 सीटें दे सकती है 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा 403 विधानसभा सीटों में 75 से 80 सीटें अपने सहयोगी दलों को दे सकती है। भाजपा खुद 323 से 328 सीटों पर कैंडिडेट उतार सकती है। संगठन में सैद्धांतिक सहमति बन चुकी है। पढ़िए पूरी खबर…